जालंधर। अनंत चौदस के अवसर पर जालंधर स्थित ऐतिहासिक सिद्ध बाबा सोढल मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालु बाबा सोढल के दरबार में पहुंच रहे हैं। इसी बीच पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने सिद्ध बाबा सोढल मंदिर पहुंचकर माथा टेका और पूजा-अर्चना की। उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ इस पवित्र पर्व की खुशियां साझा करते हुए सभी को शुभकामनाएं दीं।
राज्यपाल कटारिया ने मंदिर में दर्शन के बाद कहा कि सिद्ध बाबा सोढल के प्रति देश और दुनिया भर में रहने वाले लोगों की गहरी आस्था है। श्रद्धालुओं का इस धार्मिक स्थल के साथ केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव भी है। यही कारण है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और बाबा सोढल के दरबार में अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं।
इस दौरान राज्यपाल ने गुरुद्वारा सोढल छावनी निहंग सिंघा में भी माथा टेका। उन्होंने धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर देश में सुख-शांति, समृद्धि और भाईचारे की कामना की। राज्यपाल के दौरे के दौरान प्रशासन और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में सोढल सुधार सभा के अध्यक्ष पंकज चड्ढा, पूर्व विधायक केडी भंडारी, गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पायलट और शिरोमणि अकाली दल के महासचिव मनिंदर पाल सिंह गुंबर सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।
अनंत चौदस पर चरम पर पहुंचा मेले का उत्साह
सिद्ध बाबा सोढल मंदिर में अनंत चौदस के मौके पर लगने वाला मेला जालंधर के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल है। इस बार भी मेले को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। मंदिर परिसर के अलावा आसपास के करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में भी दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है।
मेले के चलते मंदिर के आसपास का पूरा क्षेत्र धार्मिक और उत्सवी माहौल में बदल गया है। जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए लंगर लगाए गए हैं। मेले के क्षेत्र में चार सौ से अधिक स्थानों पर विभिन्न प्रकार के व्यंजनों के लंगर लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें श्रद्धालुओं के लिए भोजन और प्रसाद की व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा मंदिर के आसपास और प्रमुख मार्गों पर अस्थायी दुकानें भी सजाई गई हैं। इन दुकानों पर धार्मिक सामग्री, खिलौने, खान-पान और रोजमर्रा के सामान के अलावा बच्चों के लिए मनोरंजन से जुड़ी चीजें उपलब्ध हैं। शाम होते ही इन दुकानों पर भीड़ बढ़ जाती है और देर रात तक खरीदारी का सिलसिला चलता रहता है।
मुख्य दिन डेढ़ लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान
मेले के आयोजकों के अनुसार, अनंत चौदस के मुख्य दिन करीब डेढ़ लाख श्रद्धालुओं के सिद्ध बाबा सोढल मंदिर में पहुंचने का अनुमान है। हालांकि श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचना मुख्य पर्व से दो दिन पहले ही शुरू हो गया था। पंजाब के अलग-अलग शहरों के अलावा दूसरे राज्यों और विदेशों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं।
मुख्य पर्व के दिन मंदिर में दर्शन और पूजा के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगने की संभावना है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पारंपरिक धार्मिक रस्मों में हिस्सा लेंगे। बाबा सोढल के प्रति आस्था रखने वाले परिवार इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना करते हैं।
अनंत चौदस पर मंदिर में खेतड़ी अर्पित करने और चौदह रोट का प्रसाद चढ़ाने की परंपरा भी निभाई जाती है। श्रद्धालु परिवार सहित मंदिर पहुंचकर इन धार्मिक रस्मों को पूरा करते हैं। कई परिवारों के लिए यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है।
मंदिर परिसर में विशेष व्यवस्थाएं
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर प्रबंधन की ओर से भी विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर प्रांगण में सोढल मंदिर ट्रस्ट की ओर से एक विशेष काउंटर स्थापित किया गया है। यहां से मेले और मंदिर से संबंधित विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है।
श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए मंदिर के मुख्य द्वार के सामने अलग-अलग विभागों की सहायता व्यवस्था भी की गई है। यहां पुलिस कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहां से सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक समन्वय की निगरानी की जा रही है।
इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से नि:शुल्क मेडिकल कैंप लगाया गया है। मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण स्वास्थ्य विभाग की टीम को तैनात किया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर श्रद्धालुओं को तत्काल प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराई जा सके।
नगर निगम की ओर से भी मुख्य प्रवेश क्षेत्र के सामने कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। यहां से सफाई, नागरिक सुविधाओं और मेले से जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं पर नजर रखी जा रही है।
धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक भागीदारी भी
सिद्ध बाबा सोढल मेले की खासियत यह है कि इसमें धार्मिक गतिविधियों के साथ सामाजिक भागीदारी भी बड़े स्तर पर दिखाई देती है। शहर के विभिन्न हिस्सों से लोग श्रद्धालुओं के लिए लंगर और अन्य सेवा कार्यों में योगदान करते हैं। बड़ी संख्या में सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं भी अपनी सेवाएं देती हैं।
मेले के दौरान श्रद्धालुओं के लिए पानी, भोजन और चिकित्सा जैसी सुविधाओं की व्यवस्था में विभिन्न संस्थाएं सहयोग करती हैं। इससे मेले का स्वरूप केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसमें सेवा और सामुदायिक भागीदारी की भावना भी दिखाई देती है।
मंदिर के आसपास लगातार बढ़ रही भीड़ के कारण प्रशासन और आयोजकों के लिए व्यवस्था बनाए रखना भी बड़ी चुनौती है। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ ही सुरक्षा, यातायात, सफाई और चिकित्सा सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
देर रात तक जारी रहेगा मेले का माहौल
अनंत चौदस के अवसर पर मंदिर परिसर और आसपास के बाजारों में देर रात तक चहल-पहल रहने की उम्मीद है। सुबह से ही दर्शन के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। परिवारों के साथ पहुंचे लोग पूजा-अर्चना के बाद मेले में खरीदारी और खान-पान का आनंद ले रहे हैं।
मंदिर के आसपास लगाए गए लंगरों में श्रद्धालुओं की सेवा की जा रही है। वहीं, दुकानदारों और अस्थायी स्टॉल संचालकों ने भी मेले को लेकर विशेष तैयारियां की हैं। बच्चों और परिवारों के लिए मेले में अलग-अलग तरह के आकर्षण मौजूद हैं।
सिद्ध बाबा सोढल मंदिर से जुड़ा यह आयोजन हर वर्ष जालंधर की धार्मिक पहचान का प्रमुख हिस्सा बनता है। अनंत चौदस के अवसर पर यहां जुटने वाली भीड़ शहर के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी पर्व जैसा माहौल पैदा करती है। इस बार भी श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में पूरे दिन रौनक बनी हुई है।




