नवंबर का महीना शुरू होते ही मौसम में बदलाव महसूस होने लगता है। सुबह और रात के समय ठंड बढ़ने लगती है, जबकि दिन में तापमान कुछ ज्यादा रहता है। मौसम का यही उतार-चढ़ाव कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बन जाता है। खासकर उन लोगों को ज्यादा दिक्कत होती है, जिन्हें धूल, मिट्टी या बदलते मौसम से एलर्जी होती है। ऐसे में सुबह उठते ही लगातार छींक आना, नाक बंद होना, गले में खराश और आंखों से पानी आने जैसी समस्याएं सामने आने लगती हैं।
अक्सर लोग इन लक्षणों को सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन हर बार ऐसा होना जरूरी नहीं है। कई मामलों में इसके पीछे विंटर एलर्जी यानी सर्दियों में बढ़ने वाली एलर्जी की समस्या होती है। इस दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली वातावरण में मौजूद कुछ कणों को नुकसानदायक समझकर प्रतिक्रिया देने लगती है। इसका असर नाक, गले, आंखों और सांस लेने की प्रक्रिया पर दिखाई देता है।
सर्दियों में प्रदूषण, धूल, घरों के भीतर जमा एलर्जी पैदा करने वाले तत्व और तापमान में बदलाव इस परेशानी को बढ़ा सकते हैं। अच्छी बात यह है कि कुछ जरूरी सावधानियां अपनाकर इसके लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। आइए समझते हैं कि आखिर विंटर एलर्जी क्या है, इसके पीछे कौन-सी वजहें जिम्मेदार हैं और इससे बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
सबसे पहले समझें, विंटर एलर्जी के लक्षण क्या हैं?
सर्दियों में होने वाली एलर्जी के लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। किसी को लगातार छींकें आती हैं, तो किसी की नाक कई दिनों तक बंद रहती है। कुछ लोगों को आंखों में खुजली और जलन की शिकायत भी हो सकती है।
इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:
- सुबह उठते ही लगातार छींक आना।
- नाक से पानी बहना या नाक का बंद रहना।
- आंखों में खुजली, लालिमा और पानी आना।
- गले में खराश या बार-बार खांसी होना।
- नाक और गले में खुजली महसूस होना।
- सांस लेने में परेशानी या सीने में जकड़न महसूस होना।
अगर ये लक्षण बार-बार दिखाई देते हैं और खासकर ठंड के मौसम में बढ़ जाते हैं, तो इन्हें सामान्य जुकाम मानकर लंबे समय तक अनदेखा नहीं करना चाहिए। एलर्जी और संक्रमण के लक्षणों में कुछ समानता हो सकती है, इसलिए जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से जांच करवाना बेहतर रहता है।
नवंबर आते ही क्यों बढ़ने लगती है एलर्जी की समस्या?
सर्दियों में एलर्जी बढ़ने के पीछे सिर्फ ठंडा मौसम जिम्मेदार नहीं होता। इसके लिए वातावरण में होने वाले कई बदलाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नवंबर के आसपास प्रदूषण का स्तर बढ़ने, हवा में नमी और तापमान में बदलाव के कारण एलर्जी से परेशान लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
1. प्रदूषित हवा और PM2.5 बन रहे बड़ी परेशानी
सर्दियों के मौसम में कई शहरों में वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर हो जाती है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और अन्य प्रदूषक मिलकर हवा की गुणवत्ता खराब करते हैं। कई जगहों पर स्मॉग की मोटी परत भी देखने को मिलती है।
इस प्रदूषण में PM2.5 कण विशेष रूप से चिंता का विषय हैं। इनका आकार 2.5 माइक्रोमीटर या इससे कम होता है। तुलना करें तो इंसान के बाल की मोटाई लगभग 70 माइक्रोमीटर हो सकती है। यानी ये कण बाल की तुलना में बेहद छोटे होते हैं।
छोटे आकार के कारण ये सांस के रास्ते शरीर के भीतर गहराई तक पहुंच सकते हैं और फेफड़ों को प्रभावित कर सकते हैं। पहले से एलर्जी या सांस संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों में प्रदूषित हवा के कारण खांसी, नाक में जलन और सांस लेने में दिक्कत बढ़ सकती है।
2. घर के अंदर जमा धूल और फफूंद का बढ़ता असर
