वजन घटाने की कोशिश करने वाले ज्यादातर लोग एक जैसी कहानी बताते हैं। शुरुआत में पूरा उत्साह रहता है, नया डाइट प्लान बनाया जाता है, खाने की मात्रा कम कर दी जाती है और एक्सरसाइज बढ़ा दी जाती है। पहले कुछ हफ्तों में वजन तेजी से कम होता भी दिखाई देता है, जिससे मोटिवेशन बढ़ जाता है। लेकिन कुछ समय बाद वही मेहनत असर कम दिखाने लगती है और कई लोगों का वजन वापस बढ़ने लगता है।
बार-बार वजन घटाने और फिर बढ़ने का यह चक्र सिर्फ इच्छाशक्ति की कमी नहीं है, बल्कि इसके पीछे शरीर की कई प्राकृतिक प्रक्रियाएं काम करती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार सख्त डाइटिंग करने और फिर उसे छोड़ देने से शरीर खुद को नए हालात के हिसाब से ढालने लगता है, जिसका असर मेटाबॉलिज्म, भूख और वजन नियंत्रित करने की क्षमता पर पड़ता है।
भारत में बढ़ता मोटापा भी इस समस्या को गंभीर बना रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में बड़ी संख्या में वयस्क मोटापे और बढ़ते वजन की समस्या से जूझ रहे हैं। वहीं, कई रिपोर्ट्स में यह सामने आया है कि पेट के आसपास जमा होने वाली चर्बी यानी एब्डॉमिनल ओबेसिटी तेजी से बढ़ रही है, जो डायबिटीज और हृदय रोग जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती है।
शुरुआत में वजन कम होने का कारण क्या होता है?
जब कोई व्यक्ति अचानक अपनी कैलोरी कम कर देता है, तो शरीर सबसे पहले अपनी जमा हुई ऊर्जा का इस्तेमाल करना शुरू करता है। शुरुआती दिनों में वजन कम होने का बड़ा हिस्सा शरीर में मौजूद पानी और ग्लाइकोजन की कमी से आता है। ग्लाइकोजन शरीर में कार्बोहाइड्रेट को स्टोर करने का एक तरीका है और यह अपने साथ पानी भी जमा रखता है।
इस वजह से डाइट शुरू करने के बाद तराजू पर वजन तेजी से नीचे जाता हुआ दिखाई देता है। कई लोगों को लगता है कि उनका फैट तेजी से कम हो रहा है, जबकि शुरुआती बदलाव में पानी की भूमिका भी काफी होती है।
लेकिन जैसे-जैसे शरीर कम खाने की स्थिति का आदी होने लगता है, वजन घटने की गति धीमी हो जाती है। शरीर ऊर्जा बचाने के लिए अपनी गतिविधियों और कैलोरी खर्च को कम करने लगता है। इसे मेटाबॉलिक एडॉप्टेशन कहा जाता है।
शरीर क्यों धीमा कर देता है मेटाबॉलिज्म?
हमारा शरीर किसी भी बड़े बदलाव को खतरे की तरह ले सकता है। जब लंबे समय तक कम कैलोरी मिलती है, तो शरीर अपनी ऊर्जा बचाने की कोशिश करता है। इसका असर बेसल मेटाबॉलिक रेट यानी आराम की स्थिति में शरीर द्वारा खर्च की जाने वाली ऊर्जा पर पड़ता है।
यही कारण है कि कई लोग लंबे समय तक डाइट फॉलो करने के बाद भी वजन कम होते हुए नहीं देखते। शरीर पहले की तुलना में कम कैलोरी खर्च करने लगता है और वजन घटाने की प्रक्रिया कठिन महसूस होने लगती है।
अगर डाइट बहुत ज्यादा सख्त हो और उसमें जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो, तो शरीर फैट के साथ-साथ मांसपेशियों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। मांसपेशियां शरीर की ऊर्जा खपत को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। मसल मास कम होने से मेटाबॉलिज्म और धीमा हो सकता है।
भूख और हार्मोन में भी आता है बदलाव
वजन घटाने के दौरान सिर्फ कैलोरी का हिसाब नहीं बदलता, बल्कि शरीर के हार्मोन भी प्रभावित होते हैं। लंबे समय तक कम खाने पर भूख बढ़ाने वाले हार्मोन ज्यादा सक्रिय हो सकते हैं, जबकि पेट भरने का संकेत देने वाले हार्मोन कमजोर पड़ सकते हैं।
इसका परिणाम यह होता है कि व्यक्ति को बार-बार खाने की इच्छा होने लगती है। खासतौर पर मीठे, तले हुए या ज्यादा कैलोरी वाले खाने की क्रेविंग बढ़ सकती है। यही वजह है कि कई लोग कुछ समय बाद अपनी पुरानी खाने की आदतों में लौट जाते हैं।
प्रोटीन और एक्सरसाइज की कमी से बढ़ सकती है परेशानी
वजन कम करने के लिए सिर्फ कम खाना ही काफी नहीं होता। शरीर को पर्याप्त प्रोटीन और सही तरह की एक्सरसाइज की जरूरत होती है। अगर डाइट में प्रोटीन कम है और रेजिस्टेंस ट्रेनिंग जैसी एक्सरसाइज नहीं की जाती, तो शरीर मांसपेशियों को बनाए रखने में संघर्ष करता है।
