स्क्रीन के सामने घंटों बिताने का असर गर्दन पर पड़ रहा है भारी? जानें बचाव के तरीके

स्क्रीन के सामने घंटों बिताने का असर गर्दन पर पड़ रहा है भारी? जानें बचाव के तरीके

आज के डिजिटल युग में स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट और कंप्यूटर हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। पढ़ाई से लेकर ऑफिस के काम तक, ऑनलाइन मीटिंग से लेकर मनोरंजन और सोशल मीडिया तक, दिन का काफी समय स्क्रीन के सामने बीतता है। डिजिटल तकनीक ने जीवन को सुविधाजनक जरूर बनाया है, लेकिन लंबे समय तक स्क्रीन का इस्तेमाल करने और गलत पोस्चर में बैठे रहने से शरीर पर कई तरह के नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकते हैं।

गर्दन और कंधों में दर्द, अकड़न, भारीपन और थकान आज उन लोगों में आम शिकायत बनती जा रही है जो रोजाना कई घंटे कंप्यूटर या मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं। खासकर जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक सिर झुकाकर मोबाइल देखता है या लैपटॉप पर काम करते समय आगे की ओर झुककर बैठता है, तो गर्दन और ऊपरी पीठ की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

इसी तरह की समस्या को आम बोलचाल की भाषा में अक्सर ‘टेक नेक’ (Tech Neck) कहा जाता है। यह कोई एक विशिष्ट बीमारी का चिकित्सकीय नाम नहीं है, बल्कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने के दौरान खराब मुद्रा और गर्दन पर पड़ने वाले अतिरिक्त तनाव से जुड़ी समस्याओं के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक सामान्य शब्द है।

टेक नेक के कारण गर्दन में दर्द, जकड़न, कंधों में तनाव और ऊपरी पीठ में असहजता महसूस हो सकती है। कुछ लोगों को सिरदर्द या हाथों तक जाने वाली असहजता भी हो सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं और लगातार या गंभीर दर्द का कारण केवल स्क्रीन इस्तेमाल ही हो, यह जरूरी नहीं है।

अच्छी बात यह है कि रोजमर्रा की कुछ आदतों में बदलाव करके स्क्रीन से जुड़ी गर्दन की परेशानी के जोखिम को कम किया जा सकता है। सही पोस्चर, नियमित ब्रेक, उचित वर्कस्टेशन और शारीरिक गतिविधि इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

1. स्क्रीन को सही ऊंचाई और दूरी पर रखें

स्क्रीन की स्थिति गर्दन के पोस्चर पर सीधा प्रभाव डाल सकती है। यदि कंप्यूटर या लैपटॉप की स्क्रीन बहुत नीचे रखी है, तो व्यक्ति को लगातार गर्दन झुकाकर देखना पड़ सकता है। लंबे समय तक ऐसा करने से गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर तनाव बढ़ सकता है।

काम करते समय कोशिश करें कि स्क्रीन ऐसी स्थिति में हो जहां आपको लगातार नीचे देखने या आगे की ओर झुकने की जरूरत न पड़े। कंप्यूटर मॉनिटर को इस तरह व्यवस्थित करना उपयोगी हो सकता है कि स्क्रीन का ऊपरी हिस्सा लगभग आंखों के स्तर के आसपास हो और आपको आरामदायक स्थिति में देखने के लिए गर्दन को बार-बार झुकाना न पड़े।

लैपटॉप का लंबे समय तक इस्तेमाल करने वालों के लिए बाहरी कीबोर्ड और माउस के साथ लैपटॉप स्टैंड का उपयोग भी मददगार हो सकता है। इससे स्क्रीन को ऊपर उठाकर रखा जा सकता है और हाथों को अलग स्थिति में रखकर काम करना आसान हो जाता है।

मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते समय भी कोशिश करें कि फोन को बहुत नीचे रखकर लगातार गर्दन न झुकाएं। फोन को आंखों के करीब ऊंचाई पर रखने से गर्दन को लंबे समय तक झुकी हुई स्थिति में रखने की जरूरत कम हो सकती है।

2. लंबे समय तक एक ही स्थिति में न बैठें

सही पोस्चर में बैठना जरूरी है, लेकिन केवल सही पोस्चर बनाए रखना ही पर्याप्त नहीं है। यदि कोई व्यक्ति कई घंटों तक लगभग एक ही स्थिति में बैठा रहता है, तो मांसपेशियों में थकान और जकड़न महसूस हो सकती है।

