भारत ने चीन से आने वाले कुछ औद्योगिक और रासायनिक सामान को लेकर जांच का दायरा बढ़ा दिया है। घरेलू कंपनियों की शिकायतों के बाद व्यापार मंत्रालय के अधीन काम करने वाले व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) ने पांच प्रमुख उत्पादों के आयात पर एंटी-डंपिंग जांच शुरू की है। इन उत्पादों में पर्सल्फेट्स, क्लावुलैनिक एसिड, कुछ काउंटर बैलेंस फोर्कलिफ्ट्स, आंतरिक ग्रूव वाले कॉपर ट्यूब और पाइप तथा कैप्रोलैक्टम शामिल हैं। डीजीटीआर की आधिकारिक वेबसाइट पर इन मामलों से संबंधित जांच अधिसूचनाएं सितंबर 2026 के अंत में जारी की गई हैं।
घरेलू निर्माताओं ने आरोप लगाया है कि इन उत्पादों का आयात ऐसे दामों पर हो रहा है, जिससे भारतीय कंपनियों के कारोबार पर दबाव बढ़ रहा है। कंपनियों का कहना है कि यदि विदेशी उत्पादों की कीमतें अनुचित रूप से कम रखकर भारतीय बाजार में सामान उतारा जाता है, तो स्थानीय निर्माताओं के लिए उनके साथ बराबरी की प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाता है। इन्हीं शिकायतों के आधार पर डीजीटीआर ने संबंधित उत्पादों के मामले में जांच की प्रक्रिया शुरू की है।
किन-किन सामानों पर जांच?
डीजीटीआर के रिकॉर्ड के मुताबिक जांच का दायरा पांच अलग-अलग उत्पादों तक फैला हुआ है। इसमें पर्सल्फेट्स, क्लावुलैनिक एसिड और उसका अमीन सॉल्ट, कुछ काउंटर बैलेंस फोर्कलिफ्ट्स, इंटरनली ग्रूव्ड कॉपर ट्यूब्स एंड पाइप्स और कैप्रोलैक्टम शामिल हैं। हालांकि इन सभी मामलों में सिर्फ चीन ही एकमात्र स्रोत नहीं है। उदाहरण के लिए काउंटर बैलेंस फोर्कलिफ्ट्स की जांच चीन और जापान से होने वाले आयात को लेकर है। वहीं क्लावुलैनिक एसिड की जांच चीन और यूरोपीय संघ से आयात पर है। कैप्रोलैक्टम के मामले में चीन के साथ रूस, थाईलैंड और अमेरिका से आने वाले उत्पाद भी जांच के दायरे में हैं। आंतरिक ग्रूव वाले कॉपर ट्यूब और पाइप के मामले में चीन के अलावा थाईलैंड और वियतनाम से आयात भी जांच के तहत है।
घरेलू कंपनियों ने क्यों उठाई आपत्ति?
घरेलू उद्योग की शिकायतों का मूल मुद्दा आयातित सामान की कीमत और उससे पैदा होने वाली प्रतिस्पर्धा है। भारतीय निर्माताओं ने संबंधित उत्पादों के आयात को लेकर डीजीटीआर के सामने आवेदन किए। उनका आरोप है कि विदेशों से आने वाले उत्पादों की कीमतें इतनी कम हैं कि इससे देश में इन्हीं सामानों का निर्माण करने वाली कंपनियों को नुकसान हो रहा है।
एंटी-डंपिंग जांच में केवल यह नहीं देखा जाता कि कोई विदेशी सामान सस्ता है या नहीं। प्राधिकरण यह भी जांचता है कि क्या संबंधित उत्पाद भारत में ऐसी कीमत पर बेचा जा रहा है जिसे डंपिंग माना जा सकता है और क्या इस वजह से घरेलू उद्योग को वास्तविक या महत्वपूर्ण आर्थिक नुकसान पहुंच रहा है। डीजीटीआर ने अपनी अधिसूचनाओं में कहा है कि उपलब्ध प्रारंभिक साक्ष्यों और घरेलू उद्योग की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर जांच शुरू की गई है।
टेक्सटाइल से फार्मा तक असर
जांच के दायरे में शामिल उत्पाद अलग-अलग उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण हैं। पर्सल्फेट्स का इस्तेमाल टेक्सटाइल सहित विभिन्न औद्योगिक प्रक्रियाओं में होता है। कैप्रोलैक्टम भी फैब्रिक और सिंथेटिक फाइबर से जुड़े औद्योगिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल होता है। दूसरी तरफ क्लावुलैनिक एसिड फार्मास्युटिकल क्षेत्र से जुड़ा उत्पाद है और इसे एक सक्रिय फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
इसी तरह काउंटर बैलेंस फोर्कलिफ्ट्स का इस्तेमाल औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों में किया जाता है। आंतरिक ग्रूव वाले कॉपर ट्यूब और पाइप भी औद्योगिक उपयोग वाला उत्पाद है। इस तरह डीजीटीआर की मौजूदा कार्रवाई का प्रभाव सिर्फ किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि केमिकल, फार्मा, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग से जुड़े कई क्षेत्रों तक इसका असर पहुंच सकता है।
कॉपर ट्यूब मामले में एक और बड़ी जांच
आंतरिक ग्रूव वाले कॉपर ट्यूब और पाइप को लेकर मामला और भी महत्वपूर्ण है। डीजीटीआर ने इस उत्पाद के आयात पर एंटी-डंपिंग जांच शुरू करने के साथ-साथ अलग से एंटी-सब्सिडी यानी काउंटरवेलिंग ड्यूटी जांच भी शुरू की है। यह जांच चीन, थाईलैंड और वियतनाम से होने वाले आयात से संबंधित है।
एंटी-सब्सिडी जांच में यह देखा जाता है कि क्या किसी विदेशी देश की सरकार की ओर से उत्पादकों या निर्यातकों को ऐसी सब्सिडी मिल रही है, जिससे उनके उत्पादों को दूसरे देशों में कम कीमत पर बेचने में मदद मिलती है। अगर जांच में इस तरह की सब्सिडी और उससे घरेलू उद्योग को नुकसान की पुष्टि होती है, तो काउंटरवेलिंग ड्यूटी की सिफारिश की जा सकती है।
एंटी-डंपिंग ड्यूटी का मतलब क्या है?
