हरियाणा के शहरों के लिए नया रोडमैप तैयार, बारिश के पानी का संरक्षण होगा अनिवार्य; 5 नगरों में कचरे से बनेगी ऊर्जा

हरियाणा के शहरों के लिए नया रोडमैप तैयार, बारिश के पानी का संरक्षण होगा अनिवार्य; 5 नगरों में कचरे से बनेगी ऊर्जा

हरियाणा सरकार ने वर्ष 2047 को ध्यान में रखते हुए राज्य के शहरी विकास की नई रूपरेखा पर काम तेज कर दिया है। भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शहरों को अधिक आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। बैठक में जल संरक्षण, ठोस कचरा प्रबंधन, डिजिटल सेवाओं, पेयजल आपूर्ति और नए शहरी विकास मॉडल जैसे विषयों पर विशेष फोकस किया गया।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, उनके क्रियान्वयन में किसी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी और शहरीकरण को देखते हुए शहरों में ऐसी व्यवस्थाएं विकसित की जानी चाहिए जो आने वाले वर्षों की जरूरतों को भी पूरा कर सकें।

बड़े मकानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग होगी अनिवार्य

बैठक में भूजल स्तर में लगातार हो रही गिरावट पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। इसे देखते हुए सरकार ने फैसला किया कि शहरी क्षेत्रों में 250 वर्ग गज या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले सभी मकानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा।

सरकार का मानना है कि वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण करने से भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में पानी की कमी जैसी चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इस नियम को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए और संबंधित भवनों में इसकी नियमित निगरानी भी सुनिश्चित की जाए।

गुरुग्राम और फरीदाबाद में 24 घंटे पेयजल आपूर्ति की तैयारी

शहरी क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने गुरुग्राम और फरीदाबाद में पायलट आधार पर चौबीसों घंटे स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की योजना को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि इस परियोजना से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए ताकि काम समय पर शुरू हो सके। सरकार का उद्देश्य घर-घर नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करना है, जिससे लोगों को अतिरिक्त बूस्टर पंप लगाने की आवश्यकता न पड़े और पानी की अनावश्यक बर्बादी भी कम हो।

यदि यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में इसे राज्य के अन्य शहरों में भी लागू किया जा सकता है।

नगर निगम सेवाएं होंगी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर

सरकार शहरी नागरिकों को सरकारी सेवाएं आसान और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने जा रही है। इसके तहत एक ‘इंटीग्रेटेड सुपर ऐप’ लॉन्च किया जाएगा, जिसे नागरिकों की प्रॉपर्टी आईडी से जोड़ा जाएगा।

इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोग घर बैठे विभिन्न नगर निगम सेवाओं का लाभ ले सकेंगे। इससे बार-बार नगर निगम कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होगी और कई सेवाओं का ऑनलाइन निपटारा संभव हो सकेगा।

सरकार का मानना है कि डिजिटल गवर्नेंस से प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

केएमपी एक्सप्रेसवे के पास विकसित होगी ‘नमो सिटी’

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में एक नई ग्रीनफील्ड सिटी विकसित करने की योजना की भी जानकारी दी। प्रस्तावित शहर का विकास कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे के निकट लगभग 5,000 एकड़ क्षेत्र में किया जाएगा।

‘नमो सिटी’ नाम से विकसित होने वाली यह नई नगरी आधुनिक शहरी नियोजन, पर्यावरण संरक्षण और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की अवधारणा पर आधारित होगी। यहां आवासीय, औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

सरकार का उद्देश्य इस परियोजना के माध्यम से बड़े निवेशकों को आकर्षित करना, रोजगार के नए अवसर पैदा करना और प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति देना है।

पांच शहरों में कचरे से बनेगी ऊर्जा

ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर भी सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, यमुनानगर और अंबाला में प्रस्तावित वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांटों की प्रगति की समीक्षा की।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए ताकि जल्द से जल्द इनका संचालन शुरू हो सके। इन संयंत्रों में नगरों से निकलने वाले ठोस कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण कर उससे ऊर्जा और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे।

सरकार का मानना है कि इससे शहरों में कचरे के बड़े ढेरों की समस्या कम होगी, लैंडफिल पर निर्भरता घटेगी और स्वच्छता व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार आएगा।

स्वच्छ और टिकाऊ शहरी विकास पर जोर

बैठक में इस बात पर भी बल दिया गया कि भविष्य के शहर केवल आधुनिक भवनों तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि उनमें पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों का बेहतर उपयोग और टिकाऊ विकास को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।

जल संरक्षण, ऊर्जा उत्पादन, कचरा प्रबंधन और डिजिटल प्रशासन जैसी योजनाओं को इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सभी परियोजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा की जाए और तय समय सीमा के भीतर उन्हें पूरा किया जाए।

विजन-2047 के अनुरूप विकसित होंगे शहर

सरकार का लक्ष्य हरियाणा के शहरों को वर्ष 2047 तक ऐसी आधुनिक शहरी व्यवस्था में बदलना है, जहां नागरिकों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं, स्वच्छ वातावरण, सुगम डिजिटल सेवाएं और मजबूत बुनियादी ढांचा उपलब्ध हो।

बैठक में लिए गए निर्णयों को इसी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य बनाने, चौबीसों घंटे पेयजल आपूर्ति, सुपर ऐप के माध्यम से डिजिटल सेवाएं, नमो सिटी की स्थापना और वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं जैसी पहलें आने वाले वर्षों में हरियाणा के शहरी विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

सरकार का कहना है कि इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से न केवल नागरिक सुविधाओं में सुधार होगा, बल्कि जल संरक्षण, स्वच्छता, पर्यावरण सुरक्षा और निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रदेश के शहर भविष्य की चुनौतियों के लिए भी बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे।