रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंच चुके हैं। उनका विशेष विमान रात करीब 3 बजे नई दिल्ली में उतरा। एयरपोर्ट पर विदेश राज्य मंत्री केवी सिंह ने रूसी राष्ट्रपति का औपचारिक स्वागत किया। इसके बाद रेड कार्पेट पर स्वागत और गार्ड ऑफ ऑनर की प्रक्रिया पूरी की गई, फिर पुतिन का काफिला दिल्ली के लिए रवाना हो गया।
भारत यात्रा के दौरान पुतिन के ठहरने की व्यवस्था नई दिल्ली स्थित मौर्या शेरटन होटल में की गई है। उनकी इस यात्रा को भारत और रूस के रणनीतिक संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासतौर पर रक्षा, परमाणु ऊर्जा, व्यापार और दोनों देशों के बीच परिवहन संपर्क को लेकर कई अहम मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच BRICS से पहले आज महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक होने वाली है। माना जा रहा है कि इस बातचीत में दोनों नेता मौजूदा वैश्विक हालात के साथ-साथ भारत-रूस के बीच लंबे समय से चल रहे रक्षा सहयोग की अगली दिशा पर चर्चा करेंगे।
Su-57 को लेकर बढ़ सकती है बातचीत
मोदी और पुतिन की बैठक में सबसे ज्यादा ध्यान रूस के Su-57 फाइटर जेट से जुड़ी संभावित डील पर हो सकता है। रूस पहले ही भारत को इस पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की पेशकश कर चुका है। केवल विमान बेचने के बजाय मॉस्को भारत में इसके उत्पादन और तकनीक साझा करने का प्रस्ताव भी दे चुका है।
भारत की दिलचस्पी सिर्फ तैयार लड़ाकू विमान हासिल करने में नहीं है। नई दिल्ली चाहती है कि यदि यह सौदा आगे बढ़ता है तो उसे ऐसी तकनीकी क्षमता भी मिले, जिसका इस्तेमाल भविष्य में भारत के अपने स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रमों को मजबूत करने में किया जा सके। इसी वजह से तकनीक ट्रांसफर और भारत में निर्माण का मुद्दा डील का अहम हिस्सा बन सकता है।
S-400 और सुखोई के अपग्रेड पर भी नजर
रक्षा क्षेत्र में बातचीत केवल Su-57 तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। भारत रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की बची हुई खेप की आपूर्ति और इसके रखरखाव से जुड़े मामलों पर भी चर्चा कर सकता है।
इसके साथ ही भारतीय वायुसेना के Su-30MKI विमानों के आधुनिकीकरण का मुद्दा भी बैठक में उठ सकता है। ‘सुपर सुखोई’ योजना के तहत इन विमानों की क्षमता बढ़ाने पर काम किया जा रहा है। इसमें बेहतर रडार, आधुनिक हथियार और अन्य नई तकनीकों को शामिल करने की योजना है। रूस इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण साझेदार हो सकता है।
ब्रह्मोस के नए वर्जन पर भी हो सकती है सहमति
भारत और रूस के रक्षा सहयोग में ब्रह्मोस मिसाइल पहले से ही एक सफल उदाहरण मानी जाती है। अब दोनों देश इसके हल्के और नए संस्करणों को लेकर सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
इसमें ब्रह्मोस-NG यानी नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल को विशेष महत्व दिया जा रहा है। इसका डिजाइन मौजूदा ब्रह्मोस की तुलना में हल्का रखने की योजना है। इसका फायदा यह होगा कि इसे हल्के लड़ाकू विमानों पर भी तैनात किया जा सकेगा। तेजस जैसे विमानों से इसके इस्तेमाल की संभावना भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को बढ़ा सकती है।
ऐसे में पुतिन की यात्रा के दौरान ब्रह्मोस के भविष्य के विकास, उत्पादन और तकनीकी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी दोनों देशों के बीच चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है।
पुतिन की सुरक्षा के लिए रूस और भारत की एजेंसियां साथ
रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा के लिए सुरक्षा के भी खास इंतजाम किए गए हैं। पुतिन के काफिले से जुड़े कई वाहन और उनकी विशेष बख्तरबंद कार भारत पहुंचने से पहले ही तैयारियों का हिस्सा बन चुके थे।
गुरुवार को जेवर एयरपोर्ट पर रूस के तीन ट्रांसपोर्ट विमानों के जरिए पुतिन के काफिले से जुड़ी गाड़ियां भारत पहुंचीं। इनमें रूस की प्रसिद्ध ऑरस सीनेट बख्तरबंद लिमोजिन भी शामिल है। इस कार का इस्तेमाल पुतिन अपनी विदेश यात्राओं के दौरान करते हैं।
रूसी राष्ट्रपति की सुरक्षा में रूस की फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस यानी FSO की भूमिका रहेगी। वहीं भारत की सुरक्षा एजेंसियां उनके बाहरी सुरक्षा घेरे और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं को संभालेंगी।
पुतिन के खान-पान को लेकर भी विशेष सावधानी बरती जाएगी। उनके खाने की अलग से जांच की व्यवस्था रहेगी और रूस की ओर से आए रसोइयों की टीम उनके भोजन की जिम्मेदारी संभालेगी।
‘फ्लाइंग क्रेमलिन’ भी भारत पहुंचा
