लुधियाना में नकली सप्लीमेंट्स पर शिकंजा, हेल्थ विभाग के छापे में बड़ी मात्रा में पैकिंग सामग्री और न्यूट्रिशन प्रोडक्ट जब्त

लुधियाना में नकली सप्लीमेंट्स पर शिकंजा, हेल्थ विभाग के छापे में बड़ी मात्रा में पैकिंग सामग्री और न्यूट्रिशन प्रोडक्ट जब्त

लुधियाना में नकली और संदिग्ध स्वास्थ्य सप्लीमेंट्स के कारोबार पर नकेल कसने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। जिले की फूड सेफ्टी टीम ने तिब्बा रोड स्थित एक सप्लीमेंट स्टोर पर अचानक छापेमारी कर भारी मात्रा में संदिग्ध पैकिंग सामग्री, न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट्स और आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग एजेंट जब्त किए हैं। विभाग का मानना है कि बरामद सामग्री का इस्तेमाल मिसब्रांडेड अथवा नकली उत्पाद तैयार कर बाजार में बेचने के लिए किया जा सकता था। फिलहाल पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है और जब्त किए गए उत्पादों के नमूने प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई जिले में चलाए जा रहे विशेष प्रवर्तन अभियान का हिस्सा है। विभाग लगातार उन कारोबारियों पर नजर रख रहा है जो बिना निर्धारित मानकों का पालन किए खाद्य एवं स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों का व्यापार कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

छापेमारी के दौरान फूड सेफ्टी अधिकारियों को स्टोर से लगभग 75 किलोग्राम आयातित खाली रैपर मिले। यह रैपर विभिन्न ब्रांडों के न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट्स की पैकेजिंग में उपयोग किए जाने वाले बताए जा रहे हैं। विभाग को आशंका है कि इन खाली रैपरों का उपयोग नकली या घटिया गुणवत्ता वाले सप्लीमेंट्स को असली ब्रांड के नाम से दोबारा पैक कर बाजार में बेचने के लिए किया जा सकता था। इसी कारण पूरी खेप को मौके पर ही जब्त कर लिया गया।

जांच के दौरान टीम ने लगभग 100 किलोग्राम न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट्स भी कब्जे में लिए। अधिकारियों ने बताया कि इन उत्पादों की गुणवत्ता, निर्माण प्रक्रिया और वैधानिक दस्तावेजों की जांच की जाएगी। यदि इनमें किसी प्रकार की अनियमितता या खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित कारोबारी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

कार्रवाई के दौरान स्टोर परिसर में 36 डिब्बे आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग एजेंट भी पाए गए। विभाग के अनुसार इन फ्लेवरिंग एजेंटों के उपयोग और स्रोत की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि इनका इस्तेमाल बिना अनुमति अथवा निर्धारित मानकों के विपरीत किया गया है तो यह गंभीर कानूनी उल्लंघन माना जाएगा। इसलिए इन्हें भी जब्त कर आगे की जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।

फूड सेफ्टी टीम ने मौके से चार अलग-अलग प्रकार के स्वास्थ्य सप्लीमेंट्स के नमूने भी एकत्र किए हैं। इनमें वेट गेनर, आइसोप्योर व्हे प्रोटीन, व्हे प्रोटीन और अल्ट्रा प्योर व्हे फॉर्मूला शामिल हैं। इन नमूनों को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया है, जहां इनके पोषण स्तर, गुणवत्ता, शुद्धता तथा लेबल पर दी गई जानकारी की सत्यता की जांच की जाएगी। प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उत्पाद निर्धारित मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य सप्लीमेंट्स का बाजार तेजी से बढ़ा है। जिम जाने वाले युवाओं, खिलाड़ियों और फिटनेस के प्रति जागरूक लोगों के बीच प्रोटीन पाउडर, वेट गेनर और अन्य न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी बढ़ती मांग का फायदा उठाकर कुछ लोग नकली, मिसब्रांडेड अथवा घटिया गुणवत्ता वाले उत्पाद बाजार में उतारने की कोशिश करते हैं, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आशीष चावला ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं बल्कि लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा स्वास्थ्य सप्लीमेंट्स के निर्माण, पैकेजिंग, भंडारण और बिक्री के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं। इन नियमों का पालन प्रत्येक फूड बिजनेस ऑपरेटर के लिए अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि बाजार में बिकने वाले प्रत्येक स्वास्थ्य सप्लीमेंट पर वैध एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर, बैच नंबर, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि, उत्पाद की सामग्री, पोषण संबंधी जानकारी और आवश्यक होने पर आयातकर्ता का पूरा विवरण अंकित होना चाहिए। यदि किसी उत्पाद पर यह जानकारी उपलब्ध नहीं है या उसमें किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है तो उपभोक्ताओं को ऐसे उत्पाद खरीदने से बचना चाहिए।

