नाग पंचमी 2026: शिव पूजा से लेकर नाग देवता के अभिषेक तक, जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और पर्व का धार्मिक महत्व

नाग पंचमी 2026: शिव पूजा से लेकर नाग देवता के अभिषेक तक, जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और पर्व का धार्मिक महत्व

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इसी पवित्र महीने में आने वाली नाग पंचमी का पर्व भी हिंदू धर्म में खास स्थान रखता है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने के साथ भगवान शिव की आराधना की जाती है। मान्यता है कि नाग पंचमी पर श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख-शांति आती है और नाग देवता की कृपा प्राप्त होती है।

इस वर्ष नाग पंचमी का पर्व सावन के तीसरे सोमवार के साथ पड़ रहा है। सोमवार और नाग पंचमी का एक साथ आना धार्मिक दृष्टि से विशेष संयोग माना जा रहा है। यही वजह है कि शिव भक्तों के लिए इस बार का दिन और भी महत्वपूर्ण हो गया है। श्रद्धालु सुबह स्नान करके भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे और इसके बाद नाग देवता की पूजा-अर्चना करेंगे।

कब है नाग पंचमी और क्या है पूजा का शुभ समय?

नाग पंचमी हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने की परंपरा सदियों पुरानी है। इस बार पूजा के लिए सुबह का समय विशेष शुभ बताया गया है।

ज्योतिषाचार्य डॉ. पूनम वार्ष्णेय के अनुसार, नाग पंचमी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:15 बजे से 8:31 बजे तक रहेगा। श्रद्धालु इस अवधि में नाग देवता और भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं। इस दिन शुभ योग, मुद्गर योग और गजकेसरी योग का संयोग बनने की बात कही गई है। वहीं चंद्रमा चित्रा नक्षत्र में रहेंगे।

इसके अलावा सुबह करीब 7:59 बजे सूर्य के सिंह राशि में प्रवेश करने का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे में धार्मिक दृष्टि से दिन की शुरुआत स्नान, ध्यान और पूजा-पाठ से करना शुभ माना जा रहा है।

सोमवार के साथ नाग पंचमी का संयोग क्यों खास?

नाग पंचमी और सोमवार का एक साथ आना भगवान शिव के भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। शिवजी के गले में नाग का वास होने के कारण नाग देवता का संबंध भगवान शिव से भी जोड़ा जाता है। इसी वजह से नाग पंचमी के अवसर पर शिवलिंग का जलाभिषेक और नाग देवता की पूजा साथ-साथ करने की परंपरा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव की आराधना के साथ नाग देवता का स्मरण करने से भक्त को मानसिक शांति, सुख और समृद्धि की कामना पूरी होने का आशीर्वाद मिलता है। कई श्रद्धालु इस दिन व्रत भी रखते हैं और दिनभर भगवान शिव तथा नाग देवता का ध्यान करते हैं।

नाग पंचमी पर क्यों की जाती है नाग देवता की पूजा?

हिंदू धार्मिक परंपरा में नागों को केवल सर्प के रूप में नहीं, बल्कि देव स्वरूप में भी पूजा जाता है। नाग पंचमी प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान का संदेश देने वाला पर्व भी माना जाता है। भारतीय परंपरा में नागों का संबंध भगवान शिव, भगवान विष्णु और कई धार्मिक कथाओं से जुड़ा हुआ है।

मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है। कुछ धार्मिक मान्यताओं में इस दिन की पूजा को कालसर्प दोष से जुड़ी बाधाओं को दूर करने वाला भी बताया गया है। हालांकि इन मान्यताओं का संबंध धार्मिक आस्था और ज्योतिषीय परंपराओं से है।

इस दिन लोग अपने परिवार की सुरक्षा, सुख-समृद्धि और शांति के लिए नाग देवता से प्रार्थना करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में नाग पंचमी का पर्व खेती और प्रकृति से भी जुड़ा हुआ माना जाता है।

कैसे करें नाग पंचमी की पूजा?

