रूस का यूक्रेन के सूमी शहर पर Ballistic मिसाइल हमला: 21 की मौत, सड़क पर पड़े मिले शव; लगातार दूसरे दिन जारी हवाई हमले।

रूस का यूक्रेन के सूमी शहर पर Ballistic मिसाइल हमला: 21 की मौत, सड़क पर पड़े मिले शव; लगातार दूसरे दिन जारी हवाई हमले।

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। यूक्रेन के अधिकारियों के अनुसार रूस ने उत्तर-पूर्वी यूक्रेन के सूमी (Sumy) शहर पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया, जिसमें कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई। इस हमले में कई अन्य लोग घायल भी हुए, जिन्हें स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और राहत एवं बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंच गए।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस हमले के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया। वीडियो में सड़क पर क्षतिग्रस्त वाहन, इमारतों के टूटे हिस्से, मलबा और राहतकर्मियों द्वारा घायलों को सुरक्षित स्थान पर ले जाते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में कुछ स्थानों पर लोगों के शव भी दिखाई दे रहे हैं, जबकि आपातकालीन सेवाएं लगातार बचाव कार्य में जुटी नजर आती हैं।

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब हाल के दिनों में अमेरिका की मध्यस्थता में रूस और यूक्रेन के बीच युद्धविराम को लेकर बातचीत तेज हुई थी। ऐसे में इस घटना ने एक बार फिर शांति प्रयासों को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

युद्धविराम वार्ता के बीच हुआ हमला

सूमी पर हुआ यह हमला उस समय सामने आया जब दो दिन पहले ही अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ रूस पहुंचे थे। उन्होंने मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात कर युद्धविराम और संभावित शांति वार्ता पर चर्चा की थी। अमेरिका लगातार दोनों देशों के बीच संघर्ष कम करने और स्थायी समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है।

हालांकि वार्ता के बीच हुए इस हमले ने यह संकेत दिया है कि जमीन पर सैन्य गतिविधियां अभी भी जारी हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों ने युद्धविराम की दिशा में प्रयासों को जारी रखने की अपील की है, जबकि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमलों के आरोप लगाते रहे हैं।

सूमी शहर में राहत और बचाव अभियान जारी

हमले के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन, आपातकालीन सेवाओं और स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित इलाके में पहुंचीं। कई इमारतों को नुकसान पहुंचने की सूचना है, जबकि सड़क पर खड़े वाहनों और आसपास की संरचनाओं को भी क्षति पहुंची।

घायलों को एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया गया और कई स्थानों पर मलबा हटाने का कार्य शुरू किया गया। प्रशासन ने लोगों से प्रभावित क्षेत्र से दूर रहने और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

कीव में भारतीय फार्मास्यूटिकल कंपनी के गोदाम पर हमले का दावा, नए विवाद की शुरुआत

रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के दौरान एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। यूक्रेन में स्थित भारतीय फार्मास्यूटिकल कंपनी कुसुम के गोदाम को भी हमले में नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। यूक्रेन में भारतीय दूतावास नहीं बल्कि भारत में स्थित यूक्रेनी दूतावास ने इस घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

दूतावास का दावा है कि राजधानी कीव में स्थित भारतीय कंपनी के गोदाम पर रूसी हमले के कारण आग लग गई। इस बयान के बाद यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।

यूक्रेनी दूतावास ने लगाए गंभीर आरोप

भारत में यूक्रेन के दूतावास ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि रूसी हमले में भारतीय कंपनी कुसुम के गोदाम को निशाना बनाया गया। दूतावास ने आरोप लगाया कि रूस स्वयं को भारत का मित्र देश बताता है, लेकिन उसके सैन्य अभियान में भारतीय कंपनी की संपत्ति भी प्रभावित हुई है।

दूतावास के अनुसार गोदाम में बड़ी मात्रा में दवाइयां रखी गई थीं, जिनका उपयोग विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और अन्य जरूरतमंद मरीजों के उपचार के लिए किया जाता था। आग लगने से दवाओं का बड़ा स्टॉक नष्ट होने की बात कही गई है।

भारत और रूस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

इस घटना के सामने आने के बाद भी भारत सरकार और रूस सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया। दोनों देशों की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से यूक्रेनी अधिकारियों और स्थानीय दावों पर आधारित है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी युद्ध क्षेत्र में हुई घटना की स्वतंत्र पुष्टि होने में समय लग सकता है। इसलिए विभिन्न पक्षों के दावों की जांच और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

ब्रिटेन के राजदूत ने ड्रोन हमले की बात कही

ब्रिटेन में यूक्रेन के राजदूत मार्टिन हैरिस ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि कीव में स्थित एक प्रमुख फार्मास्यूटिकल गोदाम रूसी ड्रोन हमले में पूरी तरह नष्ट हो गया।

मार्टिन हैरिस ने कहा कि इस गोदाम में बच्चों और बुजुर्गों के लिए आवश्यक दवाइयों का बड़ा भंडार रखा गया था, जो आग लगने से पूरी तरह जल गया। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके अनुसार हमला ड्रोन के जरिए किया गया था, जबकि कुछ अन्य रिपोर्टों में मिसाइल हमले का उल्लेख किया गया है।

