CM भगवंत मान के इनकार पर नायब सैनी ने जताई नाराजगी, कहा- ये राजनीतिक नहीं, पीने के पानी का मुद्दा है।

हरियाणा और पंजाब के बीच पानी के मुद्दे को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने से इनकार किए जाने के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विस्तृत प्रतिक्रिया दी। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने पक्ष रखते हुए पानी के बंटवारे, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) की भूमिका और उपलब्ध जल संसाधनों को लेकर अलग-अलग दावे किए हैं।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब उत्तर भारत के कई हिस्सों में गर्मी के कारण पेयजल की मांग बढ़ जाती है। इसी वजह से पानी के प्रबंधन और राज्यों के बीच जल वितरण को लेकर चर्चा तेज हो गई है। दोनों सरकारों की ओर से जारी बयानों के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने क्या कहा?

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दावा किया कि हरियाणा अपने निर्धारित हिस्से से अधिक पानी का उपयोग कर चुका है। उनका कहना है कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार हरियाणा ने अपने हिस्से का लगभग 103 प्रतिशत पानी इस्तेमाल कर लिया है। इसी आधार पर उन्होंने अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराने से इनकार किया।

मुख्यमंत्री मान ने यह भी आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के माध्यम से पंजाब सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि पानी के वितरण से जुड़े सभी निर्णय निर्धारित नियमों और उपलब्ध जल संसाधनों के आधार पर लिए जाने चाहिए।

BBMB की भूमिका को लेकर भी उठे सवाल

पानी के इस विवाद में भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड की भूमिका भी चर्चा में है। पंजाब सरकार का कहना है कि बोर्ड के माध्यम से पंजाब पर अतिरिक्त पानी छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि हरियाणा सरकार का कहना है कि BBMB के निर्णय सभी राज्यों के हितों को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।

इस मुद्दे के सामने आने के बाद BBMB की कार्यप्रणाली और राज्यों के बीच जल वितरण व्यवस्था को लेकर भी राजनीतिक दलों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जताई आपत्ति

पंजाब के मुख्यमंत्री के बयान के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि भगवंत मान का बयान उन्हें आश्चर्यचकित करता है। उन्होंने कहा कि इस विषय को राजनीतिक रंग देने के बजाय तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि यह विवाद सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर के मुद्दे से अलग है और वर्तमान चर्चा मुख्य रूप से पेयजल आपूर्ति से संबंधित है। उन्होंने कहा कि SYL से जुड़ा मामला पहले से ही न्यायिक प्रक्रिया में है और उसकी सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में चल रही है।

हरियाणा ने पानी के आंकड़ों का दिया हवाला

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पानी के वितरण से जुड़े कुछ आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में अप्रैल से जून के बीच BBMB हरियाणा को लगभग 9,000 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराता है।

उन्होंने बताया कि इस कुल मात्रा में दिल्ली, राजस्थान और पंजाब के हिस्से का पानी भी शामिल रहता है। उनके अनुसार निर्धारित हिस्सों के बाद हरियाणा के लिए लगभग 6,800 क्यूसेक पानी उपलब्ध रहता है। मुख्यमंत्री का कहना था कि पिछले वर्षों में भी इसी व्यवस्था के अनुसार पानी का वितरण किया जाता रहा है।

हरियाणा का दावा- अब तक पूरा हिस्सा नहीं मिला

मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा यह कहना कि हरियाणा अपने हिस्से का पानी पहले ही उपयोग कर चुका है, वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता। उनका दावा है कि हरियाणा को अभी तक उसका पूरा निर्धारित हिस्सा प्राप्त नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि जल वितरण से जुड़े रिकॉर्ड संबंधित विभागों और BBMB के पास उपलब्ध रहते हैं तथा इन आंकड़ों के आधार पर ही किसी भी प्रकार का निर्णय लिया जाना चाहिए।

