खाने को लेकर लोगों की पसंद अलग-अलग हो सकती है। कोई पूरी तरह शाकाहारी भोजन को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाता है, तो किसी की डाइट में अंडे, मछली, चिकन या दूसरे पशु-आधारित खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। लंबे समय से यह चर्चा भी होती रही है कि शाकाहारी भोजन ज्यादा फायदेमंद है या मांसाहारी खाना। लेकिन स्वास्थ्य के नजरिए से इस सवाल का जवाब केवल ‘वेज’ या ‘नॉन-वेज’ में देना आसान नहीं है।
असल में किसी व्यक्ति की सेहत पर उसकी पूरी डाइट का असर पड़ता है। वह क्या खाता है, कितनी मात्रा में खाता है, भोजन कितना प्रोसेस्ड है और उसमें फाइबर, प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स तथा अच्छे फैट की मात्रा कितनी है, ये सभी बातें महत्वपूर्ण होती हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ अक्सर किसी एक फूड ग्रुप को पूरी तरह अच्छा या खराब बताने के बजाय पूरी डाइट के पैटर्न को देखते हैं।
दिल की सेहत में शाकाहारी भोजन को मिल सकता है फायदा
प्लांट-बेस्ड डाइट को लेकर हुई कई रिसर्च में इसके संभावित हृदय संबंधी फायदों पर ध्यान दिया गया है। ऐसी डाइट में आमतौर पर सब्जियां, फल, दालें, साबुत अनाज, बीन्स, नट्स और बीज शामिल होते हैं। इन खाद्य पदार्थों से शरीर को फाइबर, एंटीऑक्सिडेंट और अनसेचुरेटेड फैट मिल सकते हैं।
कई अध्ययनों और मेटा-एनालिसिस में शाकाहारी डाइट को हृदय रोग के कम जोखिम से जोड़ा गया है। 2022 में प्रकाशित एक बड़ी मेटा-एनालिसिस में शाकाहारी लोगों में कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का जोखिम लगभग 15 प्रतिशत और इस्केमिक हार्ट डिजीज का जोखिम करीब 21 प्रतिशत कम पाया गया था।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर शाकाहारी व्यक्ति को हृदय रोग का खतरा कम ही होगा। अगर किसी की वेज डाइट में ज्यादा नमक, चीनी, तला हुआ खाना और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड शामिल है, तो सिर्फ शाकाहारी होने से उसे स्वास्थ्य लाभ की गारंटी नहीं मिलती।
वजन घटाने के मामले में भी प्लांट-बेस्ड डाइट चर्चा में
वजन को नियंत्रित करने के लिहाज से भी शाकाहारी भोजन पर काफी शोध हुआ है। पौधों से मिलने वाले कई खाद्य पदार्थों में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है। फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है, जिससे बार-बार खाने या ज्यादा कैलोरी लेने की संभावना कम हो सकती है।
कई अध्ययनों में शाकाहारी लोगों का औसत BMI अपेक्षाकृत कम पाया गया है। कुछ रिसर्च में प्लांट-बेस्ड डाइट को बेहतर वजन प्रबंधन और टाइप-2 डायबिटीज के कम जोखिम से भी जोड़ा गया है।
इसका एक कारण यह माना जाता है कि जब डाइट में सब्जियां, फल, दालें, साबुत अनाज और अन्य फाइबरयुक्त चीजों की मात्रा ज्यादा होती है, तो भोजन की कुल पोषण गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। लेकिन यहां भी भोजन की गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण है।
‘वेज’ लिखा है तो खाना हेल्दी होगा, ऐसा जरूरी नहीं
शाकाहारी डाइट को लेकर सबसे आम गलतफहमियों में से एक यह है कि बिना मांस वाला हर खाना स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। वास्तव में ऐसा नहीं है।
उदाहरण के लिए कोई व्यक्ति दिनभर तले हुए समोसे, पकौड़े, नमकीन, बिस्किट, मिठाइयां, मीठे पेय और मैदा से बने खाद्य पदार्थ खाता है तो उसकी डाइट शाकाहारी होने के बावजूद पोषण की दृष्टि से संतुलित नहीं कही जाएगी।
इसके उलट एक अच्छी तरह प्लान की गई वेज डाइट में दाल, राजमा, छोले, सब्जियां, फल, साबुत अनाज, बीज और सीमित मात्रा में नट्स शामिल किए जा सकते हैं। यानी भोजन का सिर्फ शाकाहारी होना पर्याप्त नहीं है, उसकी गुणवत्ता और संतुलन भी जरूरी है।
मांसाहारी भोजन में मिलते हैं कई जरूरी पोषक तत्व
दूसरी तरफ नॉनवेज खाने को भी सिर्फ नुकसान से जोड़ना सही नहीं होगा। मांस, मछली और अंडे जैसे खाद्य पदार्थ प्रोटीन के अच्छे स्रोत हो सकते हैं। इनसे शरीर को जरूरी अमीनो एसिड के साथ-साथ विटामिन और मिनरल्स भी मिलते हैं।
पशु-आधारित खाद्य पदार्थ खासतौर पर विटामिन B12 के महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं। इसके अलावा इनमें आयरन, जिंक और कुछ खाद्य पदार्थों में ओमेगा-3 फैटी एसिड भी पर्याप्त मात्रा में मिल सकता है।