ऑफिस में काम करने वाले या घर से काम करने वाले लोगों को नियमित रूप से अपनी स्थिति बदलने की कोशिश करनी चाहिए। लंबे समय तक लगातार बैठने के बजाय बीच-बीच में उठकर कुछ कदम चलना, पानी पीना या हल्की गतिविधि करना उपयोगी हो सकता है।

हर 30 से 40 मिनट में एक छोटा ब्रेक लेना कुछ लोगों के लिए व्यावहारिक तरीका हो सकता है, लेकिन ब्रेक की अवधि और आवृत्ति आपके काम और व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार अलग हो सकती है। यदि संभव हो तो फोन पर बात करते समय थोड़ा चलना या किसी छोटे काम के लिए अपनी सीट से उठना भी दिनभर की निष्क्रियता को कम कर सकता है।

लगातार बैठने की आदत को कम करने के लिए काम के दौरान छोटे-छोटे मूवमेंट ब्रेक लेना शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है।

3. गर्दन और कंधों के लिए हल्की स्ट्रेचिंग करें

नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर की सामान्य गतिशीलता और मांसपेशियों की ताकत बनाए रखने में मदद कर सकती है। स्क्रीन पर लंबे समय तक काम करने वाले लोगों के लिए हल्की स्ट्रेचिंग भी उपयोगी हो सकती है।

ब्रेक के दौरान गर्दन को आराम से एक तरफ और दूसरी तरफ घुमाना, कंधों को धीरे-धीरे ऊपर उठाकर नीचे करना और कंधों को पीछे की ओर रोल करना जैसे हल्के मूवमेंट किए जा सकते हैं।

हालांकि, किसी भी स्ट्रेचिंग को धीरे-धीरे और बिना जोर लगाए करना चाहिए। यदि किसी गतिविधि से दर्द बढ़ता है, चक्कर आता है या हाथ में झनझनाहट जैसी समस्या महसूस होती है, तो उसे रोक देना चाहिए।

यदि गर्दन का दर्द पहले से मौजूद है या लंबे समय से बना हुआ है, तो बिना विशेषज्ञ की सलाह के कठिन एक्सरसाइज करना उचित नहीं है। फिजियोथेरेपिस्ट व्यक्ति की स्थिति का आकलन करके उचित एक्सरसाइज और पोस्चर सुधारने की सलाह दे सकता है।

4. अपने वर्कस्टेशन को एर्गोनॉमिक तरीके से व्यवस्थित करें

गर्दन के दर्द से बचने के लिए केवल स्क्रीन की ऊंचाई ही नहीं, बल्कि पूरा वर्कस्टेशन सही होना जरूरी है। कुर्सी की ऊंचाई, डेस्क की स्थिति, कीबोर्ड और माउस का स्थान तथा पैरों की स्थिति सभी शरीर के पोस्चर को प्रभावित कर सकते हैं।

बैठते समय कोशिश करें कि पैर आराम से जमीन पर टिके हों और कंधे अनावश्यक रूप से ऊपर उठे हुए न हों। कीबोर्ड और माउस ऐसी स्थिति में रखें जहां काम करते समय हाथों और कंधों पर अतिरिक्त तनाव न पड़े।

कुर्सी पर बैठते समय पीठ को उचित सपोर्ट मिलना भी महत्वपूर्ण है। यदि कुर्सी की ऊंचाई सही नहीं है, तो व्यक्ति आगे की ओर झुककर काम कर सकता है, जिससे गर्दन और ऊपरी पीठ पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

वर्कस्टेशन को अपनी लंबाई और शरीर की जरूरत के अनुसार व्यवस्थित करने से लंबे समय तक काम करते समय आराम बेहतर हो सकता है।

5. सही तकिये का चुनाव करें

गर्दन की सेहत केवल दिन के समय स्क्रीन इस्तेमाल करने से प्रभावित नहीं होती। रात में सोने की स्थिति और तकिये का चुनाव भी गर्दन के आराम पर असर डाल सकते हैं।

बहुत ऊंचा या बहुत नीचा तकिया गर्दन को असहज स्थिति में रख सकता है। कुछ लोगों को गलत तकिये के कारण सुबह उठने पर गर्दन में जकड़न या दर्द महसूस हो सकता है।

ऐसा तकिया चुनना बेहतर हो सकता है जो आपकी सोने की स्थिति के अनुसार गर्दन को आरामदायक सपोर्ट दे। करवट लेकर सोने वाले व्यक्ति की जरूरत पीठ के बल सोने वाले व्यक्ति से अलग हो सकती है।

