हिमाचल के सरकारी स्कूलों में नई शिक्षा नीति पर जोर, 147 सीबीएसई स्कूलों में सितंबर तक पूरी होगी शिक्षक भर्ती

हिमाचल के सरकारी स्कूलों में नई शिक्षा नीति पर जोर, 147 सीबीएसई स्कूलों में सितंबर तक पूरी होगी शिक्षक भर्ती

शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए सीबीएसई पैटर्न को प्रमुखता देने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधानसभा में कहा कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध राज्य के 147 सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया 30 सितंबर तक पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षा या चयन प्रक्रिया का परिणाम घोषित होने के बाद सरकार नियुक्तियों में अनावश्यक देरी नहीं करेगी और अगले ही दिन चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की व्यवस्था की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने सीबीएसई से जुड़े सरकारी स्कूलों में तकनीकी सुविधाओं को बढ़ाने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में आधुनिक कंप्यूटर लैब स्थापित करने के लिए सरकार 80 करोड़ रुपये का बजट उपलब्ध करवाएगी। सरकार का मानना है कि डिजिटल शिक्षा और आधुनिक तकनीक विद्यार्थियों को बदलते शैक्षणिक एवं रोजगारपरक वातावरण के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगी।

विधानसभा में भाजपा विधायकों सुधीर शर्मा, रणधीर शर्मा, डॉ. जनक राज, विपिन सिंह परमार और राकेश जम्वाल द्वारा पूछे गए संयुक्त सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने के फैसले का शुरुआती असर विद्यार्थियों के दाखिलों में दिखाई देने लगा है। उनके मुताबिक, सीबीएसई संबद्धता के बाद सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में करीब 24 हजार की वृद्धि हुई है।

सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य हिमाचल प्रदेश को देश के उन राज्यों में शामिल करना है, जहां स्कूली शिक्षा का स्तर सर्वोत्तम माना जाए। सरकार अगले पांच वर्षों में हिमाचल को उत्कृष्ट स्कूली शिक्षा प्रदान करने वाले राज्यों की अग्रणी श्रेणी में लाने की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इसके लिए स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के साथ शिक्षकों की उपलब्धता, डिजिटल संसाधन और बेहतर शैक्षणिक वातावरण पर भी जोर दिया जा रहा है।

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने सदन में बताया कि सीबीएसई से संबद्ध सरकारी स्कूलों में शिक्षक पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार ने इन स्कूलों के लिए करीब छह हजार पद भरने की मंजूरी दी है। इन पदों को नियमित भर्ती, योजना आधारित नियुक्तियों और अन्य माध्यमों से भरे जाने की प्रक्रिया चल रही है।

शिक्षा मंत्री के अनुसार, वर्तमान में सीबीएसई से जुड़े सरकारी स्कूलों में 3,830 शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि 28 श्रेणियों के 2,183 पद अभी खाली हैं। सरकार की योजना के तहत 1,359 पद आउटसोर्स आधार पर और 3,319 पद योजना आधारित व्यवस्था के माध्यम से भरे जा रहे हैं। योजना के तहत नियुक्त होने वाले शिक्षकों को प्रतिमाह 30 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा।

रोहित ठाकुर ने बताया कि इन शिक्षकों को शैक्षणिक सत्र के दौरान 10 महीने का वेतन मिलेगा। फिलहाल इन शिक्षकों को नियमित सरकारी कर्मचारी बनाने की कोई नीति निर्धारित नहीं है। हालांकि, भविष्य में इस संबंध में नीति तैयार करने या विचार करने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सीबीएसई से संबद्ध सरकारी स्कूलों की संख्या को और बढ़ाने की योजना पर भी काम कर रही है। आने वाले समय में 100 और सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने का प्रस्ताव है। सरकार का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रम और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध करवाना है।

सरकार ने सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की घटती संख्या को भी सीबीएसई पैटर्न अपनाने की प्रमुख वजहों में शामिल किया है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि पिछले 15 वर्षों के दौरान हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों का पंजीकरण करीब चार लाख तक कम हुआ है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजना पसंद कर रहे हैं और इसी चुनौती से निपटने के लिए सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर और पैटर्न बदलने की आवश्यकता महसूस हुई।

शिक्षा मंत्री के अनुसार, सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू करने से सरकारी स्कूलों को राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्रणाली से जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे विद्यार्थियों को आगे चलकर राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं और अन्य प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में बेहतर तैयारी का अवसर मिल सकता है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी वही शैक्षणिक अवसर मिलना चाहिए जो निजी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को उपलब्ध हैं।