सर्दियां शुरू होते ही लोग ठंड से बचने के लिए ज्यादा समय घर के अंदर बिताने लगते हैं। खिड़कियां और दरवाजे लंबे समय तक बंद रखने से घर में हवा का आवागमन कम हो सकता है। ऐसे वातावरण में धूल, धूल के कणों में रहने वाले सूक्ष्म जीव, पालतू जानवरों के बाल और फफूंद जैसे एलर्जी पैदा करने वाले तत्व जमा हो सकते हैं।
पुराने गद्दे, तकिए, सोफे, मोटे पर्दे और कालीन भी धूल जमा होने की जगह बन सकते हैं। इसके अलावा बाथरूम, रसोई और नमी वाली दीवारों पर फंगस पनप सकती है। इनके संपर्क में आने से संवेदनशील लोगों को छींक, नाक बहने और आंखों में खुजली की समस्या हो सकती है।
3. तापमान में उतार-चढ़ाव भी बढ़ाता है परेशानी
नवंबर में सुबह और रात के समय ठंड ज्यादा महसूस होती है, जबकि दोपहर में तापमान बढ़ सकता है। ऐसे में शरीर को बार-बार बदलते वातावरण के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है।
इसके अलावा कई घरों में ठंड से बचने के लिए हीटर का इस्तेमाल शुरू हो जाता है। हीटर से कमरे की हवा गर्म और शुष्क हो सकती है। इससे कुछ लोगों की नाक और गले में सूखापन तथा जलन महसूस हो सकती है। अचानक ठंडी हवा से गर्म कमरे में आने-जाने पर भी संवेदनशील लोगों को परेशानी हो सकती है।
हालांकि तापमान में बदलाव अपने आप में एलर्जी का एकमात्र कारण नहीं है, लेकिन यह पहले से मौजूद नाक और सांस संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकता है।
किन लोगों को विंटर एलर्जी से ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?
कुछ लोगों में सर्दियों के दौरान एलर्जी के लक्षण अधिक गंभीर हो सकते हैं। जिन लोगों को पहले से एलर्जिक राइनाइटिस, अस्थमा या धूल-मिट्टी से एलर्जी की शिकायत रहती है, उन्हें इस मौसम में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
एलर्जिक राइनाइटिस में नाक की अंदरूनी परत एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों के संपर्क में आने पर प्रतिक्रिया देती है। इसकी वजह से लगातार छींकें आना, नाक बहना, खुजली और बंद नाक जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
एलर्जी की प्रवृत्ति परिवार में आनुवंशिक रूप से भी देखी जा सकती है। यानी अगर माता-पिता को एलर्जी की समस्या रही है, तो बच्चों में भी इसकी आशंका बढ़ सकती है।
इसके अलावा अस्थमा के मरीजों को भी प्रदूषण और एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों से बचना चाहिए। कुछ लोगों में पालतू जानवरों की त्वचा से निकलने वाले सूक्ष्म कण और बाल भी एलर्जी की प्रतिक्रिया पैदा कर सकते हैं।
डॉक्टर जरूरत पड़ने पर एलर्जी की पहचान के लिए जांच की सलाह दे सकते हैं। कुछ मामलों में खून में IgE और ईोसिनोफिल का स्तर भी बढ़ा हुआ मिल सकता है। हालांकि इनकी मात्रा अकेले एलर्जी की पुष्टि नहीं करती। सही निष्कर्ष के लिए लक्षणों और मेडिकल जांच को साथ में देखना जरूरी होता है।
विंटर एलर्जी से बचने के लिए अपनाएं ये 6 आसान उपाय
सर्दियों में एलर्जी से पूरी तरह बचना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन कुछ आदतों में बदलाव करके इसके जोखिम और लक्षणों को कम किया जा सकता है।
1. घर की नियमित सफाई करना न भूलें
घर में जमा धूल एलर्जी की एक बड़ी वजह बन सकती है। इसलिए सप्ताह में नियमित रूप से घर की अच्छी तरह सफाई करें। फर्श, फर्नीचर, सोफे और बिस्तर के आसपास धूल जमा न होने दें।
जहां संभव हो, वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करें। कालीन, भारी पर्दे और गद्दों की भी समय-समय पर सफाई करवाएं। सफाई करते समय धूल उड़ने से बचाने के लिए गीले कपड़े का इस्तेमाल करना बेहतर हो सकता है। अगर सफाई के दौरान आपको एलर्जी होती है, तो मास्क पहनें या किसी दूसरे व्यक्ति की मदद लें।
2. पुराने कागज और बेकार सामान हटाएं
घर के किसी कोने में रखे पुराने अखबार, मैगजीन, गत्ते और दूसरे बेकार सामान पर अक्सर धूल जमा होती रहती है। लंबे समय तक इन्हें एक जगह रखने से धूल और कुछ कीटों के पनपने की संभावना बढ़ सकती है।
इसलिए घर में अनावश्यक सामान इकट्ठा न होने दें। स्टोर रूम और अलमारियों की समय-समय पर सफाई करें। बिस्तर के नीचे और फर्नीचर के पीछे जमा धूल को भी हटाते रहें।