तकिये का उद्देश्य गर्दन को जबरदस्ती किसी स्थिति में रखना नहीं, बल्कि सिर और गर्दन को आरामदायक और प्राकृतिक स्थिति में सपोर्ट देना होना चाहिए।

यदि नियमित रूप से सुबह उठते ही गर्दन में दर्द या अकड़न होती है, तो सोने की स्थिति, गद्दे और तकिये की ऊंचाई पर भी ध्यान देना उपयोगी हो सकता है।

6. पर्याप्त और अच्छी नींद लेने की कोशिश करें

नींद शरीर की रिकवरी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लगातार कम नींद लेने से थकान बढ़ सकती है और व्यक्ति को दिनभर शरीर में तनाव और असहजता अधिक महसूस हो सकती है।

जो लोग लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करते हैं, उनके लिए पर्याप्त आराम विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। दिनभर की मानसिक और शारीरिक थकान के बाद शरीर को आराम देने के लिए नियमित नींद की दिनचर्या बनाए रखना उपयोगी है।

अधिकांश वयस्कों के लिए आमतौर पर 7 से 9 घंटे की नींद की सलाह दी जाती है, हालांकि व्यक्तिगत जरूरत अलग हो सकती है। सोने से पहले लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करने की आदत को कम करना भी कुछ लोगों के लिए बेहतर नींद की दिनचर्या बनाने में मदद कर सकता है।

यदि नींद पूरी होने के बावजूद लगातार थकान या गर्दन-कंधों में दर्द बना रहता है, तो इसके अन्य संभावित कारणों पर भी ध्यान देना चाहिए।

7. गर्म सिकाई से अस्थायी राहत मिल सकती है

गर्दन की हल्की मांसपेशीय जकड़न या तनाव में कुछ लोगों को गर्म सिकाई से आराम महसूस हो सकता है। गर्माहट प्रभावित क्षेत्र में आराम का एहसास दे सकती है और मांसपेशियों की जकड़न को अस्थायी रूप से कम करने में मदद कर सकती है।

गर्म पानी की बोतल या हीट पैड का इस्तेमाल करते समय बहुत अधिक गर्म तापमान से बचना जरूरी है। त्वचा को जलने से बचाने के लिए गर्म स्रोत को सीधे त्वचा पर लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि गर्म सिकाई केवल अस्थायी राहत दे सकती है। यदि गर्दन का दर्द लगातार बना रहता है, बार-बार वापस आता है या इसके साथ अन्य लक्षण दिखाई देते हैं, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

8. मोबाइल का इस्तेमाल करते समय गर्दन न झुकाएं

स्मार्टफोन आज टेक नेक से जुड़ी समस्या का एक महत्वपूर्ण कारण बन सकता है। लोग अक्सर मोबाइल को गोद या कमर के स्तर पर रखकर लंबे समय तक सोशल मीडिया, वीडियो या मैसेजिंग का इस्तेमाल करते हैं।

इस स्थिति में सिर लगातार नीचे की ओर झुका रहता है। लंबे समय तक ऐसा करने से गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर तनाव बढ़ सकता है।

मोबाइल का उपयोग करते समय फोन को अपेक्षाकृत ऊंची स्थिति में रखने और गर्दन को लंबे समय तक नीचे झुकाने से बचने की कोशिश करें। लंबे समय तक वीडियो देखने या पढ़ने के बजाय बीच-बीच में ब्रेक लेना भी उपयोगी हो सकता है।

यदि मोबाइल पर पढ़ने के लिए टेक्स्ट बहुत छोटा है और आपको लगातार आगे झुकना पड़ता है, तो फॉन्ट का आकार बढ़ाना भी एक सरल समाधान हो सकता है।

9. शरीर को नियमित रूप से सक्रिय रखें

केवल गर्दन की एक्सरसाइज करना ही पर्याप्त नहीं है। पूरे शरीर को सक्रिय रखना भी मांसपेशियों और जोड़ों के सामान्य स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

नियमित पैदल चलना, हल्की कार्डियो गतिविधियां, योग या व्यक्ति की क्षमता के अनुसार अन्य व्यायाम शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकते हैं।

जो लोग पूरे दिन डेस्क पर काम करते हैं, वे दिन में छोटे-छोटे वॉक ब्रेक शामिल कर सकते हैं। लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का उपयोग करना या छोटे कामों के लिए थोड़ी दूरी पैदल तय करना भी दैनिक गतिविधि बढ़ाने के सरल तरीके हो सकते हैं।

किसी भी नए व्यायाम कार्यक्रम को शुरू करने से पहले अपनी उम्र, फिटनेस और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए।