डॉ. चावला ने स्पष्ट किया कि आयातित खाली रैपरों का अवैध रूप से संग्रह करना अथवा उनका उपयोग कर नकली उत्पाद तैयार करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में न केवल आर्थिक धोखाधड़ी होती है बल्कि लोगों के स्वास्थ्य को भी खतरा पैदा होता है। उन्होंने कहा कि नकली सप्लीमेंट्स में घटिया गुणवत्ता के रसायन या असुरक्षित पदार्थ मिलाए जाने की संभावना रहती है, जिससे किडनी, लिवर और अन्य अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि विभाग लगातार ऐसे कारोबारियों की पहचान कर रहा है जो नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। भविष्य में भी जिले के विभिन्न इलाकों में बिना पूर्व सूचना के औचक निरीक्षण किए जाएंगे ताकि खाद्य सुरक्षा कानूनों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित किया जा सके। यदि किसी प्रतिष्ठान में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों का उल्लंघन पाया गया तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग ने यह भी बताया कि जांच केवल जब्त किए गए उत्पादों तक सीमित नहीं रहेगी। अधिकारियों द्वारा यह भी पता लगाया जाएगा कि बरामद पैकिंग सामग्री और सप्लीमेंट्स की आपूर्ति कहां से हुई, उनका वितरण किन-किन स्थानों पर किया गया और क्या इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल हैं। जरूरत पड़ने पर जांच का दायरा बढ़ाया जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि नकली स्वास्थ्य सप्लीमेंट्स का सेवन करने से शरीर को अपेक्षित पोषण नहीं मिलता, बल्कि कई बार इनमें मौजूद हानिकारक तत्व गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इसलिए केवल प्रमाणित और लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही उत्पाद खरीदने चाहिए। ऑनलाइन या ऑफलाइन खरीदारी के दौरान भी उत्पाद की पैकेजिंग, सील, लेबल और एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर की जांच करना जरूरी है।

स्वास्थ्य विभाग ने फिटनेस प्रेमियों, खिलाड़ियों और जिम संचालकों से भी अपील की है कि वे सस्ते या बिना बिल वाले सप्लीमेंट्स खरीदने से बचें। किसी भी उत्पाद की खरीद के समय अधिकृत बिल अवश्य लें ताकि आवश्यकता पड़ने पर उसकी ट्रेसिंग की जा सके। यदि किसी उत्पाद की गुणवत्ता पर संदेह हो तो उसकी सूचना तुरंत स्वास्थ्य विभाग या संबंधित अधिकारियों को दें।

अधिकारियों ने कहा कि खाद्य सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि उपभोक्ताओं, व्यापारियों और निर्माताओं की भी साझा जिम्मेदारी है। यदि सभी संबंधित पक्ष नियमों का पालन करेंगे तो बाजार में सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य एवं स्वास्थ्य उत्पाद उपलब्ध कराए जा सकेंगे।

स्वास्थ्य विभाग ने दोहराया कि जनस्वास्थ्य की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मिलावटी, नकली या मिसब्रांडेड खाद्य एवं स्वास्थ्य उत्पादों के कारोबार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले समय में जिले भर में ऐसे विशेष अभियान लगातार जारी रहेंगे ताकि लोगों तक केवल सुरक्षित और मानक गुणवत्ता वाले उत्पाद ही पहुंच सकें।