हरियाणा को मिलेगा नया इंडस्ट्रियल ग्रोथ इंजन, अंबाला में ₹304 करोड़ से विकसित होगा हाईटेक इंडस्ट्रियल पार्क; निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार को मिलेगी रफ्तार

हरियाणा को मिलेगा नया इंडस्ट्रियल ग्रोथ इंजन, अंबाला में ₹304 करोड़ से विकसित होगा हाईटेक इंडस्ट्रियल पार्क; निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार को मिलेगी रफ्तार

हरियाणा सरकार ने राज्य को औद्योगिक विकास के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। प्रदेश के उत्तरी हिस्से को औद्योगिक मानचित्र पर और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (आईएमटी) अंबाला में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस एक विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्क विकसित करने की योजना को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है। यह परियोजना केंद्र सरकार की भारत औद्योगिक विकास योजना (भाव्या) के तहत तैयार की जाएगी और इसके माध्यम से प्रदेश में निवेश, विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को राज्य स्तरीय समिति (एसएलसी) की बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में परियोजना के तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। समिति से मंजूरी मिलने के बाद अब इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। बैठक में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

सरकार का मानना है कि यह औद्योगिक पार्क केवल एक नई परियोजना नहीं होगा, बल्कि उत्तर हरियाणा की औद्योगिक तस्वीर बदलने वाला बड़ा निवेश केंद्र साबित हो सकता है। इससे घरेलू और विदेशी कंपनियों को आधुनिक आधारभूत सुविधाओं के साथ उद्योग स्थापित करने का अवसर मिलेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।

प्रस्ताव के अनुसार हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं आधारभूत संरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) के आईएमटी अंबाला परिसर में लगभग 108.58 एकड़ भूमि पर यह आधुनिक औद्योगिक पार्क विकसित किया जाएगा। परियोजना पर करीब 304.10 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य ऐसा औद्योगिक परिसर तैयार करना है जहां निवेशकों को उद्योग शुरू करने के लिए आवश्यक सभी बुनियादी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हों।

यह पार्क प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इसका अर्थ है कि उद्योगों को भूमि मिलने के बाद उन्हें बुनियादी ढांचा तैयार करने में अधिक समय नहीं लगेगा। सड़क, बिजली, पानी, ड्रेनेज, संचार व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाएं पहले से उपलब्ध होने के कारण निवेशक कम समय में उत्पादन शुरू कर सकेंगे। इससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति तेज होगी और निवेश आकर्षित करने में भी मदद मिलेगी।

राज्य सरकार का मानना है कि वर्तमान समय में निवेशक ऐसे औद्योगिक क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हैं जहां आधारभूत सुविधाएं पहले से विकसित हों और प्रशासनिक प्रक्रियाएं सरल हों। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए इस पार्क की रूपरेखा तैयार की गई है।

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि यह परियोजना केंद्र सरकार की भाव्या योजना के तहत निर्धारित सभी पात्रता मानकों को पूरा करती है। परियोजना के लिए उपलब्ध भूमि पूरी तरह विवादमुक्त है, जिससे भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी बाधा आने की संभावना कम रहेगी। इसके अलावा यह क्षेत्र मजबूत सड़क, रेल और अन्य परिवहन सुविधाओं से जुड़ा हुआ है, जिससे उद्योगों को कच्चा माल लाने और तैयार उत्पाद देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने में आसानी होगी।

सरकार का कहना है कि मजबूत मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक होगी। राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे नेटवर्क और अन्य परिवहन सुविधाओं के कारण यह पार्क लॉजिस्टिक्स के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

प्रस्तावित औद्योगिक पार्क में उद्योगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। योजना के तहत 256 औद्योगिक भूखंड तैयार किए जाएंगे, जहां विभिन्न प्रकार के विनिर्माण और औद्योगिक इकाइयां स्थापित की जा सकेंगी। इसके अलावा 15 रेडी-टू-मूव फैक्टरी शेड भी बनाए जाएंगे, ताकि छोटे और मध्यम उद्योग बिना अधिक निर्माण कार्य के तुरंत उत्पादन शुरू कर सकें।

परियोजना में आधुनिक वेयरहाउस, कॉमन फैसिलिटी सेंटर, श्रमिक आवास, कौशल विकास केंद्र, उच्च गुणवत्ता वाली विद्युत और जलापूर्ति व्यवस्था, जल शोधन संयंत्र, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी), चौड़ी आंतरिक सड़कें, पार्किंग क्षेत्र और व्यापक हरित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे।