इस प्रकार हमले के तरीके को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं और स्वतंत्र जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

ऊर्जा ढांचे पर हमलों को लेकर दोनों देशों के आरोप

रूस के रक्षा मंत्रालय ने भी हाल ही में दावा किया कि यूक्रेन ने उसके ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर कई हमले किए हैं। रूसी पक्ष के अनुसार एक ही दिन में ऊर्जा सुविधाओं पर पांच अलग-अलग हमले हुए।

वहीं यूक्रेन लगातार आरोप लगाता रहा है कि रूस उसके ऊर्जा नेटवर्क, बिजली संयंत्रों और अन्य नागरिक ढांचों को निशाना बना रहा है। दोनों देशों के बीच इस प्रकार के आरोप पिछले कई महीनों से लगातार लगाए जाते रहे हैं।

दो सप्ताह पहले हुआ था ऊर्जा ढांचे पर हमला न करने का समझौता

कुछ समय पहले अमेरिका की मध्यस्थता में रूस और यूक्रेन के बीच अलग-अलग स्तरों पर बातचीत हुई थी। इन चर्चाओं के बाद दोनों पक्षों ने ऊर्जा अवसंरचना पर हमले कम करने की दिशा में सहमति जताई थी।

इसके अलावा ब्लैक-सी क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बनाए रखने और तनाव कम करने पर भी चर्चा हुई थी। हालांकि हालिया घटनाओं ने इन समझौतों के भविष्य पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।

रियाद में हुई थी लंबी कूटनीतिक बैठक

पिछले महीने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अमेरिका और रूस के प्रतिनिधियों के बीच कई घंटों तक वार्ता हुई थी। इस बैठक में युद्धविराम, मानवीय सहायता, कैदियों की रिहाई और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा की गई थी।

अमेरिका लगातार दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, हालांकि जमीन पर सैन्य कार्रवाई पूरी तरह नहीं रुकी है।

रूस और यूक्रेन कर चुके हैं कैदियों की अदला-बदली

हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच मानवीय स्तर पर कुछ सकारात्मक कदम भी देखने को मिले हैं। अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों की कोशिशों के बाद रूस और यूक्रेन ने युद्धबंदियों की अदला-बदली की थी।

दोनों देशों ने एक-दूसरे की हिरासत में मौजूद 175-175 सैनिकों को रिहा किया था। इसके अलावा रूस ने गंभीर रूप से घायल 22 यूक्रेनी सैनिकों को भी वापस भेजा था। इसे युद्ध के दौरान मानवीय पहल के रूप में देखा गया था।

पुतिन के काफिले से जुड़ी कार में आग लगने की घटना भी रही चर्चा में

कुछ सप्ताह पहले रूस में एक और घटना चर्चा का विषय बनी थी। रिपोर्टों के अनुसार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के काफिले से जुड़ी एक लग्जरी लिमोजिन कार में आग लग गई थी। यह घटना रूस की संघीय सुरक्षा सेवा (FSB) के मुख्यालय के बाहर हुई थी।

रिपोर्ट्स में बताया गया कि कार के इंजन वाले हिस्से में आग लगी, जिसके बाद आग वाहन के अन्य हिस्सों तक फैल गई। हालांकि उस समय राष्ट्रपति पुतिन इस वाहन में मौजूद नहीं थे और न ही यह कार उनके तत्काल काफिले का हिस्सा थी।

यूक्रेन के बड़े हिस्से पर रूस का नियंत्रण

फरवरी 2022 में शुरू हुए युद्ध के बाद से रूस ने यूक्रेन के कई इलाकों पर नियंत्रण स्थापित किया है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय आकलनों के अनुसार वर्तमान समय में यूक्रेन के लगभग 20 प्रतिशत क्षेत्र पर रूस का कब्जा है।

रूस ने डोनेट्स्क, लुहांस्क, जापोरिज्जिया और खेरसॉन क्षेत्रों को अपने साथ शामिल करने का दावा किया है। हालांकि यूक्रेन और अधिकांश पश्चिमी देशों ने इन दावों को मान्यता नहीं दी है।

वहीं रूस के कुर्स्क क्षेत्र और सीमा से लगे अन्य इलाकों में भी समय-समय पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच संघर्ष की खबरें आती रही हैं। सीमा क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियां अभी भी जारी हैं और दोनों पक्ष लगातार अपने-अपने सैन्य अभियानों को आगे बढ़ा रहे हैं।

युद्ध के मानवीय प्रभाव लगातार बढ़ रहे हैं

रूस-यूक्रेन संघर्ष का प्रभाव केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है। लगातार हो रहे हमलों के कारण नागरिक आबादी, अस्पताल, दवा आपूर्ति, ऊर्जा व्यवस्था, परिवहन और अन्य आवश्यक सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं, जबकि कई क्षेत्रों में मानवीय सहायता पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है।

संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां लगातार नागरिकों की सुरक्षा, राहत सामग्री की आपूर्ति और युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय सहायता पहुंचाने की अपील करती रही हैं। इसी बीच युद्धविराम और कूटनीतिक समाधान की कोशिशें भी जारी हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर संघर्ष अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

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