हिमाचल प्रदेश में पर्यटन और कारोबार को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के संचालन को लेकर बड़ा बदलाव किया है। अब राज्य में दुकानें, शोरूम, मॉल, खुदरा श्रृंखला और अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठान चौबीसों घंटे संचालित किए जा सकेंगे। सरकार ने मौजूदा प्रावधानों में एक वर्ष के लिए छूट देते हुए रात के समय भी कारोबारी गतिविधियां जारी रखने का रास्ता साफ कर दिया है।
इस फैसले का सबसे सीधा असर पर्यटन स्थलों और औद्योगिक क्षेत्रों में दिखाई देने की उम्मीद है। शिमला, मनाली, धर्मशाला, सोलन सहित प्रमुख पर्यटन केंद्रों में देर रात तक पर्यटकों को खानपान और खरीदारी की सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। वहीं बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़, कालाअंब और मैहतपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में शिफ्ट आधारित आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
हालांकि, 24 घंटे कारोबार की अनुमति का मतलब श्रमिकों से लगातार काम लेना नहीं होगा। सरकार ने कर्मचारियों के काम के घंटे, साप्ताहिक अवकाश, ओवरटाइम, सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े प्रावधानों को बरकरार रखा है। इन नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठान मालिकों और प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी।
एक साल के लिए नियमों में छूट
श्रम, रोजगार एवं ओवरसीज प्लेसमेंट विभाग ने 22 सितंबर 2026 को इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। इसके तहत हिमाचल प्रदेश दुकान एवं वाणिज्यिक स्थापन अधिनियम, 1969 की धारा 9 और 10 तथा संबंधित नियमों के प्रावधानों में एक वर्ष के लिए छूट दी गई है।
यह छूट राजपत्र में अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से प्रभावी होगी और एक वर्ष तक लागू रहेगी। इसके बाद सरकार व्यवस्था की समीक्षा करते हुए आगे की कार्रवाई पर निर्णय ले सकती है।
धारा 9 और 10 के तहत दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के खुलने तथा बंद होने के समय और साप्ताहिक अवकाश से जुड़े प्रावधान लागू होते थे। नई व्यवस्था के तहत इन निर्धारित समय-सीमाओं में छूट देकर कारोबारियों को चौबीसों घंटे संचालन की सुविधा प्रदान की गई है।
सरकार के इस कदम को कारोबारी गतिविधियों को आसान बनाने और राज्य में रात के समय भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
पर्यटन कारोबार को मिलेगा रात तक कारोबार का अवसर
हिमाचल की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका है। बड़ी संख्या में पर्यटक शाम और रात के समय भी पर्यटन स्थलों पर पहुंचते हैं। ऐसे में दुकानों और खानपान प्रतिष्ठानों के निर्धारित समय के बाद बंद हो जाने से पर्यटकों को कई बार आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल पाती थीं।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद पर्यटन केंद्रों में कारोबारी अपनी जरूरत और मांग के अनुसार रात की शिफ्ट में भी प्रतिष्ठान संचालित कर सकेंगे। इससे होटल, रेस्तरां, ढाबे, चाय की दुकानें, खुदरा दुकानें और अन्य पर्यटक सेवाओं से जुड़े कारोबार को अतिरिक्त समय मिल सकेगा।
विशेष रूप से शिमला, मनाली, धर्मशाला और सोलन जैसे पर्यटन केंद्रों में इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। देर रात पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए खानपान और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता बढ़ाने में भी यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है।
सरकार की ओर से पर्यटन केंद्रों में रात्रिकालीन आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पहल के तहत पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को अलग-अलग शिफ्ट में संचालित करने की दिशा में यह कदम उठाया गया है।