सरकार का उद्देश्य केवल उद्योगों के लिए भूमि उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसा समग्र औद्योगिक वातावरण तैयार करना है जहां निवेशकों, कर्मचारियों और उद्योगों की सभी आवश्यकताओं का एकीकृत समाधान उपलब्ध हो। श्रमिकों के लिए आवासीय सुविधाएं और कौशल विकास केंद्र स्थापित किए जाने से स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार दोनों का लाभ मिलने की संभावना है।

बैठक के दौरान परियोजना के क्रियान्वयन मॉडल पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि इस औद्योगिक पार्क का विकास एनआईसीडीसी हरियाणा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब प्रोजेक्ट लिमिटेड (एसपीवी) के माध्यम से किया जाएगा। परियोजना का संचालन और विकास केंद्र सरकार की भाव्या योजना के दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जाएगा, जिससे गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि परियोजना से जुड़ी सभी प्रशासनिक और तकनीकी औपचारिकताएं निर्धारित समय सीमा में पूरी की जाएं। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखना आवश्यक है ताकि केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद परियोजना का कार्य बिना किसी देरी के शुरू किया जा सके।

उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि परियोजना के प्रत्येक चरण की नियमित समीक्षा की जाए और यदि किसी स्तर पर कोई बाधा आती है तो उसका तत्काल समाधान किया जाए। सरकार चाहती है कि यह परियोजना निर्धारित समय में पूरी होकर उद्योगों के लिए उपलब्ध हो।

राज्य सरकार का मानना है कि अंबाला का भौगोलिक स्थान इस परियोजना को विशेष महत्व प्रदान करता है। उत्तर भारत के कई प्रमुख राज्यों से इसकी बेहतर कनेक्टिविटी होने के कारण यह क्षेत्र विनिर्माण, वितरण और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के लिए उपयुक्त माना जाता है। ऐसे में यहां विकसित होने वाला आधुनिक औद्योगिक पार्क निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर आधारित औद्योगिक पार्क विकसित होने से उद्योगों की स्थापना में लगने वाला समय काफी कम होगा। इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और नई औद्योगिक इकाइयों के आने की संभावना मजबूत होगी। इसके साथ ही छोटे और मध्यम उद्यमों को भी आधुनिक आधारभूत ढांचे का लाभ मिलेगा।

इस परियोजना से रोजगार के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव की उम्मीद की जा रही है। औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के बाद प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के रोजगार के अवसर पैदा होंगे। निर्माण कार्य के दौरान भी बड़ी संख्या में लोगों को काम मिलेगा, जबकि उद्योग शुरू होने के बाद तकनीकी, प्रशासनिक, उत्पादन, परिवहन, सुरक्षा, रखरखाव और अन्य सेवाओं में रोजगार बढ़ने की संभावना है।

सरकार का अनुमान है कि इस परियोजना से आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां भी तेज होंगी। होटल, परिवहन, गोदाम, पैकेजिंग, मरम्मत सेवाएं, खाद्य आपूर्ति और अन्य सहायक उद्योगों को भी इसका लाभ मिलेगा। इससे अंबाला और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को मजबूती मिलेगी।

कौशल विकास केंद्र स्थापित किए जाने का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित करना है। इससे कंपनियों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होगा और युवाओं को रोजगार पाने में आसानी होगी। सरकार की कोशिश है कि स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर मिलें।

पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए भी परियोजना की योजना तैयार की गई है। औद्योगिक पार्क में सीईटीपी के माध्यम से औद्योगिक अपशिष्ट का वैज्ञानिक उपचार किया जाएगा। इसके अलावा जल संरक्षण, हरित क्षेत्र के विकास और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं।

हरियाणा सरकार पिछले कुछ वर्षों से राज्य में औद्योगिक निवेश बढ़ाने, व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है। विभिन्न औद्योगिक नीतियों, सिंगल विंडो सिस्टम और निवेशक-अनुकूल सुधारों के माध्यम से राज्य देश के प्रमुख औद्योगिक गंतव्यों में अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। अंबाला में प्रस्तावित यह विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्क उसी व्यापक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से देखें तो यह परियोजना केवल एक नए औद्योगिक परिसर के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर हरियाणा में औद्योगिक विकास की नई संभावनाओं का द्वार खोल सकती है। यदि केंद्र सरकार से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद यह परियोजना तय समय में पूरी होती है, तो अंबाला क्षेत्र निवेश, विनिर्माण, निर्यात, लॉजिस्टिक्स और रोजगार का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है। सरकार को उम्मीद है कि आधुनिक सुविधाओं से युक्त यह औद्योगिक पार्क हरियाणा की औद्योगिक प्रगति को नई गति देने के साथ-साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करेगा।