राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण और पुराने वाणिज्यिक वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए हरियाणा सरकार ने अब सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। राज्य के एनसीआर क्षेत्र में आने वाले जिलों में पुराने ट्रकों और बसों को चरणबद्ध तरीके से सड़क से हटाने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। इसके तहत बीएस-1, बीएस-2, बीएस-3 और संबंधित पुरानी श्रेणियों के वाहनों के मालिकों को नोटिस जारी किए जाएंगे। वाहन मालिकों को तय समयसीमा के भीतर अपने पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने या नियमों के अनुरूप उन्हें बदलने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
इस संबंध में शुक्रवार को मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में परिवहन विभाग की ओर से लागू की जा रही ‘परिवर्तन योजना’ के तहत एनसीआर में पुराने वाणिज्यिक वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की अब तक की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में अधिकारियों ने योजना के तहत चिन्हित वाहनों, वाहन मालिकों को दिए जाने वाले विकल्प और नई गाड़ियों की खरीद पर उपलब्ध प्रोत्साहनों को लेकर भी जानकारी दी।
सरकार ने साफ किया है कि एनसीआर में निर्धारित उत्सर्जन मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले पुराने वाणिज्यिक वाहनों को लंबे समय तक सड़क पर चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। संबंधित वाहन मालिकों को नियमों के अनुसार पुराने वाहनों का निपटान करना होगा। बीएस-1, बीएस-2, बीएस-3 और इससे पुरानी श्रेणी के वाहनों को अधिकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्रों में जाकर स्क्रैप करवाना होगा।
पात्र बीएस-4 श्रेणी के वाहनों के मालिकों को भी निर्धारित नियमों के तहत वाहन स्क्रैप कराने का विकल्प दिया जाएगा। इसके अलावा ऐसे वाहनों को एनसीआर से बाहर किसी गैर-एनसीएपी शहर या क्षेत्र में बेचने की अनुमति दी जा सकती है। पुराने वाहन के स्थान पर अधिक कड़े उत्सर्जन मानकों वाले नए वाहन अथवा इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने का विकल्प भी वाहन मालिकों के पास रहेगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि योजना का पालन नहीं करने वाले वाहन मालिकों के खिलाफ प्रवर्तन कार्रवाई की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को जब्त किया जा सकता है और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें अधिकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्रों तक भेजा जाएगा। इससे सरकार ने संकेत दिया है कि इस बार पुराने वाणिज्यिक वाहनों को हटाने की प्रक्रिया केवल नोटिस जारी करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नियमों के पालन के लिए सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।
परिवहन विभाग के आयुक्त एवं सचिव अतुल कुमार ने बैठक में योजना से जुड़े आंकड़े साझा करते हुए बताया कि परिवहन परिवर्तन पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार राज्य में कुल 96,441 लक्षित वाणिज्यिक वाहन चिन्हित किए गए हैं। इनमें 81,079 ट्रक और 15,362 बसें शामिल हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पुराने वाणिज्यिक वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की प्रक्रिया बड़े स्तर पर लागू की जानी है।
जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा लक्षित वाहन गुरुग्राम में चिन्हित किए गए हैं। यहां कुल 24,032 पुराने वाणिज्यिक वाहन योजना के दायरे में आते हैं। इसके बाद फरीदाबाद में 18,141 वाहन चिन्हित किए गए हैं। इसके अलावा जींद, रेवाड़ी, सोनीपत, झज्जर, करनाल, पानीपत और रोहतक समेत कई अन्य जिलों में भी बड़ी संख्या में पुराने वाणिज्यिक वाहनों की पहचान की गई है।
सरकार की योजना केवल पुराने वाहनों को हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वाहन मालिकों को नए और कम प्रदूषण वाले वाहनों की ओर स्थानांतरित करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन भी दिए जा रहे हैं। योजना के तहत पात्र वाहन मालिक यदि नया बीएस-4 मानक वाला या इलेक्ट्रिक वाहन खरीदते हैं तो उन्हें मोटर वाहन कर में बड़ी राहत मिलेगी।
जानकारी के मुताबिक पात्र इलेक्ट्रिक या निर्धारित नई श्रेणी के वाहन खरीदने वाले वाहन मालिकों को 10 साल की अवधि के लिए मोटर वाहन कर में 100 प्रतिशत छूट देने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य पुराने डीजल वाहनों के स्थान पर कम उत्सर्जन वाले और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर विकल्पों को बढ़ावा देना है।