10. शरीर के वजन और सामान्य फिटनेस पर ध्यान दें

शरीर का वजन और समग्र फिटनेस भी मस्कुलोस्केलेटल स्वास्थ्य से जुड़े हो सकते हैं। संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि स्वस्थ वजन बनाए रखने में सहायता कर सकते हैं।

हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि गर्दन का दर्द केवल अधिक वजन के कारण होता है। गर्दन में दर्द के कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं, जिनमें मांसपेशियों का तनाव, खराब पोस्चर, चोट या अन्य स्वास्थ्य स्थितियां शामिल हो सकती हैं।

इसलिए स्वस्थ वजन बनाए रखना समग्र स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, लेकिन लगातार गर्दन दर्द होने पर केवल वजन को इसका कारण मानना उचित नहीं है।

टेक नेक के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज न करें

टेक नेक से जुड़ी परेशानी धीरे-धीरे विकसित हो सकती है। शुरुआत में व्यक्ति को केवल गर्दन में हल्का तनाव या थकान महसूस हो सकती है। समय के साथ यह समस्या गर्दन की जकड़न, कंधों में दर्द या ऊपरी पीठ में असहजता के रूप में दिखाई दे सकती है।

कुछ लोगों को लंबे समय तक स्क्रीन इस्तेमाल करने के बाद सिरदर्द भी महसूस हो सकता है। यदि स्क्रीन के सामने काम करने के बाद नियमित रूप से ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो अपने पोस्चर और काम करने की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है।

लक्षणों को लगातार नजरअंदाज करने के बजाय शुरुआती स्तर पर अपनी दिनचर्या में बदलाव करना बेहतर हो सकता है।

कब डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेनी चाहिए

हर गर्दन का दर्द टेक नेक के कारण नहीं होता। यदि दर्द बहुत तेज है, लंबे समय से बना हुआ है या बार-बार वापस आता है, तो विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी हो सकता है।

यदि गर्दन के दर्द के साथ हाथ या उंगलियों में लगातार झनझनाहट, सुन्नपन, कमजोरी, संतुलन की समस्या या चोट के बाद गंभीर दर्द हो, तो चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

फिजियोथेरेपिस्ट आपकी गर्दन, कंधों और पोस्चर का मूल्यांकन करके समस्या के संभावित कारण को समझने में मदद कर सकता है। जरूरत के अनुसार वह स्ट्रेचिंग, strengthening exercises, posture correction और दैनिक गतिविधियों में बदलाव की सलाह दे सकता है।

किसी भी एक्सरसाइज को केवल इंटरनेट पर देखकर शुरू करने के बजाय अपनी व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार उचित सलाह लेना अधिक सुरक्षित हो सकता है।

डिजिटल लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव ला सकते हैं बड़ा अंतर

आज के समय में स्क्रीन का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करना व्यावहारिक नहीं है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, लगभग हर आयु वर्ग के लोग किसी न किसी रूप में डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए समाधान स्क्रीन से पूरी तरह दूरी बनाना नहीं, बल्कि उसके इस्तेमाल का तरीका बेहतर बनाना है।

स्क्रीन की सही ऊंचाई रखना, लंबे समय तक एक ही स्थिति में न बैठना, नियमित ब्रेक लेना, शरीर को सक्रिय रखना और मोबाइल इस्तेमाल करते समय गर्दन को लंबे समय तक नीचे न झुकाना जैसी छोटी आदतें रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से शामिल की जा सकती हैं।

इसके साथ ही पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि भी समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। यदि गर्दन में लगातार दर्द या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं, तो समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

डिजिटल युग में स्क्रीन हमारी जिंदगी का हिस्सा बनी रहेगी, लेकिन सही एर्गोनॉमिक्स, बेहतर पोस्चर और नियमित मूवमेंट के जरिए स्क्रीन से जुड़ी गर्दन और कंधों की परेशानी के जोखिम को कम किया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें और दर्द या असहजता लगातार बनी रहने पर उचित स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।

डिस्क्लेमर

यह लेख सामान्य स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत चिकित्सकीय स्थिति का निदान या उपचार नहीं है। गर्दन का दर्द कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है और हर व्यक्ति के लिए उपचार अलग हो सकता है। यदि दर्द लगातार बना रहता है, बढ़ रहा है या इसके साथ सुन्नपन, कमजोरी, झनझनाहट या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं, तो योग्य डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से व्यक्तिगत सलाह लेना उचित है। किसी भी नई एक्सरसाइज या उपचार को शुरू करने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह प्राप्त करें।

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