किसानों से लेकर सड़कों और अस्पतालों तक हरियाणा में विकास की रफ्तार तेज, 15.63 करोड़ से खरीदा जाएगा 25 हजार टन जिप्सम

किसानों से लेकर सड़कों और अस्पतालों तक हरियाणा में विकास की रफ्तार तेज, 15.63 करोड़ से खरीदा जाएगा 25 हजार टन जिप्सम

हरियाणा सरकार ने प्रदेश में कृषि भूमि सुधार से लेकर पेयजल, सीवरेज, स्वास्थ्य, शिक्षा, जेल, न्यायिक परिसर और सड़क बुनियादी ढांचे से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में चंडीगढ़ में हुई हाई पावर्ड परचेज कमेटी की बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़े विकास कार्यों और खरीद प्रस्तावों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में किसानों को राहत देने के साथ-साथ शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा, राजस्व मंत्री विपुल गोयल, कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा और जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा समेत संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए ऐसा प्रस्ताव मंजूर किया है, जिसके तहत प्रदेश में करीब 10 लाख एकड़ भूमि की गुणवत्ता सुधारने के लिए 25 हजार टन जिप्सम खरीदा जाएगा। इस खरीद पर करीब 15.63 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

सरकार की योजना के अनुसार किसानों को जिप्सम 50 प्रतिशत सब्सिडी पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे ऐसी कृषि भूमि, जहां मिट्टी की गुणवत्ता से संबंधित समस्याओं के कारण उत्पादन प्रभावित होता है, को सुधारने में मदद मिलने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य कृषि भूमि की उत्पादकता बढ़ाने के साथ किसानों की लागत और उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों को कम करना है।

जिप्सम की खरीद और किसानों को सब्सिडी पर वितरण की योजना को कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बड़ी मात्रा में भूमि को इस अभियान के दायरे में लाने से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में कृषि योग्य जमीन की गुणवत्ता सुधारने का प्रयास किया जाएगा। सरकार का फोकस किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल फसल उत्पादन तक सीमित न रहकर मिट्टी और भूमि की गुणवत्ता को बेहतर करने पर भी है।

इसी क्रम में कैथल स्थित हैफेड कांप्लेक्स में भंडारण और गुणवत्ता जांच की सुविधाएं विकसित करने का निर्णय भी लिया गया। मुख्यमंत्री ने 9.80 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 21,680 टन क्षमता वाले गोदाम और क्वालिटी कंट्रोल लैब के निर्माण को मंजूरी दी। नई व्यवस्था से कृषि से जुड़ी सामग्री के भंडारण के साथ उसकी गुणवत्ता की निगरानी में भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

पेयजल योजनाओं को लेकर भी बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए। पानीपत जिले के भैंसवाल, कुटानी, राजाखेड़ी, निम्बरी, उग्राखेड़ी, रिसालु, नांगलखेड़ी, काबड़ी और गढ़ी सिकंदरपुर समेत नौ गांवों में महाग्राम योजना के तहत पेयजल परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन योजनाओं पर करीब 75.50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और लोगों को बेहतर जल सुविधा उपलब्ध करवाना है। सरकार का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती आबादी और पानी की जरूरत को देखते हुए पेयजल नेटवर्क को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

गोहाना शहर के कुछ इलाकों में सीवरेज व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए भी मंजूरी दी गई है। शनि मंदिर और एमपीएस गुढ़ा क्षेत्र में सीवरेज लाइन बिछाने के लिए करीब 16.30 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे संबंधित क्षेत्रों में सीवरेज नेटवर्क को विस्तार देने और जल निकासी की समस्या कम करने में मदद मिलेगी।

अंबाला जिले के लिए भी बैठक में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को हरी झंडी दी गई। पिंजौर के सेक्टर-27 में न्यायिक परिसर के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना पर करीब 22.70 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। न्यायिक परिसर के निर्माण से संबंधित न्यायिक सुविधाओं के लिए बेहतर आधारभूत ढांचा उपलब्ध हो सकेगा।

अंबाला शहर में लघु सचिवालय के प्रशासनिक ब्लॉक के तीसरे चरण के निर्माण को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। इस कार्य पर करीब 34 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रशासनिक ढांचे के विस्तार से सरकारी कार्यालयों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद है।

अंबाला कैंट में बैंक स्क्वेयर भवन के फेज-1 का निर्माण भी किया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत 52 करोड़ रुपये रखी गई है। सरकार के अनुसार शहर में विभिन्न संस्थागत और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए आधुनिक भवन और सुविधाएं विकसित करने की दिशा में यह परियोजना महत्वपूर्ण होगी।

शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े बुनियादी ढांचे को भी बैठक में प्राथमिकता दी गई। सफीदों में राजकीय नर्सिंग कॉलेज के निर्माण के लिए 37.49 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। नर्सिंग कॉलेज बनने से क्षेत्र में स्वास्थ्य शिक्षा के लिए बेहतर संस्थागत सुविधा विकसित होगी और भविष्य में प्रशिक्षित नर्सिंग मानव संसाधन तैयार करने में मदद मिलेगी।