पुतिन के साथ आया IL-96-300PU विमान भी चर्चा में है। इसे रूस के राष्ट्रपति के लिए चलने वाले मोबाइल कमांड सेंटर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसकी वजह से इसे अक्सर ‘फ्लाइंग क्रेमलिन’ कहा जाता है।
राष्ट्रपति के साथ आने वाली दूसरी विशेष उड़ान भी दिल्ली पहुंच चुकी है। इसमें रूसी राजनयिकों और अधिकारियों के आने की जानकारी है। रूस के पहले डिप्टी प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव भी भारत पहुंच चुके हैं।
BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले प्रमुख नेताओं में पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के काफिले सबसे बड़े और सबसे जटिल सुरक्षा इंतजामों वाले काफिलों में शामिल रहने की संभावना है।
यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बड़ी व्यक्तिगत BRICS भागीदारी
पुतिन की मौजूदा यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस के बाहर आयोजित होने वाली किसी BRICS शिखर बैठक में यह उनकी पहली व्यक्तिगत भागीदारी होगी।
इससे भारत के साथ रूस के रिश्तों में BRICS की भूमिका और दोनों देशों के बीच रणनीतिक संवाद की अहमियत भी सामने आती है। रूस और भारत लंबे समय से रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग करते रहे हैं।
रक्षा के साथ परमाणु ऊर्जा पर भी बढ़ सकता है सहयोग
मोदी-पुतिन बातचीत में परमाणु ऊर्जा का मुद्दा भी अहम हो सकता है। रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोसाटॉम भारत में कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना से जुड़ी है।
दोनों देश भारत में रूसी तकनीक की मदद से नए परमाणु बिजली संयंत्रों की संभावनाओं पर आगे बातचीत कर सकते हैं। इसके अलावा छोटे मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टरों यानी छोटे आकार के परमाणु रिएक्टरों के क्षेत्र में भी सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर चर्चा हो सकती है।
भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए परमाणु ऊर्जा को भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। ऐसे में रूस के साथ तकनीकी और निवेश सहयोग का विस्तार दोनों देशों के लिए अहम हो सकता है।
डॉलर के बजाय स्थानीय करेंसी में कारोबार बढ़ाने की कोशिश
भारत और रूस के बीच आर्थिक संबंधों में भुगतान व्यवस्था भी लगातार महत्वपूर्ण विषय बन रही है। दोनों देश डॉलर पर निर्भरता कम करते हुए रुपये और रूबल में व्यापार को बढ़ाने के विकल्प तलाश रहे हैं।
रूस के क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव पहले कह चुके हैं कि मॉस्को डॉलर को खत्म करने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि व्यापारिक भुगतान को आसान बनाने वाले विकल्पों को बढ़ावा देना चाहता है। उनके मुताबिक BRICS देशों के साथ रूस के व्यापार का बड़ा हिस्सा स्थानीय मुद्राओं में हो रहा है।
भारत और रूस के बीच लंबे समय से व्यापार असंतुलन और भुगतान से जुड़ी चुनौतियां रही हैं। दोनों देशों के पास एक-दूसरे की मुद्राओं में जमा रकम भी है। अब इस धन का इस्तेमाल व्यापार और निवेश में करने के तरीकों पर चर्चा की जा सकती है।
रूस तक सामान पहुंचाने के लिए नए रास्तों पर जोर
व्यापार बढ़ाने के लिए परिवहन संपर्क मजबूत करना भी दोनों देशों की प्राथमिकताओं में शामिल है। इस दिशा में इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर यानी INSTC महत्वपूर्ण परियोजना है।
यह कॉरिडोर भारत को ईरान के रास्ते रूस से जोड़ता है। इसके जरिए समुद्री और रेल मार्गों को जोड़कर माल परिवहन को तेज और अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है।
इसके अलावा चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग पर भी भारत और रूस के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावना है। इस मार्ग के पूरी तरह प्रभावी होने पर भारत से रूस के पूर्वी हिस्से तक सामान पहुंचाने में लगने वाला समय काफी कम हो सकता है। मौजूदा करीब 40 दिनों के मुकाबले यह अवधि लगभग 20 से 22 दिन तक आने की संभावना जताई जाती है।
इस तरह पुतिन की भारत यात्रा सिर्फ BRICS बैठक तक सीमित नहीं है। मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बातचीत में रक्षा सौदों से लेकर परमाणु ऊर्जा, स्थानीय मुद्रा में व्यापार और नए परिवहन गलियारों तक कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर आने वाले समय में भारत-रूस संबंधों की दिशा तय हो सकती है। खास तौर पर Su-57, ब्रह्मोस-NG और S-400 से जुड़े फैसले दोनों देशों के रक्षा सहयोग के अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।




