प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वाराणसी से गुजरात के वडनगर की ओर बढ़ रहे ‘सेवा यात्रियों’ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने यात्रा में शामिल युवाओं से समाजसेवा, सामाजिक बदलाव और जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़ने की बात कही। पीएम मोदी ने कहा कि सेवा का उद्देश्य केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज में मौजूद समस्याओं और बुराइयों को दूर करने की दिशा में भी लगातार प्रयास होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि गांधी जी ने देश की आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन उनका योगदान केवल अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष तक सीमित नहीं था। वे सामाजिक सुधार के लिए भी लगातार काम करते रहे। पीएम मोदी के मुताबिक, समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और कुरीतियों के खिलाफ काम करने की भावना को आगे बढ़ाने की जरूरत है।
उन्होंने सेवा यात्रियों से कहा कि किसी भी समाज की प्रगति केवल सरकारी योजनाओं या सुविधाओं से नहीं होती। इसके लिए लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझना और उनके साथ मिलकर समाधान की दिशा में काम करना भी जरूरी है। सेवा यात्रियों की यह यात्रा इसी भावना को जमीन पर पहुंचाने का माध्यम बन सकती है।
वडनगर और काशी से जुड़ी है सेवा यात्रा
‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत 17 सितंबर को दो दिशाओं में बाइक यात्राएं शुरू की गई थीं। एक यात्रा गुजरात के वडनगर से वाराणसी के लिए रवाना हुई, जबकि दूसरी यात्रा वाराणसी से वडनगर की ओर शुरू हुई। वडनगर प्रधानमंत्री मोदी का जन्मस्थान है, जबकि वाराणसी उनका लोकसभा क्षेत्र है। दोनों यात्राओं को उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर से जोड़ा गया है।
इन यात्राओं में बाइक सवार अलग-अलग समूहों में कई राज्यों, जिलों, कस्बों और गांवों से गुजर रहे हैं। अभियान का उद्देश्य सिर्फ एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचना नहीं है। यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों से संपर्क, सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी, युवाओं की भागीदारी और जनकल्याण से जुड़े विषयों पर संवाद भी किया जा रहा है।
सेवा यात्रियों की गतिविधियों में सफाई अभियान, स्थानीय निवासियों से बातचीत, स्कूलों और अन्य सामुदायिक संस्थानों में संपर्क तथा विभिन्न वर्गों के लोगों से संवाद जैसी गतिविधियां शामिल हैं। इस तरह बाइक यात्रा को सामाजिक संपर्क और सेवा गतिविधियों से जोड़ा गया है।
पीएम ने अपने जीवन की यात्राओं का भी किया जिक्र
बातचीत के दौरान नरेंद्र मोदी ने कहा कि सेवा यात्राओं का उनके जीवन में भी खास महत्व रहा है। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक जीवन में रहते हुए देश के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा करने का अवसर उन्हें मिला। कई जिलों में उन्हें रात बिताने और वहां के लोगों के साथ समय गुजारने का मौका मिला।
पीएम ने कहा कि यात्राओं के दौरान मिले अनुभवों ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया और लोगों के जीवन को करीब से समझने का अवसर दिया। उनके अनुसार, रास्ते में मिलने वाले लोग और परिस्थितियां कई बार किसी शिक्षक की तरह मार्गदर्शन करती हैं।
उन्होंने वडनगर और काशी का उल्लेख करते हुए कहा कि वडनगर से उन्हें जीवन के शुरुआती संस्कार मिले, जबकि काशी ने उन संस्कारों में सेवा के कई नए अनुभव जोड़े। उन्होंने सेवा यात्रा में शामिल युवाओं से कहा कि वे भी इस सफर को केवल बाइक यात्रा के रूप में न देखें, बल्कि अलग-अलग समाजों और लोगों को समझने के अवसर के तौर पर लें।
गांवों में बदलाव और बुनियादी सुविधाओं पर पीएम की बात
प्रधानमंत्री ने पिछले वर्षों में गांवों और शहरों के बीच अंतर को कम करने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि बीते करीब 12 वर्षों के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में काम हुआ है। उनके मुताबिक, गांवों में सुविधाओं के विस्तार के साथ महिलाओं और बेटियों के बीच आत्मनिर्भरता की भावना भी बढ़ी है।
उन्होंने सेवा यात्रियों से आग्रह किया कि वे रास्ते में जिन क्षेत्रों से गुजर रहे हैं, वहां के लोगों से बातचीत करें और स्थानीय बदलावों को समझें। यात्रा के दौरान सामने आने वाले अनुभवों को दर्ज करने और उनसे सीखने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
सेवा यात्रियों ने भी अलग-अलग इलाकों में अपने अनुभव साझा किए। यात्रा से जुड़े प्रतिभागियों ने स्थानीय लोगों, विद्यार्थियों और विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों से हुई बातचीत के बारे में प्रधानमंत्री को जानकारी दी। यात्रा कई जिलों और राज्यों से होकर गुजर रही है।
दीनदयाल उपाध्याय की जयंती का भी किया उल्लेख
