फिरोजपुर कैंट बोर्ड स्टेडियम में आयोजित 80वें स्वतंत्रता दिवस के राज्य स्तरीय समारोह में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद प्रदेश के विकास, महिला सशक्तिकरण, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और सुरक्षा से जुड़े सरकार के प्रयासों को सामने रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 पंजाब की महिलाओं के लिए आर्थिक आजादी और सशक्तिकरण का वर्ष बन रहा है। ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’ के जरिए लाखों महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने की दिशा में कदम उठाया गया है, ताकि वे अपनी जरूरतों के मुताबिक सम्मान राशि का इस्तेमाल स्वयं कर सकें।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, योजना के तहत अब तक 74 लाख 59 हजार महिलाओं का पंजीकरण हो चुका है, जबकि 65 लाख 62 हजार से अधिक लाभार्थियों के बैंक खातों में 2,274 करोड़ 42 लाख रुपये की सम्मान राशि भेजी जा चुकी है। उन्होंने बाकी पात्र महिलाओं से भी योजना के तहत पंजीकरण करवाकर इसका लाभ लेने की अपील की।
भगवंत मान ने कहा कि उनकी सरकार का उद्देश्य केवल सरकारी योजनाओं की घोषणा करना नहीं, बल्कि पंजाब के लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाना है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना इसी व्यापक सोच का हिस्सा है। उनके अनुसार, जब परिवार की महिलाएं आर्थिक फैसलों में अधिक सक्षम होती हैं तो इसका सकारात्मक असर पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है।
स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने देश की आजादी के संघर्ष में पंजाब और पंजाबियों के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि फिरोजपुर की धरती का भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में विशेष स्थान है। उन्होंने शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव समेत उन तमाम स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया।
मुख्यमंत्री ने हुसैनीवाला पहुंचकर राष्ट्रीय शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सतलुज के किनारे स्थित हुसैनीवाला पंजाब की उस महान विरासत का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और बलिदान की प्रेरणा देती है। उन्होंने बताया कि शहीदों की स्मृति को समर्पित विरासती कॉम्प्लेक्स का निर्माण 25 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है।
भगवंत मान ने सारागढ़ी की लड़ाई में शहादत देने वाले 21 बहादुर सिख सैनिकों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि फिरोजपुर की धरती ने देश को ऐसे अनेक वीर दिए हैं, जिनकी बहादुरी और बलिदान को हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के योगदान की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमा पर बसे पंजाब के लोग दुश्मनों की साजिशों के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं और दूसरी चुनौतियों का भी मजबूती से सामना करते हैं।
मुख्यमंत्री ने 1947 के विभाजन के दर्द को याद करते हुए कहा कि देश के बंटवारे की सबसे बड़ी कीमत पंजाब ने चुकाई। लाखों परिवारों को अपना घर, जमीन और कारोबार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा। उन्होंने कहा कि विभाजन केवल जमीन का बंटवारा नहीं था, बल्कि परिवारों, रिश्तों और भावनाओं को भी गहरी चोट पहुंचाने वाली त्रासदी थी। आज भी पंजाब के लोग सीमा पार स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों के खुले दर्शन की अरदास करते हैं।
आजादी के आंदोलन में पंजाबियों की भूमिका का उल्लेख करते हुए भगवंत मान ने कहा कि अत्याचार के खिलाफ खड़े होने और मानवता की रक्षा करने की प्रेरणा पंजाब की महान धार्मिक और सामाजिक विरासत से मिली। उन्होंने कूका आंदोलन, पगड़ी संभाल जट्टा लहर, गदर आंदोलन और बब्बर अकाली आंदोलन समेत स्वतंत्रता संघर्ष के विभिन्न चरणों में पंजाबियों की भूमिका को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि जलियांवाला बाग कांड के बाद पंजाबियों की कुर्बानियों ने पूरे देश में अंग्रेजी शासन के खिलाफ रोष को और मजबूत किया। भगत सिंह, ऊधम सिंह, करतार सिंह सराभा, लाला लाजपत राय, दीवान सिंह कालेपानी, बाबा राम सिंह और मदन लाल ढींगरा समेत हजारों पंजाबियों ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। मुख्यमंत्री ने इन सभी शहीदों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि पंजाब की धरती का स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान असाधारण रहा है।
