हरियाणा सरकार ने राज्य के ग्रामीण विकास, शहरी प्रशासन, कृषि, महिला सशक्तिकरण और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों को मंजूरी देकर प्रशासनिक सुधारों की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में कुल 15 प्रस्ताव विचारार्थ रखे गए, जिनमें से 14 को स्वीकृति प्रदान कर दी गई। इन फैसलों का सीधा असर लाखों लोगों पर पड़ने की संभावना है।
कैबिनेट के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में गांवों की शामलात देह भूमि पर वर्षों से रह रहे परिवारों को मालिकाना अधिकार दिलाने की प्रक्रिया को सरल बनाना शामिल है। इसके साथ ही किसानों के हितों की सुरक्षा, महिलाओं से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे, न्यायिक अधिकारियों के करियर विकास और व्यापारिक लाइसेंसिंग प्रक्रिया को आसान बनाने जैसे कई मुद्दों पर भी महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।
शामलात भूमि पर बसे परिवारों को मिलेगी बड़ी राहत
राज्य सरकार ने हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) अध्यादेश-2026 के माध्यम से एक महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत अब ऐसे लोग, जिन्होंने 31 मार्च 2004 या उससे पहले गांवों की शामलात देह भूमि पर मकान बनाकर स्थायी रूप से निवास करना शुरू कर दिया था, उन्हें मालिकाना हक देने की प्रक्रिया और तेज होगी।
अब तक इस प्रकार के मामलों में अंतिम स्वीकृति देने का अधिकार विकास एवं पंचायत विभाग के निदेशक के पास था। बड़ी संख्या में आवेदन लंबित होने के कारण पात्र लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था। सरकार ने इस समस्या को देखते हुए संबंधित जिलों के उपायुक्तों (डीसी) को भी मंजूरी देने का अधिकार प्रदान कर दिया है।
सरकार का मानना है कि अधिकारों के विकेंद्रीकरण से लंबित मामलों का निपटारा तेजी से होगा और वर्षों से मालिकाना हक की प्रतीक्षा कर रहे ग्रामीण परिवारों को जल्द राहत मिलेगी। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति दोनों आएंगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन संबंधी विवादों में भी आएगी कमी
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि स्वामित्व से जुड़े कई पुराने विवादों के समाधान का रास्ता खुल सकता है। लंबे समय से मकान बनाकर रह रहे परिवारों को कानूनी मान्यता मिलने से संपत्ति संबंधी अधिकार मजबूत होंगे और विकास कार्यों में भी आसानी होगी।
सरकार का तर्क है कि ऐसे कई परिवार हैं जो दशकों से शामलात भूमि पर रह रहे हैं, लेकिन स्वामित्व दस्तावेजों के अभाव में उन्हें विभिन्न प्रशासनिक और वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। नया प्रावधान उनके लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।
मीट कारोबारियों को दोहरे लाइसेंस से मिलेगी मुक्ति
कैबिनेट ने शहरी निकायों से संबंधित दो महत्वपूर्ण संशोधनों को भी मंजूरी दी है। हरियाणा नगर पालिका संशोधन अध्यादेश-2026 और हरियाणा नगर निगम संशोधन अध्यादेश-2026 के तहत उन प्रावधानों को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है, जिनके कारण मीट की दुकानों और बूचड़खानों को अलग-अलग विभागों से लाइसेंस लेने पड़ते थे।
सरकार का कहना है कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन पहले से ही इस प्रकार के व्यवसायों का नियमन कर रहा है। ऐसे में नगर निकायों से अलग लाइसेंस लेने की बाध्यता अनावश्यक प्रशासनिक बोझ पैदा कर रही थी।
नए संशोधन के बाद व्यापारियों को एक ही नियामक व्यवस्था के तहत काम करना होगा, जिससे कारोबार करना आसान होगा और अनावश्यक कागजी प्रक्रियाओं में कमी आएगी।
किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए सख्त नियम
हरियाणा सरकार ने बागवानी क्षेत्र में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से हरियाणा बागवानी नर्सरी नियम-2026 को मंजूरी दी है। यह निर्णय विशेष रूप से किसानों के हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नए नियमों के तहत यदि कोई नर्सरी संचालक किसानों को खराब गुणवत्ता वाले पौधे, बीज या रोपण सामग्री बेचता है और उससे किसानों को नुकसान होता है, तो उसे लागत राशि का दोगुना मुआवजा देना पड़ सकता है।
यह नियम फलदार पौधों, सब्जियों, मसालों, फूलों, सजावटी पौधों, औषधीय फसलों और सुगंधित पौधों से संबंधित नर्सरियों पर लागू होंगे।
