हरियाणा सरकार का युवाओं पर बड़ा दांव, CET पास 5.40 लाख अभ्यर्थियों के लिए रोजगार रोडमैप तैयार; नौकरी नहीं मिलने पर आर्थिक सहायता का भी ऐलान

हरियाणा सरकार का युवाओं पर बड़ा दांव, CET पास 5.40 लाख अभ्यर्थियों के लिए रोजगार रोडमैप तैयार; नौकरी नहीं मिलने पर आर्थिक सहायता का भी ऐलान

हरियाणा सरकार ने प्रदेश के लाखों युवाओं को रोजगार और कौशल विकास से जोड़ने के उद्देश्य से एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) पास कर चुके युवाओं को सरकारी योजनाओं के माध्यम से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल भर्ती प्रक्रिया पूरी करना नहीं, बल्कि युवाओं को रोजगार योग्य बनाकर उन्हें उद्योगों और विभिन्न क्षेत्रों में स्थायी अवसर उपलब्ध कराना है।

बुधवार को चंडीगढ़ में विकसित भारत विजन-2047 के अंतर्गत रोजगार, कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग तथा हरियाणा स्किल डेवलपमेंट मिशन की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। बैठक में राज्य में चल रही रोजगार योजनाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के विस्तार और नई तकनीकों पर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्वेक्षण के दौरान चिन्हित किए गए 5 लाख 40 हजार 428 CET उत्तीर्ण युवाओं को एक नवंबर से कम से कम 100 घंटे का कार्य उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी योग्य युवा अवसरों से वंचित न रहे। यदि इन युवाओं को अगले दो वर्षों के भीतर स्थायी रोजगार नहीं मिल पाता है तो उन्हें सक्षम युवा योजना के तहत निर्धारित मानदेय प्रदान किया जाएगा, ताकि रोजगार मिलने तक उन्हें आर्थिक सहयोग मिलता रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं की प्रतिभा और ऊर्जा राज्य की सबसे बड़ी पूंजी है। सरकार का प्रयास है कि युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाया जाए। इसके लिए कौशल विकास, आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण और उद्योगों के साथ बेहतर तालमेल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री विकसित भारत योजना के तहत हरियाणा ने देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। इस योजना के माध्यम से अब तक लगभग 51 हजार युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह संख्या और तेजी से बढ़ाई जाएगी तथा निजी उद्योगों और सरकारी संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रोजगार योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि प्रत्येक जिले में नियमित समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया जाए कि युवाओं तक योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंचे। इसके लिए जिला स्तर पर भी निगरानी तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री ने तकनीक आधारित कौशल विकास पर विशेष जोर देते हुए कहा कि बदलते समय के साथ रोजगार का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। इसलिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी नई तकनीकों के अनुरूप तैयार करना होगा। उन्होंने अधिकारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एक आधुनिक डिजिटल पोर्टल विकसित करने के निर्देश दिए, जिसमें आईटीआई, स्किल डेवलपमेंट, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, उपलब्ध सीटों, प्रशिक्षित युवाओं और रोजगार के अवसरों से जुड़ा संपूर्ण डेटा उपलब्ध रहेगा।

उन्होंने कहा कि यह पोर्टल युवाओं, उद्योगों और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच एक मजबूत डिजिटल कड़ी का काम करेगा। इससे उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने और युवाओं को रोजगार दिलाने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी होगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि प्रत्येक तीन महीने में रोजगार और कौशल विकास विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की जाए। इन बैठकों में योजनाओं की प्रगति, रोजगार के आंकड़ों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और उद्योगों की जरूरतों के अनुसार आवश्यक बदलावों पर निर्णय लिया जाएगा।

उन्होंने अधिकारियों को प्रदेशभर में युवाओं का विस्तृत सर्वेक्षण कराने के निर्देश भी दिए। इस सर्वे के माध्यम से तकनीकी रूप से दक्ष, विशेष कौशल रखने वाले तथा विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवाओं की अलग पहचान की जाएगी। इससे उद्योगों की आवश्यकता के अनुसार युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने में सुविधा होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आईटीआई संस्थानों के पाठ्यक्रमों में भी समयानुकूल बदलाव किए जाने चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि उद्योग जगत की वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नए कोर्स शुरू किए जाएं। इससे प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी और उद्योगों को भी प्रशिक्षित कार्यबल उपलब्ध होगा।

