हरियाणा में जर्जर स्कूल भवनों पर सरकार का एक्शन, 118 इमारतें होंगी ध्वस्त, 200 करोड़ से बनेंगे नए भवन

हरियाणा में जर्जर स्कूल भवनों पर सरकार का एक्शन, 118 इमारतें होंगी ध्वस्त, 200 करोड़ से बनेंगे नए भवन

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में जर्जर हो चुकी इमारतों को लेकर प्रदेश सरकार ने अब मरम्मत के बजाय नए निर्माण का रास्ता अपनाने का फैसला किया है। राज्यभर में कराए गए सर्वे के दौरान जिन 118 स्कूल भवनों को पूरी तरह असुरक्षित और जर्जर पाया गया है, उन्हें अब दुरुस्त करने के बजाय नए सिरे से तैयार किया जाएगा। इन भवनों के निर्माण के लिए सरकार ने 200 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है।

सरकार की ओर से प्रस्तावित नए स्कूल भवनों को मौजूदा जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाएगा। इनमें आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर रहेगा। कुछ स्कूलों के नए भवनों के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। सरकार का दावा है कि जर्जर भवनों की समस्या को चरणबद्ध तरीके से दूर करने के साथ सरकारी स्कूलों के आधारभूत ढांचे को मजबूत किया जा रहा है।

विधानसभा में शिक्षा मंत्री ने दी जानकारी

मंगलवार को हरियाणा विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान बादली से कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों की खराब इमारतों और वहां उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं से जुड़ा सवाल उठाया। इसके जवाब में शिक्षा मंत्री महिपाल सिंह ढांडा ने सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी सदन में दी।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में स्कूल भवनों की स्थिति का सर्वे कराया गया था। इस प्रक्रिया में जिन भवनों को पूरी तरह जर्जर पाया गया, उनकी पहचान की गई है। ऐसे 118 भवनों को मरम्मत के जरिए उपयोग में लाने के बजाय नए भवनों के रूप में विकसित किया जाएगा।

सदन में शिक्षा मंत्री ने प्रस्तावित नए स्कूल भवनों की तस्वीरें भी प्रस्तुत कीं। उन्होंने बताया कि नए निर्माण को लेकर कई स्थानों पर टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और संबंधित कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है।

बादली में सात स्कूलों को मिलेंगे नए भवन

बादली विधानसभा क्षेत्र में भी जर्जर स्कूल भवनों की पहचान की गई है। शिक्षा मंत्री के अनुसार, इस विधानसभा क्षेत्र में सात सरकारी स्कूलों के नए भवन बनाए जाएंगे।

सरकार की योजना केवल पुराने ढांचे को बदलने तक सीमित नहीं है। नए भवनों को वर्तमान शैक्षणिक आवश्यकताओं और विद्यार्थियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

सरकार का मानना है कि सुरक्षित और पर्याप्त बुनियादी ढांचा सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए जरूरी है। इसी कारण पूरी तरह जर्जर भवनों में छोटी-मोटी मरम्मत कराने के बजाय स्थायी समाधान के तौर पर नए भवनों के निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है।

छोटे कामों के लिए स्कूलों को मिलेगी ज्यादा वित्तीय ताकत

विधानसभा में स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की कमी और छोटी-मोटी मरम्मत के लिए लंबी सरकारी प्रक्रिया का मुद्दा भी सामने आया। इस पर शिक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार ने स्कूल स्तर पर मरम्मत और निर्माण से जुड़े छोटे एवं मध्यम कार्यों के लिए अधिकारों का दायरा बढ़ाया है।

अब स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) 25 लाख रुपये तक के काम करवा सकेगी। इसके अलावा स्कूल के प्रिंसिपल को एक लाख रुपये तक के निर्माण और मरम्मत कार्य कराने का अधिकार दिया गया है।

इस बदलाव का उद्देश्य यह है कि स्कूलों में छोटी समस्याओं के समाधान के लिए हर बार उच्च स्तर से मंजूरी लेने और लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने की जरूरत न पड़े। यदि किसी स्कूल में तत्काल मरम्मत, छोटे निर्माण कार्य या बुनियादी सुविधा से जुड़ी समस्या आती है तो निर्धारित वित्तीय सीमा के भीतर स्कूल स्तर पर ही कार्रवाई की जा सकेगी।

सरकार को उम्मीद है कि इससे स्कूलों में जरूरी काम तेजी से पूरे होंगे और लंबे समय तक छोटी समस्याओं के लंबित रहने की स्थिति कम होगी।

जर्जर भवनों के साथ शिक्षकों की कमी पर भी फोकस

विधानसभा में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का सवाल भी उठा। शिक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार ने विभिन्न पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) को शिक्षकों की भर्ती के लिए मांग भेज दी है।

