फाजिल्का के किसानों को बड़ी राहत, 412 एकड़ जलभराव वाली जमीन फिर बनी खेती योग्य

फाजिल्का के किसानों को बड़ी राहत, 412 एकड़ जलभराव वाली जमीन फिर बनी खेती योग्य

फाजिल्का जिले में वर्षों से जलभराव की समस्या से प्रभावित किसानों को बड़ी राहत मिली है। खुइयां सरवर गांव में सब-सरफेस ड्रेनेज सिस्टम के दो प्रोजेक्ट पूरे होने के बाद 412 एकड़ ऐसी जमीन को दोबारा खेती के योग्य बनाया गया है, जिस पर लंबे समय से पानी जमा रहने के कारण खेती करना मुश्किल हो गया था। इन दोनों परियोजनाओं पर कुल 7.78 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

कैबिनेट मंत्री बरिंदर गोयल ने खुइयां सरवर और नाकेरिया गांवों का दौरा कर ड्रेनेज परियोजनाओं की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने स्थानीय किसानों और ग्रामीणों से मुलाकात की तथा जलभराव से प्रभावित जमीन को राहत मिलने पर उन्हें बधाई दी। मंत्री ने कहा कि जलभराव की समस्या का समाधान किसानों के लिए केवल एक विकास कार्य नहीं, बल्कि उनकी आजीविका और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है।

खुइयां सरवर में पूरे हुए दोनों प्रोजेक्टों के जरिए उन कृषि क्षेत्रों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था की गई है, जहां लंबे समय से जलभराव बना हुआ था। पहला सब-सरफेस ड्रेनेज प्रोजेक्ट 5.38 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया गया। इसके माध्यम से करीब 327 एकड़ जमीन को जलभराव से राहत मिली है। इसी गांव में दूसरे प्रोजेक्ट पर 2.40 करोड़ रुपये खर्च किए गए और इसके जरिए लगभग 85 एकड़ भूमि को फिर से खेती योग्य बनाने में सफलता मिली है।

दोनों परियोजनाओं को मिलाकर 412 एकड़ जमीन अब जलभराव की समस्या से बाहर आई है। परियोजनाओं का काम मई 2026 में शुरू किया गया था। सरकार की ओर से कम समय में इन्हें पूरा करने को किसानों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

मंत्री बरिंदर गोयल ने कहा कि फाजिल्का क्षेत्र में जलभराव लंबे समय से किसानों के लिए गंभीर चुनौती रहा है। खेतों में लंबे समय तक पानी खड़ा रहने से जमीन की उत्पादकता प्रभावित होती है और कई बार किसान उस भूमि पर फसल भी नहीं लगा पाते। इससे खेती पर निर्भर परिवारों की आमदनी पर सीधा असर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि किसी किसान के लिए उसकी जमीन केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं होती। वह उसके परिवार की आय, बच्चों की शिक्षा, घर के खर्च और आने वाले भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का आधार होती है। ऐसे में जलभराव के कारण अगर जमीन का इस्तेमाल ही नहीं हो पाए तो किसान को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ता है। सरकार का प्रयास है कि ऐसी जमीन को वैज्ञानिक तरीके से सुधारकर फिर कृषि के उपयोग में लाया जाए।

बरिंदर गोयल ने बताया कि सब-सरफेस ड्रेनेज तकनीक जलभराव की समस्या के समाधान का प्रभावी माध्यम है। इस प्रणाली में जमीन के भीतर जमा अतिरिक्त पानी को ड्रेनेज नेटवर्क के माध्यम से बाहर निकालने की व्यवस्था की जाती है। इससे खेतों में पानी का स्तर कम होता है और लंबे समय तक जलभराव रहने से प्रभावित भूमि को दोबारा कृषि योग्य बनाने में मदद मिलती है।

मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल तत्काल राहत प्रदान करना नहीं है, बल्कि जलभराव की समस्या का टिकाऊ समाधान तैयार करना है। उनका कहना था कि यदि किसी इलाके में बार-बार जलभराव होता है तो वहां केवल पंप लगाकर या अस्थायी उपाय करके समस्या को खत्म नहीं किया जा सकता। इसके लिए क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और पानी के स्तर को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक समाधान जरूरी है।

खुइयां सरवर में पूरे हुए दोनों प्रोजेक्ट इसी सोच के तहत तैयार किए गए हैं। इनके जरिए 412 एकड़ जमीन को राहत मिलने से किसानों को अपनी भूमि का फिर से इस्तेमाल करने का अवसर मिला है। अब इस क्षेत्र में कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और किसानों की आय में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

मंत्री के दौरे के दौरान किसानों ने भी जलभराव की समस्या से राहत मिलने को लेकर खुशी जताई। ग्रामीणों के अनुसार लंबे समय तक खेतों में पानी जमा रहने से खेती प्रभावित होती रही है। कई स्थानों पर जमीन का पूरा उपयोग नहीं हो पाता था और किसान मौसम के अनुसार फसल लेने में भी कठिनाई महसूस करते थे। ड्रेनेज व्यवस्था बेहतर होने के बाद अब उन्हें अपनी जमीन पर नियमित खेती की उम्मीद है।

