सुबह स्कूल के लिए बच्चे को जगाना बन गया है रोज की परेशानी? बिना डांट के अपनाएं ये 5 स्मार्ट तरीके

सुबह स्कूल के लिए बच्चे को जगाना बन गया है रोज की परेशानी? बिना डांट के अपनाएं ये 5 स्मार्ट तरीके

सुबह का वक्त हर घर के लिए काफी भागदौड़ भरा होता है। किसी को ऑफिस के लिए निकलना होता है, किसी को नाश्ता तैयार करना होता है तो किसी को बच्चों का टिफिन और स्कूल बैग संभालना होता है। इस पूरी भागदौड़ के बीच सबसे बड़ी चुनौती तब बन जाती है, जब स्कूल जाने का समय करीब आ चुका हो और बच्चा आराम से बिस्तर में सो रहा हो। कई बार माता-पिता बच्चे को एक-दो बार प्यार से उठाने की कोशिश करते हैं, लेकिन जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती तो आवाज तेज होने लगती है। इसके बाद शुरू होता है सुबह-सुबह का तनाव, रोना-धोना और जल्दी तैयार होने की जद्दोजहद।

हालांकि, बच्चे का सुबह उठने में आनाकानी करना हमेशा सिर्फ उसकी जिद या आलस नहीं होता। कई बार देर रात तक जागना, स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल, नींद पूरी न होना या सुबह की दिनचर्या का सही तरीके से तय न होना भी इसकी वजह हो सकता है। ऐसे में हर दिन बच्चे को डांटने या उस पर गुस्सा करने से समस्या हल होने के बजाय और बढ़ सकती है। बच्चा सुबह उठने को एक तनावपूर्ण अनुभव मानने लगता है।

अगर आप चाहते हैं कि स्कूल की सुबह बिना चिल्लाहट और झगड़े के शुरू हो, तो बच्चे की दिनचर्या में कुछ छोटे लेकिन असरदार बदलाव किए जा सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही 5 आसान तरीके, जिनकी मदद से बच्चा धीरे-धीरे समय पर उठने और सुबह के काम खुद करने का आदी बन सकता है।

1. बच्चे को सुबह की तैयारी में खुद शामिल करें

बच्चे को समय पर उठाने का एक अच्छा तरीका यह है कि उसे सिर्फ निर्देश देने के बजाय सुबह की तैयारी का हिस्सा बनाया जाए। रात में सोने से पहले उससे अगले दिन की कुछ छोटी तैयारियां खुद करवाएं। जैसे स्कूल ड्रेस निकालकर रखना, जूते सही जगह रखना, बैग चेक करना या अपनी पानी की बोतल तैयार करना।

जब बच्चा रात में ही इन चीजों को व्यवस्थित करता है, तो उसे अगले दिन की जिम्मेदारियों का अंदाजा रहता है। सुबह उठने के बाद भी उसे यह महसूस होता है कि उसे खुद कुछ काम पूरे करने हैं।

आप बच्चे से यह भी पूछ सकते हैं कि वह सुबह सबसे पहले क्या करना पसंद करेगा। उदाहरण के लिए, क्या वह उठने के बाद पहले पानी पीना चाहता है या ब्रश करना? इस तरह उसे छोटे-छोटे फैसले लेने की आजादी मिलेगी और वह सुबह की दिनचर्या में ज्यादा रुचि दिखा सकता है।

2. सबसे पहले रात की नींद को ठीक करें

सुबह बच्चे के समय पर न उठने की समस्या का समाधान कई बार सुबह नहीं, बल्कि रात से शुरू होता है। अगर बच्चा रोज अलग-अलग समय पर सोता है या रात में काफी देर तक मोबाइल, टीवी या वीडियो गेम में व्यस्त रहता है, तो उसके लिए सुबह जल्दी उठना मुश्किल हो सकता है।

इसलिए बच्चे के लिए सोने और जागने का लगभग एक निश्चित समय तय करना बेहतर होता है। छुट्टी के दिनों में भी सोने-जागने के समय में बहुत ज्यादा अंतर न हो, ताकि उसकी बॉडी क्लॉक ज्यादा न बिगड़े।

सोने से पहले का माहौल भी शांत रखें। कोशिश करें कि बच्चे को बिस्तर पर जाने से करीब एक घंटे पहले स्क्रीन से दूर रखा जाए। इस समय किताब पढ़ना, हल्की बातचीत करना, कहानी सुनना या शांत गतिविधियां करना बेहतर विकल्प हो सकता है।

यह भी ध्यान रखें कि बच्चों की नींद की जरूरत उम्र के अनुसार अलग-अलग होती है। इसलिए केवल यह सोचकर कि बच्चा बिस्तर पर चला गया है, यह मान लेना सही नहीं होगा कि उसकी पर्याप्त नींद पूरी हो रही है। उसकी कुल नींद और अगले दिन के व्यवहार पर भी ध्यान दें।

3. अलार्म को बच्चे का दुश्मन नहीं, दोस्त बनाएं

कई घरों में बच्चे को जगाने की जिम्मेदारी पूरी तरह माता-पिता पर होती है। वे बार-बार कमरे में जाकर कहते हैं, “उठो, देर हो रही है”, लेकिन बच्चा हर बार करवट बदलकर दोबारा सो जाता है। इस आदत को धीरे-धीरे बदला जा सकता है।

