पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत के खिलाफ कई पुराने और विवादित मुद्दे फिर से उठाए। अपने संबोधन में उन्होंने सिंधु नदी के पानी, जम्मू-कश्मीर, 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य तनाव और कथित इस्लामोफोबिया का जिक्र किया। सबसे तीखी टिप्पणी सिंधु नदी के पानी को लेकर रही। शहबाज ने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, उसमें बाधा डालने या उसका रुख बदलने की किसी भी कोशिश को उनका देश ‘युद्ध की कार्रवाई’ मानेगा।
शहबाज का भाषण ऐसे समय हुआ है जब भारत और पाकिस्तान के बीच कई मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मंच से बातचीत और शांति की जरूरत पर भी जोर दिया, लेकिन साथ ही भारत के खिलाफ पाकिस्तान का रुख दोहराते हुए पानी और कश्मीर को सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के तौर पर पेश किया।
सिंधु नदी के पानी पर भारत को चेतावनी
शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में सिंधु नदी प्रणाली को पाकिस्तान के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पानी को किसी देश के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक नदियां देशों और लोगों के लिए जीवन का आधार हैं, इसलिए उन्हें टकराव का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए।
इसी संदर्भ में उन्होंने भारत को चेतावनी देते हुए कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, उसके प्रवाह में रुकावट डालने या उसे मोड़ने की कोशिश को पाकिस्तान युद्ध की कार्रवाई के रूप में देखेगा।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने सिंधु जल संधि को लेकर भी भारत की स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि भारत की ओर से संधि को एकतरफा तौर पर स्थगित रखने का फैसला कानूनी आधार से रहित है। शहबाज ने कहा कि पाकिस्तान अब भी इस समझौते को वैध और प्रभावी मानता है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान के रुख को समर्थन मिला है और भारत के कदमों पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, ये दावे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के अपने संबोधन में रखे गए पक्ष का हिस्सा हैं।
कश्मीर को बताया पाकिस्तान की ‘गर्दन की नस’
संयुक्त राष्ट्र में शहबाज शरीफ ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया में स्थायी शांति के लिए कश्मीर विवाद का समाधान जरूरी है।
उन्होंने कश्मीर को पाकिस्तान की ‘जगुलर वेन’ यानी ‘गर्दन की नस’ बताया और कहा कि पाकिस्तान कश्मीरियों के आत्मनिर्णय के अधिकार के समर्थन में अपनी कूटनीतिक और राजनीतिक कोशिशें जारी रखेगा। शहबाज ने संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रस्तावों का हवाला देते हुए कहा कि कश्मीर का मुद्दा लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंच पर मौजूद है।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने भारत पर कश्मीर की स्थिति बदलने और वहां जनसांख्यिकीय बदलाव की कोशिश करने जैसे आरोप भी लगाए। भारत इन दावों को स्वीकार नहीं करता और जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न हिस्सा बताता रहा है।
पहलगाम के बाद 2025 के सैन्य तनाव का जिक्र
अपने संबोधन में शहबाज ने 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव को भी याद किया। उन्होंने पाकिस्तान की सेना की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तारीफ की।
शहबाज के मुताबिक उस समय दोनों परमाणु-सक्षम पड़ोसी देशों के बीच स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान ने अपनी रक्षा के लिए जवाब दिया और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से किए गए हस्तक्षेप ने तनाव को और बढ़ने से रोकने में भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया को दोबारा ऐसी स्थिति में नहीं पहुंचना चाहिए जहां दोनों देशों के बीच बड़ा सैन्य संघर्ष शुरू होने का खतरा पैदा हो। इसके लिए उन्होंने कश्मीर विवाद के समाधान को जरूरी बताया।
इस्लामोफोबिया पर भी पाकिस्तान का फोकस
शहबाज शरीफ ने अपने भाषण का एक हिस्सा दुनिया में कथित बढ़ते इस्लामोफोबिया के लिए समर्पित किया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदायों को नफरत, भेदभाव और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने मस्जिदों पर हमलों और कुरान के अपमान जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक नफरत के लिए वैश्विक स्तर पर कोई जगह नहीं होनी चाहिए। पाकिस्तान की ओर से जारी भाषण के विवरण में भारत का भी संदर्भ आया और शहबाज ने देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों को लेकर कई आरोप लगाए।
