नवरात्र 2026 में तिथियों का अनोखा संयोग: अष्टमी के तुरंत बाद नवमी, जानें कब रखें व्रत और करें कन्या पूजन

नवरात्र 2026 में तिथियों का अनोखा संयोग: अष्टमी के तुरंत बाद नवमी, जानें कब रखें व्रत और करें कन्या पूजन

शारदीय नवरात्र को लेकर भक्तों की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना वाला यह पर्व हर साल आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होता है। नवरात्र के दौरान घरों और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, अखंड ज्योत जलाई जाती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व का समापन विजयादशमी के साथ होता है।

इस बार शारदीय नवरात्र की तारीखों को लेकर एक खास बात सामने आ रही है। पंचांग की गणना के मुताबिक 2026 में अष्टमी और नवमी तिथि का संयोग बनेगा। यही वजह है कि कई लोगों के मन में सवाल है कि आखिर इस बार नवरात्र आठ दिन के होंगे या नौ दिन के? साथ ही भक्त यह भी जानना चाहते हैं कि घटस्थापना किस दिन होगी, अष्टमी और नवमी की पूजा कब करनी है और कन्या पूजन के लिए कौन-सी तारीख रहेगी।

पंचांग के अनुसार, इस बार नवरात्र का पर्व 11 अक्टूबर से शुरू होगा और 19 अक्टूबर तक चलेगा। इसके अगले दिन यानी 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी।

2026 में नवरात्र कितने दिन के होंगे?

शारदीय नवरात्र को परंपरागत रूप से नौ दिनों का पर्व माना जाता है। वर्ष 2026 में भी नवरात्र का धार्मिक पर्व नौ दिनों तक ही रहेगा। हालांकि तिथियों की गणना में बदलाव के कारण अष्टमी और नवमी का संयोग एक ही दिन देखने को मिलेगा। इसलिए सामान्य कैलेंडर देखकर यह भ्रम हो सकता है कि नवरात्र आठ दिन के हैं।

दरअसल, इस बार सप्तमी तिथि का विस्तार होने के कारण नवरात्र के दिनों की गणना कुछ अलग दिखाई देगी। पंचांग में 18 अक्टूबर को सप्तमी और 19 अक्टूबर को अष्टमी दर्ज है, जबकि इसी 19 अक्टूबर को नवमी तिथि भी शुरू हो जाएगी। इस वजह से अष्टमी और नवमी से जुड़े कई अनुष्ठान एक ही दिन किए जाएंगे।

इसलिए भक्तों को नवरात्र को आठ दिन का मानकर पूजा की तैयारी नहीं करनी चाहिए। पर्व की शुरुआत 11 अक्टूबर को घटस्थापना के साथ होगी और 19 अक्टूबर को अष्टमी-नवमी के धार्मिक अनुष्ठानों के बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी।

11 अक्टूबर को होगी घटस्थापना

शारदीय नवरात्र की शुरुआत आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। 2026 में प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9 बजकर 19 मिनट से शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात 9 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। चूंकि 11 अक्टूबर को सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन नवरात्र का पहला दिन माना जाएगा और घटस्थापना की जाएगी।

रविवार, 11 अक्टूबर को घरों और मंदिरों में कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की आराधना शुरू होगी। इस दिन भक्त कलश स्थापित करके देवी का आह्वान करेंगे। इसके साथ ही कई घरों में जौ बोने और अखंड ज्योत जलाने की परंपरा भी निभाई जाएगी।

घटस्थापना नवरात्र के सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक मानी जाती है। पंचांग परंपरा के अनुसार इसे प्रतिपदा तिथि के दौरान दिन के शुरुआती हिस्से में करना शुभ माना जाता है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय के समय में अंतर होने के कारण घटस्थापना के मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। उदाहरण के तौर पर जालंधर के लिए 11 अक्टूबर को घटस्थापना का मुहूर्त सुबह 6:28 बजे से 10:19 बजे तक बताया गया है, जबकि अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक रहेगा।

पहले दिन मां शैलपुत्री की होगी पूजा

नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। भक्त सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर घर के पूजा स्थान की सफाई करते हैं। इसके बाद कलश स्थापना करके मां शैलपुत्री की विधिवत पूजा की जाती है।

नौ दिनों में देवी के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना करने की परंपरा है। मां शैलपुत्री से शुरू होकर मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कूष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।

