गर्दन चटकाने की आदत कहीं पड़ न जाए भारी, जानिए आवाज आने की वजह और कब हो सकती है परेशानी

गर्दन चटकाने की आदत कहीं पड़ न जाए भारी, जानिए आवाज आने की वजह और कब हो सकती है परेशानी

गर्दन में खिंचाव या भारीपन महसूस होते ही कई लोगों की आदत होती है कि वे उसे एक तरफ मोड़कर चटका लेते हैं। कुछ लोगों को ऐसा करने के बाद तुरंत हल्कापन और आराम महसूस होता है। यही वजह है कि धीरे-धीरे गर्दन चटकाना उनकी रोजमर्रा की आदत बन जाता है। खासकर वे लोग जो दिन का लंबा समय मोबाइल, लैपटॉप या डेस्क पर बैठकर काम करते हैं, उन्हें गर्दन में अकड़न और तनाव ज्यादा महसूस हो सकता है।

गर्दन चटकाते समय आने वाली आवाज कई लोगों को परेशान भी करती है। मन में सवाल उठता है कि आखिर हड्डियों या जोड़ों के अंदर ऐसा क्या होता है, जिसकी वजह से यह आवाज निकलती है? क्या हर बार गर्दन चटकना सामान्य है या यह शरीर में किसी समस्या का संकेत हो सकता है? सबसे जरूरी सवाल यह भी है कि अगर कोई व्यक्ति दिन में कई बार जानबूझकर गर्दन चटकाता है, तो क्या लंबे समय में इसका नुकसान हो सकता है?

ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों के मुताबिक, कभी-कभार गर्दन से आवाज आ जाना और जानबूझकर बार-बार गर्दन को झटके से चटकाना, दोनों को एक जैसा नहीं समझना चाहिए। समस्या मुख्य रूप से तब बढ़ सकती है, जब गर्दन को बार-बार और जरूरत से ज्यादा जोर लगाकर घुमाने की आदत बन जाए।

गर्दन से आखिर चटकने की आवाज निकलती क्यों है?

डॉ. लेफ्टिनेंट कर्नल रूपेश प्रसाद, वरिष्ठ सलाहकार, ऑर्थोपेडिक्स, पारस हेल्थ पंचकूला के अनुसार, गर्दन के जोड़ों में होने वाले दबाव में बदलाव की वजह से चटकने जैसी आवाज सुनाई दे सकती है। जोड़ों के भीतर मौजूद तरल पदार्थ और गैस से जुड़े छोटे बुलबुलों में बदलाव भी इस तरह की आवाज का कारण बन सकते हैं।

इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार आवाज आने पर हड्डी टूट रही है या जोड़ को नुकसान पहुंच रहा है। अगर गर्दन सामान्य तरीके से हिलाने पर कभी-कभी आवाज करती है और व्यक्ति को इसके साथ दर्द, सूजन, सुन्नपन या कमजोरी जैसी शिकायत नहीं है, तो आमतौर पर इसे गंभीर समस्या का संकेत नहीं माना जाता।

हालांकि, केवल आवाज के आधार पर गर्दन की स्थिति का अंदाजा लगाना सही नहीं है। अगर आवाज के साथ दूसरे लक्षण भी दिखाई देने लगें, तो मामले को नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर होता है।

बार-बार गर्दन चटकाने की इच्छा क्यों होती है?