सरकार के अनुसार, स्कूलों की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए केवल भवनों का निर्माण पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त संख्या में शिक्षक भी जरूरी हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों की रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया पर भी काम किया जा रहा है।

इससे सरकारी स्कूलों में आधारभूत ढांचे और मानव संसाधन, दोनों स्तरों पर सुधार लाने की सरकार की योजना सामने आती है।

पिल्लूखेड़ा कॉलेज का बजट बढ़ा

विधानसभा में शिक्षा से जुड़े अन्य संस्थानों की विकास परियोजनाओं की भी जानकारी दी गई। पिल्लूखेड़ा के राजकीय कॉलेज के निर्माण के लिए स्वीकृत बजट में बढ़ोतरी की गई है।

पहले इस परियोजना के लिए आठ करोड़ रुपये का बजट निर्धारित था, जिसे अब बढ़ाकर 11 करोड़ रुपये कर दिया गया है। बजट में वृद्धि का उद्देश्य निर्माण कार्य को मौजूदा जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाना बताया गया है।

राजकीय कॉलेजों में बेहतर आधारभूत सुविधाओं के विकास को उच्च शिक्षा के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार की ओर से निर्माण कार्यों में आवश्यकतानुसार बजट बढ़ाने का फैसला इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गुढ़ा आईटीआई में मारुति का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तैयार

व्यावसायिक शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी हरियाणा सरकार की ओर से औद्योगिक संस्थानों के साथ तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। झज्जर जिले की गुढ़ा मॉडल आईटीआई में मारुति का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तैयार हो चुका है और इसे जल्द शुरू किया जाएगा।

इस सेंटर का उद्देश्य युवाओं को उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। औद्योगिक क्षेत्र में आवश्यक कौशल के अनुसार विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किए जाने से उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।

सरकार का जोर आईटीआई और उद्योगों के बीच सीधा तालमेल स्थापित करने पर है, ताकि तकनीकी शिक्षा हासिल करने वाले युवाओं को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रहना पड़े, बल्कि उन्हें वास्तविक औद्योगिक कार्यप्रणाली और आवश्यक तकनीकी कौशल की भी जानकारी मिले।

साल्हावास आईटीआई में नौ ट्रेड के लिए उपकरण पहुंचे

साल्हावास आईटीआई में भी प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। यहां नौ ट्रेड के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जा चुके हैं।

उपकरणों की उपलब्धता से विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के दौरान व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने में मदद मिलेगी। आईटीआई में तकनीकी शिक्षा की उपयोगिता काफी हद तक प्रशिक्षण के लिए उपलब्ध मशीनरी और उपकरणों पर निर्भर करती है। ऐसे में सरकार की ओर से उपकरण उपलब्ध कराने को कौशल विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सरकारी स्कूलों का ढांचा बदलने की तैयारी

विधानसभा में सामने आई जानकारी से स्पष्ट है कि हरियाणा सरकार सरकारी शिक्षा व्यवस्था में एक साथ कई स्तरों पर काम करने की तैयारी कर रही है। एक ओर पूरी तरह जर्जर स्कूल भवनों को नए सिरे से बनाने के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, वहीं दूसरी ओर स्कूलों को छोटे और मध्यम मरम्मत कार्यों के लिए अधिक वित्तीय अधिकार दिए गए हैं।

इसके साथ ही शिक्षकों की भर्ती के लिए आयोगों को मांग भेजी गई है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पिल्लूखेड़ा राजकीय कॉलेज के बजट में वृद्धि की गई है, जबकि तकनीकी शिक्षा को उद्योग की जरूरतों से जोड़ने के लिए गुढ़ा मॉडल आईटीआई में मारुति के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और साल्हावास आईटीआई में नए उपकरणों की व्यवस्था की गई है।

सरकार का लक्ष्य सरकारी शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को सुरक्षित भवन, बेहतर सुविधाएं, पर्याप्त शिक्षक और रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। जर्जर भवनों के मामले में 118 स्कूलों को नए भवन देने का फैसला इसी व्यापक योजना का अहम हिस्सा है।

आने वाले समय में इन स्कूलों के नए भवनों का निर्माण पूरा होने के बाद विद्यार्थियों को अधिक सुरक्षित और आधुनिक शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा। वहीं, स्कूल स्तर पर मरम्मत के अधिकार बढ़ाए जाने से रोजमर्रा की बुनियादी समस्याओं के समाधान में भी तेजी आने की उम्मीद है। इस तरह हरियाणा सरकार सरकारी शिक्षा व्यवस्था को केवल भवनों के स्तर पर नहीं, बल्कि शिक्षक उपलब्धता और कौशल आधारित प्रशिक्षण के स्तर पर भी मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।