पर्दे पर गांधी बनने की कहानी: इन 10 कलाकारों ने निभाया महात्मा गांधी का किरदार, किसी ने सादगी तो किसी ने संघर्ष को किया जीवंत

पर्दे पर गांधी बनने की कहानी: इन 10 कलाकारों ने निभाया महात्मा गांधी का किरदार, किसी ने सादगी तो किसी ने संघर्ष को किया जीवंत

महात्मा गांधी का जीवन भारतीय इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसे साहित्य से लेकर रंगमंच और सिनेमा तक अलग-अलग माध्यमों में प्रस्तुत किया जाता रहा है। गांधी जयंती के मौके पर जब देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों, संघर्ष और सिद्धांतों को याद करेगा, तब फिल्मों में निभाए गए उनके किरदार भी चर्चा में आएंगे। सत्य, अहिंसा, सादगी और सामाजिक बदलाव का संदेश देने वाले गांधी के व्यक्तित्व को पर्दे पर उतारना किसी कलाकार के लिए सामान्य अभिनय से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण रहा है। उनके चलने का अंदाज, बोलने की शैली, पहनावा, चेहरे के भाव और विचारों को समझकर उन्हें कैमरे के सामने प्रस्तुत करना एक कठिन जिम्मेदारी रही है।

भारतीय सिनेमा के साथ-साथ विदेशी फिल्मों में भी कई कलाकारों ने महात्मा गांधी की भूमिका निभाई है। दिलचस्प बात यह है कि हर फिल्म में गांधी का चित्रण एक जैसा नहीं रहा। कहीं उनके राजनीतिक संघर्ष को केंद्र में रखा गया, तो कहीं उनके पारिवारिक जीवन और व्यक्तिगत रिश्तों को कहानी का हिस्सा बनाया गया। कुछ फिल्मों ने गांधी के विचारों को गंभीर ऐतिहासिक संदर्भ में पेश किया, जबकि कुछ ने उनके सिद्धांतों को आधुनिक जीवन से जोड़ने की कोशिश की। यही वजह है कि गांधी का किरदार निभाने वाले कलाकारों की सूची काफी लंबी है। आइए जानते हैं उन 10 कलाकारों के बारे में, जिन्होंने अलग-अलग फिल्मों में गांधी की भूमिका को पर्दे पर उतारा।

दिलीप प्रभावलकर ने गांधी को आम लोगों के करीब पहुंचाया

महात्मा गांधी के किरदार को लोकप्रिय अंदाज में पेश करने वाली फिल्मों में राजकुमार हिरानी की ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ का नाम खास तौर पर लिया जाता है। 2006 में रिलीज हुई इस फिल्म में दिलीप प्रभावलकर ने गांधी का किरदार निभाया था। फिल्म की कहानी में गांधी सीधे ऐतिहासिक घटनाओं के किरदार के रूप में नहीं, बल्कि संजय दत्त के निभाए मुन्नाभाई के सामने दिखाई देने वाले मार्गदर्शक के रूप में नजर आए।

फिल्म ने गांधी के विचारों को ‘गांधीगिरी’ के जरिए नई पीढ़ी से जोड़ने की कोशिश की। दिलीप प्रभावलकर ने अपने हाव-भाव और संवाद अदायगी से गांधी की सरल छवि को पर्दे पर पेश किया। इस भूमिका ने गांधी के विचारों को मनोरंजन के माध्यम से दर्शकों के बड़े वर्ग तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

दर्शन जरीवाला ने दिखाया गांधी का पारिवारिक पक्ष

2007 की फिल्म ‘गांधी, माई फादर’ में दर्शन जरीवाला ने महात्मा गांधी की भूमिका निभाई। यह फिल्म गांधी के राजनीतिक जीवन से ज्यादा उनके निजी और पारिवारिक रिश्तों पर केंद्रित थी। कहानी गांधी और उनके बड़े बेटे हरिलाल गांधी के संबंधों को सामने लाती है।

इस फिल्म में गांधी केवल स्वतंत्रता आंदोलन के नेता के रूप में नहीं दिखाई देते, बल्कि एक पिता के रूप में भी उनके व्यक्तित्व को समझने की कोशिश की गई। दर्शन जरीवाला ने गांधी के इस जटिल और भावनात्मक पक्ष को निभाया। उनके अभिनय के जरिए दर्शकों को गांधी के व्यक्तित्व का एक ऐसा पहलू देखने को मिला, जो आमतौर पर स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी फिल्मों में कम दिखाई देता है।

