फ्रांस से क्यों मजबूत होती है भारत की ताकत? पीएम मोदी के सातवें दौरे के बहाने समझिए दोनों देशों की अनोखी साझेदारी

फ्रांस से क्यों मजबूत होती है भारत की ताकत? पीएम मोदी के सातवें दौरे के बहाने समझिए दोनों देशों की अनोखी साझेदारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर फ्रांस की यात्रा पर हैं। यह उनकी फ्रांस की सातवीं आधिकारिक यात्रा है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने फ्रांस का इतना अधिक दौरा नहीं किया है। हालांकि यह सिर्फ कूटनीतिक यात्राओं का आंकड़ा नहीं है, बल्कि भारत और फ्रांस के बीच लगातार मजबूत होते रिश्तों की कहानी भी है। बीते कुछ दशकों में दोनों देशों के संबंध रक्षा, विज्ञान, अंतरिक्ष, ऊर्जा, व्यापार और वैश्विक राजनीति जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक फैल चुके हैं।

आज जब दुनिया तेजी से बदल रही है और अंतरराष्ट्रीय समीकरण नए रूप ले रहे हैं, ऐसे समय में फ्रांस भारत का सबसे भरोसेमंद यूरोपीय साझेदार बनकर सामने आया है। यही वजह है कि नई दिल्ली और पेरिस के बीच संवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।

भारत-फ्रांस संबंधों की सबसे बड़ी खासियत

भारत के कई पश्चिमी देशों के साथ अच्छे संबंध हैं, लेकिन फ्रांस के साथ उसकी साझेदारी कुछ मायनों में अलग दिखाई देती है। दोनों देशों के बीच विश्वास का स्तर काफी ऊंचा माना जाता है। फ्रांस उन चुनिंदा देशों में शामिल रहा है जिसने कई संवेदनशील मुद्दों पर भारत का खुलकर समर्थन किया।

1998 में जब भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किए थे, तब कई बड़े देशों ने नई दिल्ली पर प्रतिबंध लगाने का रास्ता अपनाया था। उस दौर में फ्रांस का रवैया अपेक्षाकृत संतुलित रहा। उसने भारत के साथ संवाद बनाए रखा और भारत को अलग-थलग करने की कोशिशों का हिस्सा नहीं बना। इसी घटना ने दोनों देशों के बीच भरोसे को और मजबूत किया। फ्रांस हमेशा भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता का सम्मान करता रहा है। यही कारण है कि दोनों देशों के रिश्ते समय के साथ और अधिक गहरे होते गए।

रक्षा क्षेत्र में भरोसेमंद सहयोगी

अगर भारत और फ्रांस के संबंधों की सबसे मजबूत कड़ी की बात की जाए तो वह रक्षा सहयोग है। भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल राफेल लड़ाकू विमान इस साझेदारी का सबसे बड़ा उदाहरण हैं। इन विमानों ने भारत की सैन्य क्षमता को नई मजबूती प्रदान की है। सिर्फ लड़ाकू विमान ही नहीं, बल्कि नौसेना के लिए स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का निर्माण भी दोनों देशों के सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। फ्रांस उन देशों में गिना जाता है जो भारत के साथ तकनीकी सहयोग और रक्षा उत्पादन में साझेदारी को बढ़ावा देते हैं।

‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत भी फ्रांस ने तकनीकी सहयोग और संयुक्त उत्पादन के प्रति सकारात्मक रुख दिखाया है। भारत अपने रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम करना चाहता है और इस दिशा में फ्रांस महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

अंतरिक्ष मिशनों में भी मजबूत साझेदारी

भारत और फ्रांस की दोस्ती केवल रक्षा तक सीमित नहीं है। अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भी दोनों देशों का सहयोग कई दशकों पुराना है। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के शुरुआती वर्षों से ही फ्रांसीसी एजेंसियों ने सहयोग दिया है। भारत के अनेक उपग्रहों को यूरोप के एरियन प्रक्षेपण यानों के माध्यम से अंतरिक्ष में भेजा गया। इसके अलावा मौसम विज्ञान, समुद्री अध्ययन और पृथ्वी अवलोकन से जुड़े कई संयुक्त प्रोजेक्ट दोनों देशों ने मिलकर संचालित किए हैं।

वर्तमान समय में दोनों देश अंतरिक्ष अनुसंधान के नए क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ा रहे हैं। भविष्य में गहरे अंतरिक्ष अभियानों, ग्रहों के अध्ययन और नई तकनीकों के विकास में भी सहयोग की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं।

ऊर्जा सुरक्षा में फ्रांस की भूमिका

भारत की बढ़ती आबादी और तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा एक बड़ी आवश्यकता है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए भारत और फ्रांस परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी सहयोग कर रहे हैं। महाराष्ट्र के जैतापुर में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना दोनों देशों की साझेदारी का प्रमुख उदाहरण मानी जाती है। इस परियोजना का उद्देश्य भारत की बिजली उत्पादन क्षमता को बढ़ाना और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित करना है।

