क्या सिर्फ 10 मिनट की वॉक से स्वस्थ रहेगा दिल? जानिए हफ्ते में कितनी एक्सरसाइज है जरूरी

क्या सिर्फ 10 मिनट की वॉक से स्वस्थ रहेगा दिल? जानिए हफ्ते में कितनी एक्सरसाइज है जरूरी

आजकल हार्ट हेल्थ को लेकर चिंता सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक बैठे रहने की आदत, शारीरिक गतिविधियों की कमी और खान-पान में आए बदलावों के कारण कम उम्र के लोगों में भी हृदय से जुड़ी समस्याओं का खतरा चर्चा में है। ऐसे में दिल को स्वस्थ रखने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि को जीवनशैली का हिस्सा बनाना जरूरी माना जाता है।

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर स्वस्थ दिल के लिए कितनी एक्सरसाइज पर्याप्त है? क्या रोज कुछ मिनट टहलना ही काफी है या फिर इसके लिए जिम में घंटों पसीना बहाना जरूरी है? विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल की सेहत के लिए व्यायाम का मतलब केवल जिम जाना नहीं है। रोजमर्रा की कई गतिविधियां भी शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकती हैं।

हालांकि एक्सरसाइज का फायदा तभी अधिक मिल सकता है, जब उसे व्यक्ति अपनी उम्र, शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर करे। बहुत ज्यादा मेहनत करना जरूरी नहीं, बल्कि लंबे समय तक नियमित रूप से सक्रिय रहना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

हफ्ते में 150 से 300 मिनट एक्टिविटी का लक्ष्य

स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों में वयस्कों के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि की सलाह दी जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के मुताबिक, स्वस्थ वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 मिनट और अधिकतम 300 मिनट तक मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि करने का लक्ष्य रखना चाहिए।

इसे आसान भाषा में समझें तो सप्ताह के ज्यादातर दिनों में करीब 30 मिनट की गतिविधि की जा सकती है। जरूरी नहीं कि यह पूरा समय एक ही बार में किया जाए। व्यक्ति अपनी सुविधा और दिनचर्या के अनुसार इसे अलग-अलग हिस्सों में भी बाँट सकता है।

मध्यम तीव्रता वाली गतिविधियों में तेज गति से चलना, साइकिल चलाना और तैराकी जैसी एक्सरसाइज शामिल हो सकती हैं। इन गतिविधियों के दौरान शरीर सामान्य अवस्था की तुलना में ज्यादा सक्रिय होता है और दिल की धड़कन तथा सांस लेने की गति बढ़ सकती है।

अगर किसी व्यक्ति की दिनचर्या अभी बहुत कम सक्रिय है तो शुरुआत धीरे-धीरे करना अधिक व्यावहारिक हो सकता है। अचानक बहुत कठिन एक्सरसाइज शुरू करने के बजाय गतिविधि का समय और स्तर धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है।

क्या हर दिन जिम जाना जरूरी है?

दिल को स्वस्थ रखने के लिए जिम जाना अनिवार्य नहीं है। जिम में की जाने वाली एक्सरसाइज के अलावा भी कई ऐसी शारीरिक गतिविधियां हैं, जिन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल किया जा सकता है।

तेज कदमों से पैदल चलना सबसे आसान विकल्पों में से एक है। इसके अलावा साइकिलिंग, तैराकी या अन्य एरोबिक गतिविधियां भी शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकती हैं। जिन लोगों के पास जिम जाने का समय नहीं है, वे अपनी दिनचर्या में नियमित वॉक या दूसरी उपयुक्त शारीरिक गतिविधियां जोड़ सकते हैं।

यहां सबसे अहम बात यह है कि व्यक्ति ऐसी गतिविधि चुने जिसे वह लंबे समय तक नियमित रूप से कर सके। अगर कोई एक्सरसाइज बहुत कठिन है और उसे कुछ दिनों बाद छोड़ दिया जाता है, तो उससे नियमितता बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

इसलिए एक्सरसाइज को रोजमर्रा की आदत बनाने पर जोर दिया जाता है, न कि केवल कुछ दिनों तक बहुत ज्यादा मेहनत करने पर।

सिर्फ कार्डियो नहीं, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी जरूरी

दिल की सेहत की चर्चा होते ही अक्सर लोगों का ध्यान वॉक, रनिंग या दूसरी एरोबिक एक्सरसाइज पर जाता है। लेकिन शरीर को मजबूत बनाए रखने के लिए मांसपेशियों की कसरत को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रवि प्रकाश सिंह के मुताबिक, एरोबिक एक्सरसाइज हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ मांसपेशियों को मजबूत करने वाली गतिविधियों को भी रूटीन में शामिल करना चाहिए। सप्ताह में कम से कम दो दिन स्ट्रेंथ एक्सरसाइज करने से मांसपेशियों की ताकत बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

इसके लिए हमेशा भारी वजन उठाने की जरूरत नहीं होती। व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार वजन उठाने वाली एक्सरसाइज, रेजिस्टेंस बैंड से किए जाने वाले अभ्यास या बॉडी-वेट एक्सरसाइज कर सकता है।

हालांकि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शुरू करते समय सही तकनीक और अपनी क्षमता का ध्यान रखना जरूरी है। खासतौर पर लंबे समय से एक्सरसाइज न करने वाले लोगों को शुरुआत हल्के स्तर से करनी चाहिए।

एक्सरसाइज की तीव्रता से ज्यादा नियमितता पर ध्यान

कई लोग एक्सरसाइज शुरू करते समय शुरुआत में ही बहुत कठिन लक्ष्य तय कर लेते हैं। कुछ दिनों तक ज्यादा मेहनत करने के बाद थकान या समय की कमी के कारण उनका रूटीन टूट जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा करने के बजाय अपनी दिनचर्या में ऐसी गतिविधि शामिल करना बेहतर है जिसे लगातार किया जा सके।

उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति शुरुआत में तेज चाल से थोड़ी देर पैदल चल सकता है और बाद में धीरे-धीरे अपनी अवधि बढ़ा सकता है। इसी तरह साइकिलिंग, तैराकी या दूसरी गतिविधियों को भी अपनी सुविधा के हिसाब से चुना जा सकता है।

नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर को लंबे समय तक सक्रिय रखने में मदद करती है। इसलिए एक दिन बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करने और फिर कई दिनों तक बिल्कुल निष्क्रिय रहने के बजाय सप्ताह भर गतिविधि को बांटना अधिक उपयोगी हो सकता है।

क्या 10 मिनट की वॉक बेकार है?

