टीबी उन्मूलन की दिशा में हरियाणा का मजबूत कदम, डिजिटल अभियान से हजारों लोग जुड़े; देशभर में बना अग्रणी राज्यों में शामिल

टीबी उन्मूलन की दिशा में हरियाणा का मजबूत कदम, डिजिटल अभियान से हजारों लोग जुड़े; देशभर में बना अग्रणी राज्यों में शामिल

प्रधानमंत्री के वर्ष 2025 तक देश को क्षय रोग (टीबी) से मुक्त बनाने के संकल्प को जनआंदोलन का रूप देने की दिशा में हरियाणा तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार द्वारा तकनीक और सामाजिक भागीदारी को साथ लेकर चलाए जा रहे प्रयासों का असर अब राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। ‘टीबी मुक्त भारत ऐप’ पर 32 हजार से अधिक पंजीकरण दर्ज होने के साथ हरियाणा ने देशभर में दूसरा स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि केवल सरकारी प्रयासों का परिणाम नहीं बल्कि आम नागरिकों, स्वयंसेवी संगठनों और स्वास्थ्य कर्मियों की सक्रिय भागीदारी का भी प्रमाण मानी जा रही है।

स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि टीबी जैसी गंभीर बीमारी को केवल सरकारी योजनाओं के भरोसे समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने प्रदेश के नागरिकों, उद्योगपतियों, सामाजिक संस्थाओं, शिक्षण संस्थानों और युवाओं से ‘निक्षय मित्र’ बनकर टीबी मरीजों की सहायता करने की अपील की। उनका कहना है कि मरीजों को दवा के साथ-साथ पौष्टिक भोजन, मानसिक संबल और सामाजिक सहयोग भी उतना ही जरूरी है, जिससे उनका उपचार सफलतापूर्वक पूरा हो सके।

तकनीक बनी टीबी उन्मूलन अभियान की नई ताकत

राज्य सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसी सोच के तहत विकसित ‘टीबी मुक्त भारत ऐप’ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित कई सुविधाएं जोड़ी गई हैं, जिनसे मरीज, स्वयंसेवक, निक्षय मित्र और स्वास्थ्य विभाग एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जुड़े हुए हैं।

इस डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से मरीजों की पहचान, उपचार की निगरानी, पोषण सहायता, दवा वितरण और सामाजिक सहयोग जैसी प्रक्रियाएं पहले की तुलना में अधिक सरल और व्यवस्थित हो गई हैं। सरकार का विश्वास है कि डिजिटल मॉनिटरिंग के कारण इलाज बीच में छोड़ने वाले मरीजों की संख्या में भी कमी आएगी और टीबी नियंत्रण कार्यक्रम को नई गति मिलेगी।

पंजीकरण के आंकड़ों में हरियाणा की उल्लेखनीय उपलब्धि

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार ‘टीबी मुक्त भारत ऐप’ पर हरियाणा से अब तक 32,643 लोगों ने पंजीकरण कराया है। इसी उपलब्धि के साथ राज्य कुल पंजीकरण के मामले में देशभर में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।

इन पंजीकरणों में 22,266 स्वयंसेवकों ने मरीजों तक पोषण किट पहुंचाने और उन्हें मानसिक एवं सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए स्वयं को जोड़ा है। वहीं 1,997 नागरिकों ने ‘निक्षय मित्र’ के रूप में पंजीकरण कर टीबी मरीजों को गोद लेने तथा उनके उपचार और पोषण संबंधी आवश्यकताओं में सहयोग देने की जिम्मेदारी उठाई है।

सरकार का मानना है कि जितने अधिक लोग इस अभियान से जुड़ेंगे, उतनी ही तेजी से टीबी मरीजों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।

निक्षय मित्र योजना से मिल रहा मरीजों को सहारा

टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में ‘निक्षय मित्र’ योजना को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस पहल के अंतर्गत कोई भी इच्छुक व्यक्ति, संस्था, उद्योग, शैक्षणिक संस्थान या सामाजिक संगठन टीबी मरीजों को गोद लेकर उनके उपचार के दौरान आवश्यक सहयोग प्रदान कर सकता है।

इस सहयोग में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना, पोषण किट देना, समय-समय पर मरीजों का उत्साहवर्धन करना और जरूरत पड़ने पर अन्य सहायता देना शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी के उपचार में नियमित दवा के साथ संतुलित पोषण और सकारात्मक सामाजिक वातावरण बेहद जरूरी होता है। यही कारण है कि निक्षय मित्र योजना को टीबी उन्मूलन अभियान का महत्वपूर्ण स्तंभ माना जा रहा है।

पारदर्शी व्यवस्था के लिए डिजिटल निगरानी

सरकार ने स्वयंसेवकों द्वारा वितरित किए जाने वाले पोषण किट की निगरानी के लिए भी डिजिटल व्यवस्था विकसित की है। स्वयंसेवक जब किसी मरीज तक भोजन या पोषण सामग्री पहुंचाते हैं तो उन्हें ऐप के माध्यम से जियो-टैग्ड और टाइम-स्टैम्प वाली तस्वीरें अपलोड करनी होती हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि सहायता वास्तव में निर्धारित लाभार्थी तक पहुंची है।