रजित कपूर ने दिखाया गांधी बनने का सफर

महात्मा गांधी के शुरुआती जीवन और उनके विचारों में आए बदलावों को समझने के लिए श्याम बेनेगल की 1996 में आई ‘द मेकिंग ऑफ द महात्मा’ महत्वपूर्ण फिल्म मानी जाती है। इसमें रजित कपूर ने गांधी का किरदार निभाया था।

फिल्म में गांधी के दक्षिण अफ्रीका में बिताए वर्षों और वहां उनके अनुभवों को कहानी का केंद्र बनाया गया। यह वह दौर था, जिसने आगे चलकर गांधी के राजनीतिक और सामाजिक विचारों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रजित कपूर ने युवा गांधी के रूप में उनके व्यक्तित्व में होने वाले बदलावों और संघर्षों को सहज अभिनय के जरिए प्रस्तुत किया। इस भूमिका के लिए उन्हें काफी सराहना मिली।

बेन किंग्सले का गांधी आज भी याद किया जाता है

जब फिल्मों में महात्मा गांधी के किरदार की बात होती है तो 1982 में आई रिचर्ड एटनबरो की ‘गांधी’ का उल्लेख जरूर होता है। ब्रिटिश अभिनेता बेन किंग्सले ने इस फिल्म में गांधी की भूमिका निभाई थी। फिल्म ने गांधी के जीवन, स्वतंत्रता आंदोलन और अहिंसा के सिद्धांतों को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने रखा।

बेन किंग्सले ने गांधी के रूप-रंग, चाल-ढाल और व्यवहार को पर्दे पर उतारने के लिए काफी मेहनत की थी। उनके अभिनय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली और इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का ऑस्कर पुरस्कार मिला। फिल्म के जरिए गांधी के व्यक्तित्व को वैश्विक सिनेमा में व्यापक पहचान मिली।

नसीरुद्दीन शाह ने ‘हे राम’ में निभाया ऐतिहासिक किरदार

कमल हासन की फिल्म ‘हे राम’ में नसीरुद्दीन शाह ने महात्मा गांधी की भूमिका निभाई थी। 2000 में रिलीज हुई यह फिल्म भारत के विभाजन और उसके बाद पैदा हुए सांप्रदायिक तनाव की पृष्ठभूमि में आगे बढ़ती है।

फिल्म में गांधी का किरदार कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा था। नसीरुद्दीन शाह जैसे अनुभवी कलाकार ने गांधी के संयमित व्यक्तित्व और संवादों को गंभीरता के साथ प्रस्तुत किया। फिल्म ने इतिहास के उस दौर को अलग नजरिए से देखने की कोशिश की, जिसमें गांधी की भूमिका भी कहानी का अहम हिस्सा बनी।

अन्नू कपूर ने ‘सरदार’ में निभाया गांधी का रोल

1993 में रिलीज हुई फिल्म ‘सरदार’ का केंद्र स्वतंत्रता सेनानी और देश के पहले उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन था। इस फिल्म में अन्नू कपूर ने महात्मा गांधी का किरदार निभाया था।

कहानी में गांधी और पटेल के राजनीतिक संबंधों तथा स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े घटनाक्रमों को जगह दी गई। अन्नू कपूर ने गांधी के व्यक्तित्व को फिल्म की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के अनुरूप प्रस्तुत किया। उनके किरदार ने कहानी में गांधी की भूमिका को सामने लाने का काम किया।

सुरेंद्र राजन के नाम के साथ जुड़ गया गांधी का किरदार

कुछ कलाकारों ने महात्मा गांधी का किरदार एक ही फिल्म में निभाया, जबकि सुरेंद्र राजन कई फिल्मों में गांधी के रूप में दिखाई दिए। उन्होंने ‘द लीजेंड ऑफ भगत सिंह’ में गांधी की भूमिका निभाई। इसके अलावा ‘बोस: द फॉरगॉटन हीरो’ में भी वह गांधी के किरदार में नजर आए।

अलग-अलग ऐतिहासिक फिल्मों में गांधी की भूमिका निभाने के कारण सुरेंद्र राजन की पहचान इस किरदार से विशेष रूप से जुड़ गई। उनकी भूमिकाओं में गांधी को स्वतंत्रता आंदोलन के अलग-अलग संदर्भों में देखा गया।