विटामिन B12 शरीर के लिए बेहद जरूरी है और इसकी कमी से एनीमिया तथा न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं। जो लोग पूरी तरह वीगन डाइट अपनाते हैं, उनके लिए B12 की पर्याप्त मात्रा हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे मामलों में फोर्टिफाइड फूड या सप्लीमेंट की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि सप्लीमेंट लेने का फैसला व्यक्ति की जरूरत और चिकित्सकीय सलाह के आधार पर होना चाहिए।
मांस की बात हो तो किस तरह का मांस खाया जा रहा है, यह भी मायने रखता है
मांसाहारी डाइट को एक ही श्रेणी में रखना भी सही नहीं है। चिकन, मछली, अंडे और प्रोसेस्ड मीट के पोषण संबंधी प्रभाव एक जैसे नहीं होते।
कई अध्ययनों में ज्यादा मात्रा में रेड मीट और खासकर प्रोसेस्ड मीट के सेवन को हृदय रोग और कुछ प्रकार के कैंसर समेत कई स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है। प्रोसेस्ड मीट में सॉसेज, बेकन और सलामी जैसे खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं।
इसलिए ‘नॉनवेज’ शब्द अपने आप में यह नहीं बताता कि भोजन हेल्दी है या अनहेल्दी। भोजन किस प्रकार का है, उसे कैसे पकाया गया है और कितनी मात्रा में खाया जा रहा है, ये बातें भी उतनी ही अहम हैं।
मछली और सीमित अनप्रोसेस्ड मीट का संदर्भ अलग है
सभी पशु-आधारित खाद्य पदार्थों को एक जैसा मानना सही नहीं है। उदाहरण के लिए मछली में प्रोटीन के साथ कुछ प्रकार के ओमेगा-3 फैटी एसिड मिलते हैं, जो शरीर के लिए उपयोगी माने जाते हैं।
इसी तरह बिना प्रोसेस किया हुआ चिकन कई लोगों के लिए प्रोटीन का अच्छा स्रोत हो सकता है। लेकिन इसे ज्यादा तेल, मक्खन या नमक के साथ पकाने पर पूरे भोजन की कैलोरी और पोषण प्रोफाइल बदल सकती है।
इसलिए खाना चुनने के साथ-साथ उसे तैयार करने का तरीका भी महत्वपूर्ण है। डीप फ्राई करने की तुलना में ग्रिल, बेक, रोस्ट या कम तेल में पकाने जैसे तरीके अलग पोषण परिणाम दे सकते हैं।
डायबिटीज और ब्लड शुगर के मामले में भी पूरी डाइट देखें
टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को लेकर भी प्लांट-बेस्ड डाइट पर कई शोध हुए हैं। फाइबर से भरपूर साबुत अनाज, सब्जियां, फलियां और दालें संतुलित भोजन का हिस्सा बन सकती हैं। वहीं अत्यधिक रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और शुगर वाले खाद्य पदार्थों की अधिकता ब्लड शुगर नियंत्रण के लिए चुनौती पैदा कर सकती है।
इसलिए किसी व्यक्ति के लिए डाइट का असर केवल इस बात से तय नहीं होता कि वह शाकाहारी है या मांसाहारी। उदाहरण के तौर पर सफेद ब्रेड, मीठे पेय और मिठाइयों से भरपूर वेज डाइट जरूरी नहीं कि दाल, सब्जी और साबुत अनाज वाली संतुलित वेज डाइट जितनी बेहतर हो।
मेडिटेरेनियन डाइट से समझिए संतुलित खाने का उदाहरण
मेडिटेरेनियन डाइट अक्सर संतुलित भोजन के उदाहरण के तौर पर सामने आती है। इसमें मुख्य रूप से सब्जियां, फल, साबुत अनाज, फलियां, नट्स और जैतून का तेल शामिल होते हैं। इसके साथ मछली और दूसरे पशु-आधारित खाद्य पदार्थ सीमित मात्रा में लिए जाते हैं।
इस तरह की डाइट यह समझने में मदद करती है कि स्वस्थ भोजन का मतलब जरूरी नहीं कि पूरी तरह वेज या पूरी तरह नॉनवेज होना ही हो। भोजन में पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों की अच्छी मात्रा, पर्याप्त प्रोटीन और स्वस्थ फैट का संतुलन भी महत्वपूर्ण है।
आखिर किस डाइट को चुनें?
शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह की डाइट को सही तरीके से प्लान किया जाए तो उनसे शरीर को जरूरी पोषण मिल सकता है। फर्क इस बात से पड़ता है कि आपकी प्लेट में क्या-क्या शामिल है और उसकी मात्रा कितनी है।
अगर कोई व्यक्ति शाकाहारी है तो उसे दाल, राजमा, छोले, सोया, पनीर या अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोतों के साथ सब्जियां, फल, साबुत अनाज और आवश्यक पोषक तत्वों का ध्यान रखना चाहिए। पूरी तरह वीगन डाइट लेने वालों को B12 जैसे पोषक तत्वों पर विशेष ध्यान देना पड़ सकता है।
वहीं मांसाहारी व्यक्ति भी सब्जियों, फलों, साबुत अनाज और दालों को डाइट का हिस्सा बनाए रख सकता है। रेड और प्रोसेस्ड मीट की मात्रा सीमित रखना और प्रोटीन के लिए मछली, अंडे या बिना प्रोसेस किया गया चिकन जैसे विकल्पों को प्राथमिकता देना कई लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है।
आखिरकार स्वस्थ डाइट की पहचान सिर्फ इस बात से नहीं होती कि उसमें मांस है या नहीं। संतुलित पोषण, भोजन की गुणवत्ता, मात्रा, प्रोसेसिंग और व्यक्ति की अपनी जरूरतें ज्यादा मायने रखती हैं। इसलिए वेज बनाम नॉनवेज की बहस से ज्यादा जरूरी यह देखना है कि आपकी रोज की थाली शरीर को पर्याप्त प्रोटीन, फाइबर, विटामिन, मिनरल्स और स्वस्थ फैट दे रही है या नहीं।
(Photo : AI Generated)




