शहीद सुखदेव थापर के जन्मस्थान की अनदेखी पर भड़का ट्रस्ट, 8वें दिन भी भूख हड़ताल जारी

शहीद सुखदेव थापर के जन्मस्थान की अनदेखी पर भड़का ट्रस्ट, 8वें दिन भी भूख हड़ताल जारी

लुधियाना। शहीद सुखदेव थापर के जन्मस्थान की उपेक्षा और लंबे समय से अधर में लटकी विकास परियोजनाओं को लेकर शहीद सुखदेव थापर मेमोरियल ट्रस्ट का आंदोलन लगातार जारी है। ट्रस्ट की ओर से शुरू की गई भूख हड़ताल बुधवार को आठवें दिन में प्रवेश कर गई। प्रदर्शनकारियों ने पंजाब सरकार और जिला प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले महान क्रांतिकारी के जन्मस्थान को उसका उचित सम्मान और सुविधाएं नहीं मिलना गंभीर चिंता का विषय है।

ट्रस्ट का कहना है कि शहीद सुखदेव थापर के जन्मस्थान से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे वर्षों से लंबित हैं। इनमें जन्मस्थान को चौड़ा बाजार से जोड़ने वाली सड़क का निर्माण प्रमुख मांगों में शामिल है। ट्रस्ट के पदाधिकारियों का आरोप है कि बार-बार मांग उठाए जाने और संबंधित अधिकारियों के समक्ष मामला रखने के बावजूद सड़क निर्माण की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

भूख हड़ताल का उद्देश्य केवल सड़क निर्माण की मांग तक सीमित नहीं है। ट्रस्ट का कहना है कि यह आंदोलन शहीद सुखदेव थापर के जन्मस्थान की गरिमा, संरक्षण और उचित विकास के लिए शुरू किया गया है। ट्रस्ट चाहता है कि जन्मस्थान को ऐसा ऐतिहासिक और स्मारक स्थल विकसित किया जाए, जहां देशभर से आने वाले लोग शहीद के जीवन, संघर्ष और बलिदान के बारे में जान सकें।

बुधवार को भी भूख हड़ताल स्थल पर ट्रस्ट से जुड़े कई सदस्य मौजूद रहे। आंदोलन में अशोक थापर, त्रिभुवन थापर, शिवेंद्र एबॉट, परगट सिंह, जयंत पुरी, अशोक वर्मा, पाली सहजिपाल और प्रमोद थापर सहित अन्य लोग शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि शहीद के जन्मस्थान से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए।

ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष और शहीद सुखदेव थापर के वंशज अशोक थापर ने पंजाब सरकार और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जन्मस्थान को चौड़ा बाजार से जोड़ने वाली सड़क का काम लंबे समय से रुका हुआ है। उनके अनुसार, सरकारी स्तर पर इच्छाशक्ति की कमी और स्थानीय राजनीतिक कारणों के चलते यह परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है।

अशोक थापर ने कहा कि शहीद सुखदेव थापर का जन्मस्थान केवल एक परिवार या किसी संगठन की संपत्ति नहीं, बल्कि पूरे देश की ऐतिहासिक विरासत है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों से जुड़े स्थलों को संरक्षित करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे स्थानों के विकास में देरी से शहीदों के योगदान के प्रति सम्मान की भावना प्रभावित होती है।

उन्होंने कहा कि ट्रस्ट लंबे समय से संबंधित मांगों को लेकर सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करता रहा है। इसके बावजूद यदि समस्याओं का समाधान नहीं होता तो आंदोलन को आगे बढ़ाने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचेगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह प्रदर्शनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करे और लंबित कार्यों को जल्द पूरा करवाए।

अशोक थापर ने लुधियाना रेलवे स्टेशन का नाम शहीद सुखदेव थापर के नाम पर रखने के मामले में हो रही देरी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि शहीद के नाम को सम्मान देने से जुड़ी इस मांग को लंबे समय से उठाया जा रहा है, लेकिन अभी तक अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं दे रही। उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशन जैसे प्रमुख सार्वजनिक स्थल का नाम शहीद के नाम पर रखा जाना उनके बलिदान के प्रति सम्मान का प्रतीक होगा।

ट्रस्ट का कहना है कि लुधियाना का शहीद सुखदेव थापर से गहरा ऐतिहासिक संबंध है। ऐसे में शहर के प्रमुख स्थलों और शहीद के जन्मस्थान को उनकी स्मृति से जोड़ने की मांग स्वाभाविक है। संगठन चाहता है कि सरकार केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित न रहे, बल्कि शहीद के जन्मस्थान और उनसे जुड़े ऐतिहासिक स्थलों के विकास के लिए ठोस कदम उठाए।

भूख हड़ताल के आठ दिन पूरे होने के बावजूद सरकार और जिला प्रशासन की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर ट्रस्ट के सदस्यों में नाराजगी बढ़ रही है। आंदोलनकारियों का कहना है कि इतने दिनों से चल रहे शांतिपूर्ण विरोध के बावजूद यदि प्रशासन की ओर से बातचीत या समाधान की ठोस पहल नहीं होती है तो यह चिंता का विषय है।

