लिवर हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह शरीर में मौजूद कई जरूरी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने के साथ-साथ पोषक तत्वों के इस्तेमाल, पाचन और शरीर से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में लिवर की सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। खराब खान-पान, ज्यादा वजन, शराब का सेवन और शारीरिक गतिविधियों की कमी जैसी आदतें लिवर पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं।
अक्सर सोशल मीडिया और इंटरनेट पर लिवर को “डिटॉक्स” या “क्लीन” करने वाले कई तरह के ड्रिंक्स और सप्लीमेंट्स के बारे में दावे किए जाते हैं। हालांकि, हर डिटॉक्स ड्रिंक जरूरी या फायदेमंद हो, ऐसा नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक लिवर को स्वस्थ रखने के लिए किसी खास डिटॉक्स प्रोडक्ट पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित डाइट और स्वस्थ जीवनशैली ज्यादा महत्वपूर्ण है।
डबल बोर्ड-सर्टिफाइड फिजिशियन और इंटरनल मेडिसिन व गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एक्सपर्ट डॉ. जोसेफ सल्हाब ने भी सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में कुछ ऐसे पेय पदार्थों के बारे में बताया, जिन्हें संतुलित डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। इनमें एंटीऑक्सीडेंट और दूसरे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो सामान्य तौर पर स्वस्थ आहार का हिस्सा हो सकते हैं।
1. ब्लैक कॉफी हो सकती है अच्छा विकल्प
कॉफी का सेवन अगर सीमित मात्रा में किया जाए तो इसे लिवर हेल्थ के लिए फायदेमंद पेय पदार्थों में शामिल किया जा सकता है। खासतौर पर बिना ज्यादा चीनी और क्रीम वाली ब्लैक कॉफी एक बेहतर विकल्प मानी जाती है।
कॉफी में कई बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं। शोध में कॉफी के सेवन और लिवर से जुड़ी बेहतर सेहत के बीच संबंध देखा गया है। नियमित लेकिन संतुलित मात्रा में कॉफी पीने वाले लोगों में कुछ लिवर संबंधी समस्याओं का जोखिम कम पाया गया है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि ज्यादा कॉफी पीना लिवर के लिए ज्यादा फायदेमंद होगा। जरूरत से ज्यादा कैफीन लेने से बेचैनी, नींद में परेशानी और कुछ लोगों में गैस या एसिडिटी जैसी समस्या हो सकती है। इसलिए अपनी सहनशीलता के अनुसार ही इसका सेवन करना बेहतर है।
2. ग्रीन टी और माचा में मौजूद होते हैं एंटीऑक्सीडेंट
ग्रीन टी लंबे समय से अपने एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जानी जाती है। इसमें कैटेचिन नाम के पौधों से मिलने वाले कंपाउंड पाए जाते हैं। माचा भी इसी तरह का एक विकल्प है, जिसमें चाय की पत्तियों को बारीक पाउडर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
इन पेय पदार्थों को बिना अतिरिक्त चीनी के लेना ज्यादा बेहतर है। कुछ अध्ययनों में ग्रीन टी में मौजूद तत्वों और लिवर के स्वास्थ्य के बीच संभावित लाभकारी संबंध देखने को मिला है। हालांकि इसे लिवर की बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।
अगर किसी व्यक्ति को पहले से लिवर की बीमारी है या वह कोई दवा ले रहा है, तो बड़ी मात्रा में ग्रीन टी एक्सट्रैक्ट या किसी सप्लीमेंट का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। सामान्य ग्रीन टी और कॉन्संट्रेटेड सप्लीमेंट एक जैसी चीजें नहीं हैं।
3. ब्लैक टी भी हो सकती है डाइट का हिस्सा
दूध और ज्यादा चीनी के बिना ली जाने वाली ब्लैक टी भी एक ऐसा पेय है जिसे संतुलित डाइट में शामिल किया जा सकता है। ब्लैक टी में पॉलीफेनोल और अन्य पौधों से मिलने वाले एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड मौजूद होते हैं।
हालांकि चाय को लिवर की सफाई करने वाली दवा समझना सही नहीं होगा। इसका फायदा तभी बेहतर तरीके से मिल सकता है जब पूरी डाइट संतुलित हो और व्यक्ति की जीवनशैली भी स्वस्थ हो।
ब्लैक टी लेते समय सबसे ज्यादा ध्यान इसमें डाली जाने वाली चीनी की मात्रा पर देना चाहिए। बहुत ज्यादा चीनी का सेवन वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक समस्याओं का कारण बन सकता है, जो आगे चलकर लिवर की सेहत पर भी असर डाल सकती हैं।
4. चुकंदर को जूस के बजाय साबुत खाना बेहतर
चुकंदर में बीटालेन जैसे प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड पाए जाते हैं। इसलिए इसे हेल्दी डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। कई लोग चुकंदर का जूस पीना पसंद करते हैं, लेकिन अगर संभव हो तो इसे साबुत या सलाद के रूप में खाना अधिक उपयोगी हो सकता है।
इसका सबसे बड़ा कारण इसमें मौजूद फाइबर है। जूस निकालने के दौरान फाइबर की मात्रा कम हो सकती है, जबकि साबुत चुकंदर खाने से फाइबर और दूसरे पोषक तत्व भी मिलते हैं।
