हरियाणा सरकार की निवेश आकर्षित करने की मुहिम को मुंबई में आयोजित ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ के अंतरराष्ट्रीय आउटरीच अभियान के दौरान बड़ी सफलता मिली है। अभियान के दूसरे दिन करीब 20 कंपनियों ने राज्य में निवेश के लिए समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इन प्रस्तावित निवेशों में सबसे बड़ा करार गोदरेज ग्रुप के साथ हुआ है, जिसने औद्योगिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में करीब 20,000 करोड़ रुपये निवेश करने का प्रस्ताव दिया है।
मुंबई में आयोजित इस निवेश अभियान के दौरान देश और विदेश की प्रमुख कंपनियों ने हरियाणा में अलग-अलग क्षेत्रों में कारोबार विस्तार और नई परियोजनाएं स्थापित करने में रुचि दिखाई। सरकार के अनुसार इन निवेश प्रस्तावों से राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
निवेश प्रस्तावों में गोदरेज ग्रुप सबसे आगे रहा। कंपनी ने औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में 20,000 करोड़ रुपये के निवेश को लेकर एमओयू किया है। अधिकारियों के मुताबिक गोदरेज पहले ही हरियाणा में करीब 12,000 करोड़ रुपये का निवेश कर चुका है। अब कंपनी अगले पांच वर्षों के दौरान राज्य में लगभग 20,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त निवेश करने की योजना बना रही है।
डेटा सेंटर के क्षेत्र में भी हरियाणा को बड़ी निवेश प्रतिबद्धताएं मिली हैं। वारी एनर्जीज लिमिटेड और आवाडा ग्रुप ने राज्य में 10-10 हजार करोड़ रुपये निवेश करने के लिए समझौता किया है। दोनों कंपनियों का निवेश डेटा सेंटर क्षेत्र में प्रस्तावित है। डिजिटल अर्थव्यवस्था और क्लाउड आधारित सेवाओं के बढ़ते विस्तार के बीच डेटा सेंटर उद्योग को भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में माना जा रहा है।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर यानी जीसीसी क्षेत्र में भी हरियाणा को बड़ा निवेश मिलने की संभावना है। बर्कलेज ने इस क्षेत्र में करीब 8,200 करोड़ रुपये निवेश करने का प्रस्ताव दिया है। जीसीसी के विस्तार से राज्य में वित्तीय सेवाओं, तकनीक, रिसर्च, आईटी और अन्य उच्च कौशल वाले क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
निवेश प्रस्तावों की सूची में नारेडको ने 6,600 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। इसके अलावा बॉक्सएलएनजी 6,000 करोड़ रुपये, प्रोलोगिस 1,500 करोड़ रुपये और एलएंडटी 1,000 करोड़ रुपये निवेश करेगी। इन कंपनियों के साथ भी राज्य सरकार ने एमओयू किए हैं।
मुंबई आउटरीच कार्यक्रम के दौरान कई अन्य कंपनियों ने भी हरियाणा में निवेश को लेकर रुचि दिखाई। अल्ट्राटेक ने 650 करोड़ रुपये, स्पेक्ट्रा टेक्नोलॉजीज ने 600 करोड़ रुपये, ओपी मोबिलिटी ने 500 करोड़ रुपये, प्रूडेंशियल ने 458 करोड़ रुपये और मालपानी ग्रुप ने 400 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव दिए हैं।
इसके अलावा लाइफवर्क्स सॉल्यूशंस ने 353 करोड़ रुपये, कोंग्सबर्ग ऑटोमोटिव ने 160 करोड़ रुपये, स्कलार ने 150 करोड़ रुपये और सिवेंट ने 100 करोड़ रुपये के निवेश के लिए सरकार के साथ समझौते किए हैं।
इन प्रस्तावों से स्पष्ट है कि हरियाणा में निवेशकों की रुचि केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है। औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर जैसे नए और तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में भी कंपनियां राज्य को निवेश के लिए उपयुक्त गंतव्य मान रही हैं।
हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि गोदरेज ग्रुप पहले ही राज्य में लगभग 12,000 करोड़ रुपये निवेश कर चुका है। अब कंपनी ने अगले पांच वर्षों में करीब 20,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने कहा कि यह निवेश राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति देने वाला साबित हो सकता है।
सरकार की ओर से आयोजित ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ अभियान का उद्देश्य राज्य में बड़े निवेशकों को आकर्षित करना और हरियाणा को उद्योगों के लिए पसंदीदा निवेश स्थल के रूप में स्थापित करना है। मुंबई में आयोजित आउटरीच कार्यक्रम इसी अभियान का हिस्सा है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर राज्य की औद्योगिक क्षमताओं, नीतियों और उपलब्ध बुनियादी ढांचे की जानकारी साझा की जा रही है।
