होर्मुज संकट के बीच नई पहल, ईरान ने ओमान के साथ नए समुद्री मार्ग का किया ऐलान

होर्मुज संकट के बीच नई पहल, ईरान ने ओमान के साथ नए समुद्री मार्ग का किया ऐलान

मध्य पूर्व के सबसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल सामने आई है। ईरान ने खुलासा किया है कि ओमान के साथ नए समुद्री मार्ग को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। हालांकि, तेहरान ने साफ कर दिया है कि इस संभावित समझौते का मतलब यह नहीं है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा पूरी तरह खोल दिया जाएगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित नया मार्ग दोनों देशों की संप्रभुता, सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस विषय पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने कैबिनेट के समक्ष पेश अपनी रिपोर्ट में ओमान के साथ चल रही बातचीत की प्रगति का उल्लेख किया है। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच समुद्री मार्ग को लेकर लंबे समय से चल रही वार्ता अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है और जल्द ही अंतिम सहमति बनने की संभावना है। अराघची ने यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर साझा की, जहां उन्होंने कहा कि वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।

इस पूरे मामले पर ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकेई ने भी विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने सरकारी टेलीविजन को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि प्रस्तावित समुद्री मार्ग मौजूदा शिपिंग लेन से अलग होगा। उनके मुताबिक, न तो पारंपरिक उत्तरी मार्ग को अपनाया जाएगा और न ही दक्षिणी मार्ग को, बल्कि ऐसा नया रास्ता तैयार किया जाएगा जिस पर दोनों देशों की सहमति हो और जो किसी भी पक्ष के अधिकारों का उल्लंघन न करे।

बाकेई ने कहा कि इस नए समुद्री मार्ग का उद्देश्य केवल जहाजों की आवाजाही के लिए एक संतुलित और स्वीकार्य विकल्प तैयार करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहल किसी एक देश के हित में नहीं, बल्कि दोनों देशों के साझा हितों और क्षेत्रीय स्थिरता को ध्यान में रखकर की जा रही है। उनके अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था दोनों देशों की संप्रभु सीमाओं का सम्मान करेगी और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का भी समाधान करेगी।

हालांकि, नए शिपिंग रूट पर संभावित सहमति के बावजूद ईरान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इससे होर्मुज जलडमरूमध्य के वर्तमान संचालन की स्थिति में कोई स्वतः बदलाव नहीं आएगा। बाकेई ने कहा कि कई लोग इस समझौते को जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। उन्होंने दो टूक कहा कि नए मार्ग पर सहमति का होर्मुज के खुले या बंद रहने के फैसले से कोई सीधा संबंध नहीं है।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जलडमरूमध्य की मौजूदा स्थिति के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने अपने वादों का पालन नहीं किया और ईरान के खिलाफ नौसैनिक दबाव तथा घेराबंदी की नीति अपनाई। उनके अनुसार, इसी कारण क्षेत्र में तनाव बढ़ा और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वर्तमान हालात बने। उन्होंने कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और समुद्री सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अनुमान है कि दुनिया में समुद्री मार्ग से भेजे जाने वाले कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत इसी जलडमरूमध्य के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में होने वाली किसी भी सैन्य या राजनीतिक गतिविधि का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर तुरंत दिखाई देता है।

भौगोलिक दृष्टि से भी यह जलडमरूमध्य बेहद महत्वपूर्ण है। इसका उत्तरी तट ईरान से जुड़ा हुआ है, जबकि दक्षिणी हिस्सा ओमान के समुद्री क्षेत्र के अंतर्गत आता है। इस कारण यहां किसी भी तरह की नौवहन व्यवस्था या समुद्री मार्ग में बदलाव के लिए दोनों देशों के बीच समन्वय आवश्यक माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नया समुद्री मार्ग अस्तित्व में आता है तो इससे भविष्य में जहाजों की आवाजाही के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था विकसित हो सकती है।

क्षेत्र में तनाव की शुरुआत उस समय हुई जब फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया। इसके बाद पूरे पश्चिम एशिया में संघर्ष का दायरा तेजी से बढ़ गया। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिका के सहयोगी देशों से जुड़े ठिकानों और हितों को निशाना बनाया। इससे समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर कई देशों की चिंता बढ़ गई।

लगातार बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्यस्थता के प्रयास शुरू हुए। कई दौर की बातचीत के बाद अप्रैल में दोनों पक्षों ने हमले रोकने पर सहमति जताई। इसके बाद जून में संघर्ष विराम को औपचारिक रूप दिया गया और उम्मीद जताई गई कि क्षेत्र में शांति बहाल हो सकेगी। लेकिन यह राहत ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी।

होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही और समुद्री नियंत्रण को लेकर पैदा हुए नए विवाद ने संघर्ष विराम को कमजोर कर दिया। कुछ ही सप्ताह के भीतर दोनों पक्षों के बीच तनाव फिर बढ़ गया और जुलाई में दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू हो गई। इस घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

विश्लेषकों का मानना है कि ईरान और ओमान के बीच प्रस्तावित नया समुद्री मार्ग भविष्य में क्षेत्रीय नौवहन व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देश अंतिम समझौते तक कितनी जल्दी पहुंचते हैं और अन्य क्षेत्रीय शक्तियां इस पहल को किस नजरिए से देखती हैं। यदि समझौता सफल रहता है तो यह समुद्री व्यापार के लिए एक नया विकल्प उपलब्ध करा सकता है, लेकिन फिलहाल इससे होर्मुज जलडमरूमध्य की मौजूदा स्थिति में तत्काल बदलाव की उम्मीद नहीं की जा रही है।

फिलहाल दुनिया की नजर ईरान और ओमान के बीच जारी इस वार्ता पर टिकी हुई है। ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां और खाड़ी क्षेत्र से जुड़े देश इस संभावित समझौते को बेहद करीब से देख रहे हैं। आने वाले दिनों में यदि दोनों पक्ष अंतिम सहमति पर पहुंचते हैं तो यह पश्चिम एशिया की समुद्री राजनीति और वैश्विक व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम साबित हो सकता है। वहीं, ईरान के ताजा बयान से यह भी साफ हो गया है कि नया समुद्री मार्ग तैयार होने के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उसकी सुरक्षा और रणनीतिक नीति में फिलहाल किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है।