अगर चुकंदर का जूस लिया जा रहा है तो उसमें अतिरिक्त चीनी मिलाने से बचना चाहिए। घर पर तैयार किया गया बिना चीनी वाला जूस बेहतर विकल्प हो सकता है। फिर भी इसे लिवर “क्लीनिंग ड्रिंक” के तौर पर नहीं, बल्कि पौष्टिक आहार के एक हिस्से के रूप में देखना चाहिए।
5. अनार में भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं पॉलीफेनोल
अनार स्वादिष्ट होने के साथ-साथ कई पोषक तत्वों का स्रोत भी है। इसमें पॉलीफेनोल और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जिन्हें स्वस्थ डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है।
अनार का जूस पीने के बजाय साबुत अनार खाना कई मामलों में ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है, क्योंकि इससे फाइबर भी मिलता है। अगर जूस पीना पसंद करते हैं तो बिना अतिरिक्त चीनी वाला विकल्प चुनना चाहिए।
बाजार में मिलने वाले कई पैकेज्ड फ्रूट ड्रिंक्स में अतिरिक्त चीनी हो सकती है। इसलिए लेबल पढ़कर ही कोई उत्पाद चुनना चाहिए। ज्यादा मीठे पेय पदार्थों का नियमित सेवन वजन और ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकता है।
6. बेरीज से बनाएं बिना चीनी वाली स्मूदी
स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी और रास्पबेरी जैसी बेरीज में एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर पाए जाते हैं। इन्हें डाइट में शामिल करने का एक आसान तरीका बिना अतिरिक्त चीनी वाली स्मूदी हो सकता है।
इसके लिए ताजी या फ्रोजन बेरीज को बिना चीनी वाले दही या दूध के साथ मिलाया जा सकता है। हालांकि यहां भी साबुत फल खाने का विकल्प अच्छा रहता है, क्योंकि इससे फाइबर और पेट भरने का एहसास बेहतर मिल सकता है।
स्मूदी बनाते समय चीनी, फ्लेवर्ड सिरप या ज्यादा मीठे पैकेज्ड जूस को मिलाने से बचना चाहिए। प्राकृतिक मिठास के लिए फल ही पर्याप्त हो सकते हैं।
सिर्फ ड्रिंक्स से नहीं सुधरेगी लिवर की सेहत
लिवर को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ कुछ खास पेय पदार्थ पीना पर्याप्त नहीं है। अगर किसी व्यक्ति की डाइट में लगातार ज्यादा कैलोरी, मीठे खाद्य पदार्थ, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और तला-भुना खाना शामिल है, तो केवल ग्रीन टी या चुकंदर का जूस पीने से समस्या दूर नहीं होगी।
लिवर की बेहतर सेहत के लिए वजन को स्वस्थ सीमा में रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और पौष्टिक भोजन लेना ज्यादा महत्वपूर्ण है। डाइट में सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, प्रोटीन के अच्छे स्रोत और पर्याप्त फाइबर शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।
इसके अलावा शराब का सेवन लिवर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए लिवर की सेहत को लेकर चिंतित लोगों को शराब से दूरी बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
“लिवर डिटॉक्स” के नाम पर हर प्रोडक्ट जरूरी नहीं
बाजार में कई तरह के डिटॉक्स पाउडर, हर्बल ड्रिंक और सप्लीमेंट उपलब्ध हैं। इनके बारे में अक्सर लिवर को साफ करने या शरीर से विषैले पदार्थ निकालने जैसे दावे किए जाते हैं। लेकिन किसी भी सप्लीमेंट को सिर्फ विज्ञापन देखकर शुरू करना उचित नहीं है।
हमारा लिवर खुद शरीर में कई तरह के पदार्थों को प्रोसेस करने और मेटाबॉलिज्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए स्वस्थ व्यक्ति को सामान्य तौर पर किसी विशेष “लिवर क्लीनिंग” ड्रिंक की जरूरत नहीं होती।
अगर लिवर एंजाइम बढ़े हुए हैं, फैटी लिवर है या डॉक्टर ने किसी लिवर संबंधी समस्या की जानकारी दी है, तो इलाज और डाइट का फैसला चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही होना चाहिए।
इन छोटी आदतों से भी रखें लिवर का ख्याल
लिवर हेल्थ के लिए रोजमर्रा की आदतें काफी मायने रखती हैं। नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन और वजन को नियंत्रित रखना लंबे समय में मददगार हो सकता है। मीठे पेय, अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड और जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेने से बचना भी जरूरी है।
इसलिए ग्रीन टी, ब्लैक कॉफी, ब्लैक टी, चुकंदर, अनार या बेरीज को किसी चमत्कारी इलाज की तरह देखने के बजाय इन्हें एक संतुलित डाइट के हिस्से के रूप में लेना चाहिए। सबसे जरूरी बात यह है कि लिवर को स्वस्थ रखने का कोई एक ड्रिंक या शॉर्टकट नहीं है। सही खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली ही लंबे समय में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। इसे किसी बीमारी के इलाज या डॉक्टर की सलाह का विकल्प न समझें। अगर आपको लिवर से जुड़ी कोई बीमारी है, लिवर एंजाइम बढ़े हुए हैं या आप नियमित रूप से कोई दवा लेते हैं, तो अपनी डाइट में बड़ा बदलाव करने या किसी सप्लीमेंट का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।