रोहित ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था और स्कूल शिक्षा बोर्ड का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड देश के बेहतर शिक्षा बोर्डों में शामिल है। उनके मुताबिक, हिमाचल के साथ गोवा शिक्षा बोर्ड को भी देश के मॉडल बोर्डों में गिना जाता है। उन्होंने कहा कि सीबीएसई से संबद्धता का उद्देश्य राज्य बोर्ड की क्षमता पर सवाल उठाना नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के अतिरिक्त और व्यापक अवसर तैयार करना है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि सीबीएसई से जुड़े स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली परीक्षाओं और प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन के लिए अनुकूल वातावरण मिलेगा। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि सीबीएसई पैटर्न में बदलाव के शुरुआती चरण में स्कूलों और शिक्षकों को कुछ व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार इन समस्याओं को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है और जल्द ही स्थिति को व्यवस्थित करने का दावा किया गया है।

सरकार ने सदन में सरकारी स्कूलों के विलय और बंद किए जाने से संबंधित आंकड़े भी साझा किए। शिक्षा विभाग के अनुसार, पिछले करीब पौने चार वर्षों में राज्य में 1,526 स्कूलों को बंद या दूसरे स्कूलों में विलय किया गया है। इनमें 885 स्कूल ऐसे थे, जहां एक भी विद्यार्थी का नामांकन नहीं था। इसके अलावा 641 स्कूलों में पांच से कम विद्यार्थी पढ़ रहे थे।

सरकार का तर्क है कि बहुत कम या शून्य नामांकन वाले स्कूलों को लंबे समय तक अलग-अलग संचालित करने से संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल नहीं हो पाता। ऐसे स्कूलों को बंद या मर्ज करने के बाद शिक्षकों, भवनों और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल अधिक संख्या वाले स्कूलों में बेहतर तरीके से किया जा सकता है। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की ओर से समय-समय पर सवाल भी उठाए जाते रहे हैं।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल स्कूलों की संख्या बनाए रखना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाना है। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्कूल में पर्याप्त विद्यार्थी नहीं हैं तो संसाधनों को दूसरी जगह बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने की आवश्यकता होती है। सरकार शिक्षा के क्षेत्र में खर्च किए जाने वाले संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना चाहती है।

सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने को सरकार ने प्राथमिकता दी है। छह हजार पदों को भरने की प्रक्रिया को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 30 सितंबर तक 147 सीबीएसई स्कूलों में शिक्षक नियुक्तियां पूरी करने का मुख्यमंत्री का आश्वासन भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

सरकार की योजना केवल शिक्षकों की नियुक्ति तक सीमित नहीं है। 80 करोड़ रुपये से कंप्यूटर लैब स्थापित करने की घोषणा से स्पष्ट है कि सीबीएसई स्कूलों में डिजिटल और तकनीकी शिक्षा के बुनियादी ढांचे को भी मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले समय में इन स्कूलों में विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी संसाधनों तक बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है।

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में लंबे समय से जारी गिरावट को रोकना है। पिछले डेढ़ दशक में चार लाख विद्यार्थियों के कम होने का आंकड़ा इस चुनौती की गंभीरता को दर्शाता है। इसी कारण सरकार सीबीएसई पैटर्न, आधुनिक सुविधाओं और बेहतर शिक्षण व्यवस्था के जरिए अभिभावकों का विश्वास सरकारी स्कूलों की ओर वापस लाने की कोशिश कर रही है।

मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के बयानों से संकेत मिलता है कि हिमाचल सरकार आने वाले वर्षों में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर के मानकों के अनुरूप ढालने पर जोर देगी। 147 मौजूदा सीबीएसई स्कूलों में शिक्षक भर्ती पूरी करने, 100 और स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने तथा कंप्यूटर लैब के लिए 80 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

सरकार का दावा है कि सीबीएसई से संबद्धता के बाद अब तक सरकारी स्कूलों में 24 हजार विद्यार्थियों का बढ़ना सकारात्मक संकेत है। हालांकि, इस प्रयोग की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि आने वाले वर्षों में सरकारी स्कूलों में दाखिले कितने बढ़ते हैं, विद्यार्थियों के शैक्षणिक परिणामों में कितना सुधार आता है और अभिभावकों का सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा किस हद तक मजबूत होता है।