नर्सरियों की होगी नियमित निगरानी
सरकार ने केवल मुआवजे का प्रावधान ही नहीं किया है, बल्कि गुणवत्ता नियंत्रण के लिए निरीक्षण व्यवस्था को भी मजबूत बनाने का फैसला लिया है। नए नियमों के अनुसार नर्सरियों का नियमित निरीक्षण किया जाएगा और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में लाइसेंस निलंबित या रद्द भी किया जा सकेगा।
इसके अलावा रोगग्रस्त या अवैध रोपण सामग्री को नष्ट करने का भी प्रावधान रखा गया है, ताकि फसलों में कीट और बीमारियों के फैलाव को रोका जा सके। किसानों की शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए समयबद्ध अपील प्रणाली भी लागू की जाएगी।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध होंगे और बागवानी क्षेत्र में विश्वास बढ़ेगा।
न्यायिक अधिकारियों के लिए करियर ग्रोथ का नया ढांचा
कैबिनेट ने हरियाणा उच्चतर न्यायिक सेवा नियम-2007 में संशोधन को भी मंजूरी प्रदान की है। इस फैसले के तहत जिला न्यायाधीशों और उच्चतर न्यायिक सेवा के अधिकारियों के लिए संशोधित वेतन ढांचा लागू किया जाएगा।
नई व्यवस्था में एंट्री लेवल, चयन ग्रेड और सुपर टाइम स्केल से जुड़े वेतनमानों को पुनर्गठित किया गया है। साथ ही वार्षिक वेतन वृद्धि और पदोन्नति के अवसरों को भी अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित बनाया गया है।
सरकार का मानना है कि इससे न्यायिक अधिकारियों का मनोबल बढ़ेगा और न्यायिक सेवाओं में दक्षता को बढ़ावा मिलेगा।
चयन ग्रेड और सुपर टाइम स्केल का मिलेगा लाभ
संशोधित प्रावधानों के अनुसार कुल स्वीकृत जिला न्यायाधीश पदों में से 35 प्रतिशत पद चयन ग्रेड के लिए निर्धारित किए जाएंगे। यह लाभ उन अधिकारियों को मिलेगा जिन्होंने जिला न्यायाधीश संवर्ग में लगातार कम से कम पांच वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो।
इसके अतिरिक्त कुल स्वीकृत पदों में से 15 प्रतिशत पद सुपर टाइम स्केल के लिए आरक्षित होंगे। यह अवसर उन अधिकारियों को मिलेगा जिन्होंने चयन ग्रेड में कम से कम तीन वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो।
दोनों स्तरों पर चयन योग्यता और वरिष्ठता के आधार पर किया जाएगा। वार्षिक वेतन वृद्धि की गणना तीन प्रतिशत की दर से की जाएगी।
महिला आयोग को मिलेगा अधिक प्रतिनिधित्व
महिलाओं से जुड़े मामलों के प्रभावी समाधान को ध्यान में रखते हुए राज्य मंत्रिमंडल ने हरियाणा राज्य महिला आयोग में गैर-सरकारी सदस्यों की संख्या बढ़ाने का भी निर्णय लिया है।
हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम-2012 में संशोधन के बाद आयोग में गैर-सरकारी सदस्यों की संख्या पांच से बढ़ाकर सात कर दी जाएगी।
सरकार का मानना है कि सदस्यों की संख्या बढ़ने से आयोग की कार्यक्षमता में सुधार होगा और महिलाओं से जुड़े मामलों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकेगी।
घरेलू हिंसा और साइबर अपराध मामलों पर रहेगा विशेष फोकस
महिला आयोग को मजबूत बनाने के पीछे सरकार का उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों और शिकायतों का तेजी से समाधान सुनिश्चित करना है। घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर उत्पीड़न, साइबर अपराध, लैंगिक भेदभाव और अन्य सामाजिक मामलों में आयोग की भूमिका को और प्रभावी बनाया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार आयोग में सदस्यों की संख्या बढ़ने से मामलों की सुनवाई और जांच की प्रक्रिया अधिक सुचारू रूप से संचालित हो सकेगी।
प्रशासनिक सुधारों की दिशा में बड़ा कदम
कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों को राज्य सरकार प्रशासनिक सुधारों और जनहितकारी नीतियों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है। ग्रामीण परिवारों को संपत्ति अधिकार देने से लेकर किसानों की सुरक्षा, न्यायिक अधिकारियों के करियर विकास और महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने तक, इन निर्णयों का प्रभाव विभिन्न वर्गों पर दिखाई देगा।
सरकार का दावा है कि इन सुधारों से प्रशासनिक प्रक्रियाएं सरल होंगी, लोगों को समयबद्ध सेवाएं मिलेंगी और विभिन्न विभागों की कार्यक्षमता में भी सुधार आएगा। आने वाले समय में इन फैसलों के क्रियान्वयन पर सभी की नजर रहेगी, क्योंकि इनके जरिए लाखों लोगों के जीवन पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ने की संभावना है।