पुराने वाहन को बदलकर पात्र पुराना वाहन खरीदने वाले वाहन मालिकों के लिए भी राहत का प्रावधान किया गया है। ऐसे मामलों में मोटर वाहन कर में 50 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। इसके अलावा योजना के तहत नए वाहन के पंजीकरण पर लगने वाला शुल्क भी पूरी तरह माफ करने का प्रावधान रखा गया है।
सरकार ने वाहन मालिकों पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए वाहन ऋण को लेकर भी प्रोत्साहन देने की व्यवस्था की है। पात्र मामलों में वाहन खरीदने के लिए लिए गए ऋण पर 5 प्रतिशत तक की ब्याज सहायता का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा एक वर्ष से अधिक समय से लंबित देनदारियों को लेकर भी राहत की व्यवस्था योजना में शामिल की गई है।
वाहन निर्माताओं को भी इस प्रक्रिया में भागीदार बनाया गया है। योजना में शामिल वाहन निर्माता नए वाहन खरीदने वाले पात्र ग्राहकों को अपनी ओर से 8 प्रतिशत तक की अतिरिक्त छूट दे सकते हैं। सरकार का मानना है कि टैक्स में राहत, पंजीकरण शुल्क की माफी, ब्याज सहायता और निर्माताओं की छूट जैसे प्रोत्साहनों से पुराने वाहन मालिकों को नए वाहन अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा।
हरियाणा में पुराने वाहनों को स्क्रैप करने के लिए आधारभूत ढांचा भी तैयार किया गया है। राज्य में फिलहाल 26 अधिकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से पुराने और नियमों के दायरे में आने वाले वाहनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत स्क्रैप किया जा सकेगा। सरकार ने वाहन मालिकों से केवल अधिकृत केंद्रों का इस्तेमाल करने की अपील की है।
परिवहन परिवर्तन पोर्टल पर अब तक 314 वाहनों के पंजीकरण की जानकारी प्राप्त हो चुकी है। हालांकि कुल 96,441 लक्षित वाहनों की तुलना में यह संख्या काफी कम है। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अधिक से अधिक वाहन मालिकों को योजना के दायरे में लाना और उन्हें निर्धारित समयसीमा के भीतर पुराने वाहनों के निपटान के लिए प्रेरित करना होगी।
एनसीआर में पुराने डीजल वाहनों को लेकर लंबे समय से प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में सख्ती की जाती रही है। हरियाणा के गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी के आसपास होने के कारण प्रदूषण नियंत्रण की नीतियों के लिहाज से विशेष महत्व रखते हैं। इन इलाकों में बड़ी संख्या में व्यावसायिक और मालवाहक वाहन चलते हैं। ऐसे में पुराने वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
पुराने वाणिज्यिक वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की नीति का सीधा असर ट्रांसपोर्टरों, बस संचालकों और छोटे-बड़े कारोबारी वाहन मालिकों पर पड़ेगा। कई वाहन मालिकों के लिए पुराने वाहन को स्क्रैप कर नया वाहन खरीदना एक बड़ा आर्थिक निर्णय हो सकता है। इसी वजह से सरकार ने योजना में टैक्स छूट, पंजीकरण शुल्क माफी और ब्याज सहायता जैसे प्रावधान शामिल किए हैं, ताकि वाहन बदलने की प्रक्रिया उनके लिए अपेक्षाकृत आसान हो सके।
सरकार का मानना है कि यदि पुराने वाहनों को नए और कम उत्सर्जन वाले वाहनों से बदला जाता है तो एनसीआर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने से भविष्य में परिवहन क्षेत्र में स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाने का रास्ता भी तैयार होगा।
बैठक में अधिकारियों को योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। अब संबंधित जिलों में लक्षित वाहन मालिकों की पहचान के आधार पर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। वाहन मालिकों को अपने पुराने वाहनों के संबंध में उपलब्ध विकल्पों और निर्धारित प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी।
सरकार की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि नियमों का पालन नहीं करने वाले वाहन मालिकों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। निर्धारित अवधि के बाद नियमों के उल्लंघन में पाए जाने वाले वाहनों पर कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर वाहनों को जब्त कर अधिकृत स्क्रैपिंग केंद्रों में भेजा जा सकता है।
कुल मिलाकर हरियाणा सरकार की ‘परिवर्तन योजना’ एनसीआर में पुराने वाणिज्यिक वाहनों के बड़े पैमाने पर नवीनीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। एक तरफ सरकार प्रदूषण फैलाने वाले पुराने ट्रकों और बसों को हटाने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर वाहन मालिकों को नए और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। अब इस योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि चिन्हित 96,441 वाहनों में से कितने वाहन निर्धारित समय में स्क्रैप या रिप्लेस किए जाते हैं और प्रवर्तन एजेंसियां नियमों को जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू कर पाती हैं।