पंचकूला के औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए भी राशि स्वीकृत की गई है। इंडस्ट्रियल एरिया की सड़कों के अपग्रेडेशन और मजबूतीकरण पर करीब 16.80 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। औद्योगिक क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्क से उद्योगों की आवाजाही और माल परिवहन को सुविधा मिलने की उम्मीद है।

पंचकूला जिले के गांव जलौली में जिला जेल के निर्माण की योजना को भी मंजूरी मिली है। इस परियोजना पर करीब 40 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसी तरह फतेहाबाद में नई जिला जेल के निर्माण के लिए 37 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। दोनों परियोजनाओं से जेल प्रशासन से जुड़ी आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा।

राज्य के सड़क नेटवर्क के रखरखाव को लेकर भी बैठक में बड़ा फैसला लिया गया। कुंडली-मानेसर सड़क सेक्शन के करीब 83 किलोमीटर लंबे हिस्से की मरम्मत और रखरखाव के लिए 65.66 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। सड़क की स्थिति बेहतर होने से इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात की सुविधा और सुरक्षा में सुधार की उम्मीद है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी कई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। नारनौल के अस्पताल की क्षमता बढ़ाने का फैसला किया गया है। मौजूदा 100 बेड की क्षमता वाले अस्पताल को 200 बेड के अस्पताल में अपग्रेड किया जाएगा। इस विस्तार पर करीब 26.30 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। अस्पताल की क्षमता बढ़ने से आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को अधिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

यमुनानगर में 50 बेड की क्षमता वाला आयुष अस्पताल बनाया जाएगा। इसके निर्माण पर 16.89 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। अस्पताल में आयुष पद्धतियों से संबंधित उपचार और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इससे क्षेत्र में वैकल्पिक और पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं के लिए संस्थागत सुविधा मजबूत होगी।

जुलाना शहर के लिए भी पेयजल व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। शहर में वाटर सप्लाई से जुड़े कार्यों पर 21.17 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना का उद्देश्य जल आपूर्ति नेटवर्क को बेहतर बनाना और लोगों को अधिक व्यवस्थित पेयजल सुविधा उपलब्ध करवाना है।

सड़क कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिहाज से कुरुक्षेत्र-सहारनपुर स्टेट हाईवे से जुड़ा प्रस्ताव भी मंजूर किया गया है। करीब 10 मीटर चौड़ी सड़क के विकास कार्य पर 26.90 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार इस मार्ग को भविष्य में फोरलेन बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है।

कुरुक्षेत्र-सहारनपुर मार्ग को फोरलेन में बदलने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार की जा रही है। डीपीआर तैयार होने और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद सड़क को चार लेन में विकसित करने की योजना है। इससे हरियाणा और आसपास के राज्यों के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने के साथ यातायात दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है।

बैठक में मंजूर परियोजनाओं का दायरा कृषि और ग्रामीण सुविधाओं से लेकर शहरी बुनियादी ढांचे तक फैला हुआ है। एक तरफ सरकार किसानों के लिए भूमि सुधार अभियान के तहत सब्सिडी पर जिप्सम उपलब्ध कराने जा रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और सीवरेज नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है।

शहरी क्षेत्रों में प्रशासनिक भवन, न्यायिक परिसर, औद्योगिक क्षेत्र की सड़कें और स्वास्थ्य संस्थानों के विस्तार को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा जेलों और अन्य सरकारी संस्थानों के निर्माण से संबंधित परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया गया है।

सरकार के इन फैसलों से कई जिलों में एक साथ विकास कार्य शुरू होने की संभावना है। खास तौर पर पेयजल और सीवरेज से जुड़ी परियोजनाओं का सीधा लाभ ग्रामीण और शहरी आबादी को मिलने की उम्मीद है। वहीं सड़क और औद्योगिक बुनियादी ढांचे में निवेश से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

कृषि क्षेत्र के लिए स्वीकृत जिप्सम योजना को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 10 लाख एकड़ भूमि को सुधारने के लक्ष्य के साथ 25 हजार टन जिप्सम की खरीद की जाएगी। किसानों को आधी कीमत पर जिप्सम उपलब्ध होने से भूमि सुधार की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ सकती है। इसके साथ कैथल में बड़े गोदाम और क्वालिटी कंट्रोल लैब की स्थापना से भंडारण और गुणवत्ता जांच का ढांचा भी मजबूत होगा।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में अलग-अलग विभागों के प्रस्तावों को मंजूरी दिए जाने से सरकार ने यह संकेत दिया है कि प्रदेश में बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों को गति देने पर जोर जारी रहेगा। कृषि, पेयजल, स्वास्थ्य, सड़क, न्यायिक और प्रशासनिक सुविधाओं को एक साथ मजबूत करने की दिशा में कई परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है।

कुल मिलाकर, हाई पावर्ड परचेज कमेटी की बैठक में हरियाणा के कई हिस्सों के लिए विकास योजनाओं का रास्ता साफ हुआ है। 15.63 करोड़ रुपये की लागत से 25 हजार टन जिप्सम खरीदकर 10 लाख एकड़ भूमि सुधारने की योजना से लेकर 75.50 करोड़ रुपये की ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं, अस्पतालों के विस्तार, नई जेलों, न्यायिक परिसर और सड़क परियोजनाओं तक सरकार ने कई प्रस्तावों को मंजूरी दी है। आने वाले समय में इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से प्रदेश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद है।