पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान बरकरार: एकता के संदेश के बीच बढ़ी दूरियां, संगठनात्मक नियुक्तियों पर टकराव गहराया

पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान बरकरार: एकता के संदेश के बीच बढ़ी दूरियां, संगठनात्मक नियुक्तियों पर टकराव गहराया

चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक फेरबदल के बाद शुरू हुआ असंतोष अभी शांत होता नजर नहीं आ रहा है। सोमवार को पूरे दिन घटनाक्रम तेजी से बदलता रहा। दिन की शुरुआत पार्टी की ओर से एकजुटता का संदेश देने के प्रयासों से हुई, लेकिन शाम तक कई घटनाओं ने यह संकेत दे दिया कि वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल के चंडीगढ़ दौरे के दौरान कुछ प्रमुख नेताओं की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया।

सुबह पंजाब कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा और कुछ विधायकों की संयुक्त तस्वीर साझा की गई। तस्वीर के साथ “एकता में शक्ति” का संदेश भी दिया गया, जिससे यह संकेत देने की कोशिश की गई कि पार्टी के भीतर चल रहा विवाद सुलझने की दिशा में बढ़ रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी इस संदेश को साझा किया, जिससे कार्यकर्ताओं के बीच सकारात्मक संकेत देने का प्रयास किया गया।

हालांकि दिन चढ़ने के साथ राजनीतिक तस्वीर बदलती नजर आई।

प्रभारी के स्वागत से दूरी ने बढ़ाई अटकलें

दोपहर बाद पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल तीन सह-प्रभारियों के साथ चंडीगढ़ पहुंचे। उनके दौरे का उद्देश्य आगामी चुनावों की तैयारियों की समीक्षा करना, नई संगठनात्मक टीम के साथ संवाद स्थापित करना और पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को कम करना माना जा रहा था।

लेकिन राजनीतिक हलकों में उस समय चर्चाएं तेज हो गईं जब पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा उनके स्वागत के लिए नहीं पहुंचे। इसे लेकर विभिन्न तरह के राजनीतिक कयास लगाए जाने लगे। चर्चा यह भी रही कि चन्नी अपने समर्थक सांसदों और विधायकों के साथ दिल्ली रवाना हो गए, हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई।

दूसरी ओर, भूपेश बघेल का स्वागत विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व उपमुख्यमंत्री ओपी सोनी ने किया।

ओपी सोनी की मौजूदगी बनी चर्चा का विषय

इस पूरे घटनाक्रम में पूर्व उपमुख्यमंत्री ओपी सोनी की भूमिका भी चर्चा में रही। हाल ही में मोरिंडा में चरणजीत सिंह चन्नी के आवास पर हुई बैठक में भी वह शामिल हुए थे और सोमवार को उन्होंने भूपेश बघेल का स्वागत भी किया। इससे यह संकेत मिला कि पार्टी के भीतर संवाद के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं और कुछ वरिष्ठ नेता दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

कांग्रेस भवन में चली मैराथन बैठकों का दौर

चंडीगढ़ पहुंचने के बाद भूपेश बघेल ने कांग्रेस भवन में विभिन्न समितियों के नवनियुक्त अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। चुनावी रणनीति, संगठन की मजबूती और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठकों में मेनिफेस्टो समिति के अध्यक्ष सांसद डॉ. अमर सिंह, चुनाव प्रबंधन एवं समन्वय समिति के अध्यक्ष विजय इंदर सिंगला, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राणा केपी सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इन बैठकों का उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को गति देना और संगठनात्मक गतिविधियों को सक्रिय करना बताया गया।

हालांकि सबसे अधिक चर्चा इस बात की रही कि कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष चरणजीत सिंह चन्नी और कोर कमेटी के अध्यक्ष सुखजिंदर सिंह रंधावा इन बैठकों में शामिल नहीं हुए।

राजा वड़िंग बोले—अभी और बैठकें होंगी

वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति पर जब प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग से सवाल किया गया तो उन्होंने किसी भी प्रकार के विवाद से इनकार किया। उन्होंने कहा कि प्रभारी का दौरा कई दिनों तक चलेगा और सभी नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें प्रस्तावित हैं।

