अंबाला में वामन द्वादशी मेले का शुभारंभ, सीएम सैनी बोले- पीढ़ियों को जोड़ रही आस्था की यह परंपरा

अंबाला में वामन द्वादशी मेले का शुभारंभ, सीएम सैनी बोले- पीढ़ियों को जोड़ रही आस्था की यह परंपरा

अंबाला की पुरानी अनाज मंडी में सोमवार रात वामन द्वादशी मेले की पहली संध्या श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रही। धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व वाले इस आयोजन का शुभारंभ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने भगवान वामन का आशीर्वाद लिया और मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि वह यहां मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि भगवान वामन के एक श्रद्धालु के रूप में पहुंचे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान के चरणों में शीश झुकाना और उनके आशीर्वाद की कामना करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने अंबाला की धार्मिक परंपराओं और वामन द्वादशी मेले के साथ लोगों की भावनात्मक जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि इस आयोजन ने लंबे समय से शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान वामन के पूजन और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री ने मंच से मेले की ऐतिहासिक परंपरा और इससे जुड़े धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मां अम्बा की पावन धरती पर आयोजित इस मेले में शामिल होना उनके लिए विशेष अवसर है।

अंबाला से अपने जुड़ाव का किया जिक्र

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अंबाला के लोगों के साथ अपने आत्मीय संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शहर के लोगों का स्नेह उन्हें हमेशा नई ऊर्जा देता है। उन्होंने मेले में मौजूद श्रद्धालुओं को आयोजन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि धार्मिक परंपराएं समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करती हैं।

मुख्यमंत्री के अनुसार, अंबाला में वामन द्वादशी मेले की परंपरा केवल एक धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। इसके साथ शहर की सामाजिक और सांस्कृतिक स्मृतियाँ भी जुड़ी हुई हैं। हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग मेले में शामिल होते हैं और भगवान वामन के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं।

उन्होंने कहा कि समय के साथ मेले का स्वरूप और शहर की परिस्थितियां भले ही बदली हों, लेकिन लोगों की आस्था में कोई कमी नहीं आई है। इसके उलट नई पीढ़ियां भी इस परंपरा से जुड़ रही हैं।

दादा-दादी से बच्चों और पोते-पोतियों तक पहुंच रही परंपरा

मुख्यमंत्री ने वामन द्वादशी मेले को पीढ़ियों को जोड़ने वाली धार्मिक विरासत बताते हुए कहा कि इस आयोजन की परंपरा करीब सवा सौ वर्षों से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि इसके पीछे कई पीढ़ियों की श्रद्धा, तपस्या और धार्मिक विश्वास जुड़े हुए हैं।

उन्होंने कहा कि एक समय जिन बच्चों ने अपने दादा-दादी की उंगली पकड़कर इस मेले में आना शुरू किया होगा, आज वही लोग अपने बच्चों और पोते-पोतियों को लेकर यहां पहुंच रहे हैं। इस तरह धार्मिक आयोजन केवल पूजा और अनुष्ठान का माध्यम नहीं रहता, बल्कि परिवारों के बीच संस्कार और परंपराएं आगे बढ़ाने का माध्यम भी बन जाता है।

सैनी ने कहा कि एक पीढ़ी जब अगली पीढ़ी को मेले और धार्मिक परंपरा से जोड़ती है तो वह उसे केवल एक आयोजन में शामिल नहीं करती, बल्कि अपनी संस्कृति, आस्था और मिट्टी से जुड़ाव भी सौंपती है। उन्होंने कहा कि ऐसी परंपराएं समाज की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

भगवान वामन के प्रसंग से विनम्रता का संदेश

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भगवान वामन और राजा बलि से जुड़े धार्मिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए इसे जीवन के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि भगवान वामन एक छोटे ब्रह्मचारी के रूप में राजा बलि के पास पहुंचे और उनसे तीन पग भूमि का दान मांगा।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान वामन ने विराट स्वरूप धारण कर दो पगों में समस्त लोक को नाप लिया। इसके बाद जब तीसरे पग के लिए स्थान की आवश्यकता हुई तो राजा बलि ने अपना सिर भगवान के चरणों में समर्पित कर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रसंग में विनम्रता, वचन की मर्यादा और समर्पण का संदेश समाहित है। भगवान वामन की कथा मनुष्य को यह सीख देती है कि जीवन में अहंकार को कम करके सेवा और समर्पण की भावना को बढ़ाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने अहंकार से ऊपर उठता है तो उसे समाज के दूसरे लोगों की परेशानियां दिखाई देने लगती हैं। इसके बाद दूसरों की मदद करना और जरूरतमंदों की सेवा करना सहज भाव बन जाता है।