भगवंत मान ने कहा कि आजादी के बाद भी पंजाब के जवानों ने देश की रक्षा में लगातार बहादुरी दिखाई है। पड़ोसी देशों के साथ हुए युद्धों में पंजाब के सैनिकों ने अदम्य साहस का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि इतने छोटे भू-भाग से देश के लिए इतनी बड़ी संख्या में बलिदान की मिसाल इतिहास में बहुत कम देखने को मिलती है।
मुख्यमंत्री ने पंजाब की सामाजिक एकता और भाईचारे को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए कहा कि प्रदेश में नफरत और विभाजन की राजनीति के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने शांति और सद्भावना को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वाली ताकतों को चेतावनी दी कि पंजाब की जनता ऐसी किसी भी साजिश को सफल नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि पंजाब की पहचान भाईचारे, एकता और ‘सरबत के भले’ की भावना से है और इसे हर कीमत पर कायम रखा जाएगा।
अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने शहीदों की सोच को सरकारी कामकाज और विकास की दिशा से जोड़ने का प्रयास किया है। उन्होंने बताया कि मोहाली स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम शहीद-ए-आजम भगत सिंह के नाम पर रखा गया है और वहां उनकी प्रतिमा भी स्थापित की गई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने खटकड़ कलां में शपथ ली थी और सरकारी कार्यालयों में भगत सिंह तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीरें लगाने का फैसला भी इसी सोच का हिस्सा है।
भगवंत मान ने दावा किया कि पिछले साढ़े चार वर्षों में उनकी सरकार ने पंजाब के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं और चुनाव से पहले लोगों से किए गए सभी वादों को पूरा किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों का लक्ष्य पंजाब को आर्थिक रूप से मजबूत, सामाजिक रूप से सुरक्षित और विकास के लिहाज से आगे बढ़ता हुआ राज्य बनाना है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में रोजगार के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अब तक 69,093 युवाओं को सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं। उनका कहना था कि युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है, ताकि उन्हें अपने भविष्य के लिए दूसरे राज्यों या देशों की ओर मजबूरी में न देखना पड़े।
कृषि क्षेत्र में किए गए कामों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के 88 प्रतिशत खेतों तक अब नहर का पानी पहुंच रहा है। उन्होंने इसे किसानों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि खेतों तक नहरी पानी पहुंचने से भूजल पर निर्भरता कम करने और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी।
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों को भी मुख्यमंत्री ने सरकार की उपलब्धियों में शामिल किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ-साथ पंजाब में सड़क सुरक्षा के लिए सड़क सुरक्षा फोर्स जैसी पहल भी की गई है। सरकार का प्रयास है कि नागरिकों को बेहतर शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षित परिवेश उपलब्ध कराया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ सरकार की लड़ाई भी लगातार जारी है। उनका कहना था कि पंजाब को नशामुक्त और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई कर रही है। उन्होंने रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य को भी नशे के खिलाफ लड़ाई का अहम आधार बताया।
सोशल मीडिया पर भी मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम की झलकियां साझा कीं। उन्होंने हुसैनीवाला में शहीदों को श्रद्धांजलि देने, पंजाब के युवाओं को रोजगार देने, खेतों तक नहरी पानी पहुंचाने और शिक्षा-स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधारों का उल्लेख किया। उन्होंने पंजाब की शांति और भाईचारे को और मजबूत करने का आह्वान करते हुए लोगों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं।
अपने संबोधन के अंत में भगवंत मान ने कहा कि आजादी केवल राजनीतिक स्वतंत्रता का नाम नहीं, बल्कि हर नागरिक को सम्मान, अवसर और बेहतर जीवन उपलब्ध करवाने का संकल्प भी है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं की आर्थिक ताकत बढ़ाने से लेकर युवाओं को रोजगार, किसानों को सिंचाई सुविधा, बच्चों को बेहतर शिक्षा और आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदों के सपनों के अनुरूप एक खुशहाल, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील ‘रंगला पंजाब’ बनाना सरकार का लक्ष्य है।




