सावन शुक्ल पक्ष में त्योहारों की धूम: हरियाली तीज से रक्षाबंधन तक, जानिए किस तारीख को कौन-सा व्रत और पूजा होगी

सावन शुक्ल पक्ष में त्योहारों की धूम: हरियाली तीज से रक्षाबंधन तक, जानिए किस तारीख को कौन-सा व्रत और पूजा होगी

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस पवित्र महीने में पूजा-पाठ, व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला पूरे महीने चलता रहता है। अब सावन शुक्ल पक्ष की शुरुआत हो चुकी है। 13 अगस्त से शुरू हुआ यह पक्ष 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा के साथ समाप्त होगा। इस दौरान कई महत्वपूर्ण तिथियां पड़ रही हैं, जिनमें हरियाली तीज, गणेश चतुर्थी, नाग पंचमी, पुत्रदा एकादशी, प्रदोष व्रत और रक्षाबंधन जैसे प्रमुख पर्व शामिल हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्ल पक्ष की तिथियां पूजा, व्रत और शुभ कार्यों के लिए काफी महत्वपूर्ण होती हैं। इस दौरान अलग-अलग देवी-देवताओं की आराधना करने से मनोकामनाओं की पूर्ति और परिवार में सुख-शांति की कामना की जाती है। खास बात यह है कि इस पक्ष में महिलाओं से जुड़े कई प्रमुख पर्व भी पड़ रहे हैं। आइए जानते हैं 13 अगस्त से 28 अगस्त तक कौन-कौन से व्रत और त्योहार किस दिन मनाए जाएंगे और इस दिन क्या धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं।

15 अगस्त को हरियाली तीज, शिव-पार्वती की होगी आराधना

सावन शुक्ल पक्ष की सबसे खास तिथियों में हरियाली तीज शामिल है। इस वर्ष 15 अगस्त, शनिवार को सावन शुक्ल तृतीया के दिन हरियाली तीज का व्रत रखा जाएगा। सुहागिन महिलाओं के लिए इस पर्व का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। महिलाएं इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य तथा वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं।

हरियाली तीज के अवसर पर माता पार्वती को सुहाग की वस्तुएं अर्पित करने की परंपरा है। पूजा में मेहंदी, चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर और अन्य श्रृंगार सामग्री चढ़ाई जाती है। वहीं भगवान शिव को जल और बेलपत्र अर्पित किए जाते हैं। कई स्थानों पर महिलाएं झूला झूलती हैं और तीज के पारंपरिक गीत भी गाती हैं। इस दिन शिव-पार्वती की कथा सुनना या पढ़ना भी शुभ माना जाता है।

16 अगस्त को दुर्वा गणपति चतुर्थी व्रत

हरियाली तीज के अगले दिन यानी 16 अगस्त, रविवार को दुर्वा गणपति चतुर्थी का व्रत रहेगा। यह दिन भगवान गणेश की उपासना के लिए समर्पित माना जाता है। गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है, इसलिए भक्त इस व्रत के माध्यम से जीवन की परेशानियों और बाधाओं को दूर करने की कामना करते हैं।

पूजा के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करना विशेष माना जाता है। इसके अलावा फूल, हार, फल और मोदक का भोग लगाया जा सकता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार दिनभर व्रत रखकर गणेश मंत्रों का जाप कर सकते हैं। पूजा के अंत में भगवान गणेश से परिवार की सुख-शांति और सभी कार्यों में सफलता की प्रार्थना करनी चाहिए।

17 अगस्त को नाग पंचमी और सिंह संक्रांति

17 अगस्त, सोमवार को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। इसी दिन सिंह संक्रांति भी पड़ रही है। इसलिए धार्मिक दृष्टि से यह दिन काफी महत्वपूर्ण रहेगा। नाग पंचमी पर भगवान शिव और नागदेवता की पूजा करने की परंपरा है।

दिन की शुरुआत सूर्यदेव को जल अर्पित करके की जा सकती है। इसके बाद भगवान शिव की पूजा करें और शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। शिवलिंग के साथ विराजित नागदेवता की प्रतीकात्मक पूजा भी की जा सकती है। हल्दी, कुमकुम और फूल आदि अर्पित किए जाते हैं।

नाग पंचमी पर नागदेवता के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना धार्मिक परंपरा का हिस्सा है, लेकिन जीवित सांपों को दूध पिलाने से बचना चाहिए। इसके बजाय नाग की प्रतिमा या चित्र की विधि-विधान से पूजा करना उचित माना जाता है। भगवान शिव का ध्यान और मंत्र जाप भी इस दिन किए जा सकते हैं।