3. हीटर और एयर प्यूरीफायर के फिल्टर की सफाई करें
सर्दियों में हीटर और एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल बढ़ जाता है। लेकिन इनके फिल्टर की सफाई नहीं करने पर इनमें धूल और दूसरे कण जमा हो सकते हैं।
इसलिए उपकरण बनाने वाली कंपनी के निर्देशों के अनुसार फिल्टर की सफाई या बदलाव करते रहें। एयर प्यूरीफायर खरीदते समय कमरे के आकार के हिसाब से सही क्षमता वाला मॉडल चुनें। HEPA फिल्टर वाले उपकरण हवा में मौजूद कई तरह के सूक्ष्म कणों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
ध्यान रखें कि एयर प्यूरीफायर प्रदूषण और एलर्जी से बचाव का एक सहायक तरीका है, लेकिन यह घर की सफाई और दूसरी सावधानियों का विकल्प नहीं है।
4. घर में नमी और फंगस जमा न होने दें
बाथरूम, रसोई और घर के उन हिस्सों पर खास ध्यान दें जहां पानी या नमी जमा रहती है। ऐसी जगहों पर फफूंद तेजी से विकसित हो सकती है, जो एलर्जी के लक्षणों को बढ़ा सकती है।
बाथरूम इस्तेमाल करने के बाद उसे सूखा रखने की कोशिश करें। पानी की लीकेज को जल्द ठीक करवाएं और जरूरत के मुताबिक वेंटिलेशन की व्यवस्था रखें। अगर दीवारों पर फंगस फैल गई है, तो उसे हटाने के लिए विशेषज्ञ की सहायता लें।
5. पालतू जानवरों के साथ संपर्क में सावधानी बरतें
कई लोगों को कुत्ते, बिल्ली और दूसरे पालतू जानवरों से एलर्जी हो सकती है। इसका कारण केवल उनके बाल नहीं, बल्कि त्वचा से निकलने वाले सूक्ष्म कण और लार में मौजूद प्रोटीन भी हो सकते हैं।
अगर आपको पालतू जानवरों के संपर्क में आने के बाद छींक, खुजली या सांस संबंधी परेशानी होती है, तो उनके साथ बहुत नजदीकी संपर्क से बचें। उन्हें बेडरूम और बिस्तर से दूर रखना मददगार हो सकता है। उनके रहने की जगह की नियमित सफाई भी जरूरी है।
6. खानपान और टीकाकरण का रखें ध्यान
सर्दियों में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार लें। खाने में फल, हरी सब्जियां, दालें और पर्याप्त पोषक तत्व शामिल करें। शरीर में पानी की कमी न होने दें और पर्याप्त नींद लें।
इसके अलावा फ्लू और निमोनिया से बचाव के लिए टीकाकरण पर भी ध्यान देना चाहिए। डॉक्टर से अपनी उम्र, स्वास्थ्य और मेडिकल हिस्ट्री के अनुसार फ्लू और न्यूमोकोकल वैक्सीन की जरूरत के बारे में सलाह लें।
ध्यान रहे कि ये टीके एलर्जी को खत्म नहीं करते, बल्कि संबंधित संक्रमणों से बचाव में मदद करते हैं।
कब समझें कि अब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?
अगर आपको कई दिनों से लगातार छींकें आ रही हैं, नाक बंद रहती है या आंखों में खुजली की समस्या बनी हुई है, तो डॉक्टर से सलाह लें। खासकर तब जब घरेलू सावधानियों के बावजूद परेशानी कम नहीं हो रही हो या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगे हों।
अगर रात में खांसी बढ़ती है, सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आती है या सीने में जकड़न महसूस होती है, तो इसे नजरअंदाज न करें। अस्थमा के मरीजों को ऐसे लक्षण दिखाई देने पर जल्द मेडिकल सलाह लेनी चाहिए।
वहीं, सांस लेने में बहुत ज्यादा परेशानी, सीने में तेज दर्द, होंठ नीले पड़ना या बोलने में कठिनाई जैसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
एक और जरूरी बात यह है कि एलर्जी और सामान्य वायरल सर्दी-जुकाम में अंतर समझना आवश्यक है। एलर्जी में अक्सर नाक और आंखों में खुजली तथा बार-बार छींक आने की शिकायत होती है, जबकि वायरल संक्रमण में बुखार, शरीर में दर्द और गले में दर्द भी हो सकता है। हालांकि केवल लक्षणों के आधार पर खुद से बीमारी तय करना सही नहीं है।
नवंबर में बढ़ती ठंड और प्रदूषण के बीच अपनी सेहत को लेकर थोड़ी अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है। घर को साफ रखना, धूल और फफूंद से बचना, प्रदूषण के संपर्क को कम करना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना विंटर एलर्जी को नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है।