हरियाणा सरकार ने प्रदेश को भविष्य की तकनीकों का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचकूला और गुरुग्राम में अत्याधुनिक एआई हब स्थापित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग और अन्य आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का लक्ष्य दो लाख युवाओं को हार्ड स्किल प्रशिक्षण प्रदान करना है, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें।

इसके अलावा करनाल, पंचकूला और पानीपत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और ड्रोन टेक्नोलॉजी के विशेष प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों के विकास पर लगभग 20 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यहां आधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की सहायता से युवाओं को भविष्य की तकनीकों में दक्ष बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में एआई, ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और ड्रोन तकनीक से जुड़े रोजगार तेजी से बढ़ेंगे। इसलिए हरियाणा सरकार पहले से ही युवाओं को इन क्षेत्रों के लिए तैयार करने की दिशा में काम कर रही है।

बैठक के दौरान कौशल विकास से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों के विस्तार पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि फतेहाबाद में श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाए। यहां आधुनिक उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

इसके साथ ही उमरी (कुरुक्षेत्र) में राज्य स्तरीय कला एवं संस्कृति केंद्र स्थापित किया जाएगा, जहां पारंपरिक कला और आधुनिक रचनात्मक कौशल को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं फतेहाबाद, सुल्तानपुर और अंतेड़ी में उद्यमिता विकास केंद्र स्थापित किए जाएंगे, ताकि युवाओं को स्वरोजगार और स्टार्टअप शुरू करने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल सरकारी नौकरियों पर निर्भर रहने के बजाय युवाओं को उद्यमिता के लिए भी प्रेरित करना आवश्यक है। यदि युवा स्वयं का उद्योग या व्यवसाय शुरू करेंगे तो वे अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकेंगे।

राज्य सरकार ने आईटीआई नेटवर्क के विस्तार की योजना को भी प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर जिले में मॉडल आईटीआई विकसित किए जाएंगे और भविष्य में प्रत्येक ब्लॉक स्तर तक आईटीआई की सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 143 ब्लॉकों में से 117 ब्लॉकों में आईटीआई संचालित हैं और शेष क्षेत्रों में भी चरणबद्ध तरीके से संस्थान स्थापित किए जाएंगे।

उन्होंने जानकारी दी कि झोझू कलां, कारीरूपा, रणकौली और पिल्लूखेड़ा में नई आईटीआई खोली जाएंगी। इसके अलावा नारनौल महिला आईटीआई का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जबकि बरवाला, बसंतपुर और नलवी खुर्द में नए आईटीआई भवनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन संस्थानों में केवल पारंपरिक ट्रेड ही नहीं, बल्कि आधुनिक उद्योगों की मांग के अनुसार नए तकनीकी पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे। इससे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के युवाओं को भी गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा उपलब्ध होगी।

बैठक में मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली कौशल प्रतियोगिताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने घोषणा की कि सितंबर में चीन में आयोजित होने वाली विश्व स्तरीय स्किल प्रतियोगिता में यदि हरियाणा का कोई प्रतिभागी पदक जीतता है तो उसे राज्य सरकार की ओर से 10 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके साथ ही ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं को सरकारी नौकरी देने की भी व्यवस्था की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल पुरस्कार नहीं, बल्कि अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा का माध्यम होगा। सरकार चाहती है कि हरियाणा के युवा वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करें और प्रदेश का नाम रोशन करें।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कौशल विकास से जुड़ी सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। साथ ही निजी उद्योगों, तकनीकी संस्थानों और प्रशिक्षण एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाकर युवाओं को रोजगार से जोड़ने की प्रक्रिया को और मजबूत बनाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत विजन-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में हरियाणा की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके लिए प्रदेश के युवाओं को आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से देखा जाए तो हरियाणा सरकार का यह रोडमैप केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए युवाओं को तैयार करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो आने वाले वर्षों में प्रदेश में कौशल विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की संभावना है। सरकार का मानना है कि प्रशिक्षित, आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सक्षम युवा ही हरियाणा को देश के अग्रणी राज्यों में बनाए रखने की सबसे बड़ी ताकत साबित होंगे।