देर रात तक जागना बन सकता है सेहत का दुश्मन, नींद की कमी से बढ़ सकता है स्ट्रोक का खतरा; एक्सपर्ट्स ने दी बड़ी चेतावनी

देर रात तक जागना बन सकता है सेहत का दुश्मन, नींद की कमी से बढ़ सकता है स्ट्रोक का खतरा; एक्सपर्ट्स ने दी बड़ी चेतावनी

आज के डिजिटल दौर में देर रात तक जागना कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। काम का दबाव, मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, वेब सीरीज और लगातार स्क्रीन टाइम ने लोगों की नींद का समय काफी बदल दिया है। कई लोग रात के घंटों को अपना निजी समय मानकर सोने में देरी करते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत धीरे-धीरे शरीर पर गंभीर असर डाल सकती है। लंबे समय तक नींद पूरी न होने से सिर्फ थकान और चिड़चिड़ापन नहीं बढ़ता, बल्कि दिमाग और दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।

न्यूरोलॉजिस्ट्स के अनुसार, रात में लगातार जागने और कम नींद लेने की आदत शरीर के कई जरूरी सिस्टम को प्रभावित करती है। इसका असर ब्लड प्रेशर, हार्मोन बैलेंस, मेटाबॉलिज्म और ब्लड वेसल्स पर पड़ सकता है। यही कारण है कि खराब नींद को अब स्ट्रोक जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

मिनी स्ट्रोक क्या होता है और क्यों है खतरनाक?

मिनी स्ट्रोक को मेडिकल भाषा में ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) कहा जाता है। यह स्थिति तब बनती है जब थोड़े समय के लिए दिमाग के किसी हिस्से तक खून की सप्लाई बाधित हो जाती है। इसकी वजह से शरीर के कुछ हिस्सों में अचानक कमजोरी, बोलने में परेशानी या दूसरी न्यूरोलॉजिकल समस्याएं महसूस हो सकती हैं।

इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके लक्षण कुछ समय बाद अपने आप खत्म हो सकते हैं, इसलिए कई लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक, मिनी स्ट्रोक शरीर की तरफ से मिलने वाला एक बड़ा चेतावनी संकेत हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि जिन लोगों को TIA होता है, उनमें आगे चलकर सामान्य स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए अगर शरीर में अचानक कोई बदलाव महसूस हो, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

नींद की कमी शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाती है?

नींद सिर्फ आराम करने का समय नहीं है, बल्कि इस दौरान शरीर खुद को रिपेयर करता है। जब कोई व्यक्ति लगातार देर रात तक जागता है या पर्याप्त नींद नहीं लेता, तो शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित होने लगती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कम नींद लेने से शरीर में तनाव से जुड़े हार्मोन बढ़ सकते हैं। इससे ब्लड प्रेशर ऊपर जा सकता है और शरीर में सूजन यानी इंफ्लेमेशन बढ़ सकती है। लंबे समय तक ऐसा होने पर दिल और दिमाग की नसों पर दबाव बढ़ने लगता है।

नींद की कमी का असर शरीर के मेटाबॉलिज्म पर भी पड़ता है। इससे वजन बढ़ने, शुगर लेवल बिगड़ने और हार्ट संबंधी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है। ये सभी स्थितियां आगे चलकर स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाने वाले कारण बन सकती हैं।

रात में मोबाइल चलाने की आदत भी बड़ी वजह

आज बहुत से लोग बिस्तर पर जाने के बाद भी मोबाइल फोन से दूर नहीं हो पाते। देर रात तक सोशल मीडिया देखना, वीडियो देखना या ऑफिस के काम निपटाना आम बात हो गई है। लेकिन स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी और लगातार मानसिक सक्रियता नींद के पैटर्न को बिगाड़ सकती है।

कई बार लोग थकान महसूस करने के बावजूद सोने में देरी करते रहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि पूरा दिन काम में निकल गया और अब यही समय खुद के लिए बचा है। यही आदत धीरे-धीरे खराब नींद की समस्या में बदल सकती है।

क्या है ‘रिवेंज बेडटाइम प्रॉक्रैस्टिनेशन’?