रात में भोजन की उपलब्धता पर भी जोर
सरकार की ओर से यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब पर्यटन स्थलों में देर रात तक पर्यटकों को सुविधाएं उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। शिमला जैसे प्रमुख पर्यटन शहर में रात दस बजे के बाद भोजन की सुविधा सीमित होने की समस्या को लेकर मुख्यमंत्री ने चिंता जताई थी।
अब नई व्यवस्था के तहत पर्यटन केंद्रों में ढाबे, चाय की दुकानें और अन्य खानपान से जुड़े प्रतिष्ठान अपनी गतिविधियां देर रात तक जारी रख सकेंगे। इससे देर रात आने-जाने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, रात के समय प्रतिष्ठान संचालित करने वाले संचालकों को श्रम कानूनों और कर्मचारियों से जुड़े सुरक्षा प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य होगा।
24 घंटे खुलेंगे प्रतिष्ठान, लेकिन कर्मचारी 24 घंटे काम नहीं करेंगे
सरकार की छूट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रतिष्ठान को चौबीस घंटे खुला रखने की अनुमति मिलने का अर्थ कर्मचारियों से चौबीस घंटे काम लेना नहीं है।
कर्मचारियों के काम के घंटे अधिनियम के तहत निर्धारित सीमा के भीतर ही रहेंगे। किसी भी कर्मचारी से तय सीमा से अधिक काम नहीं लिया जा सकेगा। जरूरत पड़ने पर शिफ्ट व्यवस्था के माध्यम से प्रतिष्ठान को लगातार संचालित करना होगा।
हर कर्मचारी को सप्ताह में अनिवार्य साप्ताहिक अवकाश देना होगा। इसके अलावा तय सीमा से अधिक ओवरटाइम नहीं कराया जा सकेगा। ओवरटाइम से संबंधित प्रावधानों का उल्लंघन होने पर संबंधित प्रतिष्ठान प्रबंधन कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।
इस तरह सरकार ने कारोबारियों को संचालन की स्वतंत्रता देने के साथ श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था को भी लागू रखा है।
श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी मालिक की
नई व्यवस्था में कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण से संबंधित जिम्मेदारी प्रतिष्ठान मालिक या प्रबंधन की होगी। रात की शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना भी प्रबंधन की जिम्मेदारी होगी।
सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के नाम पर श्रम कानूनों की अनदेखी नहीं की जा सकती। यदि कोई प्रतिष्ठान निर्धारित कार्य अवधि, साप्ताहिक अवकाश, ओवरटाइम या सुरक्षा संबंधी प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो श्रम विभाग कार्रवाई कर सकता है।
इससे रात की शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों के अधिकारों की निगरानी की जिम्मेदारी भी संबंधित विभाग पर बढ़ जाएगी।
महिला कर्मचारियों के लिए पहले ही दी जा चुकी है नाइट शिफ्ट की अनुमति
हिमाचल सरकार ने महिला कर्मचारियों को रात की शिफ्ट में काम करने की अनुमति पहले ही प्रदान कर दी थी। अब दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को चौबीसों घंटे संचालन की छूट उसी दिशा में आगे बढ़ाया गया कदम है।
महिला कर्मचारियों को रात की शिफ्ट में काम कराने के लिए उनकी सहमति, सुरक्षा और आवश्यक सुविधाओं से जुड़े प्रावधानों का पालन करना होगा। परिवहन सुविधा और कार्यस्थल की निगरानी जैसी व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित करनी होंगी।
रात की शिफ्ट में महिला कर्मचारियों की तैनाती के दौरान सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था को विशेष महत्व दिया गया है। सीसीटीवी सहित आवश्यक सुरक्षा इंतजामों की जिम्मेदारी भी प्रतिष्ठान प्रबंधन की होगी।
औद्योगिक क्षेत्रों में भी बढ़ सकती हैं गतिविधियां
