अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ने ईरान के खिलाफ दोबारा बड़े स्तर पर सैन्य अभियान शुरू करने की संभावनाओं पर चर्चा की है। हालांकि, अभी तक ट्रंप की ओर से ईरान पर हमले को लेकर कोई अंतिम आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन अमेरिकी रक्षा विभाग को संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में एक बार फिर बड़े संघर्ष की आशंका को बढ़ा दिया है।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन ने कुछ दिन पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM को संभावित बड़े सैन्य अभियान के लिए अपनी तैयारियां पूरी करने को कहा था। इस तैयारी में सैन्य संसाधनों, अभियान की क्षमता और संभावित लक्ष्यों से जुड़ी योजनाओं को तैयार रखना शामिल बताया जा रहा है। हालांकि, अभी किसी हमले के लिए निश्चित तारीख तय नहीं की गई है। इसका मतलब यह है कि अमेरिका ने सैन्य विकल्प को खुला रखा है, लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप प्रशासन वास्तव में कब और किस स्तर पर कार्रवाई करेगा।
कैंप डेविड में हुई लंबी बैठक से बढ़ी हलचल
ईरान को लेकर अमेरिकी प्रशासन की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा रहा है कि ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ने कैंप डेविड में कई घंटे तक बैठक की। रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को हुई इस बैठक में युद्ध से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े दूसरे मामलों पर भी चर्चा हुई। बैठक के दौरान ईरान में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू करने की संभावना भी चर्चा के प्रमुख विषयों में शामिल रही।
अमेरिकी प्रशासन की इस गतिविधि को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत से कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की कोशिशों के बावजूद स्थिति में कोई निर्णायक सुधार नहीं हुआ है। ऐसे में सैन्य विकल्प पर चर्चा ने क्षेत्रीय समीकरणों को और संवेदनशील बना दिया है।
एक इजरायली अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि फिलहाल अमेरिकी चुनाव से पहले ईरान के खिलाफ दोबारा व्यापक युद्ध शुरू होने की संभावना बहुत अधिक नहीं मानी जा रही है। हालांकि, नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद परिस्थितियां बदल सकती हैं और सैन्य कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।
ईरान के किन ठिकानों को बनाया जा सकता है निशाना?
अगर अमेरिका सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने का फैसला करता है, तो संभावित कार्रवाई केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के अनुसार, संभावित अभियान में ईरान के ऊर्जा क्षेत्र, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है।
ईरान के परमाणु प्रतिष्ठान पहले से ही अमेरिका और इजरायल के बीच विवाद का बड़ा केंद्र रहे हैं। पश्चिमी देशों का आरोप रहा है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है, जबकि तेहरान लगातार अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्यों से जुड़ा बताता रहा है। ऐसे में परमाणु ठिकानों पर किसी भी संभावित हमले से स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है।
ऊर्जा प्रतिष्ठानों को संभावित लक्ष्य बनाए जाने की बात भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ईरान की अर्थव्यवस्था और उसकी ऊर्जा व्यवस्था देश की आर्थिक ताकत का बड़ा हिस्सा है। यदि इन क्षेत्रों पर व्यापक हमले होते हैं, तो इसका असर केवल ईरान तक सीमित रहने के बजाय वैश्विक ऊर्जा बाजारों और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
व्हाइट हाउस ने कहा- ट्रंप के पास सभी विकल्प खुले
ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी ने संकेत दिया है कि राष्ट्रपति ने ईरान को लेकर किसी भी विकल्प को बंद नहीं किया है। अधिकारी के अनुसार, अमेरिका इस समय खुद को मजबूत स्थिति में मानता है। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य का उल्लेख किया, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है।
इस जलडमरूमध्य के आसपास किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है। यही वजह है कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव केवल दोनों देशों के बीच का मामला नहीं माना जा रहा है। किसी भी बड़े संघर्ष की स्थिति में खाड़ी क्षेत्र के दूसरे देश भी प्रभावित हो सकते हैं और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।
अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया कि ईरान पर पहले से ही काफी दबाव है और उसकी अर्थव्यवस्था गंभीर मुश्किलों का सामना कर रही है। उनके मुताबिक, आने वाले समय में स्थिति दो दिशाओं में जा सकती है—या तो तनाव कम करने की दिशा में आसान रास्ता चुना जाएगा या फिर टकराव का अधिक कठिन विकल्प सामने आएगा। हालांकि, यह बयान किसी निश्चित सैन्य फैसले की पुष्टि नहीं करता।
ट्रंप और नेतन्याहू के बीच फिर हुई फोन पर बातचीत