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती का भी उल्लेख किया। उन्होंने उनके ‘चरैवति-चरैवति’ संदेश की चर्चा करते हुए लगातार आगे बढ़ते रहने और समाज के बीच सक्रिय रहने की बात कही।
पीएम मोदी ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय स्वयं भी लगातार यात्राएं करते रहे और लोगों के बीच जाकर काम करते थे। सेवा यात्रियों के लिए भी निरंतर आगे बढ़ना और समाज के बीच रहकर सेवा करना एक महत्वपूर्ण उद्देश्य होना चाहिए।
उन्होंने युवाओं से कहा कि यात्रा के दौरान मिलने वाले अनुभवों को सिर्फ व्यक्तिगत अनुभव मानकर न छोड़ें, बल्कि उनसे समाज और देश को समझने की कोशिश करें। उनके अनुसार, देश को समझने के लिए जमीन से जुड़ना और अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों के साथ संवाद करना महत्वपूर्ण है।
24 सितंबर को वडनगर से निकले यात्रियों से भी हुई थी बातचीत
प्रधानमंत्री ने एक दिन पहले यानी 24 सितंबर को वडनगर से वाराणसी की ओर जा रहे सेवा यात्रियों के साथ भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की थी। इस दिशा में यात्रा कर रहे प्रतिभागियों को 10 समूहों में बांटा गया है।
उस बातचीत में भी प्रधानमंत्री ने सेवा को यात्रा का मुख्य आधार बताया था। उन्होंने एक पुरानी मान्यता का उल्लेख करते हुए कहा था कि जब कोई व्यक्ति लंबी यात्रा पूरी करके लौटता है और कोई दूसरा व्यक्ति उसका सम्मान करता है, तो यात्रा से प्राप्त आध्यात्मिक पुण्य का आधा हिस्सा सम्मान करने वाले व्यक्ति को भी मिलता है। पीएम ने कहा था कि सेवा यात्रियों को नमन करके वह भी उस पुण्य में भागीदार बन रहे हैं।
इस बातचीत में यात्रा के दौरान लोगों से हुए संपर्क और अलग-अलग क्षेत्रों में किए जा रहे सेवा कार्यों पर भी चर्चा हुई थी। सेवा यात्रियों का उद्देश्य मार्ग में आने वाले गांवों और शहरों में स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित करना और सेवा से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाना है।
7 अक्टूबर तक जारी रहेगी यात्रा
दोनों दिशाओं में शुरू की गई बाइक यात्राएं 7 अक्टूबर तक चलने वाली हैं। इन यात्राओं को प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से जुड़े ‘सेवा संकल्प अभियान’ का हिस्सा बनाया गया है।
17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर इस अभियान की शुरुआत की गई थी। वडनगर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की मौजूदगी में यात्रा को रवाना किया गया था। दूसरी ओर वाराणसी से निकलने वाली यात्रा की शुरुआत भी उसी दिन की गई थी।
अभियान के तहत यात्रा को युवाओं की भागीदारी, जनसंपर्क, सामाजिक सेवा, सांस्कृतिक जुड़ाव और स्थानीय समुदायों के साथ संवाद से जोड़ने की योजना रखी गई है। इस दौरान यात्रियों का अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों से संपर्क करने का कार्यक्रम है।
76वें जन्मदिन पर देशभर में हुए थे कार्यक्रम
प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन पर 17 सितंबर को देश के अलग-अलग हिस्सों में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। इसी दौरान ‘सेवा संकल्प अभियान’ की शुरुआत हुई और वडनगर तथा वाराणसी को जोड़ने वाली बाइक यात्राएं शुरू की गईं।
जन्मदिन के अवसर पर ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के तहत भी कई स्थानों पर दीपोत्सव आयोजित किए गए थे। विभिन्न राज्यों में लोगों ने दीप जलाकर कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। गुजरात में भी जन्मदिन से जुड़े कई कार्यक्रम हुए थे।
वडनगर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने का उल्लेख किया था। इसी अवसर पर वडनगर से वाराणसी के लिए बाइक यात्रा को रवाना किया गया।
यात्रा का संदेश सेवा और जनसंपर्क पर केंद्रित
सेवा यात्राओं को इस तरह तैयार किया गया है कि इसमें बाइक से लंबी दूरी तय करने के साथ-साथ सामाजिक संपर्क को भी प्रमुख स्थान मिले। प्रतिभागी जिन इलाकों से गुजर रहे हैं, वहां स्थानीय लोगों से बातचीत कर रहे हैं और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भी यात्रियों को समाज के बीच रहकर काम करने की बात कही। गांधी जी के सामाजिक सुधार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समाज में बदलाव की प्रक्रिया लगातार चलती रहनी चाहिए। उन्होंने सेवा को केवल किसी एक अवसर या आयोजन तक सीमित रखने के बजाय नियमित सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखने पर जोर दिया।
इस प्रकार वडनगर और वाराणसी के बीच चल रही यह यात्रा प्रधानमंत्री मोदी के जन्मस्थान और राजनीतिक क्षेत्र को जोड़ने के साथ-साथ उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों से जुड़े अभियान का हिस्सा है। 7 अक्टूबर तक चलने वाली इन यात्राओं में शामिल प्रतिभागियों के लिए अलग-अलग राज्यों और समुदायों के बीच संवाद तथा सेवा गतिविधियां प्रमुख हिस्सा बनी हुई हैं।




