चंडीगढ़। हरियाणा में नगर पालिकाओं और अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों की करीब एक महीने से जारी हड़ताल अब सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच सीधे टकराव का रूप लेती जा रही है। आंदोलन खत्म कराने के लिए सरकार की ओर से बातचीत और मांगों पर सहमति के बाद अब सख्त प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा निदेशालय ने हड़ताल में शामिल 23 फायर कर्मचारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के आदेश जारी किए हैं।
सेवा से हटाए गए कर्मचारियों में 13 ऐसे कर्मचारी हैं, जो पालिका रोल पर दमकल केंद्रों में कार्यरत थे, जबकि 10 कर्मचारी हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड (एचकेआरएनएल) के माध्यम से फायर सेवाओं में लगाए गए थे। सरकार की इस कार्रवाई को हड़ताल के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
जिन कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की गई हैं, वे प्रदेश के अलग-अलग शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित दमकल केंद्रों पर तैनात थे। पालिका रोल के तहत कार्रवाई की जद में आने वाले कर्मचारियों में बहादुरगढ़ दमकल केंद्र से सतीश कुमार और राजेश कुमार, नरवाना से सत्यवान, धारूहेड़ा से नरेंद्र सिंह, आईएमटी बावल से सुरेश कुमार, सिरसा से राजेश कुमार, हिसार से प्रदीप कुमार, पानीपत से रणबीर, रोहतक से सोनू, कुरुक्षेत्र से कुलविंद्र सिंह, करनाल से महावीर, जगाधरी से रिंकू कुमार तथा फरीदाबाद सेक्टर-15 दमकल केंद्र से रणजीत शामिल हैं।
इसी तरह एचकेआरएनएल के जरिए फायर विभाग में लगाए गए कर्मचारियों में उद्योग विहार गुरुग्राम से बलविंद्र, यमुनानगर से अभिषेक और कमल कांबोज, पिंजौर से सुरेंद्र, हांसी से दीपक, करनाल से नरेश कुमार और प्रवीण कुमार, कैथल से जोनी, सेक्टर-29 गुरुग्राम से जितेंद्र तथा सेक्टर-37 गुरुग्राम से गौरव ठाकरान की सेवाएं समाप्त की गई हैं।
हड़तालियों पर कई आरोप
सरकार की ओर से की गई कार्रवाई के पीछे कर्मचारियों के खिलाफ कई आरोप लगाए गए हैं। विभाग का कहना है कि संबंधित कर्मचारी कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से यूनियन गतिविधियों में शामिल हुए, हड़ताल का हिस्सा बने और अन्य कर्मचारियों को भी आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। इसके अलावा विभागीय कार्यों में बाधा डालने के आरोप भी लगाए गए हैं।
सरकार का मानना है कि लंबे समय से चल रही हड़ताल के कारण जरूरी सेवाओं पर असर पड़ रहा है। खासतौर पर अग्निशमन सेवाओं को आपातकालीन श्रेणी में रखा जाता है, इसलिए सरकार कर्मचारियों के आंदोलन को लेकर अधिक सख्त रुख अपना रही है।
23 कर्मचारियों को सेवा से हटाने का फैसला इस बात का संकेत है कि सरकार अब हड़ताल समाप्त कराने के लिए प्रशासनिक और अनुशासनात्मक कदमों को भी तेजी से आगे बढ़ा रही है। कार्रवाई का दायरा पालिका रोल तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि एचकेआरएनएल के कर्मचारियों पर भी समान रूप से कार्रवाई की गई है।
12 मांगों पर सरकार की सहमति का दावा
सरकार और कर्मचारियों के बीच विवाद का मुख्य मुद्दा नियमितीकरण बना हुआ है। सरकार का दावा है कि कर्मचारी संगठनों की कुल 13 मांगों में से 12 को स्वीकार किया जा चुका है। इसके बावजूद आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है, क्योंकि कर्मचारी नियमितीकरण की मांग को लेकर समझौता करने के लिए तैयार नहीं हैं।
सरकार का कहना है कि कर्मचारियों को नियमित करने के रास्ते में तकनीकी और कानूनी बाधाएं हैं। इसी कारण नियमितीकरण की मांग को तत्काल पूरा करना संभव नहीं है। इसके विकल्प के तौर पर सरकार ने कर्मचारियों को 60 वर्ष की आयु तक सेवा सुरक्षा देने और वेतन में वृद्धि करने का प्रस्ताव रखा है।
हालांकि, कर्मचारी संगठन इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के बजाय नियमितीकरण की मांग पर कायम हैं। उनका कहना है कि सेवा सुरक्षा और वेतन वृद्धि नियमित सरकारी सेवा का विकल्प नहीं हो सकती। इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है।
6 अगस्त से जारी है आंदोलन
नगर पालिका और अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों का आंदोलन 6 अगस्त से चल रहा है। शुरुआत से ही कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। समय बीतने के साथ आंदोलन लंबा होता गया और अब कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल को 6 सितंबर तक जारी रखने की घोषणा की है।
