सिर्फ वायरल समझकर न करें नजरअंदाज, इन संकेतों से पहचानें डेंगू का खतरा

सिर्फ वायरल समझकर न करें नजरअंदाज, इन संकेतों से पहचानें डेंगू का खतरा

बारिश और मौसम में बदलाव के साथ कई तरह के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसी दौरान मच्छरों की संख्या बढ़ने से डेंगू के मामले भी सामने आने लगते हैं। शुरुआत में डेंगू और सामान्य वायरल फीवर के लक्षण काफी हद तक एक जैसे दिखाई दे सकते हैं, जिसकी वजह से कई लोग इसे साधारण बुखार मानकर घर पर ही इलाज शुरू कर देते हैं। लेकिन कुछ खास लक्षण ऐसे होते हैं, जिन पर ध्यान देकर डेंगू की आशंका को समय रहते समझा जा सकता है। खासकर तेज बुखार के साथ शरीर में तेज दर्द, सिरदर्द, आंखों के आसपास दर्द, मितली या अत्यधिक कमजोरी जैसी शिकायत हो तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। डेंगू की पुष्टि केवल लक्षणों के आधार पर नहीं की जा सकती, इसलिए संदिग्ध स्थिति में डॉक्टर की सलाह और जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट जरूरी हो सकता है।

डेंगू एक वायरल संक्रमण है, जो संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से इंसान तक पहुंचता है। जब डेंगू वायरस से संक्रमित मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है, तो वायरस उसके शरीर में प्रवेश कर सकता है। एडीज मच्छर आमतौर पर दिन के समय भी काट सकता है और इसके लिए बड़े तालाब या गंदे नाले का होना जरूरी नहीं है। घर के आसपास जमा थोड़ी मात्रा में साफ पानी भी इसके प्रजनन का स्थान बन सकता है। कूलर, पानी की टंकी, बाल्टी, गमले, पुराने टायर, टूटे बर्तन या ऐसी कोई भी चीज जिसमें पानी कई दिनों तक जमा रहे, मच्छरों के पनपने का कारण बन सकती है। इसलिए डेंगू से बचाव केवल मच्छर भगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि मच्छरों के प्रजनन की जगहों को खत्म करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

अचानक तेज बुखार हो तो रहें सतर्क

डेंगू के शुरुआती चरण में सबसे आम शिकायत अचानक तेज बुखार की होती है। कई बार बुखार काफी तेजी से बढ़ सकता है और इसके साथ व्यक्ति को ठंड लगना, सिर में भारीपन या शरीर टूटने जैसा महसूस हो सकता है। यही वजह है कि शुरुआत में डेंगू को सामान्य वायरल बुखार समझ लिया जाता है। हालांकि हर तेज बुखार डेंगू नहीं होता और केवल बुखार आने से डेंगू की पुष्टि नहीं होती। यदि बुखार के साथ दूसरे लक्षण भी लगातार दिखाई दे रहे हैं या मरीज की हालत बिगड़ रही है, तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है। खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में लगातार बुखार को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

शरीर और जोड़ों में दर्द भी हो सकता है संकेत

डेंगू में बुखार के साथ शरीर में दर्द की शिकायत आम है। कई मरीजों को मांसपेशियों, हड्डियों और जोड़ों में काफी दर्द महसूस हो सकता है। इसके अलावा सिरदर्द भी परेशान कर सकता है। कुछ लोगों को आंखों के पीछे या आंखों के आसपास दर्द महसूस होता है, जो डेंगू के दौरान देखे जाने वाले लक्षणों में शामिल है। अगर तेज बुखार के साथ शरीर में असामान्य दर्द और कमजोरी कई घंटों या दिनों तक बनी रहती है, तो इसे केवल थकान या मौसम बदलने का असर मानकर टालना उचित नहीं है। डॉक्टर मरीज के लक्षणों, बीमारी की अवधि और जरूरत के अनुसार जांच की सलाह दे सकते हैं।

उल्टी, मितली और पेट दर्द पर भी दें ध्यान

डेंगू में हर मरीज के लक्षण एक जैसे नहीं होते। कुछ लोगों को बुखार और दर्द के साथ मितली या उल्टी की समस्या हो सकती है। पेट में दर्द या पेट से जुड़ी दूसरी परेशानियां भी दिखाई दे सकती हैं। यदि व्यक्ति बार-बार उल्टी कर रहा है, पानी या दूसरे तरल पदार्थ नहीं रख पा रहा है, बहुत अधिक कमजोरी महसूस कर रहा है या पेट में लगातार तेज दर्द हो रहा है, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। खास बात यह है कि बीमारी के दौरान केवल तापमान कम होना ही सुधार का संकेत नहीं माना जा सकता। डेंगू में कुछ मरीजों में बुखार कम होने के आसपास का समय भी चिकित्सकीय निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।

बुखार कम होने के बाद भी लापरवाही न करें

डेंगू से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बात यह है कि मरीज को केवल बुखार देखकर अपनी हालत का अंदाजा नहीं लगाना चाहिए। कई बार बुखार कम होने के बाद व्यक्ति को लगता है कि बीमारी पूरी तरह ठीक हो गई है और वह सामान्य दिनचर्या में लौट जाता है। लेकिन डेंगू में बीमारी के अलग-अलग चरण हो सकते हैं और कुछ मरीजों में गंभीर लक्षण बाद में विकसित हो सकते हैं। इसलिए यदि डॉक्टर ने जांच, निगरानी या दोबारा परीक्षण की सलाह दी है, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मसूड़ों या नाक से खून आना, उल्टी या मल में खून दिखाई देना, तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, बहुत अधिक कमजोरी, बेचैनी, असामान्य नींद या सांस लेने में परेशानी जैसे संकेत दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

