आज की तेज रफ्तार जिंदगी में खाना बनाने के लिए समय निकालना कई लोगों के लिए मुश्किल हो गया है। यही वजह है कि बाजार में मिलने वाले पैकेट वाले स्नैक्स, इंस्टेंट मील, रेडी-टू-ईट फूड और दूसरी सुविधाजनक चीजों का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। काम के बीच जल्दी भूख लगने पर पैकेट खोलकर कुछ खा लेना आसान लगता है और कई बार यही सुविधा धीरे-धीरे रोज की आदत में बदल जाती है।
समस्या तब शुरू होती है जब घर के बने ताजे भोजन की जगह ऐसे तैयार खाद्य पदार्थ ज्यादा लेने लगते हैं। चिप्स, बिस्किट, फ्लेवर्ड योगर्ट, इंस्टेंट स्नैक्स, सॉस और पैक्ड ड्रिंक जैसी चीजें अगर बार-बार डाइट का हिस्सा बनें तो खाने की पूरी आदत प्रभावित हो सकती है। हालांकि पैकेज्ड फूड को कम करने के लिए अचानक किचन से हर पैकेट हटाना जरूरी नहीं है। रोजमर्रा के खाने में कुछ व्यावहारिक बदलाव करके इसकी निर्भरता को धीरे-धीरे कम किया जा सकता है।
सबसे पहले अपनी स्नैकिंग की आदत पर ध्यान दें
कई लोगों को खाना खाने के बीच बार-बार कुछ न कुछ खाने की इच्छा होती है। लेकिन हर बार ऐसा होना वास्तविक भूख का संकेत नहीं होता। कई बार लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करना, टीवी देखना, मोबाइल चलाना या चाय-कॉफी पीने का समय स्नैकिंग की आदत से जुड़ जाता है।
उदाहरण के लिए कुछ लोगों को हर शाम चाय के साथ बिस्किट या नमकीन खाने की आदत होती है। अगर उस समय पेट में खास भूख नहीं है, तो केवल आदत की वजह से पैकेज्ड स्नैक लेने से बचा जा सकता है। इसके बजाय कुछ देर रुककर यह समझने की कोशिश करें कि शरीर को वास्तव में खाने की जरूरत है या सिर्फ कुछ चबाने का मन हो रहा है।
अगर भूख सच में लगी है तो घर में आसानी से उपलब्ध विकल्प तैयार रखें। भुना चना, मखाना, फल या थोड़ी मात्रा में मेवे ऐसे विकल्प हो सकते हैं जिन्हें बिना ज्यादा मेहनत के खाया जा सकता है। इस तरह पैकेट खोलने की आदत को धीरे-धीरे बदला जा सकता है।
सुबह का नाश्ता पैकेट से नहीं, साधारण चीजों से करें
दिन की शुरुआत में क्या खाया जा रहा है, इसका असर पूरे दिन की खाने की आदत पर पड़ सकता है। अगर सुबह का नाश्ता अक्सर पैकेज्ड सीरियल, मीठे स्नैक्स या किसी रेडी-टू-ईट चीज पर निर्भर रहता है तो उसमें धीरे-धीरे बदलाव करना शुरू करें।
इसके लिए बहुत जटिल रेसिपी बनाने की जरूरत नहीं है। घर में उपलब्ध सामान्य चीजों से भी नाश्ता तैयार किया जा सकता है। ओट्स को दूध, बीज और थोड़े नट्स के साथ लिया जा सकता है। इसी तरह पोहा, सब्जियों से तैयार उपमा या अन्य घरेलू नाश्ते भी रोज की डाइट में शामिल किए जा सकते हैं।
नाश्ते का विकल्प ऐसा रखना बेहतर होता है जिसे बनाने में बहुत अधिक समय न लगे। इससे व्यस्त सुबह में पैकेट वाला खाना चुनने की संभावना कम हो सकती है। अगर सुबह की तैयारी पहले से कर ली जाए तो यह बदलाव और आसान हो जाता है।
फ्रूट जूस की जगह साबुत फल को दें जगह
फलों को हेल्दी डाइट का हिस्सा माना जाता है, लेकिन उन्हें खाने का तरीका भी महत्वपूर्ण हो सकता है। कई लोग फल खाने के बजाय उनका जूस बनाकर पीना पसंद करते हैं। जब संभव हो, तो फल को साबुत खाना एक आसान विकल्प है।