यह व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ पूरे अभियान की निगरानी को भी अधिक प्रभावी बनाती है। स्वास्थ्य विभाग वास्तविक समय में सहायता वितरण की स्थिति पर नजर रख सकता है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल हस्तक्षेप भी कर सकता है।

एआई चैटबॉट देगा हर समय सहायता

‘टीबी मुक्त भारत ऐप’ की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक ‘खुशी ई-संगिनी’ नामक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैटबॉट है। यह चैटबॉट 12 भाषाओं में उपलब्ध है और उपयोगकर्ताओं को टीबी से जुड़ी विभिन्न जानकारियां उपलब्ध कराता है।

इसके माध्यम से लोग बीमारी के शुरुआती लक्षण, बचाव के उपाय, सरकारी योजनाओं की जानकारी और उपचार संबंधी सामान्य प्रश्नों के उत्तर प्राप्त कर सकते हैं। इतना ही नहीं, यह चैटबॉट जीपीएस तकनीक का उपयोग करते हुए उपयोगकर्ताओं को उनके सबसे नजदीकी टीबी जांच केंद्र की जानकारी भी उपलब्ध कराता है, जिससे जांच और उपचार शुरू कराने में देरी नहीं होती।

मरीजों के लिए व्यक्तिगत उपचार निगरानी

यह ऐप केवल स्वयंसेवकों और स्वास्थ्य विभाग के लिए ही नहीं बल्कि मरीजों के लिए भी उपयोगी बनाया गया है। टीबी मरीज अपनी निक्षय आईडी के माध्यम से ऐप में लॉग इन कर अपने उपचार की पूरी जानकारी देख सकते हैं।

उन्हें किस दिन कौन-सी दवा लेनी है, उपचार कितने चरण में पहुंचा है और आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जानी है, इसकी पूरी जानकारी डिजिटल रूप से उपलब्ध रहती है। इसके अलावा दवा समय पर लेने के लिए ऐप में दैनिक रिमाइंडर की सुविधा भी दी गई है, जिससे मरीज नियमित रूप से दवा लेते रहें और इलाज बीच में न छोड़ें।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी के इलाज में नियमित दवा लेना सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि मरीज बीच में उपचार छोड़ देता है तो बीमारी दोबारा गंभीर रूप ले सकती है और दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता भी विकसित हो सकती है। ऐसे में डिजिटल रिमाइंडर मरीजों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रहे हैं।

स्वास्थ्य कर्मियों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) हरियाणा ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए जमीनी स्तर पर कार्यरत स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया है।

मिशन निदेशक डॉ. आर. एस. ढिल्लों के अनुसार एसटीएस, एसटीएलएस, टीबी हेल्थ विजिटर और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को प्रशिक्षित किया गया है ताकि वे मरीजों के मोबाइल फोन में ऐप डाउनलोड कराने, उसका उपयोग समझाने और दवा रिमाइंडर सक्रिय कराने में सहायता कर सकें।

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का लाभ प्रत्येक मरीज तक पहुंचे, चाहे वह ग्रामीण क्षेत्र में रहता हो या शहरी क्षेत्र में।

जागरूकता बढ़ाने पर भी सरकार का जोर

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि टीबी के खिलाफ लड़ाई केवल इलाज तक सीमित नहीं है बल्कि समय पर पहचान और जागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसलिए लोगों से लगातार अपील की जा रही है कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार दो सप्ताह से अधिक खांसी, बुखार, वजन कम होना या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराएं।

सरकार का कहना है कि शुरुआती अवस्था में बीमारी की पहचान होने पर इसका इलाज पूरी तरह संभव है और संक्रमण के प्रसार को भी रोका जा सकता है।

जनभागीदारी से टीबी मुक्त हरियाणा का लक्ष्य

राज्य सरकार का लक्ष्य केवल टीबी मरीजों का इलाज करना नहीं बल्कि समाज को इस अभियान का सक्रिय भागीदार बनाना है। इसी उद्देश्य से नागरिकों को निक्षय मित्र बनने, स्वयंसेवक के रूप में जुड़ने और मरीजों की सहायता करने के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि हरियाणा की यह उपलब्धि बताती है कि यदि समाज और सरकार मिलकर काम करें तो किसी भी बड़ी स्वास्थ्य चुनौती का प्रभावी समाधान संभव है। उन्होंने विश्वास जताया कि जनसहयोग, आधुनिक तकनीक और मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था के समन्वय से हरियाणा भविष्य में टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान और मजबूत करेगा।

राज्य सरकार को उम्मीद है कि बढ़ती जनभागीदारी, डिजिटल निगरानी प्रणाली और स्वास्थ्य विभाग की सक्रिय कार्यशैली के बल पर हरियाणा टीबी नियंत्रण अभियान में नई मिसाल कायम करेगा तथा आने वाले वर्षों में टीबी मुक्त राज्य बनने के लक्ष्य की दिशा में निर्णायक प्रगति दर्ज करेगा।