जे. एस. कश्यप ने हॉलीवुड फिल्म में निभाया था गांधी का रोल

महात्मा गांधी का किरदार भारतीय सिनेमा तक सीमित नहीं रहा। 1963 में आई हॉलीवुड फिल्म ‘नाइन आवर्स टू रामा’ में जे. एस. कश्यप ने गांधी की भूमिका निभाई थी। फिल्म गांधी की हत्या से पहले के घटनाक्रम और नाथूराम गोडसे से जुड़ी कहानी पर आधारित थी।

उस समय किसी भारतीय ऐतिहासिक व्यक्तित्व को हॉलीवुड प्रोडक्शन में प्रस्तुत करना अपने आप में उल्लेखनीय था। जे. एस. कश्यप ने इस फिल्म में गांधी के किरदार को निभाया और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में गांधी की कहानी को पर्दे पर जगह मिली।

‘महात्मा’ में श्रीकांत ने पेश किया गांधी का व्यक्तित्व

2009 में रिलीज हुई फिल्म ‘महात्मा’ का केंद्र ही गांधी का जीवन और उनके विचार थे। इसमें श्रीकांत ने महात्मा गांधी की भूमिका निभाई। फिल्म में गांधी के सादगीपूर्ण जीवन, उनके सिद्धांतों और सामाजिक सोच को सामने रखने का प्रयास किया गया।

श्रीकांत के लिए यह भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि कहानी का मुख्य आधार ही गांधी का व्यक्तित्व था। ऐसे में उनके अभिनय के जरिए गांधी के विचारों और जीवनशैली को दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश की गई।

अनुपम खेर भी पर्दे पर बने महात्मा गांधी

महात्मा गांधी के किरदार को हाल के वर्षों में पर्दे पर निभाने वाले कलाकारों में अनुपम खेर का नाम भी शामिल है। 2025 में रिलीज हुई ‘द बंगाल फाइल्स’ में वह गांधी की भूमिका में नजर आए।

फिल्म से सामने आए उनके लुक ने दर्शकों का ध्यान खींचा था। गांधी के पारंपरिक पहनावे और हाव-भाव को अपनाकर अनुपम खेर ने इस ऐतिहासिक व्यक्तित्व को अपने अंदाज में पेश किया। उनके लुक और अभिनय को लेकर भी चर्चा हुई।

गांधी का किरदार निभाना क्यों रहा चुनौतीपूर्ण?

इन सभी फिल्मों को देखने पर यह बात सामने आती है कि गांधी का किरदार निभाने वाले कलाकारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल उनका रूप धारण करना नहीं थी। गांधी का व्यक्तित्व कई स्तरों वाला था। एक तरफ वह स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेता थे, वहीं दूसरी तरफ उनके जीवन में परिवार, धर्म, सामाजिक सुधार, राजनीति और व्यक्तिगत विचारों से जुड़े कई पहलू थे।

इसी वजह से अलग-अलग फिल्मों में गांधी का अलग रूप दिखाई दिया। बेन किंग्सले ने उनके पूरे राजनीतिक जीवन को बड़े कैनवास पर पेश किया, रजित कपूर ने युवा गांधी के निर्माण की प्रक्रिया दिखाई, दर्शन जरीवाला ने पारिवारिक पक्ष पर ध्यान दिया और दिलीप प्रभावलकर ने गांधी के विचारों को आधुनिक दर्शकों तक पहुंचाने वाला रूप पेश किया।

सिनेमा ने समय-समय पर गांधी को अलग नजरिए से समझने और दिखाने की कोशिश की है। यही कारण है कि गांधी का किरदार निभाने वाले कलाकारों की ये भूमिकाएं केवल ऐतिहासिक चरित्र निभाने तक सीमित नहीं रहीं। हर कलाकार ने अपनी फिल्म की कहानी और समय के अनुसार गांधी के व्यक्तित्व के अलग पहलू को पर्दे पर सामने रखा। गांधी जयंती के मौके पर इन फिल्मों और कलाकारों को याद करना यह भी बताता है कि भारतीय इतिहास के इस प्रभावशाली व्यक्तित्व को सिनेमा ने कितने अलग-अलग रूपों में दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया है।