नाग पंचमी की पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ और स्वच्छ कपड़े पहनकर पूजा का संकल्प लिया जाता है। घर के पूजा स्थान या मंदिर में भगवान शिव और नाग देवता का ध्यान किया जा सकता है।

परंपरा के अनुसार पूजा की शुरुआत भगवान शिव के जलाभिषेक से की जाती है। इसके बाद नाग देवता की प्रतिमा या तस्वीर के सामने पूजा की जाती है। कुछ स्थानों पर घर के बाहर या पूजा स्थल पर गाय के गोबर से नाग का आकार बनाकर उसकी पूजा करने की भी परंपरा है।

पूजा के दौरान सबसे पहले नाग देवता का आह्वान किया जाता है। इसके बाद जल, कच्चा दूध, फूल, अक्षत, चंदन और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। धूप और दीप जलाकर नाग देवता की आरती की जाती है। पूजा पूरी होने के बाद परिवार की सुख-शांति और सुरक्षा के लिए प्रार्थना की जाती है।

पूजा में किन चीजों का कर सकते हैं इस्तेमाल?

नाग पंचमी की पूजा के लिए बहुत अधिक सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। श्रद्धा के साथ उपलब्ध सामग्री से भी पूजा की जा सकती है। पूजा में फूल, चंदन, अक्षत, हल्दी, धूप, दीप, फल, मेवा, अबीर, गुलाल और मेहंदी जैसी चीजें अर्पित करने की परंपरा है।

नाग देवता को दूध अर्पित करने की धार्मिक परंपरा भी कई जगहों पर देखने को मिलती है। हालांकि इसे जीवित सांपों के साथ नहीं किया जाना चाहिए। पूजा के लिए नाग देवता की प्रतिमा, तस्वीर या प्रतीक का इस्तेमाल करना उचित माना जाता है।

जीवित सांप को दूध पिलाना क्यों नहीं चाहिए?

नाग पंचमी के दिन कई जगहों पर लोग जीवित सांपों को दूध पिलाने की कोशिश करते हैं, लेकिन ऐसा करना उचित नहीं है। विशेषज्ञों और पशु कल्याण से जुड़ी सलाह के अनुसार सांपों के लिए दूध प्राकृतिक आहार नहीं है और जबरन दूध पिलाना उनके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

इसलिए धार्मिक आस्था को बनाए रखते हुए नाग देवता की प्रतिमा या तस्वीर पर ही पूजा और अभिषेक करना बेहतर है। नाग पंचमी का उद्देश्य नागों के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना को बढ़ावा देना भी माना जा सकता है। जीवित सांपों को पकड़कर या उनके साथ किसी तरह का प्रदर्शन करने से बचना चाहिए।

इन आठ नागों का किया जाता है स्मरण

नाग पंचमी की पूजा के दौरान कई परंपराओं में आठ प्रमुख नागों का स्मरण किया जाता है। इनमें अनंत, वासुकी, तक्षक, कर्कोटक, पद्म, महापद्म, शंखपाल और कुलिक नागों के नाम शामिल हैं।

पूजा के समय इनका ध्यान करके धूप-दीप अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन नागों का स्मरण करने से नाग देवता का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है।

व्रत रखने वाले श्रद्धालु क्या करें?

जो लोग नाग पंचमी का व्रत रखना चाहते हैं, वे सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प ले सकते हैं। इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान शिव और नाग देवता का ध्यान किया जाता है। पूरे दिन श्रद्धा के अनुसार उपवास रखते हुए मंत्र जाप और धार्मिक पाठ किए जा सकते हैं।

व्रत रखने वाले लोगों को अपनी क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। पूजा के बाद नाग देवता से परिवार के कल्याण, सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।

नाग पंचमी का धार्मिक संदेश

नाग पंचमी केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान की भावना से भी जुड़ा हुआ है। भारतीय संस्कृति में सांपों को लंबे समय से धार्मिक प्रतीक के रूप में देखा जाता रहा है। भगवान शिव के गले में नाग का होना इस संबंध को और मजबूत करता है।

इस दिन नाग देवता की पूजा करते समय यह संदेश भी याद रखना चाहिए कि आस्था के नाम पर किसी जीव को नुकसान न पहुंचे। प्रतिमा की पूजा करना, प्रतीकात्मक अभिषेक करना और जीवित सांपों को परेशान न करना ही सुरक्षित और जिम्मेदार तरीका है।

इस नाग पंचमी पर भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करें, नाग देवता की विधि-विधान से पूजा करें और परिवार की खुशहाली की कामना करें। सोमवार और नाग पंचमी के इस विशेष संयोग में श्रद्धा के साथ की गई पूजा को धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

(Photo : AI Generated)