महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और उन्हें एक ही स्थान पर समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हरियाणा सरकार ने नई पहल की शुरुआत की है। राज्य के चयनित सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पतालों में ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार (एसएनएसपी) क्लीनिक’ स्थापित किए जाएंगे, जहां 9 से 65 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं को निःशुल्क स्वास्थ्य जांच, कैंसर स्क्रीनिंग, टीकाकरण, परामर्श और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ उपचार के लिए रेफरल जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
इस योजना के माध्यम से सरकार महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेष ध्यान देना चाहती है, ताकि गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान हो सके और उनका उपचार शुरुआती चरण में ही शुरू किया जा सके। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि एकीकृत स्वास्थ्य सेवाओं से महिलाओं की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान में तेजी आएगी और जागरूकता भी बढ़ेगी।
स्वास्थ्य महानिदेशक, पंचकूला की ओर से इस संबंध में संबंधित जिलों के सिविल सर्जनों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। यह पहल मुख्यमंत्री द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में की गई घोषणा के अनुरूप लागू की जा रही है। सरकार का उद्देश्य है कि महिलाओं को अलग-अलग सेवाओं के लिए विभिन्न विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें, बल्कि एक ही क्लीनिक में अधिकांश आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
जिला अस्पतालों के बाद अब ब्लॉक स्तर तक विस्तार
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इससे पहले जिला नागरिक अस्पतालों में संचालित पोस्ट-पार्टम सेंटर (पीपीसी) के माध्यम से ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ क्लीनिक की शुरुआत की जा चुकी है। प्रारंभिक चरण में मिले सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अब इस व्यवस्था का विस्तार उपमंडल और ब्लॉक स्तर के अस्पतालों तक किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों की महिलाओं को भी इन सुविधाओं का लाभ मिल सके।
सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होने से महिलाओं की अस्पतालों तक पहुंच आसान होगी और नियमित स्वास्थ्य जांच के प्रति उनकी भागीदारी भी बढ़ेगी।
इन अस्पतालों में शुरू होगी नई व्यवस्था
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार प्रदेश के 9 जिलों के 10 सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पतालों को इस योजना के पहले चरण के लिए चुना गया है।
इनमें शामिल अस्पताल हैं—
- अंबाला कैंट उपमंडल अस्पताल
- नारायणगढ़ उपमंडल अस्पताल (अंबाला)
- टोहाना उपमंडल अस्पताल (फतेहाबाद)
- नारनौंद उपमंडल अस्पताल (हिसार)
- समालखा उपमंडल अस्पताल (पानीपत)
- शाहबाद उपमंडल अस्पताल (कुरुक्षेत्र)
- जगाधरी उपमंडल अस्पताल (यमुनानगर)
- डबवाली उपमंडल अस्पताल (सिरसा)
- बहादुरगढ़ उपमंडल अस्पताल (झज्जर)
- महेंद्रगढ़ उपमंडल अस्पताल (महेंद्रगढ़)
संबंधित अस्पतालों के प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि क्लीनिक के लिए निर्धारित स्थान की पहचान कर उसकी तस्वीरों सहित तैयारी की रिपोर्ट चार दिनों के भीतर मुख्यालय को भेजी जाए, ताकि निर्धारित समय सीमा में सेवाएं शुरू की जा सकें।
एक ही छत के नीचे मिलेंगी कई स्वास्थ्य सेवाएं
एसएनएसपी क्लीनिक का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। यहां आने वाली महिलाओं का स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा और नियमित अंतराल पर उनकी स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी भी की जाएगी।
क्लीनिक में उपलब्ध कराई जाने वाली प्रमुख सेवाओं में शामिल हैं—
- सामान्य स्वास्थ्य जांच
- आयु आधारित स्वास्थ्य मूल्यांकन
- आवश्यक टीकाकरण
- गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर की स्क्रीनिंग
- स्तन कैंसर की शुरुआती जांच
- पोषण संबंधी परामर्श
- मानसिक स्वास्थ्य परामर्श
- स्त्री रोग संबंधी सलाह
- आवश्यकतानुसार विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास रेफरल
- उपचार के बाद नियमित फॉलोअप
सरकार का मानना है कि यदि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए तो इलाज की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसी कारण स्क्रीनिंग कार्यक्रम को इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
एचपीवी टीकाकरण पर रहेगा विशेष जोर
स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि क्लीनिकों के माध्यम से एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण का दायरा बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। एचपीवी संक्रमण को सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख कारणों में माना जाता है, इसलिए समय पर टीकाकरण से इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इसके अलावा किशोरियों और महिलाओं को व्यक्तिगत स्वच्छता, संतुलित पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच और जीवनशैली से जुड़ी अच्छी आदतों के प्रति भी जागरूक किया जाएगा।
किशोरावस्था से रजोनिवृत्ति तक मिलेगा स्वास्थ्य मार्गदर्शन
नई व्यवस्था केवल बीमारी की जांच तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि महिलाओं के जीवन के विभिन्न चरणों से जुड़ी स्वास्थ्य आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखा जाएगा।
क्लीनिकों में विशेषज्ञ स्वास्थ्यकर्मी महिलाओं को—
- किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक बदलाव,
- मासिक धर्म संबंधी समस्याएं,
- प्रजनन स्वास्थ्य,
- रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज),
- ऑस्टियोपोरोसिस,
- हृदय रोग,
- मधुमेह एवं अन्य मेटाबोलिक विकार,
- स्त्री रोग संबंधी समस्याओं
के बारे में जानकारी और आवश्यक परामर्श देंगे।
सरकार का उद्देश्य है कि महिलाएं केवल बीमारी होने पर ही अस्पताल न आएं, बल्कि नियमित स्वास्थ्य जांच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
निगरानी के लिए बनाई जाएगी अलग व्यवस्था
योजना के प्रभावी संचालन के लिए प्रत्येक एसएनएसपी क्लीनिक में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। संबंधित अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) अथवा मेडिकल सुपरिंटेंडेंट (एमएस) क्लीनिक की गतिविधियों की निगरानी करेंगे, जबकि जिला स्तर पर पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी संबंधित सिविल सर्जन के पास होगी।
स्वास्थ्य विभाग ने नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के लिए सभी अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक सोमवार दोपहर 12 बजे तक क्लीनिक की साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट मुख्यालय को भेजना अनिवार्य होगा। इन रिपोर्टों के आधार पर सेवाओं की गुणवत्ता, मरीजों की संख्या, स्क्रीनिंग और टीकाकरण की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
सिरसा में भी होगी शुरुआत
सिरसा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. पवन कुमार ने बताया कि ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ क्लीनिक पहले से ही जिला नागरिक अस्पताल में संचालित है। अब स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के अनुसार उपमंडल नागरिक अस्पताल डबवाली में भी इस सुविधा को शुरू करने की तैयारियां की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आवश्यक व्यवस्थाएं तेजी से पूरी की जा रही हैं ताकि महिलाओं को जल्द से जल्द इन स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।
महिलाओं के स्वास्थ्य को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं के लिए समर्पित इस प्रकार के क्लीनिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। नियमित जांच, समय पर स्क्रीनिंग, टीकाकरण और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से न केवल गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान संभव होगी, बल्कि महिलाओं के समग्र स्वास्थ्य स्तर में भी सुधार आएगा।
हरियाणा सरकार की यह पहल महिलाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की रोकथाम को बढ़ावा देने और परिवारों के स्वास्थ्य को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में इस मॉडल का विस्तार प्रदेश के अन्य अस्पतालों तक भी किया जाए, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।