सरकार का फोकस ऐसे निवेश को आकर्षित करने पर है, जिससे हरियाणा की अर्थव्यवस्था को गति मिले और राज्य में नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित हों। डेटा सेंटर और जीसीसी जैसे क्षेत्रों में निवेश आने से हाई-स्किल नौकरियों के अवसर बढ़ने की उम्मीद है, जबकि औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स से जुड़े निवेश से राज्य के कारोबारी नेटवर्क को मजबूती मिल सकती है।
हरियाणा पहले से ही देश के प्रमुख औद्योगिक और ऑटोमोबाइल केंद्रों में शामिल है। दिल्ली-एनसीआर से निकटता, बेहतर सड़क और परिवहन नेटवर्क तथा बड़े औद्योगिक क्षेत्रों के कारण राज्य निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण स्थान रखता है। सरकार अब नई औद्योगिक गतिविधियों के साथ-साथ तकनीक आधारित उद्योगों और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
मुंबई में हुए समझौते इसी रणनीति का हिस्सा हैं। निवेश प्रस्तावों में अलग-अलग सेक्टर की कंपनियों की भागीदारी से यह संकेत मिलता है कि राज्य में निवेश के लिए विविध क्षेत्रों में संभावनाएं मौजूद हैं। बड़े समूहों से लेकर तकनीक और ऑटोमोबाइल क्षेत्र की कंपनियों तक ने हरियाणा में विस्तार की इच्छा जताई है।
गोदरेज समूह के प्रस्ताव को विशेष महत्व इसलिए दिया जा रहा है क्योंकि कंपनी पहले से हरियाणा में मौजूद है और अब बड़े पैमाने पर अतिरिक्त निवेश की योजना बना रही है। इससे राज्य में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ सप्लाई चेन, निर्माण, लॉजिस्टिक्स और सहायक उद्योगों को भी फायदा मिलने की संभावना है।
वहीं, वारी एनर्जीज और आवाडा ग्रुप के डेटा सेंटर निवेश प्रस्ताव हरियाणा की डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। डेटा की बढ़ती मांग के बीच बड़े डेटा सेंटरों के लिए विश्वसनीय बिजली, कनेक्टिविटी और औद्योगिक भूमि की जरूरत होती है। हरियाणा इन क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
बर्कलेज का 8,200 करोड़ रुपये का जीसीसी निवेश प्रस्ताव भी राज्य के लिए महत्वपूर्ण है। ग्लोबल कंपनियां भारत में अपने तकनीकी, वित्तीय और बैक-ऑफिस संचालन के लिए जीसीसी स्थापित कर रही हैं। ऐसे केंद्र उच्च कौशल वाले युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर पैदा कर सकते हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकते हैं।
सरकार के अनुसार निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने के लिए एमओयू के बाद संबंधित विभागों के स्तर पर आवश्यक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। निवेशकों को मंजूरी, भूमि, बुनियादी ढांचे और अन्य जरूरी सुविधाओं से संबंधित प्रक्रियाओं में सहयोग उपलब्ध करवाने पर जोर रहेगा।
‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ के तहत राज्य सरकार का प्रयास केवल निवेश प्रस्ताव हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इन प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलना भी प्रमुख लक्ष्य है। सरकार चाहती है कि निवेश के साथ राज्य में उत्पादन, सेवाओं, रोजगार और राजस्व के नए स्रोत विकसित हों।
मुंबई कार्यक्रम के दौरान हुए समझौते इस लिहाज से महत्वपूर्ण हैं कि इनमें बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश के साथ भविष्य के उद्योगों पर भी ध्यान दिया गया है। औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर, जीसीसी, लॉजिस्टिक्स और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में प्रस्तावित परियोजनाएं हरियाणा की अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती हैं।
राज्य सरकार को उम्मीद है कि इन निवेश प्रस्तावों के अमल में आने से न केवल बड़े उद्योगों को फायदा होगा, बल्कि छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए भी कारोबारी अवसर बढ़ेंगे। बड़ी परियोजनाओं के आसपास सप्लायर, सेवा प्रदाता और सहायक इकाइयों का नेटवर्क विकसित होने से स्थानीय उद्यमियों को भी लाभ मिल सकता है।
मुंबई में हुए एमओयू से हरियाणा सरकार को अपनी निवेश रणनीति को आगे बढ़ाने के लिए नया प्रोत्साहन मिला है। अब सरकार के सामने इन निवेश प्रस्तावों को समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारने की चुनौती होगी। यदि प्रस्तावित परियोजनाएं निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ती हैं तो हरियाणा में औद्योगिक विस्तार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।