सरकार की ओर से लगातार यह कहा जा रहा है कि कर्मचारियों की अधिकांश मांगें स्वीकार कर ली गई हैं और केवल नियमितीकरण से संबंधित मुद्दे पर कानूनी एवं तकनीकी स्थिति बाधा बन रही है। दूसरी तरफ कर्मचारी इस मुद्दे को आंदोलन का मुख्य आधार बनाए हुए हैं।
अब 23 फायर कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त किए जाने के बाद विवाद और गहराने के आसार हैं। कर्मचारी संगठनों की ओर से इस कार्रवाई पर आगे की रणनीति तैयार किए जाने की संभावना है। यदि हड़ताल जारी रहती है तो सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव और बढ़ सकता है।
सफाई कर्मचारियों पर भी सरकार सख्त
अग्निशमन कर्मचारियों पर कार्रवाई के साथ-साथ सरकार ने सफाई कर्मचारियों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। सफाई कर्मचारियों को शनिवार तक काम पर लौटने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि तय समय तक ड्यूटी पर वापस नहीं आने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार का यह अल्टीमेटम ऐसे समय आया है जब सफाई कर्मचारी भी आंदोलन में सक्रिय हैं। लंबे समय से चल रहे प्रदर्शन के कारण स्थानीय निकायों से संबंधित जरूरी सेवाओं पर असर पड़ने की चिंता बढ़ रही है।
हालांकि, सरकार के अल्टीमेटम के बावजूद कर्मचारी संगठन पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। कर्मचारियों ने आंदोलन को और तेज करने का फैसला किया है। इसके तहत मंत्रियों के कैंप कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन करने की घोषणा की गई है।
आंदोलन तेज करने की तैयारी
कर्मचारियों की रणनीति से साफ है कि सरकार की सख्ती के बावजूद वे अपनी प्रमुख मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। मंत्रियों के कैंप कार्यालयों पर प्रदर्शन के जरिए कर्मचारी सरकार पर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव बढ़ाने की कोशिश करेंगे।
दूसरी ओर, सरकार का रुख भी अब पहले की तुलना में अधिक कठोर दिखाई दे रहा है। एक तरफ कर्मचारियों को बातचीत के जरिए समाधान का विकल्प दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ हड़ताल और विभागीय कार्य में बाधा डालने के आरोपों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
इस पूरे विवाद में नियमितीकरण का मुद्दा सबसे अहम बना हुआ है। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें नियमित किया जाए, जबकि सरकार का कहना है कि मौजूदा नियमों और कानूनी स्थिति के चलते ऐसा करना आसान नहीं है। सरकार ने सेवा सुरक्षा और वेतन बढ़ोतरी के माध्यम से कर्मचारियों को राहत देने का विकल्प रखा है, लेकिन कर्मचारी इसे पर्याप्त नहीं मान रहे।
आगे क्या होगा, इस पर नजर
अब सभी की निगाहें 6 सितंबर तक चलने वाली प्रस्तावित हड़ताल और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि कर्मचारी आंदोलन वापस नहीं लेते हैं तो आने वाले दिनों में सरकार की ओर से और विभागीय कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, कर्मचारी संगठनों के मंत्रियों के कैंप कार्यालयों पर प्रदर्शन के फैसले से राजनीतिक दबाव भी बढ़ सकता है।
फायर कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त किए जाने से सरकार ने यह संकेत दे दिया है कि आवश्यक सेवाओं को प्रभावित करने वाली लंबी हड़ताल को लेकर वह कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी। वहीं, सफाई कर्मचारियों को दिया गया अल्टीमेटम बताता है कि सरकार स्थानीय निकायों की सेवाओं को जल्द से जल्द सामान्य स्थिति में लाने की कोशिश कर रही है।
ऐसे में आने वाले कुछ दिन हरियाणा में नगर पालिका और अग्निशमन कर्मचारियों के आंदोलन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। एक तरफ सरकार 13 में से 12 मांगों पर सहमति बनने का दावा करते हुए नियमितीकरण को कानूनी और तकनीकी कारणों से संभव नहीं बता रही है, तो दूसरी ओर कर्मचारी नियमितीकरण के बिना आंदोलन समाप्त करने को तैयार नहीं हैं। सरकार की कार्रवाई और कर्मचारियों के आंदोलन के बीच अब समाधान बातचीत से निकलता है या टकराव और बढ़ता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।