पेयजल को बताया प्राथमिक आवश्यकता

हरियाणा सरकार का कहना है कि वर्तमान समय में सबसे बड़ी आवश्यकता लोगों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि इस विषय को राजनीतिक विवाद बनाने के बजाय मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में पानी की मांग बढ़ जाती है और ऐसे समय में राज्यों के बीच सहयोग की भावना आवश्यक होती है ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

पानी वितरण, जल प्रबंधन और दोनों राज्यों के दावों पर जारी बहस

संस्कृति और सहयोग का भी किया उल्लेख

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भारतीय संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि अतिथि का स्वागत पानी पिलाकर करने की परंपरा रही है। उन्होंने पंजाब सरकार से आग्रह किया कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर पेयजल उपलब्ध कराने के मुद्दे पर सहयोग किया जाए।

उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के बीच वर्षों से प्रशासनिक स्तर पर समन्वय बना रहा है और जल संसाधनों जैसे महत्वपूर्ण विषय पर भी संवाद के माध्यम से समाधान तलाशा जाना चाहिए।

जल भंडारण को लेकर भी रखी अपनी बात

मुख्यमंत्री सैनी ने जलाशयों के प्रबंधन का उल्लेख करते हुए कहा कि मानसून से पहले जल भंडारों में पर्याप्त स्थान बनाए रखना आवश्यक होता है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जलाशयों का प्रबंधन नहीं किया गया तो वर्षा के दौरान अतिरिक्त पानी का प्रभावी उपयोग करना कठिन हो सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि जल संसाधनों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन सभी राज्यों के हित में है और इस दिशा में समन्वित प्रयास किए जाने चाहिए।

BBMB के रिकॉर्ड का किया जिक्र

हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी के वितरण का पूरा रिकॉर्ड संबंधित विभागों और BBMB के पास उपलब्ध रहता है। उनके अनुसार प्रत्येक राज्य अपने हिस्से के पानी का नियमित रिकॉर्ड रखता है और जल वितरण की प्रक्रिया पारदर्शी प्रणाली के तहत संचालित होती है।

उन्होंने कहा कि इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि पानी के उपयोग का कोई स्पष्ट हिसाब उपलब्ध नहीं है।

फोन पर हुई बातचीत का भी किया उल्लेख

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि उन्होंने 26 अप्रैल को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से इस विषय पर बातचीत की थी। उनके अनुसार उन्होंने उस समय पंजाब सरकार के अधिकारियों द्वारा BBMB की समिति के निर्णयों के पालन में आ रही कठिनाइयों की जानकारी दी थी।

मुख्यमंत्री सैनी का कहना है कि बातचीत के दौरान उन्हें आश्वासन दिया गया था कि आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, लेकिन बाद में स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ। यह दावा हरियाणा सरकार की ओर से सार्वजनिक रूप से रखा गया।

राज्यों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर जोर

पानी के इस विवाद ने एक बार फिर अंतरराज्यीय जल प्रबंधन के महत्व को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि नदियों और जलाशयों से जुड़े मामलों में राज्यों के बीच नियमित संवाद और तकनीकी स्तर पर समन्वय आवश्यक होता है ताकि पेयजल, सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाया जा सके।

जल वितरण से जुड़े निर्णय आमतौर पर उपलब्ध जल स्तर, मौसम की स्थिति, जलाशयों की क्षमता और विभिन्न राज्यों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किए जाते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में आधिकारिक आंकड़ों और संस्थागत प्रक्रियाओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी

पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों के बयानों के बाद यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने दृष्टिकोण से इस मामले पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी दोनों राज्यों के दावों और उपलब्ध आंकड़ों को लेकर व्यापक चर्चा देखने को मिल रही है।

फिलहाल दोनों राज्यों की सरकारें अपने-अपने पक्ष पर कायम हैं। पानी के बंटवारे, BBMB की भूमिका और उपलब्ध जल संसाधनों को लेकर जारी यह विवाद आने वाले दिनों में प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।

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