24 घंटे संचालन की छूट का असर केवल पर्यटन कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा। प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ विकास क्षेत्र, कालाअंब और मैहतपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में कई गतिविधियां पहले से ही अलग-अलग शिफ्ट में चलती हैं। ऐसे में आसपास की दुकानों, खुदरा प्रतिष्ठानों, भोजनालयों और अन्य व्यावसायिक सेवाओं के रात में खुले रहने से कर्मचारियों और उद्योगों को अतिरिक्त सुविधा मिल सकती है।
औद्योगिक क्षेत्रों में रात की शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भोजन, जरूरी सामान और अन्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने में भी यह व्यवस्था मददगार हो सकती है।
कारोबारियों की लंबे समय से थी मांग
दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को अधिक समय तक संचालित करने की मांग कारोबारी संगठनों की ओर से लंबे समय से उठाई जाती रही है। विशेष रूप से पर्यटन सीजन में व्यापारियों का तर्क रहा है कि पर्यटक देर शाम और रात तक बाजारों में खरीदारी तथा खानपान की सुविधा चाहते हैं।
अब सरकार ने निर्धारित समय और साप्ताहिक बंदी से जुड़े प्रावधानों में एक वर्ष की छूट देकर कारोबारियों को अपनी जरूरत के मुताबिक संचालन का विकल्प दिया है।
हालांकि, सभी कारोबारी प्रतिष्ठानों के लिए रातभर संचालन करना अनिवार्य नहीं होगा। जिन्हें अतिरिक्त समय में कारोबार करना आर्थिक रूप से उपयोगी लगेगा, वे निर्धारित शर्तों के तहत अपनी गतिविधियां जारी रख सकेंगे।
श्रम विभाग की बढ़ेगी जिम्मेदारी
नई व्यवस्था लागू होने के बाद श्रम एवं रोजगार विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। 24 घंटे कारोबार की अनुमति के साथ यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी कर्मचारी के काम के घंटे निर्धारित सीमा से अधिक न हों और साप्ताहिक अवकाश सहित अन्य अधिकारों का उल्लंघन न किया जाए।
रात की शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा, महिला कर्मचारियों के लिए निर्धारित व्यवस्थाओं और ओवरटाइम के नियमों की निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी।
सरकार ने कारोबार को अधिक समय तक चलाने का रास्ता खोला है, लेकिन इसके साथ श्रमिक हितों से जुड़े नियमों को लागू रखने का संदेश भी दिया है। ऐसे में आने वाले समय में विभागीय निरीक्षण और शिकायतों के आधार पर कार्रवाई की भूमिका अहम रहेगी।
नाइट इकोनामी को बढ़ाने की दिशा में कदम
हिमाचल सरकार का यह फैसला राज्य में नाइट इकोनामी को बढ़ावा देने की व्यापक कोशिश से जुड़ा है। पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था वाले राज्य में देर रात तक सेवाओं की उपलब्धता बढ़ने से पर्यटकों के खर्च और कारोबारी गतिविधियों के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है।
शिमला, मनाली और धर्मशाला जैसे पर्यटन केंद्रों में जहां बड़ी संख्या में पर्यटक शाम के बाद भी घूमते हैं, वहीं सोलन और औद्योगिक क्षेत्रों में शिफ्ट आधारित गतिविधियों की वजह से रात में सेवाओं की मांग बनी रहती है।
अब दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को चौबीस घंटे संचालन का विकल्प मिलने के बाद यह देखना होगा कि कितने कारोबारी इस सुविधा का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही सरकार के सामने यह चुनौती भी रहेगी कि कारोबारी गतिविधियों के विस्तार के साथ कर्मचारियों के अधिकारों और सुरक्षा मानकों का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जाए।
कुल मिलाकर, एक वर्ष के लिए दी गई यह छूट हिमाचल के व्यापार और पर्यटन क्षेत्र के लिए संचालन का नया विकल्प खोलती है। कारोबारियों को अधिक समय तक प्रतिष्ठान चलाने की स्वतंत्रता मिलेगी, जबकि श्रमिकों के काम के घंटे, साप्ताहिक अवकाश, ओवरटाइम और सुरक्षा से जुड़े नियम लागू रहेंगे।