अगर कोई व्यक्ति अभी बिल्कुल एक्सरसाइज नहीं करता है, तो सिर्फ इसलिए शारीरिक गतिविधि शुरू न करना कि वह तुरंत 30 मिनट नहीं कर सकता, सही तरीका नहीं है। छोटी अवधि से शुरुआत करना भी एक कदम हो सकता है।

हालांकि सामान्य वयस्कों के लिए सुझाई जाने वाली कुल शारीरिक गतिविधि का लक्ष्य सप्ताह में 150 से 300 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली गतिविधि है। इसलिए रोज सिर्फ 10 मिनट की वॉक को हर व्यक्ति के लिए पर्याप्त मान लेना उचित नहीं होगा।

बेहतर तरीका यह है कि व्यक्ति अपनी वर्तमान क्षमता के अनुसार शुरुआत करे और धीरे-धीरे गतिविधि की मात्रा बढ़ाने की कोशिश करे। इस तरह व्यायाम को नियमित दिनचर्या में शामिल करना आसान हो सकता है।

उम्र और स्वास्थ्य के हिसाब से चुनें एक्सरसाइज

हर व्यक्ति के लिए एक जैसा एक्सरसाइज रूटीन सही नहीं हो सकता। उम्र, फिटनेस स्तर और पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के अनुसार गतिविधि का चुनाव किया जाना चाहिए।

जो व्यक्ति लंबे समय से शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं रहा है, उसे शुरुआत में अपनी क्षमता के अनुसार हल्की या मध्यम गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए। वहीं नियमित रूप से एक्सरसाइज करने वाले लोग अपनी फिटनेस के मुताबिक गतिविधि का स्तर बढ़ा सकते हैं।

एक्सरसाइज का उद्देश्य शरीर को सक्रिय और मजबूत बनाना है। इसलिए अपनी क्षमता से बाहर जाकर बहुत अधिक मेहनत करना जरूरी नहीं है। गलत तरीके से या जरूरत से ज्यादा कठिन व्यायाम करने पर चोट अथवा दूसरी परेशानियों का जोखिम बढ़ सकता है।

किन संकेतों को नजरअंदाज न करें?

व्यायाम करते समय शरीर के संकेतों पर ध्यान देना भी जरूरी है। अगर किसी व्यक्ति को एक्सरसाइज के दौरान सीने में दर्द, असामान्य सांस फूलना, चक्कर आना या बेहोशी जैसी समस्या महसूस होती है, तो इसे सामान्य मानकर व्यायाम जारी नहीं रखना चाहिए।

ऐसे लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। खासकर जिन लोगों को पहले से हृदय संबंधी बीमारी है, उनके लिए एक्सरसाइज का प्रकार और उसकी तीव्रता तय करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।

किसी भी नए या कठिन एक्सरसाइज रूटीन को शुरू करने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए।

दिल की सेहत के लिए पूरा रूटीन कैसा हो?

अगर सामान्य वयस्कों के लिए एक आसान ढांचा समझें तो सप्ताह में 150 से 300 मिनट मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि का लक्ष्य रखा जा सकता है। इसके साथ सप्ताह में कम से कम दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम किए जा सकते हैं।

यह गतिविधियां अलग-अलग दिनों में अपनी सुविधा के अनुसार व्यवस्थित की जा सकती हैं। तेज वॉक, साइकिलिंग या तैराकी जैसी गतिविधियों को एरोबिक हिस्से में शामिल किया जा सकता है, जबकि स्ट्रेंथ एक्सरसाइज के लिए बॉडी-वेट, रेजिस्टेंस बैंड या उपयुक्त वजन का इस्तेमाल किया जा सकता है।

लेकिन यह कोई ऐसा फॉर्मूला नहीं है जिसे हर व्यक्ति पर बिल्कुल एक जैसा लागू किया जाए। अपनी उम्र, फिटनेस और स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर रूटीन में बदलाव किया जा सकता है।

रोज थोड़ा सक्रिय रहना भी महत्वपूर्ण

दिल को स्वस्थ रखने के लिए एक्सरसाइज को केवल जिम या कठिन वर्कआउट से जोड़कर देखना जरूरी नहीं है। नियमित तेज चाल से चलना, साइकिलिंग, तैराकी और दूसरी शारीरिक गतिविधियां भी सक्रिय जीवनशैली का हिस्सा बन सकती हैं।

सामान्य वयस्कों के लिए सप्ताह में 150 से 300 मिनट मध्यम तीव्रता वाली गतिविधि और कम से कम दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज का लक्ष्य रखा जा सकता है। हालांकि हर व्यक्ति की जरूरत अलग हो सकती है।

सबसे महत्वपूर्ण बात एक्सरसाइज की निरंतरता है। ऐसा रूटीन चुनना बेहतर है जिसे व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार लंबे समय तक जारी रख सके। साथ ही सीने में दर्द, चक्कर, बेहोशी या असामान्य सांस फूलने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।