उन्होंने भरोसा जताया कि अगले एक-दो दिनों में सभी वरिष्ठ नेता एक मंच पर दिखाई देंगे और पार्टी पूरी मजबूती के साथ चुनावी तैयारियों में जुटेगी। राजा वड़िंग ने यह भी कहा कि कांग्रेस में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन संगठन में किसी प्रकार की गुटबाजी नहीं है।

प्रताप सिंह बाजवा ने संवाद पर दिया जोर

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने भी पार्टी के भीतर उभरे मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने की आवश्यकता बताई। उनका कहना था कि संगठनात्मक नियुक्तियां करना पार्टी हाईकमान का अधिकार है और यदि किसी नेता को कोई आपत्ति है तो उसका समाधान संवाद के माध्यम से निकाला जा सकता है।

उन्होंने कार्यकर्ताओं और नेताओं से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक परंपराओं में विश्वास रखने वाली पार्टी है, जहां हर नेता अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र है।

संगठनात्मक नियुक्तियों पर जारी है असंतोष

हाल के दिनों में पंजाब कांग्रेस की विभिन्न समितियों के गठन के बाद कई वरिष्ठ नेताओं ने अप्रत्यक्ष रूप से असंतोष जताया है। इसी मुद्दे को लेकर कुछ दिन पहले मोरिंडा में चरणजीत सिंह चन्नी के आवास पर वरिष्ठ नेताओं की बैठक भी हुई थी।

सोमवार को भी मोहाली में चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा के साथ कई वरिष्ठ नेताओं ने चर्चा की। बैठक में तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, राणा गुरजीत सिंह, बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा, हरदेव सिंह लाडी, परगट सिंह, कुलदीप सिंह ढिल्लों, भारत भूषण आशु, रजिया सुल्ताना, दविंदर सिंह घुबाया, संगत सिंह गिलजियां, गुरकीरत सिंह कोटली, अंगद सैनी सहित लगभग 18 वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

बैठक में शामिल नेताओं ने संगठनात्मक नियुक्तियों पर अपनी आपत्तियों को कांग्रेस हाईकमान के समक्ष रखने का निर्णय लिया। नेताओं का मानना है कि कुछ फैसलों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए ताकि संगठन में सभी वर्गों और क्षेत्रों को संतुलित प्रतिनिधित्व मिल सके।

हाईकमान से समय मांगने की तैयारी

सूत्रों के अनुसार बैठक में यह सहमति बनी कि कांग्रेस नेतृत्व से समय लेकर संगठनात्मक बदलावों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि वे टकराव का रास्ता नहीं चाहते, बल्कि अपनी बात शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाकर समाधान निकालना चाहते हैं।

इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी के भीतर असहमति मौजूद है, लेकिन फिलहाल सभी नेता संवाद के माध्यम से समाधान तलाशने की रणनीति पर आगे बढ़ रहे हैं।

पांच दिन तक चलेगा विचार-विमर्श

पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल ने अपने दौरे को लेकर कहा कि अगले पांच दिनों तक वह प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, विधायकों, विभिन्न समितियों के सदस्यों, यूथ कांग्रेस और संगठन के अन्य पदाधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें करेंगे।

उन्होंने कहा कि इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य आगामी चुनावों की रणनीति तैयार करना और संगठन को मजबूत बनाना है। बघेल ने दावा किया कि कांग्रेस में किसी प्रकार का स्थायी मतभेद नहीं है और सभी नेता मिलकर चुनाव की तैयारी करेंगे।

चुनाव से पहले एकजुटता सबसे बड़ी चुनौती

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखना है। एक ओर पार्टी नेतृत्व लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि सभी नेता साथ हैं, वहीं दूसरी ओर संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर उठ रहे सवाल यह संकेत दे रहे हैं कि अंदरूनी असंतोष अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

आने वाले दिनों में भूपेश बघेल की बैठकों और कांग्रेस हाईकमान के साथ प्रस्तावित संवाद के बाद यह स्पष्ट होगा कि पार्टी इन मतभेदों को कितनी जल्दी दूर कर पाती है। फिलहाल इतना तय है कि पंजाब कांग्रेस में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और संगठन के भीतर चल रही खींचतान पर सभी की नजर बनी हुई है।