एंटी-डंपिंग ड्यूटी को किसी देश से आने वाले सामान पर सामान्य सीमा शुल्क की तरह नहीं समझना चाहिए। इसका मकसद ऐसी स्थिति में घरेलू उद्योग को सुरक्षा देना है, जब जांच में यह सामने आए कि विदेशी उत्पाद भारत में अनुचित रूप से कम कीमत पर बेचे जा रहे हैं और इससे भारतीय निर्माताओं को नुकसान हो रहा है।
अगर डंपिंग और उससे होने वाले नुकसान के बीच संबंध स्थापित होता है, तो डीजीटीआर संबंधित आयात पर एंटी-डंपिंग शुल्क लगाने की सिफारिश कर सकता है। हालांकि, डीजीटीआर खुद अंतिम रूप से शुल्क लागू नहीं करता। शुल्क लगाने का अंतिम फैसला वित्त मंत्रालय की ओर से लिया जाता है।
अभी शुल्क नहीं लगा, पहले होगी पूरी जांच
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि जांच शुरू होने का अर्थ यह नहीं है कि इन उत्पादों पर तत्काल एंटी-डंपिंग शुल्क लगा दिया गया है। फिलहाल प्रक्रिया जांच के चरण में है। डीजीटीआर संबंधित पक्षों से जानकारी लेकर आयात की कीमतों, सामान्य मूल्य, घरेलू उद्योग को हुए नुकसान और अन्य व्यापारिक पहलुओं का अध्ययन करेगा।
जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। अगर आरोप प्रमाणित होते हैं और घरेलू उद्योग को नुकसान की पुष्टि होती है, तो डीजीटीआर शुल्क की सिफारिश कर सकता है। इसके बाद वित्त मंत्रालय अंतिम निर्णय लेगा।
चीन से बढ़ते व्यापार घाटे के बीच कार्रवाई
डीजीटीआर की यह कार्रवाई भारत और चीन के बीच बढ़ते व्यापार असंतुलन की पृष्ठभूमि में भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में चीन को भारत का निर्यात 36.66 प्रतिशत बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया, लेकिन चीन से आयात 16 प्रतिशत बढ़कर 131.63 अरब डॉलर पहुंच गया। इसके परिणामस्वरूप दोनों देशों के बीच भारत का व्यापार घाटा बढ़कर रिकॉर्ड 112.6 अरब डॉलर हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 99.2 अरब डॉलर था।
ऐसे में चीन से आने वाले औद्योगिक सामान पर व्यापार उपचार संबंधी जांचों का बढ़ना घरेलू विनिर्माण क्षेत्र के लिए खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार की कोशिश यह पता लगाने की है कि कहीं कम कीमत वाले आयात से भारतीय कंपनियों को अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना तो नहीं करना पड़ रहा।
भारत पहले भी करता रहा है ऐसी कार्रवाई
भारत पहले भी विभिन्न देशों, खासकर चीन से आने वाले कई उत्पादों के मामले में एंटी-डंपिंग जांच और शुल्क की कार्रवाई करता रहा है। डीजीटीआर की मौजूदा सूची में चीन से संबंधित कई अन्य उत्पादों पर भी अलग-अलग चरणों में जांच चल रही है। इनमें पेनिसिलिन जी और उसके साल्ट, सोडियम सायनाइड, टोल्यून डाइआइसोसाइनेट, टैकिफायर रेजिन और अन्य उत्पाद शामिल हैं।
एंटी-डंपिंग कार्रवाई विश्व व्यापार संगठन यानी WTO के बहुपक्षीय व्यापार नियमों के तहत उपलब्ध व्यापार सुरक्षा उपायों में से एक है। इसका मूल उद्देश्य घरेलू उद्योग को विदेशी उत्पादकों द्वारा कथित अनुचित मूल्य निर्धारण से होने वाले नुकसान से बचाना और बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए अपेक्षाकृत समान परिस्थितियां बनाना है। भारत और चीन दोनों WTO के सदस्य हैं।
अब निगाह डीजीटीआर की रिपोर्ट पर
फिलहाल पांच उत्पादों से जुड़े मामलों में जांच शुरू हो चुकी है और संबंधित उद्योगों की नजर अब डीजीटीआर की आगे की कार्रवाई पर है। यदि जांच में यह साबित होता है कि संबंधित आयात वास्तव में डंपिंग के तहत आते हैं और इनके कारण भारतीय निर्माताओं को नुकसान हुआ है, तो शुल्क लगाने की सिफारिश की जा सकती है।
हालांकि अंतिम फैसला जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध आंकड़ों पर निर्भर करेगा। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि चीन से आने वाले इन पांचों उत्पादों पर निश्चित रूप से शुल्क लगाया जाएगा। इतना जरूर है कि घरेलू उद्योग की शिकायतों के बाद सरकार ने मामले को औपचारिक जांच के स्तर तक पहुंचा दिया है। आने वाले समय में डीजीटीआर की रिपोर्ट यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगी कि इन उत्पादों के आयात पर भारत को अतिरिक्त व्यापार सुरक्षा उपायों की जरूरत है या नहीं।
(Photo : AI Generated)