खुइयां सरवर के बाद सरकार का ध्यान नाकेरिया गांव की ओर भी है। वहां सब-सरफेस ड्रेनेज का एक और बड़ा प्रोजेक्ट निर्माणाधीन है। इस परियोजना पर करीब 6.91 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके पूरा होने के बाद लगभग 250 एकड़ जलभराव प्रभावित भूमि को राहत मिलने का अनुमान है।

नाकेरिया परियोजना का काम भी मई 2026 में शुरू किया गया था। परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र के किसानों को अपनी जमीन का अधिक प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे खेती का रकबा बढ़ाने के साथ कृषि आधारित परिवारों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिल सकती है।

मंत्री बरिंदर गोयल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नाकेरिया परियोजना को भी तय मानकों और गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि ड्रेनेज व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि परियोजना तकनीकी रूप से कितनी प्रभावी है और उसका रखरखाव किस तरह किया जाता है। इसलिए निर्माण के साथ भविष्य की जरूरतों और नियमित संचालन पर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है।

फाजिल्का जैसे कृषि प्रधान क्षेत्र में जल निकासी की व्यवस्था का महत्व और बढ़ जाता है। खेती के लिए जमीन की उत्पादकता बनाए रखने के साथ-साथ बारिश और अतिरिक्त पानी के प्रबंधन की आवश्यकता होती है। यदि पानी खेतों में लंबे समय तक जमा रहे तो फसल को नुकसान पहुंचने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में सब-सरफेस ड्रेनेज परियोजनाएं किसानों के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा साबित हो सकती हैं।

बरिंदर गोयल ने कहा कि पंजाब सरकार ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने के लिए काम कर रही है। जलभराव के अलावा गांवों में सड़क, सिंचाई, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए भी अलग-अलग परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास का मतलब केवल सड़कों और इमारतों का निर्माण करना नहीं है। किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाना और जरूरत पड़ने पर खेतों से अतिरिक्त पानी निकालना भी ग्रामीण बुनियादी ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार का प्रयास है कि गांवों में ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाए, जो लोगों की मौजूदा जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य की चुनौतियों से निपटने में भी सक्षम हो।

मंत्री ने कहा कि पंजाब की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए किसानों को अपनी जमीन का पूरा उपयोग करने में सक्षम बनाना जरूरी है। जलभराव से प्रभावित भूमि को फिर खेती योग्य बनाने से केवल किसानों को ही लाभ नहीं होगा, बल्कि इससे क्षेत्र में कृषि गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

खुइयां सरवर में 412 एकड़ जमीन को राहत मिलने के बाद अब स्थानीय किसानों को आगामी फसल सीजन में अपनी जमीन का बेहतर उपयोग करने की उम्मीद है। लंबे समय से अनुपयोगी या कम उत्पादक रही जमीन के दोबारा खेती के दायरे में आने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलने की संभावना है।

नाकेरिया की 250 एकड़ भूमि के लिए चल रहा प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद इस क्षेत्र में भी इसी तरह के सकारात्मक परिणाम आने की उम्मीद है। दोनों गांवों में कुल 662 एकड़ जलभराव प्रभावित भूमि को राहत मिलने की संभावना इस क्षेत्र के कृषि परिदृश्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सरकार की ओर से इन परियोजनाओं को जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है। खासतौर पर सब-सरफेस ड्रेनेज जैसी तकनीक के इस्तेमाल से समस्या के मूल कारण पर काम करने की कोशिश की गई है। इससे खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी के साथ जमीन को लंबे समय तक कृषि उपयोग के योग्य बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

मंत्री बरिंदर गोयल ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए आगे भी आवश्यक कदम उठाती रहेगी। उन्होंने कहा कि जहां भी जलभराव के कारण किसानों की जमीन प्रभावित हो रही है, वहां परिस्थितियों का अध्ययन कर उपयुक्त तकनीकी समाधान तलाशे जाएंगे।

खुइयां सरवर में परियोजनाओं के पूरा होने और नाकेरिया में काम जारी रहने से फाजिल्का जिले में जल निकासी के बुनियादी ढांचे को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। 7.78 करोड़ रुपये के दो प्रोजेक्टों से 412 एकड़ भूमि को राहत मिलना फिलहाल किसानों के लिए बड़ी उपलब्धि है, जबकि नाकेरिया में 6.91 करोड़ रुपये की परियोजना पूरी होने पर 250 एकड़ अतिरिक्त भूमि को लाभ मिलने की संभावना है।

इस तरह फाजिल्का में जलभराव से प्रभावित कृषि भूमि को वापस खेती के दायरे में लाने की दिशा में सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है। अब इन परियोजनाओं की नियमित निगरानी और रखरखाव यह तय करेगा कि किसानों को लंबे समय तक इसका फायदा मिलता रहे और क्षेत्र में जलभराव की समस्या दोबारा गंभीर रूप न ले।