हिमाचल में कांग्रेस का गांव तक संगठन विस्तार, हर ब्लॉक में बनेगा 500-600 कार्यकर्ताओं का नेटवर्क

हिमाचल में कांग्रेस का गांव तक संगठन विस्तार, हर ब्लॉक में बनेगा 500-600 कार्यकर्ताओं का नेटवर्क

हिमाचल प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने की कवायद तेज कर दी है। चुनाव से करीब 14 महीने पहले पार्टी ने अपने संगठनात्मक ढांचे में व्यापक बदलाव की प्रक्रिया शुरू की है। अब कांग्रेस का फोकस केवल प्रदेश, जिला और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों तक सीमित रहने के बजाय पंचायतों और गांवों तक संगठन की सीधी पहुंच बनाने पर है।

पार्टी ने संगठन को अलग-अलग सामाजिक वर्गों और मुद्दों से जोड़ने के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर विभिन्न विभागों तथा सेल की कार्यकारिणियां गठित करने का फैसला लिया है। इसके तहत प्रत्येक जिला और ब्लॉक में 18 विभागों व सेल की अलग-अलग समितियां बनाई जा रही हैं। कांग्रेस की योजना हर ब्लॉक में करीब 500 से 600 सक्रिय कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़कर उन्हें जिम्मेदारियां देने की है।

पार्टी नेतृत्व का मानना है कि चुनावी तैयारियों के लिए केवल बड़े नेताओं और जिला स्तर के पदाधिकारियों पर निर्भर रहने के बजाय बूथ, पंचायत और गांव स्तर पर मजबूत नेटवर्क तैयार करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से संगठन के विस्तार की प्रक्रिया को तेज किया गया है।

जिला मुख्यालयों से गांव तक पहुंचेगा संगठन

अब तक कांग्रेस की अधिकांश संगठनात्मक गतिविधियां प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अलावा जिला और ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों के माध्यम से संचालित होती रही हैं। नए ढांचे में पार्टी ने सामाजिक समूहों, पेशेवर वर्गों और अलग-अलग मुद्दों से जुड़े लोगों को संगठन के साथ जोड़ने के लिए समानांतर व्यवस्था तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

इसके तहत जिला और ब्लॉक स्तर पर विभिन्न विभागों और सेल के पदाधिकारियों की नियुक्तियां की जा रही हैं। इन समितियों के माध्यम से पार्टी स्थानीय स्तर पर लोगों से संपर्क बढ़ाने के साथ-साथ उनके मुद्दों और समस्याओं को संगठन तक पहुंचाने का तंत्र विकसित करना चाहती है।

कांग्रेस की कोशिश है कि संगठन का कोई भी वर्ग ऐसा न रहे, जिसके साथ पार्टी का सीधा संपर्क न हो। किसान, व्यापारी, कर्मचारी, पूर्व सैनिक, अनुसूचित जाति वर्ग, पंचायत प्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों तक पहुंच बनाने के लिए अलग-अलग संगठनात्मक जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं।

18 विभागों और सेल को मिलेगी जिम्मेदारी

नए संगठनात्मक प्रारूप के तहत कांग्रेस सेवादल, किसान सेल, पंचायतीराज विभाग, अनुसूचित जाति विभाग, पूर्व सैनिक विभाग, इंटरनेट मीडिया विभाग, मानवाधिकार विभाग, शिकायत निवारण सेल, बौद्धिक विभाग, व्यापार सेल, अनुशासन समिति और असंगठित कांग्रेस समेत 18 विभागों व सेल की जिला और ब्लॉक स्तर पर कार्यकारिणियां गठित की जा रही हैं।

इन इकाइयों को केवल नाममात्र की संगठनात्मक जिम्मेदारी देने के बजाय स्थानीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार किया जा रहा है। संबंधित विभागों के पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्र और वर्ग के लोगों के साथ संपर्क बनाएंगे तथा स्थानीय मुद्दों को पार्टी संगठन के सामने रखेंगे।

इस व्यवस्था से कांग्रेस को अलग-अलग सामाजिक समूहों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्रवार राजनीतिक गतिविधियों की जानकारी हासिल करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

हर ब्लॉक में 500 से 600 सक्रिय कार्यकर्ताओं का लक्ष्य

संगठन विस्तार की इस कवायद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हर ब्लॉक में सक्रिय कार्यकर्ताओं का बड़ा नेटवर्क तैयार करना है। कांग्रेस की योजना प्रत्येक ब्लॉक में करीब 500 से 600 कार्यकर्ताओं को विभिन्न जिम्मेदारियों से जोड़ने की है।

इन कार्यकर्ताओं को पंचायत और गांव स्तर पर संगठन की गतिविधियों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। पार्टी चाहती है कि चुनाव के समय तक उसके पास ऐसा स्थानीय नेटवर्क मौजूद हो, जो मतदाताओं के साथ लगातार संपर्क में रहे और क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति की जानकारी संगठन के वरिष्ठ नेतृत्व तक पहुंचाता रहे।

इसके साथ ही पृष्ठ प्रभारियों और पंचायत अध्यक्षों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। इसका उद्देश्य संगठन की पहुंच को प्रत्येक पंचायत और गांव तक ले जाना है।