बच्चे की उम्र के हिसाब से उसके कमरे में एक सरल अलार्म क्लॉक रखा जा सकता है। उसे समझाएं कि अलार्म किस समय लगाना है और बजने के बाद क्या करना है। शुरुआत में माता-पिता को उसकी मदद करनी पड़ सकती है, लेकिन धीरे-धीरे बच्चे को खुद अलार्म सेट करने और बंद करने की जिम्मेदारी दें।

अगर बच्चा पहली बार में अलार्म सुनकर नहीं उठता, तो तुरंत नाराज होने के बजाय उसकी दिनचर्या को दोबारा व्यवस्थित करें। कुछ बच्चों को धीरे-धीरे इस आदत में ढलने में समय लगता है।

जब बच्चा खुद समय पर उठ जाए, तो उसकी छोटी सी उपलब्धि की तारीफ जरूर करें। जैसे आप कह सकते हैं, “आज तुम अलार्म बजते ही उठ गए, बहुत अच्छा।” ऐसी सकारात्मक प्रतिक्रिया बच्चे को अगली सुबह भी वही व्यवहार दोहराने के लिए प्रेरित कर सकती है।

4. पर्दे खोलकर कमरे में प्राकृतिक रोशनी आने दें

सुबह बच्चे को जगाने का तरीका भी काफी मायने रखता है। अचानक तेज आवाज में बुलाना, कंबल खींचना या बार-बार डांटना बच्चे को चिड़चिड़ा बना सकता है। इसकी जगह सुबह कमरे में प्राकृतिक रोशनी आने देना एक आसान विकल्प हो सकता है।

अगर संभव हो तो बच्चे के उठने के समय पर्दे खोल दें और कमरे में हल्की रोशनी आने दें। फिर उसके पास जाकर शांत आवाज में बात करें। उसे तुरंत बिस्तर से खींचकर उठाने के बजाय कुछ मिनट का समय देना भी मददगार हो सकता है।

कुछ बच्चों को हल्का संगीत या उनका पसंदीदा गाना सुनकर उठना अच्छा लगता है। यदि बच्चे को यह पसंद है, तो इसे उसकी मॉर्निंग रूटीन का हिस्सा बनाया जा सकता है। मकसद यह होना चाहिए कि सुबह उठना उसके लिए तनाव और डांट से जुड़ी चीज न बने।

ध्यान रखें कि हर बच्चा अलग होता है। जो तरीका एक बच्चे पर काम करता है, जरूरी नहीं कि दूसरे बच्चे को भी पसंद आए। इसलिए बच्चे की पसंद और स्वभाव के अनुसार सुबह की शुरुआत का तरीका चुनें।

5. सुबह के कामों को रेस या चैलेंज में बदल दें

अगर बच्चा सामान्य निर्देशों पर जल्दी प्रतिक्रिया नहीं देता, तो सुबह की गतिविधियों को थोड़ा मजेदार बनाया जा सकता है। बच्चों को खेल और चुनौती पसंद होती है, इसलिए इसका इस्तेमाल उनकी दिनचर्या आसान बनाने के लिए किया जा सकता है।

उदाहरण के तौर पर आप कह सकते हैं, “देखते हैं आज ब्रश कौन पहले करता है” या “क्या तुम पांच मिनट में अपनी ड्रेस पहन सकते हो?” इसी तरह बच्चे को छोटे-छोटे टारगेट दिए जा सकते हैं। लेकिन इस दौरान इसे दबाव या प्रतियोगिता का रूप न दें।

आप चाहें तो एक छोटा सा मॉर्निंग चार्ट भी बना सकते हैं। इसमें उठना, ब्रश करना, कपड़े पहनना, नाश्ता करना और बैग उठाना जैसे काम शामिल किए जा सकते हैं। बच्चा हर काम पूरा करने के बाद उसे टिक कर सकता है या कोई छोटा स्टार लगा सकता है।

इससे बच्चे को यह समझने में मदद मिलती है कि सुबह उसे कौन-कौन से काम किस क्रम में करने हैं। समय के साथ उसे हर काम के लिए माता-पिता की याद दिलाने की जरूरत भी कम हो सकती है।

डांटने के बजाय बच्चे को समझने की कोशिश करें

सबसे जरूरी बात यह है कि सुबह की जल्दबाजी में माता-पिता अपना गुस्सा बच्चे पर न निकालें। अगर बच्चा लगातार उठने में परेशानी कर रहा है, तो यह देखने की कोशिश करें कि आखिर इसकी वजह क्या है। क्या वह देर रात तक जागता है? क्या उसे सुबह उठने में परेशानी होती है? क्या वह स्कूल जाने को लेकर तनाव में है? या फिर उसकी दिनचर्या ही बहुत अनियमित है?

अगर बच्चा पर्याप्त नींद लेने के बावजूद लंबे समय तक बहुत ज्यादा सुस्त रहता है, रोज सुबह उठने में असामान्य कठिनाई होती है या दिनभर अत्यधिक नींद आती है, तो इस पर ध्यान देना जरूरी है और जरूरत पड़ने पर बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह ली जा सकती है।

आखिरकार, सुबह की अच्छी शुरुआत पूरे दिन के मूड पर असर डाल सकती है। इसलिए बच्चे को डांटकर बिस्तर से उठाने के बजाय ऐसी दिनचर्या बनाएं जिसमें नींद का सही समय, सुबह की तैयारी, थोड़ी स्वतंत्रता और सकारात्मक प्रोत्साहन शामिल हो। शुरुआत में बदलाव लाने में थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन लगातार एक जैसी दिनचर्या अपनाने से बच्चा धीरे-धीरे खुद समय पर उठने और स्कूल के लिए तैयार होने की आदत विकसित कर सकता है।

(Photo : AI Generated)