दुनिया में कार्बन उत्सर्जन कम करने और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में भी दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए साझा प्रयासों ने इस रिश्ते को और मजबूत बनाया है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का समर्थक

फ्रांस का वैश्विक प्रभाव भी भारत के लिए महत्वपूर्ण है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में शामिल फ्रांस लंबे समय से भारत की स्थायी सदस्यता की मांग का समर्थन करता आया है। जब भी भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर किसी चुनौती का सामना करना पड़ा, फ्रांस ने अक्सर उसका साथ दिया। आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर भी दोनों देशों का रुख काफी हद तक समान रहा है।

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ भारत की चिंताओं को फ्रांस ने गंभीरता से समझा है। यही वजह है कि सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग दोनों देशों के रिश्तों का अहम हिस्सा बन चुका है।

व्यापार और शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती नजदीकी

बीते वर्षों में आर्थिक संबंध भी तेजी से मजबूत हुए हैं। फ्रांस यूरोप में भारत के महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। दोनों देशों के बीच निवेश, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा है। फ्रांस की कई बड़ी कंपनियां भारत में निवेश कर रही हैं, जबकि भारतीय कंपनियां भी फ्रांसीसी बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही हैं। इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ मिल रहा है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। हर साल बड़ी संख्या में भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए फ्रांस का रुख कर रहे हैं। विज्ञान, इंजीनियरिंग, प्रबंधन और डिजाइन जैसे क्षेत्रों में फ्रांसीसी संस्थानों की लोकप्रियता बढ़ी है।

सांस्कृतिक रिश्तों की भी मजबूत नींव

भारत और फ्रांस के बीच केवल राजनीतिक या आर्थिक संबंध ही नहीं हैं, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव भी काफी गहरा है। फ्रांस में भारतीय संस्कृति, योग, आयुर्वेद और भारतीय व्यंजनों को लेकर लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है। वहीं भारत में भी फ्रांसीसी भाषा, कला, साहित्य और सिनेमा के प्रति आकर्षण देखने को मिलता है। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं, जिससे लोगों के बीच आपसी समझ और बढ़ती है।

मोदी की सात यात्राओं के पीछे क्या कारण हैं?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सात बार फ्रांस जाना केवल औपचारिक यात्राओं तक सीमित नहीं है। इन दौरों का सीधा संबंध दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी से है। रक्षा समझौतों, निवेश, तकनीकी सहयोग, जलवायु परिवर्तन, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा के लिए शीर्ष नेतृत्व के बीच नियमित संवाद आवश्यक माना जाता है। इसी वजह से मोदी और फ्रांस के नेतृत्व के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है।

इसके अलावा इंटरनेशनल सोलर अलायंस जैसी पहलें भी दोनों देशों को एक साथ जोड़ती हैं। यह संगठन स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था और इसकी स्थापना में भारत तथा फ्रांस की प्रमुख भूमिका रही है।

पूर्व प्रधानमंत्रियों ने भी दिया था महत्व

हालांकि मोदी के दौर में यात्राओं की संख्या अधिक रही है, लेकिन भारत के पूर्व प्रधानमंत्रियों ने भी फ्रांस के महत्व को समझा था।

जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्र भारत के शुरुआती वर्षों में फ्रांस का दौरा किया था। उस समय विज्ञान, तकनीक और पुदुचेरी जैसे मुद्दे प्रमुख थे। बाद में उन्होंने एक और यात्रा कर संबंधों को आगे बढ़ाया।

इंदिरा गांधी ने भी फ्रांस को विशेष महत्व दिया। प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी पहली विदेश यात्रा फ्रांस की थी। उनके कार्यकाल में परमाणु ऊर्जा और रक्षा सहयोग की नींव और मजबूत हुई।

डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान कई बार फ्रांस का दौरा किया। उनके समय में भारत और फ्रांस के बीच नागरिक परमाणु सहयोग समझौता हुआ, जिसे दोनों देशों के संबंधों में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है।

भविष्य में और मजबूत होगी साझेदारी

भारत और फ्रांस अब आने वाले दशकों के लिए दीर्घकालिक सहयोग की योजना पर काम कर रहे हैं। दोनों देशों ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है, जिसमें रक्षा, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा, हरित ऊर्जा और उन्नत तकनीक जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में यह साझेदारी और अधिक महत्वपूर्ण होती जाएगी। भारत के लिए फ्रांस केवल यूरोप का एक प्रभावशाली देश नहीं, बल्कि ऐसा विश्वसनीय मित्र है जिसने कठिन परिस्थितियों में भी साथ निभाया है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी की लगातार फ्रांस यात्राएं केवल कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि दो लोकतांत्रिक देशों के बीच बढ़ते विश्वास, सहयोग और साझा भविष्य की कहानी भी हैं।