इंडोनेशिया के फ्लोरेस द्वीप में शनिवार सुबह आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने बड़े इलाके को हिला दिया। तेज झटकों के कारण लोगों में दहशत फैल गई और कई जगह इमारतों को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हादसे में कम से कम 20 लोगों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। भूकंप के बाद लगातार आफ्टरशॉक महसूस किए जाने से लोगों में डर का माहौल बना हुआ है।
भूकंप के तुरंत बाद कुछ तटीय इलाकों में सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी। हालांकि, कुछ घंटे बाद स्थिति का आकलन करने के बाद चेतावनी वापस ले ली गई। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने की सलाह दी है। अधिकारियों को आशंका है कि तेज आफ्टरशॉक के कारण कमजोर हो चुकी इमारतों को और नुकसान पहुंच सकता है।
सुबह करीब 6 बजे धरती हिली
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS के अनुसार, भूकंप स्थानीय समय के मुताबिक सुबह करीब 6 बजे आया। इसका केंद्र इंडोनेशिया के फ्लोरेस द्वीप पर स्थित एंडे शहर से लगभग 68 किलोमीटर दूर समुद्र के नीचे था। समुद्र के भीतर भूकंप का केंद्र होने के कारण आसपास के तटीय क्षेत्रों में इसका असर काफी तेज महसूस किया गया।
भूकंप के झटके फ्लोरेस द्वीप के बड़े हिस्से के अलावा आसपास के कई इलाकों में भी महसूस किए गए। अचानक धरती हिलने से लोग घरों, दुकानों और दूसरी इमारतों से बाहर निकल आए। कई स्थानों पर लोग खुले मैदानों और ऊंचे इलाकों की तरफ जाते दिखाई दिए।
सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में इमारतों के हिस्से गिरते और कई संरचनाओं को क्षतिग्रस्त अवस्था में दिखाया गया है। हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है। प्रशासन और राहत एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन कर रही हैं।
6.1 तीव्रता तक के आफ्टरशॉक
मुख्य भूकंप के बाद इलाके में कई झटके महसूस किए गए। इनमें 5.9, 5.6 और 6.1 तीव्रता के आफ्टरशॉक भी शामिल हैं। लगातार आ रहे झटकों के कारण लोग अपने घरों और इमारतों के भीतर लौटने से बच रहे हैं।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे तब तक क्षतिग्रस्त इमारतों में प्रवेश न करें, जब तक उनकी सुरक्षा की जांच पूरी नहीं हो जाती। बड़े भूकंप के बाद आने वाले आफ्टरशॉक पहले से कमजोर संरचनाओं को गिरा सकते हैं, इसलिए प्रशासन ने सावधानी बरतने को कहा है।
कई इलाकों में लोग खुले स्थानों पर जमा हैं। स्थानीय प्रशासन राहत और बचाव कार्यों के साथ-साथ संभावित नुकसान की जानकारी जुटाने में लगा हुआ है।
समुद्र का पानी अचानक पीछे हटने से बढ़ी दहशत
भूकंप के बाद नागेकेओ इलाके में समुद्र का पानी अचानक पीछे हटता हुआ दिखाई दिया। तटीय क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए यह दृश्य बेहद डरावना था। कई लोगों ने इसे सुनामी के संभावित संकेत के तौर पर लिया और तुरंत ऊंची जगहों की तरफ भागना शुरू कर दिया।
समुद्र के नीचे आने वाले शक्तिशाली भूकंपों के बाद समुद्री जल में अचानक बदलाव सुनामी का खतरा पैदा कर सकता है। इसी संभावना को देखते हुए शुरुआती तौर पर तटीय इलाकों के लिए चेतावनी जारी की गई थी।
बाद में अधिकारियों ने सुनामी की चेतावनी हटा ली। हालांकि, प्रशासन ने लोगों को पूरी तरह सामान्य स्थिति बहाल होने तक सावधानी बरतने की सलाह दी है। खासतौर पर समुद्र के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने को कहा गया है।
प्रार्थना के समय सेमिनरी की छत गिरी
भूकंप का असर सिक्का इलाके में स्थित सेंट पीटर मेजर सेमिनरी में भी देखने को मिला। यहां सुबह की प्रार्थना चल रही थी, तभी सभा भवन की छत का एक हिस्सा अचानक गिर गया।
सेमिनरी के रेक्टर रेव. गिडेलबर्टस टांगा के मुताबिक, घटना के वक्त वहां छात्र और नन मौजूद थे। भूकंप के झटके महसूस होते ही सभी लोग घबराकर बाहर निकलने लगे।
जान बचाने की कोशिश में एक पादरी ने दूसरी मंजिल से छलांग लगा दी। इस घटना में उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया। हादसे के बाद प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया और घायलों का इलाज कराया गया।