मसल्स कम होने से शरीर की रोजाना ऊर्जा जरूरत घट सकती है। ऐसे में जब व्यक्ति सामान्य डाइट पर लौटता है, तो पहले जितनी कैलोरी खर्च नहीं हो पाती और वजन दोबारा बढ़ने लगता है।
बदलती जीवनशैली भी है बड़ी वजह
आज की शहरी जीवनशैली में बैठने का समय बढ़ गया है और शारीरिक गतिविधियां कम हो गई हैं। लंबे समय तक ऑफिस में बैठना, कम चलना और अनियमित दिनचर्या वजन बढ़ने की समस्या को और बढ़ा रही है।
जब कोई व्यक्ति सख्त डाइट छोड़ देता है लेकिन उसकी रोजाना गतिविधियां कम रहती हैं, तो शरीर में अतिरिक्त ऊर्जा जमा होने लगती है। इससे वजन वापस बढ़ना आसान हो जाता है।
सिर्फ डाइट नहीं, खाने की गुणवत्ता भी जरूरी
वजन नियंत्रित करने के लिए यह मायने रखता है कि आप कितना खाते हैं, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि क्या खाते हैं। ज्यादा मात्रा में प्रोसेस्ड फूड, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, मीठे पेय और ज्यादा नमक-फैट वाले खाद्य पदार्थ शरीर में अतिरिक्त फैट जमा कर सकते हैं।
इसके अलावा, हर व्यक्ति के लिए स्वस्थ भोजन उपलब्ध होना भी आसान नहीं होता। कई लोगों के लिए पौष्टिक भोजन लगातार खरीद पाना चुनौती होती है। यही वजह है कि सिर्फ डाइट चार्ट बना लेना काफी नहीं होता, बल्कि ऐसी आदतें बनानी होती हैं जिन्हें लंबे समय तक अपनाया जा सके।
बार-बार डाइट शुरू करने और छोड़ने का मानसिक असर
वजन घटाने की प्रक्रिया सिर्फ शरीर नहीं बल्कि दिमाग से भी जुड़ी होती है। बहुत ज्यादा नियमों वाली डाइट लंबे समय तक निभाना मुश्किल हो सकता है। बाहर जाना, यात्रा करना या व्यस्त दिनचर्या के बीच अपने खाने को नियंत्रित रखना चुनौती बन जाता है।
जब कोई व्यक्ति बार-बार अपने लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाता, तो उसका आत्मविश्वास भी प्रभावित हो सकता है। कई बार लोग निराश होकर पूरी कोशिश छोड़ देते हैं और फिर पहले जैसी आदतों में लौट जाते हैं।
वजन घटाने के बाद शरीर वापस वजन क्यों बढ़ाना चाहता है?
वजन कम होने के बाद शरीर कई बार पुराने वजन को वापस पाने की कोशिश करता है। यह शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली का हिस्सा माना जाता है। ऊर्जा खर्च कम होना और भूख बढ़ना इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
जितनी बार वजन कम करने और बढ़ाने का चक्र चलता है, उतना ही वजन को स्थिर रखना मुश्किल महसूस हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ तेजी से वजन घटाने की बजाय धीरे-धीरे और टिकाऊ बदलावों पर जोर देते हैं।
कब डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए?
अगर लगातार कोशिशों के बावजूद वजन नियंत्रित नहीं हो रहा है, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी हो सकता है। खासकर अगर वजन के साथ हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डायबिटीज, स्लीप एप्निया, कोलेस्ट्रॉल की समस्या या जोड़ों से जुड़ी परेशानी भी हो।
कुछ गंभीर मामलों में डॉक्टर दवाओं, विशेष उपचार या बेरिएट्रिक सर्जरी जैसे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। यह फैसला व्यक्ति की पूरी स्वास्थ्य स्थिति को देखकर लिया जाता है।
लंबे समय तक वजन कंट्रोल रखने का सही तरीका
स्वस्थ वजन बनाए रखने के लिए किसी एक अस्थायी डाइट की बजाय ऐसी जीवनशैली जरूरी है जिसे लंबे समय तक अपनाया जा सके। संतुलित भोजन, पर्याप्त प्रोटीन, नियमित एक्सरसाइज, अच्छी नींद और लगातार सही आदतें ही वजन को स्थिर रखने में मदद करती हैं।
वजन घटाना सिर्फ कुछ किलो कम करने का लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि शरीर को स्वस्थ रखने की प्रक्रिया होनी चाहिए। जब बदलाव धीरे-धीरे और लगातार किए जाते हैं, तो शरीर उन्हें आसानी से स्वीकार करता है और वजन दोबारा बढ़ने का खतरा कम हो जाता है।
(Photo : AI Generated)