हर परिवार की खुशहाली के लिए की प्रार्थना

मुख्यमंत्री ने भगवान वामन से प्रदेश और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने प्रार्थना की कि प्रत्येक परिवार में सुख और शांति बनी रहे, हर घर में खुशहाली आए और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें।

उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजन लोगों को सकारात्मक ऊर्जा देने के साथ-साथ समाज में आपसी भाईचारे और सद्भाव को मजबूत करने का काम करते हैं। ऐसे आयोजनों में अलग-अलग वर्गों के लोग एक साथ शामिल होते हैं और सामूहिक रूप से अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।

मुख्यमंत्री ने मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए आयोजन की सफलता की कामना की।

सनातन धर्म सभा को 21 लाख रुपये देने की घोषणा

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मेले के आयोजन और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए सनातन धर्म सभा को 21 लाख रुपये देने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि सभा धार्मिक आयोजन के साथ-साथ सामाजिक सेवा के विभिन्न क्षेत्रों में भी कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने सभा की ओर से शिक्षा, स्वास्थ्य, गौसेवा और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं की भूमिका केवल धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि समाज के जरूरतमंद वर्गों तक सहायता पहुंचाने में भी योगदान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्य धार्मिक संस्थाओं और समाज के बीच संबंध को और मजबूत करते हैं।

असीम गोयल ने किया मुख्यमंत्री का स्वागत

कार्यक्रम के दौरान पूर्व मंत्री असीम गोयल ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का स्वागत किया। उन्होंने वामन द्वादशी मेले के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अंबाला की पहचान से इस आयोजन का गहरा संबंध है।

उन्होंने कहा कि वामन द्वादशी मेला लंबे समय से शहर की धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है और सनातन धर्म सभा लगातार इस परंपरा को आगे बढ़ाने में योगदान दे रही है। उन्होंने मेले में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं और आयोजन से जुड़े लोगों का भी स्वागत किया।

धार्मिक कार्यक्रम के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

वामन द्वादशी मेले की पहली संध्या में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। पंजाबी गायक दिलावर कौशिक, गुलाब सिद्धु और गुरमुख खान ने मंच पर अपनी प्रस्तुतियां दीं।

कलाकारों की प्रस्तुतियों के दौरान मेले में मौजूद श्रद्धालुओं ने तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया। भजनों और पंजाबी गीतों से कार्यक्रम स्थल का माहौल देर रात तक भक्तिमय और सांस्कृतिक रंग में डूबा रहा।

मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और भगवान वामन के दर्शन एवं पूजा-अर्चना के साथ कार्यक्रमों का आनंद लिया। धार्मिक आयोजन के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों को मनोरंजन और आध्यात्मिक वातावरण दोनों का अनुभव कराया।

धार्मिक विरासत को आगे बढ़ाने पर जोर

वामन द्वादशी मेले के उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री के संबोधन का मुख्य केंद्र धार्मिक आस्था, परंपरा और सामाजिक सेवा रहा। उन्होंने कहा कि वर्षों से चली आ रही ऐसी परंपराएं समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखती हैं।

अंबाला में करीब सवा सौ वर्षों से आयोजित हो रहे इस मेले को लेकर स्थानीय लोगों में विशेष आस्था है। परिवारों की कई पीढ़ियां इस आयोजन में शामिल होती रही हैं। मुख्यमंत्री ने इसी परंपरा को भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज में भाईचारे और आपसी जुड़ाव को बढ़ावा देते हैं। भगवान वामन की कथा से मिलने वाले विनम्रता और समर्पण के संदेश को दैनिक जीवन में अपनाने की जरूरत है।

वामन द्वादशी मेले की पहली संध्या में धार्मिक अनुष्ठान, मुख्यमंत्री का संबोधन, सामाजिक सेवा से जुड़े कार्यों का उल्लेख और पंजाबी कलाकारों की प्रस्तुतियां प्रमुख आकर्षण रहीं। कार्यक्रम के साथ अंबाला की वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा एक बार फिर सार्वजनिक रूप से जीवंत होती दिखाई दी।