अस्पतालों में भी मची अफरा-तफरी
भूकंप के बाद अस्पतालों में भी एहतियाती कदम उठाए गए। कई चिकित्सा केंद्रों से मरीजों को बाहर निकालकर खुले स्थानों पर लाया गया। स्थानीय टीवी चैनलों की तस्वीरों में स्वास्थ्यकर्मी मरीजों को स्ट्रेचर के जरिए अस्पताल की इमारतों से बाहर ले जाते दिखाई दिए।
अस्पतालों के बाहर अस्थायी चिकित्सा व्यवस्था तैयार की गई। खुले स्थानों पर बेड, आईवी स्टैंड और ऑक्सीजन सिलेंडर लगाए गए ताकि जरूरत पड़ने पर मरीजों को तत्काल उपचार दिया जा सके।
भूकंप के दौरान अस्पतालों में मौजूद गंभीर मरीजों को सुरक्षित रखना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती रही। स्वास्थ्यकर्मियों ने इमारतों के अंदर दोबारा जाने के बजाय खुले क्षेत्रों में प्राथमिक उपचार और दूसरी चिकित्सा सेवाएं जारी रखीं।
मौमेरे में भी नुकसान की खबर
पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत के कई इलाकों में भूकंप के झटके काफी तेज थे। सिक्का की रहने वाली योहाना एम्बू ने बताया कि झटके लगते ही आसपास के लोग घबराकर ऊंची जगहों की ओर जाने लगे।
उन्होंने मौमेरे बंदरगाह के टर्मिनल के प्रतीक्षालय को भी गिरा हुआ देखने की बात कही। स्थानीय स्तर पर कई अन्य इमारतों और संरचनाओं को नुकसान पहुंचने की सूचनाएं सामने आई हैं।
राहत एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में जाकर स्थिति का जायजा ले रही हैं। मृतकों और घायलों की संख्या में बदलाव भी हो सकता है, क्योंकि दूरदराज के इलाकों से पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
लोगों को घरों में लौटने से रोका गया
प्रशासन ने लोगों को विशेष रूप से उन इमारतों में वापस जाने से बचने को कहा है, जिन्हें भूकंप से नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों के मुताबिक आफ्टरशॉक के दौरान पहले से कमजोर इमारतें अचानक गिर सकती हैं।
लोगों से खुले और सुरक्षित स्थानों पर रहने, समुद्र के किनारे जाने से बचने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। राहत एवं बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों की जानकारी जुटाने और नुकसान का आकलन करने में लगे हुए हैं।
इंडोनेशिया में बार-बार क्यों आते हैं शक्तिशाली भूकंप?
इंडोनेशिया भूकंप के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील देशों में शामिल है। इसका एक बड़ा कारण इसका ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित होना है। यह प्रशांत महासागर के आसपास फैला ऐसा क्षेत्र है जहां कई सक्रिय भूगर्भीय प्लेटें एक-दूसरे से मिलती हैं।
इंडोनेशिया के आसपास कई टेक्टोनिक प्लेटें मौजूद हैं। ये प्लेटें लगातार बेहद धीमी गति से खिसकती रहती हैं। जब दो प्लेटों के बीच टकराव होता है या एक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे जाने लगती है, तो धरती के भीतर तनाव और दबाव जमा होता रहता है।
जब यह दबाव अचानक बाहर निकलता है तो भूकंपीय ऊर्जा पैदा होती है और धरती हिलने लगती है। इसी प्रक्रिया के कारण इंडोनेशिया में छोटे-बड़े भूकंप लगातार आते रहते हैं।
इस देश की भौगोलिक स्थिति के कारण सिर्फ भूकंप ही नहीं, बल्कि ज्वालामुखी विस्फोट और सुनामी का खतरा भी बना रहता है। खासकर समुद्र के नीचे आने वाले बड़े भूकंप समुद्री जल को तेजी से विस्थापित कर सकते हैं, जिससे सुनामी की लहरें पैदा होने की आशंका रहती है।
शनिवार को आए शक्तिशाली भूकंप के बाद भी इसी वजह से तटीय क्षेत्रों में तत्काल चेतावनी जारी की गई थी। बाद में सुनामी का खतरा कम होने पर चेतावनी हटा दी गई, लेकिन लगातार आफ्टरशॉक के कारण प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता अभी बनी हुई है।
फिलहाल राहत एजेंसियां प्रभावित इलाकों में बचाव और नुकसान का आकलन करने में जुटी हैं। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने, आधिकारिक निर्देशों का पालन करने और क्षतिग्रस्त इमारतों से दूरी बनाए रखने को कहा है।