स्थानीय मुद्दों की जानकारी सीधे संगठन तक पहुंचाने पर जोर

कांग्रेस के नए ढांचे में स्थानीय स्तर से सूचनाएं जुटाने और उन्हें संगठन तक पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है। पार्टी की कोशिश है कि गांव या पंचायत स्तर पर किसी मुद्दे को लेकर लोगों में असंतोष, किसी सरकारी योजना को लेकर शिकायत, स्थानीय विकास से जुड़ी समस्या या राजनीतिक गतिविधि की जानकारी समय रहते संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों तक पहुंच सके।

इसके लिए ब्लॉक स्तर पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की योजना बनाई गई है। कार्यकर्ताओं के जरिए पार्टी अपने संगठन को केवल चुनाव के दौरान सक्रिय होने वाली व्यवस्था के बजाय लगातार काम करने वाले नेटवर्क में बदलना चाहती है।

पार्टी के सामने यह चुनौती भी है कि बड़ी संख्या में पदों पर नियुक्त किए जाने वाले कार्यकर्ताओं की सक्रियता को बनाए रखा जाए। इसी कारण नियुक्तियों के साथ उनकी जिम्मेदारियों की समीक्षा की व्यवस्था भी तैयार की जा रही है।

हर तीन महीने में होगी पदाधिकारियों के काम की समीक्षा

संगठन में नियुक्त होने वाले पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के कामकाज की नियमित निगरानी की जाएगी। पार्टी स्तर पर तय किया गया है कि पदाधिकारियों के काम की हर तीन महीने में समीक्षा की जाएगी।

समीक्षा के दौरान यह देखा जाएगा कि संबंधित पदाधिकारी ने अपने क्षेत्र में संगठन को कितना सक्रिय किया, कितने लोगों से संपर्क स्थापित किया और स्थानीय स्तर पर पार्टी की गतिविधियों को किस तरह आगे बढ़ाया। निष्क्रिय रहने वाले पदाधिकारियों को लेकर भी संगठन स्तर पर आवश्यक निर्णय लिए जा सकते हैं।

इस व्यवस्था का उद्देश्य संगठन में केवल पदों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी संभालने वाले कार्यकर्ताओं को सक्रिय बनाए रखना है। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि चुनाव से पहले प्रत्येक ब्लॉक और पंचायत में संगठन की वास्तविक गतिविधियां दिखाई दें।

पंचायत स्तर पर मजबूत उपस्थिति बनाने की कवायद

हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में पंचायत और गांव स्तर का संगठन राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। कांग्रेस अब इसी स्तर पर अपनी संगठनात्मक गतिविधियों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

पंचायत अध्यक्षों और पृष्ठ प्रभारियों की नियुक्ति के जरिए पार्टी स्थानीय स्तर पर नियमित संपर्क व्यवस्था तैयार कर रही है। इससे कांग्रेस को पंचायत स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों और नीतियों को पहुंचाने के साथ-साथ स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों को समझने का अवसर मिलेगा।

पार्टी की योजना है कि प्रदेश स्तर पर लिए जाने वाले संगठनात्मक फैसलों का असर सीधे गांवों तक दिखाई दे। इसके लिए जिला और ब्लॉक इकाइयों को अधिक सक्रिय भूमिका दी जा रही है।

चुनाव से पहले संगठन की क्षमता परखी जाएगी

कांग्रेस का यह पूरा संगठनात्मक अभियान आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जुड़ा हुआ है। पार्टी के लिए अगले कुछ महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए ढांचे के तहत नियुक्त किए गए पदाधिकारी और कार्यकर्ता कितनी सक्रियता के साथ जिम्मेदारियां निभाते हैं।

संगठन में बदलाव के जरिए पार्टी एक तरफ विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर मौजूद संगठनात्मक कमजोरियों की पहचान करने का प्रयास भी किया जा रहा है।

अब पार्टी की नजर केवल प्रदेश और जिला स्तर के प्रमुख नेताओं की गतिविधियों पर नहीं रहेगी। ब्लॉक, पंचायत और गांव स्तर पर संगठन को संभालने वाले कार्यकर्ताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। नियमित समीक्षा के जरिए पार्टी यह आकलन करने की तैयारी में है कि कौन से क्षेत्र संगठनात्मक रूप से मजबूत हैं और किन स्थानों पर अतिरिक्त मेहनत की जरूरत है।

25 और 26 को प्रदेश प्रभारी करेंगी बैठक

संगठन विस्तार की प्रक्रिया के बीच प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल 25 और 26 तारीख को पार्टी के पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगी। इन बैठकों में संगठन की मौजूदा स्थिति, नई नियुक्तियों और आगामी कार्यक्रमों को लेकर चर्चा होने की संभावना है।

बैठक के जरिए प्रदेश नेतृत्व जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय करने के लिए आगे की रणनीति पर भी विचार करेगा। नए पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों और उनके कामकाज की समीक्षा व्यवस्था को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं।

हिमाचल कांग्रेस महासचिव संगठन विनोद जिंटा के अनुसार, संगठन को धरातल पर मजबूत करने के लिए नए प्रयोग किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी का उद्देश्य संगठन को प्रदेश और जिला मुख्यालयों तक सीमित रखने के बजाय ब्लॉक, पंचायत और गांव स्तर तक प्रभावी तरीके से पहुंचाना है।

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का यह संगठनात्मक विस्तार पार्टी के लिए जमीनी नेटवर्क तैयार करने की एक बड़ी प्रक्रिया है। अब आने वाले महीनों में इसकी सफलता इस बात से तय होगी कि नई इकाइयां कितनी सक्रिय होती हैं और गांव स्तर तक संगठन की गतिविधियां किस तरह आगे बढ़ती हैं।