शहबाज ने भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ी विचारधारा पर भी आरोप लगाए और कहा कि इससे कथित तौर पर सांप्रदायिक तनाव, भीड़ हिंसा और धार्मिक स्थलों से जुड़े विवाद बढ़ते हैं। ये आरोप पाकिस्तान के प्रधानमंत्री द्वारा UNGA में रखे गए राजनीतिक दावे थे।
भारत की ओर से भी पाकिस्तान को जवाब
शहबाज के भाषण के बाद संयुक्त राष्ट्र में भारत की ओर से पाकिस्तान के आरोपों पर पलटवार किया गया। भारत ने पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि केवल किसी दावे को बार-बार दोहराने से वह सच नहीं बन जाता।
भारत की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के कश्मीर संबंधी दावों को खारिज करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने पाकिस्तान से अपने कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में रहने वाले लोगों की स्थिति पर ध्यान देने को कहा।
भारतीय पक्ष ने आतंकवाद के मुद्दे पर भी पाकिस्तान के रिकॉर्ड का उल्लेख किया और कहा कि आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान की भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं पुरानी हैं।
9/11 और ओसामा बिन लादेन का जिक्र
पेटल गहलोत ने पाकिस्तान को जवाब देते हुए 9/11 आतंकी हमले का भी संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया को उन घटनाओं को नहीं भूलना चाहिए जिनमें पाकिस्तान का नाम आतंकवाद के संदर्भ में सामने आया है।
उन्होंने ओसामा बिन लादेन का उल्लेख करते हुए कहा कि 9/11 हमलों का मास्टरमाइंड पाकिस्तान में सैन्य प्रतिष्ठान के नजदीक लंबे समय तक छिपा रहा था। भारत ने इसी उदाहरण के जरिए पाकिस्तान के आतंकवाद संबंधी दावों पर सवाल उठाया।
गहलोत ने पाकिस्तान की सेना की प्रशंसा किए जाने पर भी सवाल उठाया और कहा कि आतंकवाद से जुड़े मामलों को लेकर पाकिस्तान की ओर से दिए जाने वाले बयानों को उसके पिछले रिकॉर्ड के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए।
‘फॉर्म-47 सरकार’ वाले बयान से पाकिस्तान की राजनीति पर निशाना
भारतीय प्रतिनिधि ने अपने जवाब में पाकिस्तान की घरेलू राजनीति का भी जिक्र किया। उन्होंने शहबाज शरीफ की सरकार को ‘फॉर्म-47 सरकार’ कहकर संबोधित किया।
‘फॉर्म-47’ का संदर्भ पाकिस्तान में 2024 के आम चुनावों के बाद विपक्ष द्वारा लगाए गए चुनावी अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ा है। विपक्षी दलों ने चुनाव परिणामों को लेकर सवाल उठाए थे और चुनाव प्रक्रिया में धांधली के आरोप लगाए थे। इस राजनीतिक संदर्भ का इस्तेमाल भारत की ओर से पाकिस्तान सरकार पर टिप्पणी करने के लिए किया गया।
इस तरह संयुक्त राष्ट्र में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बयानों में एक-दूसरे के खिलाफ पुराने आरोपों और विवादित मुद्दों की लंबी सूची सामने आई।
होर्मुज और बाब-अल-मंदेब को लेकर भी बोले शहबाज
भारत-पाकिस्तान विवादों के अलावा शहबाज शरीफ ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर भी बात की। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बताया।
उन्होंने कहा कि इन दोनों रास्तों को अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के लिए खुला रखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक इन समुद्री मार्गों में किसी तरह की रुकावट का असर केवल संबंधित क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
शहबाज ने इन रास्तों को दुनिया की अर्थव्यवस्था की ‘धमनियां’ बताते हुए कहा कि इन्हें देशों के बीच टकराव का केंद्र नहीं बनना चाहिए। उन्होंने मौजूदा क्षेत्रीय संकटों के बीच बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात कही।
UN में दोनों देशों के बयानों से फिर सामने आया तनाव
संयुक्त राष्ट्र महासभा में शहबाज शरीफ के भाषण और भारत के जवाब से एक बार फिर दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेद अंतरराष्ट्रीय मंच पर सामने आए। पाकिस्तान ने पानी और कश्मीर को अपनी प्रमुख चिंताओं के रूप में रखा, जबकि भारत ने आतंकवाद और पाकिस्तान के दावों पर सवाल उठाए।
शहबाज ने एक तरफ दक्षिण एशिया में युद्ध की स्थिति दोबारा पैदा न होने देने की बात कही, वहीं सिंधु नदी के पानी को लेकर भारत को बेहद कड़ी चेतावनी भी दी। दूसरी ओर, भारत ने कश्मीर पर पाकिस्तान के दावे को खारिज करते हुए आतंकवाद से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
इस पूरे घटनाक्रम में सिंधु जल संधि, जम्मू-कश्मीर, आतंकवाद और 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य तनाव जैसे मुद्दे एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र के मंच पर चर्चा के केंद्र में रहे।