प्लेटलेट्स कम होने का मतलब हमेशा खतरा नहीं

डेंगू का नाम सुनते ही सबसे पहले प्लेटलेट्स का ख्याल आता है। बीमारी के दौरान प्लेटलेट्स की संख्या कम हो सकती है, लेकिन केवल प्लेटलेट्स की एक संख्या देखकर मरीज की स्थिति का पूरा आकलन नहीं किया जा सकता। डॉक्टर मरीज के लक्षणों, जांच रिपोर्ट और शरीर की अन्य स्थितियों को ध्यान में रखकर उपचार तय करते हैं। इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए किसी घरेलू नुस्खे या दवा का इस्तेमाल करना सही तरीका नहीं है। सोशल मीडिया या आसपास के लोगों से मिली सलाह के आधार पर इलाज बदलने की बजाय डॉक्टर के निर्देशों का पालन करना अधिक सुरक्षित है।

पपीते के पत्ते और घरेलू नुस्खों को लेकर सावधानी

डेंगू में पपीते के पत्तों का रस या दूसरे घरेलू उपायों को लेकर कई तरह के दावे किए जाते हैं। लेकिन इन्हें डेंगू का प्रमाणित इलाज मानना सही नहीं है। पपीते के पत्तों का सेवन प्लेटलेट्स को निश्चित रूप से बढ़ाता है या गंभीर डेंगू को रोक देता है, ऐसा मानकर डॉक्टर की सलाह को छोड़ना उचित नहीं होगा। डेंगू के मरीज को पर्याप्त तरल पदार्थ, आराम और डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार की जरूरत होती है। किसी भी हर्बल उत्पाद, सप्लीमेंट या घरेलू नुस्खे को इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है, खासकर तब जब मरीज पहले से कोई दूसरी दवा ले रहा हो।

डेंगू में खुद से दवा लेना पड़ सकता है भारी

बुखार होने पर कई लोग बिना डॉक्टर से पूछे दर्द या बुखार की दवा ले लेते हैं। डेंगू की आशंका होने पर ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि कुछ दवाएं रक्तस्राव के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। इसलिए बुखार या शरीर के दर्द के लिए दवा लेने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्यकर्मी से सलाह लेना जरूरी है। एंटीबायोटिक दवाएं भी वायरल संक्रमण पर सीधे काम नहीं करतीं और उन्हें बिना जरूरत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मरीज को कौन-सी दवा, कितनी मात्रा में और कितने समय तक लेनी है, यह चिकित्सकीय सलाह के आधार पर ही तय होना चाहिए।

पानी और खानपान का रखें खास ख्याल

डेंगू के दौरान शरीर में पानी की कमी होने का खतरा बढ़ सकता है, खासकर तब जब मरीज को उल्टी हो रही हो या वह पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ नहीं ले पा रहा हो। डॉक्टर की सलाह के अनुसार पानी और अन्य उपयुक्त तरल पदार्थ लेना शरीर में हाइड्रेशन बनाए रखने में मदद कर सकता है। भोजन में हल्का, संतुलित और आसानी से पचने वाला खाना लिया जा सकता है। बहुत तला-भुना या ऐसा भोजन जिससे मरीज को परेशानी बढ़े, उससे बचना बेहतर है। हालांकि डाइट हर व्यक्ति की स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है, इसलिए गंभीर लक्षणों वाले मरीज को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही खानपान रखना चाहिए।

घर के आसपास पानी जमा न होने दें

डेंगू से बचने का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों को पनपने से रोकना है। इसके लिए घर के आसपास कहीं भी पानी कई दिनों तक जमा न रहने दें। कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें और उसके अंदर की सफाई करें। गमलों की प्लेट, बाल्टी, पुराने टायर, खाली डिब्बे और छत पर रखे ऐसे सामान की जांच करें जिनमें बारिश का पानी जमा हो सकता है। पानी की टंकी को ढककर रखें और जहां संभव हो वहां मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं। घर के अंदर और बाहर साफ-सफाई रखने से मच्छरों के प्रजनन के संभावित स्थान कम किए जा सकते हैं।

मच्छरों से बचाव भी है जरूरी

डेंगू के मौसम में केवल घर की सफाई करना ही पर्याप्त नहीं है। मच्छरों के काटने से बचने के लिए पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना, जरूरत के अनुसार मच्छरदानी या रिपेलेंट का इस्तेमाल करना और घर में मच्छरों की मौजूदगी कम करने के उपाय करना उपयोगी हो सकता है। दिन के समय भी मच्छरों से बचाव पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर दिन में सक्रिय रह सकता है। यदि आसपास डेंगू के मामले सामने आ रहे हैं, तो परिवार के सभी सदस्यों को इन सावधानियों का पालन करना चाहिए।

डेंगू का हर मामला गंभीर नहीं होता, लेकिन कुछ मरीजों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए तेज बुखार के साथ शरीर में असामान्य दर्द, उल्टी, पेट दर्द, अत्यधिक कमजोरी या किसी तरह का रक्तस्राव जैसे संकेत नजर आएं तो इंतजार करने की बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। बीमारी की पुष्टि के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट करा सकते हैं और मरीज की स्थिति के मुताबिक निगरानी व उपचार तय कर सकते हैं। मौसम बदलने के दौरान बुखार को केवल सामान्य वायरल मानकर लंबे समय तक नजरअंदाज करने के बजाय लक्षणों पर नजर रखना, पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेना तथा मच्छरों से बचाव करना डेंगू के जोखिम को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।