ईरान से जुड़े घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर बातचीत भी हुई है। बुधवार को हुई यह बातचीत इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कुछ ही दिनों के भीतर दोनों नेताओं के बीच यह दूसरी वार्ता थी।
बताया जा रहा है कि इससे पहले कई सप्ताह तक ट्रंप और नेतन्याहू के बीच सीधी बातचीत नहीं हुई थी। ऐसे में लगातार दो बार बातचीत होना ईरान से जुड़े मुद्दों और क्षेत्रीय सुरक्षा परिस्थितियों को लेकर महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
इजरायल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपनी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताता रहा है। वहीं, अमेरिका भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर कड़ा रुख अपनाता रहा है। इसलिए दोनों नेताओं के बीच होने वाली बातचीत का केंद्र ईरान और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति होना स्वाभाविक माना जा रहा है।
नवंबर के चुनावों से पहले कार्रवाई को लेकर असमंजस
अमेरिका में नवंबर में मध्यावधि चुनाव होने हैं। ऐसे में ट्रंप प्रशासन के लिए ईरान के खिलाफ किसी नए बड़े सैन्य अभियान का राजनीतिक पहलू भी महत्वपूर्ण हो सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप चुनाव से पहले सैन्य कार्रवाई के विकल्प पर विचार कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन के भीतर इस कदम को लेकर पूरी तरह एक राय होने के संकेत नहीं हैं।
‘द अटलांटिक’ की एक रिपोर्ट में भी दावा किया गया था कि ट्रंप नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, अलग-अलग अधिकारियों के आकलन में कार्रवाई की संभावित समयसीमा को लेकर अंतर दिखाई दे रहा है।
एक इजरायली अधिकारी ने संकेत दिया है कि चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर युद्ध दोबारा शुरू होने की संभावना फिलहाल कम है। लेकिन अगर चुनाव समाप्त हो जाते हैं, तो अमेरिकी प्रशासन के पास सैन्य विकल्प पर आगे बढ़ने के लिए अधिक राजनीतिक गुंजाइश हो सकती है। इसी कारण नवंबर के बाद की अवधि को ईरान-अमेरिका संबंधों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
अमेरिका-ईरान बातचीत में नहीं बनी बात
अमेरिका की ओर से सैन्य तैयारी की खबर ऐसे समय में सामने आई है, जब दोनों देशों के बीच बातचीत में कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं हो सकी है। कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने के प्रयासों के बावजूद अभी तक ऐसा कोई समझौता सामने नहीं आया है, जिससे दोनों पक्षों के बीच विवाद को स्थायी रूप से कम किया जा सके।
यही गतिरोध अब सैन्य विकल्प की चर्चा को फिर से सामने ला रहा है। अमेरिकी प्रशासन एक तरफ बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पेंटागन को संभावित अभियान के लिए तैयार रखने की नीति अपना रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन बातचीत और दबाव, दोनों विकल्पों को एक साथ आगे बढ़ा रहा है।
इजरायल की भूमिका भी अहम
ईरान के खिलाफ किसी भी अमेरिकी सैन्य अभियान में इजरायल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। इजरायल पहले भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कड़ी कार्रवाई की वकालत करता रहा है। ऐसे में ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हालिया बातचीत को क्षेत्रीय घटनाक्रम के संदर्भ में खास महत्व दिया जा रहा है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका अकेले सैन्य कार्रवाई करेगा, इजरायल के साथ मिलकर कोई अभियान चलाएगा या फिर केवल दबाव की रणनीति तक सीमित रहेगा। अमेरिकी प्रशासन की ओर से फिलहाल किसी निश्चित हमले की तारीख या अभियान का आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है।
क्या फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ रहा पश्चिम एशिया?
मौजूदा घटनाक्रम से इतना जरूर स्पष्ट है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्प को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। पेंटागन की तैयारियां, कैंप डेविड में राष्ट्रीय सुरक्षा बैठक और ट्रंप-नेतन्याहू की लगातार बातचीत ने इस आशंका को मजबूत किया है कि आने वाले दिनों में ईरान को लेकर अमेरिका का रुख और कठोर हो सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ट्रंप प्रशासन सैन्य कार्रवाई का फैसला कब और किस परिस्थितियों में करेगा। यदि ऊर्जा, बुनियादी ढांचे या परमाणु प्रतिष्ठानों पर बड़े हमले होते हैं, तो इसका असर ईरान के साथ-साथ पूरे खाड़ी क्षेत्र पर पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह का सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और वैश्विक बाजारों के लिए भी चिंता बढ़ा सकता है।
इस बीच अमेरिका की ओर से यह संकेत लगातार मिल रहा है कि सैन्य विकल्प तैयार रखा गया है, जबकि अंतिम राजनीतिक निर्णय अभी बाकी है। आने वाले हफ्तों में ट्रंप प्रशासन का रुख, ईरान के साथ बातचीत की स्थिति और नवंबर के मध्यावधि चुनाव, ये तीनों कारक तय कर सकते हैं कि अमेरिका आगे कूटनीति का रास्ता अपनाता है या एक बार फिर सैन्य कार्रवाई की ओर बढ़ता है।