कई भक्त पूरे नौ दिनों तक उपवास रखते हैं, जबकि कुछ लोग पहले और आखिरी दिन व्रत करते हैं। पूजा की विधि परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

18 अक्टूबर को सप्तमी, 19 को अष्टमी-नवमी का संयोग

इस साल नवरात्र की तिथियों में सबसे ज्यादा चर्चा अष्टमी और नवमी को लेकर है। पंचांग के अनुसार 18 अक्टूबर को सप्तमी तिथि रहेगी। इसके बाद 19 अक्टूबर को अष्टमी तिथि का प्रभाव रहेगा और इसी दिन नवमी भी शुरू हो जाएगी। इस कारण 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी से जुड़े धार्मिक कार्य किए जाएंगे।

तिथि गणना के मुताबिक अष्टमी 18 अक्टूबर की सुबह करीब 8:27 बजे शुरू होकर 19 अक्टूबर की सुबह 10:51 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ होगी। इसलिए उदय तिथि की परंपरा के आधार पर 19 अक्टूबर को अष्टमी का पर्व माना जाएगा।

यही कारण है कि इस दिन मां महागौरी की पूजा, दुर्गा अष्टमी के अनुष्ठान और कन्या पूजन के साथ नवमी से जुड़े धार्मिक कार्य भी किए जा सकते हैं। हालांकि अलग-अलग स्थानों और परंपराओं में पूजा के नियम तथा समय अलग हो सकते हैं, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना उचित रहेगा।

कन्या पूजन के लिए भी खास रहेगा 19 अक्टूबर

नवरात्रि के दौरान अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है। भक्त छोटी कन्याओं को घर बुलाकर उनका पूजन करते हैं और उन्हें भोजन कराया जाता है। इसके बाद सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र, फल, मिठाई या दक्षिणा दी जाती है।

2026 में अष्टमी और नवमी एक ही दिन पड़ने के कारण कन्या पूजन को लेकर भी लोगों में भ्रम की स्थिति बन सकती है। 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी दोनों तिथियों का संयोग होने के कारण इस दिन कन्या पूजन किया जा सकता है। हालांकि किसी विशेष संप्रदाय या परिवार में अलग परंपरा होने पर उसी के अनुसार अनुष्ठान किया जा सकता है।

नवरात्रि के बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी

नवरात्र के नौ दिनों के बाद 20 अक्टूबर, मंगलवार को विजयादशमी मनाई जाएगी। इसे दशहरा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह दिन अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है।

नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा के बाद दशमी तिथि पर देवी की विदाई और नवरात्र व्रत के समापन की परंपरा होती है। कई स्थानों पर इस दिन दुर्गा प्रतिमा विसर्जन किया जाता है, जबकि अन्य जगहों पर रामलीला और रावण दहन का आयोजन होता है।

इस प्रकार 2026 में शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी। 18 अक्टूबर को सप्तमी रहेगी, जबकि 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी का विशेष संयोग बनेगा। इसके बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ नवरात्र पर्व का समापन होगा।

तारीखें एक नज़र में

11 अक्टूबर, रविवार — घटस्थापना और नवरात्र का पहला दिन

12 अक्टूबर — द्वितीया

13 अक्टूबर — तृतीया

14 अक्टूबर — चतुर्थी

15 अक्टूबर — पंचमी

16 अक्टूबर — षष्ठी

17 अक्टूबर — सप्तमी

18 अक्टूबर — सप्तमी तिथि का विस्तार

19 अक्टूबर, सोमवार — महाष्टमी, महागौरी पूजा, कन्या पूजन और महानवमी से जुड़े अनुष्ठान

20 अक्टूबर, मंगलवार — विजयादशमी और नवरात्र समापन

ऐसे में 2026 की शारदीय नवरात्रि को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि भक्त इसे केवल तारीखों की संख्या के आधार पर आठ दिन का पर्व न मानें। पंचांग के अनुसार पर्व की शुरुआत 11 अक्टूबर को होगी और 19 अक्टूबर को अष्टमी-नवमी के संयोग के बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। घटस्थापना और विशेष पूजा के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग में दिए गए समय को प्राथमिकता देना भी जरूरी है, क्योंकि सूर्योदय और मुहूर्त में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है।