हिमाचल प्रदेश में केंद्र और राज्य के बीच वित्तीय सहयोग को लेकर सियासत तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश सरकार पर केंद्र से मिलने वाली आर्थिक सहायता को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में बड़े पैमाने पर चल रहे विकास कार्यों के पीछे केंद्र सरकार की वित्तीय मदद महत्वपूर्ण है, लेकिन प्रदेश सरकार की ओर से केंद्र के सहयोग के लिए आभार जताने के बजाय उसका राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है।
जयराम ठाकुर ने एक बयान में कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर जिन विकास कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास कर रहे हैं, उनमें बड़ी संख्या में ऐसी परियोजनाएं शामिल हैं जिनका वित्तीय प्रावधान केंद्र सरकार की ओर से किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार इन परियोजनाओं का श्रेय लेने की कोशिश कर रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि राज्य को बुनियादी ढांचे के विकास के लिए केंद्र से लगातार आर्थिक सहयोग मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण, सड़कों के रखरखाव और अन्य आधारभूत ढांचे के विकास के लिए केंद्र की ओर से हिमाचल को बड़ी राशि उपलब्ध कराई गई है। जयराम ठाकुर के अनुसार कई परियोजनाओं का बजट केंद्र सरकार से स्वीकृत हुआ है और उन्हीं योजनाओं के आधार पर प्रदेश में विकास कार्य आगे बढ़ रहे हैं।
केंद्र के सहयोग का श्रेय लेने का आरोप
जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार को यह बताना चाहिए कि जिन योजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास किए जा रहे हैं, उनमें राज्य का योगदान कितना है और केंद्र सरकार की ओर से कितनी राशि स्वीकृत हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री जहां भी दौरे पर जाते हैं, वहां केंद्र की ओर से मिली सहायता और परियोजनाओं का हवाला देकर अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र से आर्थिक मदद नहीं मिलती तो राज्य सरकार के लिए मौजूदा परिस्थितियों में इतने बड़े पैमाने पर विकास कार्य करना मुश्किल होता।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच विकास कार्यों को लेकर सहयोग होना जरूरी है, लेकिन प्रदेश सरकार को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय तथ्यों के आधार पर जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
आर्थिक स्थिति को लेकर सरकार पर सवाल
जयराम ठाकुर ने प्रदेश सरकार की आर्थिक स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति ऐसी हो गई है कि सरकार कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए अपना आवश्यक हिस्सा तक उपलब्ध नहीं करवा पा रही है।
उन्होंने धर्मशाला केंद्रीय विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय से जुड़ी आवश्यकताओं के लिए 30 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध करवाने में भी सरकार असमर्थ साबित हो रही है। इसी तरह रेलवे परियोजनाओं के लिए राज्य की ओर से दिए जाने वाले 10 प्रतिशत अनिवार्य अंशदान को लेकर भी उन्होंने सरकार पर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर राज्य सरकार आर्थिक संकट का हवाला देती है, वहीं दूसरी ओर केंद्र से मिलने वाली सहायता का राजनीतिक लाभ लेने में पीछे नहीं रहती। जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार को अपनी वित्तीय प्राथमिकताएं स्पष्ट करनी चाहिए और विकास परियोजनाओं में राज्य के हिस्से की राशि समय पर उपलब्ध करवानी चाहिए।
सड़कों की खराब स्थिति को लेकर भी निशाना
नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश की सड़कों की स्थिति को लेकर भी कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में हिमाचल की सड़कों की खराब हालत किसी से छिपी नहीं रही। कई क्षेत्रों में लोगों को खराब सड़कों के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि अब केंद्र सरकार से मिलने वाले फंड के माध्यम से सड़कों की स्थिति सुधारने का काम किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क संपर्क को विस्तार दिया गया है। इससे दूरदराज के गांवों को बेहतर सड़क सुविधा से जोड़ने में मदद मिली है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचा हैं। ऐसे में सड़क परियोजनाओं के लिए केंद्र से मिलने वाली वित्तीय सहायता का राज्य के विकास पर सीधा असर पड़ता है।
फोरलेन से पर्यटन और कारोबार को फायदा
जयराम ठाकुर ने प्रदेश में फोरलेन परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि फोरलेन के विस्तार से स्थानीय लोगों को बेहतर और सुरक्षित यातायात सुविधा मिल रही है। इसके साथ ही हिमाचल आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ने से होटल, ढाबे, परिवहन, छोटे कारोबार और अन्य पर्यटन आधारित गतिविधियों को भी फायदा हुआ है।
उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क संपर्क से राज्य के पर्यटन क्षेत्र को मजबूती मिली है और इसका सकारात्मक प्रभाव स्थानीय कारोबारियों पर पड़ा है। पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिला है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से सड़क और परिवहन क्षेत्र में किए जा रहे निवेश का लाभ हिमाचल को लंबे समय तक मिलेगा। राज्य सरकार को इन परियोजनाओं को राजनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश करने के बजाय केंद्र के साथ बेहतर समन्वय के जरिए इनके काम को तेजी से पूरा करवाने पर ध्यान देना चाहिए।
नितिन गडकरी से सड़क परियोजनाओं पर हुई चर्चा
जयराम ठाकुर ने अपने हालिया दिल्ली दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के साथ हिमाचल की सड़क परियोजनाओं को लेकर बैठक की थी। बैठक में प्रदेश में चल रही और प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं की स्थिति पर चर्चा हुई।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को परियोजनाओं से जुड़े मामलों पर तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। जयराम ठाकुर के अनुसार हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सड़क परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के स्तर पर हिमाचल की सड़क परियोजनाओं को लेकर लगातार सहयोग मिल रहा है। ऐसे में राज्य सरकार को भी परियोजनाओं के लिए जरूरी औपचारिकताएं और राज्य का हिस्सा समय पर उपलब्ध करवाना चाहिए, ताकि काम में देरी न हो।
रामपुर में 232.93 करोड़ के विकास कार्यों का उदाहरण
जयराम ठाकुर ने रामपुर विधानसभा क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार की ओर से 232.93 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की बात की जा रही है। उनके अनुसार इन परियोजनाओं का बड़ा आधार केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता है।
उन्होंने दावा किया कि शिमला संसदीय क्षेत्र के भाजपा सांसद सुरेश कश्यप के प्रयासों से इन सड़क परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि केंद्र से परियोजनाओं को मंजूरी मिलने और बजट उपलब्ध होने के बाद प्रदेश सरकार उद्घाटन और शिलान्यास के जरिए इसका राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन परियोजनाओं में उसका वित्तीय योगदान कितना है और केंद्र की ओर से कितनी राशि उपलब्ध कराई गई है।
‘फीता काटने तक सीमित है सरकार’
जयराम ठाकुर ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार विकास कार्यों की वास्तविक प्रक्रिया पर पर्याप्त ध्यान देने के बजाय उद्घाटन और शिलान्यास के कार्यक्रमों के जरिए राजनीतिक संदेश देने में अधिक रुचि ले रही है।
उन्होंने कहा कि किसी परियोजना की घोषणा या उद्घाटन से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका समय पर पूरा होना है। सरकार को परियोजनाओं की प्रगति की निगरानी करनी चाहिए और जहां राज्य का हिस्सा आवश्यक है, वहां राशि उपलब्ध करवानी चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस सरकार पर केंद्र से मिलने वाली सहायता का राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि विकास योजनाओं में केंद्र और राज्य दोनों की भूमिका होती है। ऐसे में किसी एक सरकार को पूरा श्रेय देने के बजाय जनता के सामने वास्तविक वित्तीय योगदान की जानकारी रखी जानी चाहिए।
केंद्र-राज्य सहयोग को लेकर फिर गरमाई सियासत
हिमाचल में केंद्र से मिलने वाली वित्तीय सहायता और राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच पहले भी आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। अब जयराम ठाकुर के ताजा बयान से यह मुद्दा फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल के विकास के लिए केंद्र सरकार की ओर से सड़क, बुनियादी ढांचे और अन्य क्षेत्रों में सहायता जारी है। उन्होंने प्रदेश सरकार से केंद्र के सहयोग को स्वीकार करने और विकास परियोजनाओं में राज्य की जिम्मेदारी निभाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि हिमाचल की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सरकार को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय विकास परियोजनाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। सड़क, रेलवे और अन्य आधारभूत ढांचे से जुड़ी योजनाओं में राज्य का हिस्सा समय पर उपलब्ध कराने से परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ेगी और प्रदेश के लोगों को उसका लाभ जल्द मिल सकेगा।
कुल मिलाकर, जयराम ठाकुर ने केंद्र की वित्तीय सहायता को लेकर सुक्खू सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार केंद्र से मिलने वाली मदद का श्रेय लेने की कोशिश कर रही है। वहीं सड़क, फोरलेन, ग्रामीण संपर्क और रामपुर की परियोजनाओं का हवाला देते हुए उन्होंने केंद्र की भूमिका को प्रमुखता से सामने रखा। अब इस मुद्दे पर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार है।