23 और 24 अगस्त को पुत्रदा एकादशी

सावन शुक्ल पक्ष में पुत्रदा एकादशी भी महत्वपूर्ण रहेगी। तिथियों की घट-बढ़ के कारण इस बार 23 और 24 अगस्त, रविवार और सोमवार को इसे लेकर दो दिन की स्थिति बन रही है। अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित पंचांग और स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार व्रत की तारीख अलग हो सकती है। इसलिए श्रद्धालु अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार व्रत की तिथि तय कर सकते हैं।

पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से संतान से संबंधित परेशानियां दूर होने और संतान सुख की प्राप्ति की कामना पूरी होने का आशीर्वाद मिलता है।

इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करके उनके मंत्रों का जाप करना चाहिए। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार फलाहार कर सकते हैं। पूजा में भगवान विष्णु को पीले फूल, फल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। दिनभर भगवान का स्मरण करने और धार्मिक कार्यों में समय बिताने की परंपरा है।

25 अगस्त को भौम प्रदोष व्रत

25 अगस्त, मंगलवार को भौम प्रदोष व्रत रहेगा। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और मंगलवार के दिन पड़ने के कारण इसे भौम प्रदोष कहा जाता है। इस दिन शाम के समय प्रदोषकाल में शिव-पार्वती की पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है।

भक्त शाम को स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा की तैयारी कर सकते हैं। भगवान शिव को जल अर्पित करने के बाद दीपक जलाएं और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। शिव-पार्वती की पूजा के साथ भगवान शिव को बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जा सकती है।

मंगलवार होने की वजह से इस दिन हनुमान जी की आराधना भी की जा सकती है। भक्त हनुमान चालीसा का पाठ करके बजरंगबली से शक्ति, साहस और संकटों से रक्षा की प्रार्थना कर सकते हैं। शिव पूजा के बाद परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करना शुभ माना जाता है।

28 अगस्त को रक्षाबंधन के साथ सावन पूर्णिमा

सावन शुक्ल पक्ष का समापन 28 अगस्त, शुक्रवार को सावन पूर्णिमा के साथ होगा। इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाएगा। भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक यह त्योहार भारतीय परंपरा में विशेष स्थान रखता है।

रक्षाबंधन के दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर उसकी लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना करती है। भाई भी अपनी बहन की रक्षा और उसके सुख-दुख में साथ देने का संकल्प लेता है। राखी बांधने से पहले परिवार में इष्टदेव की पूजा करने की परंपरा भी कई जगहों पर है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान को राखी अर्पित करके परिवार की खुशहाली और समृद्धि की प्रार्थना की जा सकती है। सावन पूर्णिमा होने के कारण इस दिन भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व रहेगा। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार स्नान, पूजा, दान और धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं।

सावन शुक्ल पक्ष में ऐसे करें धार्मिक कार्य

सावन शुक्ल पक्ष के दौरान भगवान शिव की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। भक्त नियमित रूप से शिवलिंग पर जल चढ़ा सकते हैं और बेलपत्र अर्पित कर सकते हैं। इसके साथ ही अपनी श्रद्धा के अनुसार महामृत्युंजय मंत्र या ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप किया जा सकता है।

इस अवधि में व्रत रखने वाले लोगों को अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए ही उपवास करना चाहिए। धार्मिक परंपरा के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है। घर में साफ-सफाई रखने और पूजा स्थल को व्यवस्थित रखने पर भी विशेष ध्यान दिया जा सकता है।

कुल मिलाकर 13 अगस्त से शुरू हुआ सावन शुक्ल पक्ष धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। अगले पखवाड़े में एक के बाद एक कई प्रमुख व्रत और त्योहार आएंगे। 15 अगस्त की हरियाली तीज से शुरू होने वाला यह पर्व क्रम 16 अगस्त की गणेश चतुर्थी, 17 अगस्त की नाग पंचमी, 23-24 अगस्त की पुत्रदा एकादशी और 25 अगस्त के भौम प्रदोष से होते हुए 28 अगस्त के रक्षाबंधन और सावन पूर्णिमा तक चलेगा। अलग-अलग पर्वों की पूजा और व्रत की विधि स्थानीय परंपराओं के अनुसार कुछ भिन्न हो सकती है, इसलिए तिथि और मुहूर्त के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।

(Photo: AI-Generated)