हाल के वर्षों में नींद से जुड़ा एक नया टर्म काफी चर्चा में आया है, जिसे ‘रिवेंज बेडटाइम प्रॉक्रैस्टिनेशन’ कहा जाता है। इसका मतलब है कि व्यक्ति जानबूझकर सोने में देरी करता है ताकि उसे अपने लिए कुछ समय मिल सके। उदाहरण के तौर पर, कोई व्यक्ति दिनभर काम या जिम्मेदारियों में व्यस्त रहने के बाद रात में देर तक मोबाइल चलाता है, फिल्म देखता है या इंटरनेट पर समय बिताता है, जबकि उसे पता होता है कि सुबह जल्दी उठना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआत में यह आदत छोटी लग सकती है, लेकिन अगर यह लगातार बनी रहे तो शरीर की नींद की जरूरत पूरी नहीं हो पाती। धीरे-धीरे इसका असर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर दिखाई देने लगता है।

अच्छी नींद क्यों जरूरी है?

एक स्वस्थ वयस्क के लिए पर्याप्त नींद शरीर के सही कामकाज के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है। अच्छी नींद के दौरान शरीर ब्लड वेसल्स की मरम्मत करता है, दिमाग को आराम मिलता है और हार्मोन का संतुलन बना रहता है। पर्याप्त नींद लेने से ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है और शरीर में सूजन कम रहती है। वहीं, लगातार कम सोने से शरीर की प्राकृतिक रिकवरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक नींद की कमी कई बीमारियों से जुड़ी हो सकती है। इनमें हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी समस्याएं शामिल हैं। ये सभी स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारकों में गिनी जाती हैं।

मिनी स्ट्रोक के संकेतों को न करें नजरअंदाज

मिनी स्ट्रोक के लक्षण अचानक दिखाई दे सकते हैं। कई बार ये कुछ मिनटों तक रहते हैं और फिर खत्म हो जाते हैं, लेकिन इन संकेतों को हल्के में लेना नुकसानदायक हो सकता है।

इसके कुछ सामान्य लक्षण हैं:

  • शरीर के किसी एक हिस्से में अचानक कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना
  • बोलने या बात समझने में परेशानी होना
  • अचानक चक्कर आना या संतुलन बिगड़ना
  • आंखों से धुंधला दिखाई देना
  • चेहरे का एक तरफ झुक जाना
  • कुछ समय के लिए भ्रम या असामान्य स्थिति महसूस होना

अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

युवाओं में बढ़ रही है खराब नींद की समस्या

पहले नींद की समस्या को ज्यादातर उम्रदराज लोगों से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब युवा भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। देर रात तक काम करना, अनियमित दिनचर्या और लगातार डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल इसकी बड़ी वजहों में शामिल हैं। कई युवा कम नींद को अपनी व्यस्त जिंदगी का हिस्सा मान लेते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर को लगातार नजरअंदाज करने से भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ सकती हैं।

बेहतर नींद के लिए बदलें कुछ आदतें

स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है कि सोने और जागने का समय तय रखा जाए। रात में सोने से पहले मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल कम करना मददगार हो सकता है। इसके अलावा नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और तनाव कम करने की कोशिश भी अच्छी नींद में सहायक हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि नींद को समय की बर्बादी नहीं समझना चाहिए, क्योंकि यही शरीर को दोबारा ऊर्जा देने का सबसे जरूरी तरीका है। अगर लंबे समय तक नींद खराब रहती है या शरीर में असामान्य लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर विकल्प है।

Disclaimer: यह खबर विशेषज्ञों की राय और उपलब्ध स्वास्थ्य जानकारी पर आधारित है। इसे किसी भी तरह की मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी स्वास्थ्य समस्या या लक्षण की स्थिति में डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

(Photo : AI Generated)