गर्दन चटकाने की आदत के पीछे केवल आवाज सुनने की इच्छा नहीं होती। कई बार शरीर में लगातार बनी रहने वाली अकड़न और मांसपेशियों का तनाव भी व्यक्ति को गर्दन घुमाने या चटकाने के लिए प्रेरित करता है।

आज की जीवनशैली में मोबाइल और कंप्यूटर का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। घंटों स्क्रीन की तरफ गर्दन झुकाकर बैठने से गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऑफिस में लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने, लगातार ड्राइविंग करने या गलत तरीके से सोने के कारण भी गर्दन में खिंचाव महसूस हो सकता है।

जब गर्दन भारी या जकड़ी हुई लगती है, तो उसे घुमाने पर कुछ लोगों को अस्थायी राहत मिलती है। इसी राहत के कारण व्यक्ति बार-बार वही प्रक्रिया दोहराने लगता है। धीरे-धीरे यह एक ऐसी आदत बन सकती है जिसमें थोड़ी भी असहजता महसूस होते ही गर्दन चटकाने का मन करता है।

क्या कभी-कभार गर्दन चटकाना नुकसानदायक है?

अगर गर्दन अपने सामान्य मूवमेंट के दौरान कभी-कभार आवाज करती है और कोई अन्य परेशानी नहीं है, तो आमतौर पर घबराने की जरूरत नहीं होती। लेकिन समस्या तब हो सकती है जब कोई व्यक्ति खुद गर्दन को पकड़कर जोर से एक तरफ मोड़े, तेज झटका दे या लगातार चटकाने की कोशिश करे।

गर्दन शरीर का बेहद संवेदनशील हिस्सा है। यहां हड्डियों और जोड़ों के साथ मांसपेशियां, लिगामेंट्स और नसों से जुड़ी महत्वपूर्ण संरचनाएं मौजूद होती हैं। इसलिए गर्दन को जरूरत से ज्यादा बल देकर घुमाना उचित नहीं माना जाता।

बार-बार और जबरदस्ती गर्दन चटकाने से आसपास के ऊतकों पर अनावश्यक तनाव पड़ सकता है। इससे गर्दन में दर्द, जकड़न या असहजता बढ़ सकती है। खासतौर पर अगर पहले से गर्दन में कोई समस्या मौजूद है, तो बिना विशेषज्ञ की सलाह के इस तरह की आदत को जारी रखना ठीक नहीं है।

तेज झटके से गर्दन घुमाना क्यों सही नहीं?

कई लोग गर्दन चटकाने के लिए उसे तेजी से दाएं-बाएं घुमाते हैं। कुछ लोग अपने हाथों से गर्दन को खींचकर आवाज निकालने की कोशिश भी करते हैं। ऐसी हरकत से बचना चाहिए।

गर्दन को सामान्य सीमा के भीतर धीरे-धीरे हिलाना और उसे जबरदस्ती मोड़ना दो अलग बातें हैं। अचानक या बहुत ज्यादा जोर लगाने से मांसपेशियों और लिगामेंट्स पर खिंचाव पड़ सकता है। इसलिए अगर गर्दन में तनाव महसूस हो रहा है, तो चटकाने की बजाय उसकी वजह समझना ज्यादा जरूरी है।

विशेषज्ञ के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति को लगातार गर्दन चटकाने की जरूरत महसूस होती है, तो इसके पीछे गलत पोश्चर, लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठना या मांसपेशियों में खिंचाव जैसी वजहें हो सकती हैं।

मोबाइल और लैपटॉप इस्तेमाल करने वालों को ज्यादा सावधानी

लंबे समय तक मोबाइल देखने के दौरान लोग अक्सर सिर को नीचे की ओर झुका लेते हैं। इसी तरह लैपटॉप पर काम करते समय स्क्रीन की ऊंचाई सही न होने पर गर्दन आगे की तरफ झुकी रहती है। लंबे समय तक यही मुद्रा बनी रहने पर गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर लगातार तनाव पड़ सकता है।

ऐसे में गर्दन में भारीपन, अकड़न या खिंचाव महसूस होना स्वाभाविक हो सकता है। इसके बाद व्यक्ति गर्दन चटकाकर तुरंत राहत पाने की कोशिश करता है। लेकिन इससे मूल समस्या खत्म नहीं होती। अगर पोश्चर और काम करने की आदतों में बदलाव नहीं किया जाए, तो परेशानी बार-बार लौट सकती है।

इसलिए काम करते समय स्क्रीन को उचित ऊंचाई पर रखना, बीच-बीच में अपनी स्थिति बदलना और लंबे समय तक लगातार एक ही मुद्रा में न बैठना मददगार हो सकता है।

गर्दन चटकाने की बजाय क्या करें?