अशोक थापर ने चेतावनी दी कि यदि पंजाब सरकार और जिला प्रशासन ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो ट्रस्ट आंदोलन को और व्यापक कर सकता है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर आमरण अनशन जैसे कठोर कदम पर भी विचार किया जाएगा। हालांकि ट्रस्ट की प्राथमिकता फिलहाल शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक अपनी बात पहुंचाने और लंबित मांगों का समाधान कराने की है।

उन्होंने कहा कि ट्रस्ट किसी राजनीतिक विवाद को जन्म देने के उद्देश्य से आंदोलन नहीं कर रहा है। उनका कहना है कि संघर्ष का मुख्य उद्देश्य शहीद सुखदेव थापर की विरासत को सम्मान दिलाना और उनके जन्मस्थान को बेहतर सुविधाओं से जोड़ना है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इसे राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय शहीद के सम्मान से जुड़े विषय के रूप में लिया जाए।

भूख हड़ताल को सामाजिक संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है। जागृति सेना के प्रमुख प्रवीण डांग और भूपिंदर पाल बागा ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर ट्रस्ट के संघर्ष को अपना समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि शहीदों की विरासत से जुड़े मुद्दों पर समाज को भी अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए।

प्रवीण डांग और भूपिंदर पाल बागा ने कहा कि आठ दिनों से भूख हड़ताल जारी रहने के बावजूद सरकारी तंत्र की चुप्पी उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि आंदोलनकारियों के साथ बातचीत की जाए और उनकी मांगों को लेकर स्पष्ट निर्णय लिया जाए। उन्होंने कहा कि शहीद सुखदेव थापर जैसे स्वतंत्रता सेनानी की स्मृति से जुड़े मामलों को लंबित रखना समाज के लिए भी चिंता का विषय है।

समर्थन देने पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि शहीदों के जन्मस्थल और स्मारकों का संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जोड़ने के लिए ऐसे स्थानों का विकास आवश्यक है। यदि ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंचने के लिए बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी तो देशभर से आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

ट्रस्ट की मुख्य मांगों में जन्मस्थान को चौड़ा बाजार से जोड़ने वाली सड़क का निर्माण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। संगठन का कहना है कि सड़क बनने से जन्मस्थान तक पहुंच आसान होगी और पर्यटकों, श्रद्धालुओं तथा इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों को सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही क्षेत्र के विकास से स्थानीय स्तर पर भी गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

ट्रस्ट का मानना है कि शहीद सुखदेव थापर के जन्मस्थान को एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसके लिए बेहतर सड़क संपर्क, साफ-सफाई, पार्किंग, सूचना केंद्र और अन्य आवश्यक सुविधाओं की जरूरत है। संगठन चाहता है कि सरकार इस दिशा में दीर्घकालिक योजना तैयार करे ताकि जन्मस्थान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके।

अशोक थापर ने कहा कि शहीदों की स्मृति केवल जयंती या शहीदी दिवस पर होने वाले कार्यक्रमों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार, वास्तविक सम्मान तब होगा जब उनके जन्मस्थलों और स्मारकों का संरक्षण किया जाए तथा वहां आने वाली नई पीढ़ी को उनके जीवन और विचारों से परिचित कराया जाए।

उन्होंने कहा कि शहीद सुखदेव थापर ने भगत सिंह और राजगुरु के साथ देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन बलिदान किया। ऐसे क्रांतिकारियों की स्मृति को जीवित रखना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है। ट्रस्ट इसी उद्देश्य से लगातार काम कर रहा है और अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहा है।

भूख हड़ताल के आठवें दिन आंदोलनकारियों ने एक बार फिर सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। ट्रस्ट का कहना है कि यदि प्रशासन बातचीत के लिए आगे आता है तो वह अपनी मांगों और उनसे जुड़े दस्तावेजों के साथ विस्तार से चर्चा करने को तैयार है। संगठन चाहता है कि लंबित परियोजनाओं के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए और उसकी प्रगति की नियमित निगरानी हो।

फिलहाल आंदोलनकारियों की निगाहें पंजाब सरकार और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर हैं। आठ दिनों से जारी भूख हड़ताल के बाद ट्रस्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। आमरण अनशन की चेतावनी ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

लुधियाना में शहीद सुखदेव थापर के जन्मस्थान से जुड़ा यह विवाद अब केवल स्थानीय विकास का विषय नहीं रह गया है। यह शहीदों की विरासत, ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और सरकार की जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। ट्रस्ट और समर्थक संगठनों की मांग है कि सरकार जल्द संवाद शुरू करे और वर्षों से लंबित सड़क समेत अन्य विकास कार्यों को गति दे।

अब देखना होगा कि आठवें दिन तक जारी भूख हड़ताल के बाद प्रशासन आंदोलनकारियों से बातचीत करता है या नहीं। फिलहाल ट्रस्ट ने अपने रुख में नरमी के संकेत नहीं दिए हैं और साफ कर दिया है कि शहीद सुखदेव थापर के जन्मस्थान की उपेक्षा के खिलाफ उसका संघर्ष मांगें पूरी होने तक जारी रह सकता है।