सेब, अमरूद, संतरा, पपीता जैसे फल सीधे खाए जा सकते हैं। साबुत फल खाने पर उसमें मौजूद फाइबर भी भोजन का हिस्सा रहता है। इसके अलावा फल को काटकर ऑफिस या काम की जगह पर ले जाना भी आसान है।
इसलिए अगर आपकी आदत रोज पैक्ड जूस या मीठे ड्रिंक लेने की है, तो उसमें बदलाव करते हुए साबुत फल को विकल्प बनाया जा सकता है। इससे स्नैकिंग के समय भी फल को एक सरल विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
दही खरीदते समय सिर्फ स्वाद न देखें
दही और योगर्ट को आमतौर पर हल्के और सुविधाजनक स्नैक के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन बाजार में उपलब्ध सभी फ्लेवर्ड योगर्ट एक जैसे नहीं होते। कई उत्पादों में स्वाद बढ़ाने के लिए अतिरिक्त चीनी हो सकती है। इसलिए खरीदारी करते समय केवल पैकेट पर लिखे फ्लेवर या हेल्दी होने वाले दावों पर निर्भर न रहें।
लेबल पर दी गई पोषण संबंधी जानकारी देखना एक अच्छी आदत हो सकती है। खासकर शुगर की मात्रा पर ध्यान दिया जा सकता है। रोज के इस्तेमाल के लिए सादा दही एक सरल विकल्प है। इसमें अपनी पसंद के फल, कुछ नट्स या बीज मिलाकर स्वाद और पोषण दोनों में बदलाव किया जा सकता है।
इस छोटे से बदलाव से रोजाना फ्लेवर्ड और मीठे विकल्पों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
मुख्य खाने के साथ आने वाली पैकेज्ड चीजों को भी नजरअंदाज न करें
कई बार लोग सोचते हैं कि उनका खाना घर का बना है, इसलिए पूरी डाइट हेल्दी है। लेकिन प्लेट के साथ इस्तेमाल होने वाली चीजों पर भी ध्यान देना जरूरी है। केचप, डिप्स, रेडीमेड सॉस और पैक्ड ड्रेसिंग इसके उदाहरण हैं।
इन चीजों का इस्तेमाल अक्सर कम मात्रा में होता है, इसलिए लोग इन्हें अपनी रोज की डाइट में गिनते भी नहीं हैं। लेकिन अगर इनका इस्तेमाल लगातार हो रहा है तो इन्हें भी खाने की आदत का हिस्सा समझना चाहिए।
खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए हर बार बाजार से तैयार सॉस लेने की जरूरत नहीं है। नींबू, हरी चटनी, दही और घर में मौजूद मसालों की मदद से भी भोजन को स्वादिष्ट बनाया जा सकता है। इससे पैक्ड डिप्स और सॉस के इस्तेमाल को कम किया जा सकता है।
किचन में हेल्दी स्नैक्स पहले से तैयार रखें
पैकेज्ड फूड का एक बड़ा फायदा यह है कि वह तुरंत खाने के लिए उपलब्ध होता है। इसलिए अगर घर में उसके विकल्प तैयार नहीं होंगे तो भूख लगने पर व्यक्ति फिर उसी पैकेट की ओर जा सकता है।
इस आदत को बदलने के लिए घर में कुछ आसान स्नैक्स पहले से रखे जा सकते हैं। जैसे भुना चना, मखाना, फल या सीमित मात्रा में मेवे। इन्हें ऐसी जगह रखा जा सकता है जहां जरूरत पड़ने पर आसानी से मिल सकें।
फ्रिज में कटे हुए फल या सादा दही रखना भी उपयोगी हो सकता है। जब हेल्दी विकल्प आसानी से उपलब्ध होंगे, तो अचानक लगी भूख में पैकेज्ड स्नैक चुनने की संभावना कम हो सकती है।
हर पैकेज्ड चीज को तुरंत छोड़ना जरूरी नहीं