अगर लंबे समय तक बैठने के बाद गर्दन में अकड़न महसूस होती है, तो सबसे पहले अपनी बैठने की मुद्रा पर ध्यान दें। पीठ को उचित सहारा दें और स्क्रीन को इस तरह रखें कि लगातार गर्दन नीचे न झुकानी पड़े।

काम के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लेना भी उपयोगी हो सकता है। कुछ समय के लिए स्क्रीन से नजर हटाकर शरीर को आराम दें और गर्दन को सामान्य, आरामदायक तरीके से हिलाएं। किसी विशेषज्ञ द्वारा बताई गई हल्की स्ट्रेचिंग भी मदद कर सकती है।

लेकिन गर्दन में पहले से दर्द, चोट या कोई दूसरी समस्या है, तो खुद से जोरदार एक्सरसाइज या स्ट्रेचिंग शुरू करने से पहले डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लेना बेहतर है।

किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें?

सिर्फ गर्दन से आवाज आने की तुलना में उससे जुड़े दूसरे लक्षण ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं। अगर गर्दन चटकाने या सामान्य रूप से गर्दन हिलाने के दौरान दर्द होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इसी तरह हाथों में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी महसूस होना भी डॉक्टर से सलाह लेने की वजह हो सकती है। अगर गर्दन की परेशानी के साथ चक्कर, तेज सिरदर्द या किसी चोट के बाद लगातार दर्द बना हुआ है, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

विशेष रूप से चोट लगने के बाद खुद से गर्दन चटकाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में समस्या की गंभीरता का पता लगाने के लिए डॉक्टर की सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।

आदत बन गई है तो इसे कैसे कम करें?

गर्दन चटकाने की आदत छोड़ने के लिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ऐसा करने की जरूरत क्यों महसूस होती है। अगर लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करने के बाद गर्दन चटकाने का मन करता है, तो काम करने की मुद्रा और ब्रेक लेने की आदत पर ध्यान देना चाहिए।

अगर तनाव या अकड़न इसकी वजह है, तो विशेषज्ञ की सलाह से उपयुक्त एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग अपनाई जा सकती है। गर्दन को बार-बार हाथ से पकड़कर जोर देने के बजाय उसे सामान्य तरीके से मूव करना बेहतर है।

किसी भी तरह की एक्सरसाइज करते समय दर्द बढ़े तो उसे जारी नहीं रखना चाहिए। लगातार बनी समस्या के मामले में खुद इलाज करने के बजाय ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेना उचित रहेगा।


गर्दन से कभी-कभार चटकने की आवाज आना अपने आप में हमेशा बीमारी का संकेत नहीं होता। जोड़ों के भीतर दबाव में बदलाव और गैस से जुड़े छोटे बुलबुलों में परिवर्तन जैसी वजहों से यह आवाज आ सकती है। लेकिन गर्दन को जानबूझकर बार-बार और जोर लगाकर चटकाना अच्छी आदत नहीं है।

लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल, गलत बैठने की मुद्रा और मांसपेशियों में खिंचाव बार-बार गर्दन चटकाने की इच्छा की वजह बन सकते हैं। इसलिए केवल आवाज निकालकर राहत पाने के बजाय अपनी दिनचर्या और पोश्चर पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।

अगर गर्दन में दर्द के साथ हाथों में सुन्नपन या झनझनाहट, कमजोरी, चक्कर, तेज सिरदर्द या चोट के बाद परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से जांच कराना चाहिए। यानी गर्दन को कभी-कभार सामान्य रूप से हिलाने पर आवाज आने से घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन उसे बार-बार जोर से चटकाने की आदत को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए।