बरनाला घटना पर भाजपा-एसजीपीसी का सरकार पर हमला, सिख युवक से कथित दुर्व्यवहार की निष्पक्ष जांच की मांग

बरनाला घटना पर भाजपा-एसजीपीसी का सरकार पर हमला, सिख युवक से कथित दुर्व्यवहार की निष्पक्ष जांच की मांग

चंडीगढ़/बरनाला। बरनाला के गांव शेरों में मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यक्रम के दौरान एक सिख युवक के साथ पुलिस द्वारा कथित तौर पर की गई मारपीट और उसके ककारों की बेअदबी का मामला राजनीतिक और धार्मिक मुद्दा बनता जा रहा है। इस घटना को लेकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने पंजाब सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि पार्टी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक के साथ कानून के नाम पर ज्यादती नहीं होनी चाहिए और यदि पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

वहीं एसजीपीसी प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने भी घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि गुरसिख नौजवान मोहनजीत सिंह शेरों के साथ पुलिस द्वारा कथित अत्याचार और उसके ककारों की बेअदबी की बात सामने आना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे सिख धार्मिक भावनाओं और मर्यादा से जुड़ा संवेदनशील विषय बताया।

धामी ने कहा कि सिख धर्म में ककारों का विशेष महत्व है। ये केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि सिख की पहचान, उसकी रहत और गुरु के प्रति उसकी आस्था से जुड़े हुए हैं। इसलिए किसी सिख व्यक्ति के ककारों के साथ जानबूझकर अपमानजनक व्यवहार या उनकी बेअदबी को सामान्य घटना के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ और पुलिस की भूमिका क्या रही।

पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि सरकार के कार्यक्रम में अपनी बात रखने या किसी मुद्दे पर सवाल उठाने वाले व्यक्ति के साथ यदि पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया है तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर सवाल करना जनता का अधिकार है।

ढिल्लों के अनुसार, किसी नागरिक को केवल इसलिए दबाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए कि वह सरकार के कामकाज से असहमति रखता है। उन्होंने कहा कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को पुलिस कार्रवाई के जरिए चुप कराने का प्रयास लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।

उन्होंने कहा कि भाजपा इस घटना को लेकर चुप नहीं बैठेगी और पीड़ित परिवार को हरसंभव सहयोग देने के साथ मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करेगी।

नशे के मुद्दे पर सरकार को घेरा

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने पंजाब में नशे की स्थिति को लेकर भी राज्य सरकार पर हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में नशे की समस्या गंभीर बनी हुई है और सरकार के दावों के बावजूद जमीनी हालात चिंताजनक हैं।

ढिल्लों ने आरोप लगाया कि नशे पर कार्रवाई के नाम पर कथित तौर पर दलालों के माध्यम से पैसे लिए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने सरकार से इस तरह के आरोपों की जांच कराने और नशे के खिलाफ अभियान को पारदर्शी तरीके से चलाने की मांग की।

उन्होंने कहा कि पंजाब में नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि इसका असर युवाओं, परिवारों और पूरे सामाजिक ढांचे पर पड़ रहा है। इसलिए सरकार को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय ठोस कार्रवाई पर ध्यान देना चाहिए।

कर्मचारियों की मांगों को लेकर भी निशाना

ढिल्लों ने पंजाब सरकार के कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पहले कर्मचारियों को लेकर बड़े-बड़े वादे किए गए थे और सरकार बनने के बाद कर्मचारियों का स्वागत भी उत्साहपूर्वक किया गया था, लेकिन अब वही कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन करने और धरने देने को मजबूर हैं।

उन्होंने महंगाई भत्ते यानी डीए का मुद्दा उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 60 प्रतिशत डीए मिल रहा है, जबकि पंजाब के कर्मचारियों को उनका लंबित डीए नहीं दिया जा रहा। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने और लंबित मांगों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।

ढिल्लों ने कहा कि कर्मचारी किसी भी सरकार के प्रशासनिक ढांचे की रीढ़ होते हैं। यदि बड़ी संख्या में कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हों तो सरकार को उनके साथ बातचीत करके समाधान निकालना चाहिए।

दलित समाज को लेकर भाजपा की रणनीति

पंजाब में दलित वोट बैंक को लेकर भी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने अपनी पार्टी की रणनीति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि भाजपा दलित समाज के हितों के लिए लगातार काम कर रही है और पार्टी आने वाले समय में इस वर्ग के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत करेगी।

ढिल्लों ने दावा किया कि भाजपा पंजाब में दलित समुदाय सहित समाज के विभिन्न वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य राज्य में विकास और सुशासन पर आधारित सरकार बनाना है।

उन्होंने आम आदमी पार्टी की ओर से महिलाओं और बेटियों के सम्मान के नाम पर किए गए आर्थिक लाभ के वादों पर भी सवाल उठाया। ढिल्लों ने कहा कि सरकार ने लोगों से किए कई वादे पूरे नहीं किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता अब सरकार के दावों और जमीनी स्थिति के बीच अंतर महसूस कर रही है।

लाडो योजना को लेकर बड़ा दावा

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी की प्रस्तावित ‘लाडो योजना’ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भाजपा सत्ता में आने पर इस योजना को सरकार के पहले दिन से लागू करेगी।

उन्होंने कहा कि महिलाओं और बेटियों के सम्मान तथा उनके आर्थिक सशक्तीकरण को लेकर भाजपा की प्रतिबद्धता स्पष्ट है। पार्टी सत्ता में आने पर अपने चुनावी वादों को प्राथमिकता के आधार पर लागू करेगी और प्रदेश में विकास की गति को तेज किया जाएगा।

ढिल्लों ने कहा कि पंजाब के लोगों के सामने अब राजनीतिक विकल्प मौजूद हैं और भाजपा आने वाले विधानसभा चुनाव में मजबूत दावेदारी के साथ मैदान में उतरेगी।

सुखपाल खैहरा और बिक्रम मजीठिया के नोटिस पर प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी द्वारा कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैहरा और शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को भेजे गए नोटिस के संबंध में पूछे गए सवाल पर भी ढिल्लों ने प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में सरकार ने नोटिस और मुकदमे दर्ज करने की राजनीति का एक नया चलन शुरू कर दिया है। ढिल्लों ने कहा कि राजनीतिक नेताओं के खिलाफ मामले दर्ज होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए न हो।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक असहमति के लिए स्थान होना चाहिए और नेताओं को जनता से जुड़े मुद्दे उठाने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।

सतीश पूनिया के दौरे से संगठन को मजबूती का दावा

भाजपा के प्रदेश प्रभारी सतीश पूनिया के पंजाब दौरे को लेकर ढिल्लों ने कहा कि पूनिया ने लगातार तीन दिन तक पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ बैठकें कीं। इस दौरान संगठन की स्थिति, आगामी राजनीतिक गतिविधियों और कार्यकर्ताओं की भूमिका पर चर्चा की गई।

उन्होंने कहा कि भाजपा पंजाब में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर काम कर रही है। कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद और स्थानीय स्तर की समस्याओं की जानकारी लेने से पार्टी को अपनी चुनावी रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी।

ढिल्लों के अनुसार, आने वाले समय में भाजपा पंजाब में अपनी गतिविधियों को और तेज करेगी और विभिन्न सामाजिक वर्गों तक पहुंच बढ़ाई जाएगी।

ककारों की बेअदबी को लेकर धामी ने जताई चिंता

एसजीपीसी प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने मोहनजीत सिंह शेरों के मामले को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील बताते हुए कहा कि सिखों के ककार गुरु साहिब की ओर से निर्धारित धार्मिक पहचान का हिस्सा हैं।

उन्होंने कहा कि केस, कड़ा, कंघा, कृपाण और कच्छेरा सिख जीवन और आस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। किसी गुरसिख के साथ व्यवहार करते समय उसकी धार्मिक पहचान और मर्यादा का सम्मान किया जाना चाहिए।

धामी ने कहा कि यदि किसी पुलिसकर्मी द्वारा जानबूझकर ककारों के साथ बेअदबी की गई है तो इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मामले के तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल करने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।

सरकार से जवाब मांगना नागरिक का अधिकार

धामी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार से सवाल पूछना किसी भी नागरिक का अधिकार है। सरकार की नीति, प्रशासनिक फैसलों या सामाजिक समस्याओं पर असहमति व्यक्त करना लोकतंत्र का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया या किसी मुद्दे पर अपनी बात रखने का प्रयास किया तो उसका जवाब संवाद के माध्यम से दिया जाना चाहिए। पुलिस की ताकत का इस्तेमाल कर किसी नागरिक को दबाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

एसजीपीसी प्रधान ने कहा कि प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि धार्मिक पहचान से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और मर्यादा का पूरा ध्यान रखा जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि संबंधित अधिकारी घटना की गंभीरता को समझते हुए निष्पक्ष जांच करेंगे और वास्तविक तथ्य जनता के सामने रखेंगे।

बरनाला के गांव शेरों में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान हुई इस कथित घटना ने अब राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर बहस छेड़ दी है। भाजपा ने जहां इसे कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा है, वहीं एसजीपीसी ने इसे सिख धार्मिक मर्यादा और ककारों के सम्मान से जुड़ा मामला बताया है। ऐसे में अब निगाहें सरकार और प्रशासन की ओर हैं कि इस मामले में क्या जांच कराई जाती है और आरोपों पर आगे क्या कार्रवाई होती है।