पंजाब में सरकारी स्कूलों को लेकर चल रही राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के शिक्षा मॉडल और स्मार्ट स्कूलों के दावों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बिट्टू ने लुधियाना के कुन्दनपुरी स्थित एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की स्थिति को सामने रखते हुए आरोप लगाया कि सरकार जिस शिक्षा क्रांति और आधुनिक सरकारी स्कूल व्यवस्था की तस्वीर जनता के सामने पेश कर रही है, जमीनी हकीकत उससे काफी अलग है।
बिट्टू ने स्कूल की तस्वीरें और वहां की कथित व्यवस्थाओं से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करते हुए कहा कि यदि राज्य के सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति ऐसी है तो केवल नए नाम और बड़े-बड़े दावों के सहारे शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का दावा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रचार और राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर यह बताना चाहिए कि प्रदेश के प्रत्येक सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाई के लिए किस तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कुन्दनपुरी के सरकारी प्राथमिक स्कूल की इमारत की हालत चिंताजनक है। उनके अनुसार भवन के कुछ हिस्सों में मरम्मत और रखरखाव की आवश्यकता है तथा जर्जर ढांचा विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। उन्होंने सवाल किया कि जिस समय सरकार स्मार्ट स्कूलों, अत्याधुनिक शिक्षा और विश्वस्तरीय सुविधाओं की बात कर रही है, उसी समय शहर के भीतर स्थित सरकारी स्कूल में बुनियादी ढांचे की समस्याएं क्यों बनी हुई हैं।
बिट्टू ने स्कूल में शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि पर्याप्त संख्या में अध्यापक उपलब्ध न होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षक किसी भी शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ होते हैं और यदि स्कूलों में पर्याप्त अध्यापक ही नहीं होंगे तो केवल भवन बनाने या स्कूलों को स्मार्ट घोषित करने से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने दावा किया कि स्कूल में कमरों की कमी के कारण कुछ कक्षाओं को बरामदों में संचालित करना पड़ रहा है। विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के कारण कथित तौर पर डबल शिफ्ट में कक्षाएं चलाने की जरूरत पड़ रही है। बिट्टू ने कहा कि छोटे बच्चों के लिए नियमित और सुरक्षित कक्षा वातावरण बेहद जरूरी है। यदि विद्यार्थियों को पर्याप्त कमरे, बैठने की उचित व्यवस्था और सीखने के लिए अनुकूल वातावरण नहीं मिलता तो इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ता है।
भाजपा नेता ने स्कूल में स्मार्ट क्लास और आधुनिक डिजिटल शिक्षा सुविधाओं की उपलब्धता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार पिछले कुछ वर्षों से स्मार्ट स्कूलों और डिजिटल शिक्षा को अपनी बड़ी उपलब्धियों के तौर पर पेश करती रही है। ऐसे में सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वास्तव में कितने सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास की सुविधाएं पूरी तरह कार्यरत हैं और कितने स्कूल अभी भी बुनियादी संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं।
बिट्टू ने स्कूल में खेल मैदान की कथित अनुपलब्धता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित शिक्षा पर्याप्त नहीं है। खेल, शारीरिक गतिविधियां और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां भी स्कूली शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि यदि सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा और समग्र विकास का अवसर देने का दावा किया जा रहा है, तो खेल सुविधाओं की स्थिति पर भी समान रूप से ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा।
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने सत्ता में आने के बाद सरकारी शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव के दावे किए हैं। स्कूल ऑफ एमिनेंस, स्मार्ट स्कूल, डिजिटल कक्षाएं, आधुनिक प्रयोगशालाएं और शिक्षकों के प्रशिक्षण जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार लगातार अपनी शिक्षा नीति को देश के सामने मॉडल के रूप में प्रस्तुत करती रही है। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि इन योजनाओं का लाभ प्रदेश के प्रत्येक सरकारी स्कूल तक समान रूप से नहीं पहुंच पाया है।
बिट्टू ने कहा कि सरकार को केवल चुनिंदा स्कूलों की तस्वीरें और नई इमारतें दिखाने के बजाय पूरे पंजाब के सरकारी स्कूलों की स्थिति का स्वतंत्र और पारदर्शी मूल्यांकन कराना चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्रत्येक स्कूल में उपलब्ध कमरों, शिक्षकों, प्रयोगशालाओं, डिजिटल संसाधनों, शौचालयों, पेयजल, बिजली, खेल सुविधाओं और अन्य आधारभूत व्यवस्थाओं का सार्वजनिक डाटा जारी किया जाए।
भाजपा नेता ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार का वास्तविक पैमाना यह नहीं होना चाहिए कि किसी स्कूल की नई इमारत का उद्घाटन कितनी बार हुआ या उसका प्रचार कितनी बार किया गया। असली सवाल यह है कि उस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को किस स्तर की शिक्षा और सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे सामान्य और मध्यम वर्गीय परिवारों से आते हैं, इसलिए उनके भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
इसी मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए बिट्टू ने पंजाब सरकार पर केंद्र सरकार की योजनाओं और वित्तीय सहायता का पर्याप्त उल्लेख नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से पंजाब को शिक्षा क्षेत्र में लगातार वित्तीय सहायता दी गई है, लेकिन राज्य सरकार इन योजनाओं को अपने नाम से प्रचारित कर जनता के सामने प्रस्तुत कर रही है।
उन्होंने दावा किया कि पिछले चार वित्तीय वर्षों के दौरान केंद्र सरकार ने विभिन्न शिक्षा योजनाओं के तहत पंजाब को 3,205 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता जारी की है। बिट्टू ने कहा कि यह राशि केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूल भवनों, अतिरिक्त कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, डिजिटल शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, विद्यार्थियों के पोषण और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई आवश्यकताओं को पूरा करने में इस्तेमाल की जाती है।