डाइट में बदलाव करते समय एक सामान्य गलती यह होती है कि लोग एक ही दिन में सभी पैकेज्ड फूड छोड़ने की कोशिश करते हैं। इससे नई आदत को लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। इसलिए छोटे और व्यावहारिक कदम ज्यादा आसान हो सकते हैं।
सबसे पहले उस पैकेज्ड चीज की पहचान करें जिसे आप सबसे ज्यादा खाते हैं। फिर उसके इस्तेमाल को धीरे-धीरे कम करें और उसके स्थान पर घर का कोई विकल्प जोड़ें। उदाहरण के लिए रोज शाम बिस्किट खाने की आदत है तो शुरुआत में उसकी मात्रा कम की जा सकती है और बाद में फल, भुना चना या मखाना शामिल किया जा सकता है।
इसी तरह मीठे पैक्ड ड्रिंक की जगह पानी, नींबू पानी या अन्य कम मीठे घरेलू विकल्पों पर ध्यान दिया जा सकता है। बदलाव का उद्देश्य केवल किसी एक चीज को हटाना नहीं, बल्कि खाने की पूरी आदत को धीरे-धीरे बेहतर बनाना होना चाहिए।
खरीदारी के समय लेबल पढ़ना सीखें
पैकेज्ड फूड को पूरी तरह से डाइट से बाहर करना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है। अगर कोई पैक्ड प्रोडक्ट खरीद रहे हैं तो उसकी सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी पढ़ने की आदत विकसित की जा सकती है।
किसी भी उत्पाद को केवल उसकी पैकेजिंग देखकर हेल्दी मान लेना सही तरीका नहीं है। उत्पाद में कितनी चीनी, नमक और अन्य पोषक तत्व हैं, इसकी जानकारी लेबल से मिल सकती है। एक ही श्रेणी के अलग-अलग उत्पादों की तुलना करके भी विकल्प चुना जा सकता है।
यह आदत खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है जो लगातार इंस्टेंट या रेडी-टू-ईट चीजें खरीदते हैं।
पानी को भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं
कई बार लोग प्यास और भूख के बीच अंतर नहीं कर पाते और कुछ खाने लगते हैं। इसलिए दिनभर पर्याप्त पानी पीने की आदत बनाए रखना भी जरूरी है। काम के दौरान पास में पानी रखने से बार-बार मीठे या फ्लेवर्ड ड्रिंक लेने की आदत को कम किया जा सकता है।
हालांकि पानी की जरूरत हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है और मौसम, गतिविधि तथा शरीर की जरूरत के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता है।
बदलाव का तरीका सरल रखें
पैकेज्ड फूड कम करने का मतलब यह नहीं है कि आपको अपने खाने की पूरी दिनचर्या एक साथ बदलनी पड़ेगी। शुरुआत छोटे कदमों से की जा सकती है। नाश्ते में घर की चीजें शामिल करना, भूख लगने पर फल या भुना चना चुनना, फ्लेवर्ड योगर्ट की जगह सादा दही लेना और केचप-डिप्स का इस्तेमाल कम करना ऐसे छोटे बदलाव हैं जिन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाना आसान हो सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खाने को लेकर संतुलित नजरिया रखा जाए। हर पैकेज्ड खाद्य पदार्थ को एक जैसा मानने के बजाय उसकी सामग्री, मात्रा और खाने की आवृत्ति पर ध्यान देना ज्यादा व्यावहारिक तरीका है। अगर पैकेज्ड स्नैक्स आपकी रोज की आदत बन चुके हैं, तो उन्हें अचानक छोड़ने के बजाय धीरे-धीरे घरेलू और कम प्रोसेस्ड विकल्पों से बदलना लंबे समय तक नई डाइट रूटीन बनाए रखने में मदद कर सकता है।
(Photo: AI Generated)