बिट्टू ने विशेष रूप से समग्र शिक्षा योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस योजना के तहत पंजाब को इस अवधि में 2,200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध कराई गई है। उनके अनुसार इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री श्री स्कूल, पीएम पोषण, उल्लास और पीएम-उषा जैसी केंद्रीय योजनाओं के माध्यम से भी राज्य के शिक्षा क्षेत्र को आर्थिक और संस्थागत सहयोग दिया गया है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं का उद्देश्य केवल पैसा उपलब्ध करवाना नहीं है, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था के विभिन्न स्तरों को मजबूत करना है। इन योजनाओं के तहत स्कूलों में अतिरिक्त कक्षाओं का निर्माण, विज्ञान और कंप्यूटर प्रयोगशालाओं का विकास, पुस्तकालय सुविधाओं का विस्तार, डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता, शिक्षकों का प्रशिक्षण तथा विद्यार्थियों को पोषण सहायता जैसे कार्य किए जाते हैं।
भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से सीधा सवाल करते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार की योजनाओं और वित्तीय सहायता से पंजाब के स्कूलों में काम हो रहा है तो राज्य सरकार इन योजनाओं का स्पष्ट उल्लेख करने से क्यों बचती है। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि किसी भी सरकारी परियोजना के निर्माण और संचालन में राज्य तथा केंद्र सरकार की हिस्सेदारी कितनी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार द्वारा कई बार केंद्र की सहायता से चल रही योजनाओं को राज्य सरकार की उपलब्धि के तौर पर प्रचारित किया जाता है। बिट्टू ने कहा कि किसी भी सरकार को अपनी उपलब्धियों का प्रचार करने का अधिकार है, लेकिन सरकारी योजनाओं में योगदान देने वाली दूसरी सरकार या संस्था का नाम छिपाना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने पंजाब के साथ विकास योजनाओं के मामले में भेदभाव नहीं किया है। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन विकास और जनहित से जुड़ी केंद्रीय योजनाओं के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत पंजाब को वित्तीय सहायता दी गई है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर केंद्र और राज्य की संयुक्त परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखे।
बिट्टू ने यह भी कहा कि शिक्षा किसी भी राज्य की आर्थिक और सामाजिक प्रगति की बुनियाद होती है। पंजाब में लंबे समय से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या बड़ी है और ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में लाखों परिवार सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर हैं। ऐसे में स्कूलों की इमारतों की मरम्मत, पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति, आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
उन्होंने सरकार से मांग की कि जर्जर भवनों वाले स्कूलों की पहचान कर तत्काल मरम्मत कराई जाए। जिन विद्यालयों में कमरों की कमी है, वहां अतिरिक्त कक्षाओं का निर्माण किया जाए। शिक्षक पदों को खाली न रखा जाए और विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में स्टाफ उपलब्ध कराया जाए। साथ ही प्रत्येक सरकारी स्कूल में डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लास, पुस्तकालय और खेल सुविधाओं को मजबूत किया जाए।
बिट्टू ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पंजाब में शिक्षा व्यवस्था को बदलना चाहती है तो उसे स्कूलों की जमीनी समस्याओं पर ध्यान देना होगा। केवल बड़े शहरों में कुछ चुनिंदा स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करके पूरे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में क्रांति का दावा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि शिक्षा सुधार तभी सफल माना जाएगा, जब दूरदराज के गांव से लेकर शहर के पुराने सरकारी स्कूल तक प्रत्येक विद्यार्थी को समान अवसर और सुविधाएं मिलें।
भाजपा नेता ने कहा कि सरकार को विपक्ष की आलोचना को राजनीतिक हमला मानने के बजाय उसे सुधार के अवसर के रूप में देखना चाहिए। यदि किसी सरकारी स्कूल में वास्तव में भवन, शिक्षक या सुविधाओं की कमी है तो सरकार को उसे दूर करने की दिशा में तत्काल कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि तस्वीरें और आंकड़े सामने आने के बाद वास्तविक स्थिति की जांच करना सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि पंजाब के अभिभावक अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए सरकारी स्कूलों से बड़ी उम्मीद रखते हैं। यदि सरकार सरकारी शिक्षा को मजबूत करने में सफल होती है तो इसका लाभ केवल विद्यार्थियों को नहीं, बल्कि पूरे समाज को मिलेगा। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, आर्थिक असमानता कम होगी और युवाओं को बेहतर भविष्य के लिए मजबूत आधार मिलेगा।
बिट्टू ने अंत में कहा कि पंजाब सरकार को शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रत्येक खर्च और परियोजना का पूरा विवरण सार्वजनिक करना चाहिए। जनता को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि किसी स्कूल की इमारत किस योजना के तहत बनी, उसमें राज्य का कितना पैसा लगा और केंद्र सरकार की कितनी हिस्सेदारी रही। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता से ही सरकार के दावों और वास्तविक काम के बीच अंतर स्पष्ट हो सकेगा।
उन्होंने दोहराया कि पंजाब में शिक्षा के क्षेत्र में वास्तविक सुधार की जरूरत है और भाजपा इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी। बिट्टू ने कहा कि बच्चों की शिक्षा किसी राजनीतिक दल की उपलब्धि साबित करने का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य तैयार करने की जिम्मेदारी है। इसलिए सरकार को प्रचार से ज्यादा स्कूलों की जमीनी जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पंजाब का कोई भी सरकारी स्कूल बुनियादी सुविधाओं से वंचित न रहे।




