दिल्ली में हिमाचल भवन के इस्तेमाल पर उठाए सवाल, मुख्यमंत्री सुक्खू पर लगाए आरोप; कहा- सरकारी परिसर जनता और प्रशासनिक कार्यों के लिए है
नई दिल्ली। भाजपा सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने दिल्ली के मंडी हाउस स्थित हिमाचल भवन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के जमावड़े को लेकर हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी परिसर का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, जबकि इसका उद्देश्य प्रदेश के लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराना और सरकारी कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करना है। ठाकुर ने कहा कि हिमाचल भवन को राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनाना उचित नहीं है और सार्वजनिक परिसरों का उपयोग जनहित में होना चाहिए।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस नेताओं की ओर से संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ गैर-जिम्मेदाराना बयान दिए जा रहे हैं। अब दिल्ली में हिमाचल भवन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगाकर सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पहली बार नहीं है, जब कांग्रेस ने सरकारी परिसर का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया हो।
भाजपा सांसद के अनुसार, मंडी हाउस स्थित हिमाचल भवन में करीब 200 से 250 कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के कारण आम लोगों को परिसर में आने-जाने में परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल भवन प्रदेश के नागरिकों और सरकारी कार्यों के लिए बनाया गया है। ऐसे में वहां ऐसी गतिविधियां नहीं होनी चाहिए, जिनसे आम लोगों को असुविधा का सामना करना पड़े।
एआई समिट के दौरान हुए प्रदर्शन का भी उठाया मुद्दा
अनुराग ठाकुर ने एआई समिट के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के शर्टलेस प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उस घटना से अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि प्रभावित हुई थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं का इस तरह का प्रदर्शन देश की प्रतिष्ठा के अनुरूप नहीं था।
ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर आरोप लगाया कि प्रदर्शन के बाद वहां से निकले कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पहले हिमाचल भवन और फिर हिमाचल प्रदेश में संरक्षण दिया गया। उन्होंने इस घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा कि सरकारी परिसरों का राजनीतिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाने को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं।
भाजपा सांसद ने मौजूदा स्थिति को इसी संदर्भ में उठाते हुए कहा कि हिमाचल भवन में एक बार फिर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जमावड़ा देखने को मिल रहा है। उनके अनुसार, सरकारी भवनों का उपयोग राजनीतिक गतिविधियों के लिए किए जाने के बजाय जनता से जुड़े कामों के लिए होना चाहिए।
हालांकि, कांग्रेस कार्यकर्ताओं के जमावड़े और उनके उद्देश्य को लेकर अनुराग ठाकुर ने जो आरोप लगाए हैं, वे उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। इन आरोपों के संबंध में कांग्रेस या राज्य सरकार का पक्ष यहां उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।
200 से 250 कार्यकर्ताओं की मौजूदगी का दावा
अनुराग ठाकुर ने कहा कि दिल्ली के मंडी हाउस स्थित हिमाचल भवन में आज करीब 200 से 250 कांग्रेस कार्यकर्ता एकत्रित हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण आम नागरिकों को परिसर में आने-जाने में परेशानी हो रही है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल भवन में प्रदेश से आने वाले लोगों को सरकारी कार्यों के लिए पहुंचना पड़ता है। ऐसे में परिसर में लोगों की आवाजाही प्रभावित होने से उन्हें असुविधा हो सकती है। सरकारी भवनों में उपलब्ध सुविधाओं और स्थान का इस्तेमाल इस तरह होना चाहिए कि आम नागरिकों के काम प्रभावित न हों।
भाजपा सांसद ने सवाल उठाया कि जब हिमाचल प्रदेश सरकार आर्थिक दबाव का सामना कर रही है और राज्य पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ने की बात कही जा रही है, तब दिल्ली में स्थित सरकारी भवन का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों के लिए क्यों किया जा रहा है।
उनका कहना था कि सरकारी परिसरों के उपयोग में प्राथमिकता जनहित और प्रशासनिक जरूरतों को दी जानी चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे को सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल से जोड़ते हुए कांग्रेस सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
बढ़ते कर्ज के बीच सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर सवाल
अनुराग ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। ऐसे समय में सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल सावधानी और जिम्मेदारी से किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक भवनों का उद्देश्य आम नागरिकों को सुविधा देना और सरकारी कामकाज के लिए आवश्यक स्थान उपलब्ध कराना है। यदि ऐसे परिसरों का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों के लिए होने लगे तो उनके मूल उद्देश्य पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ठाकुर ने कहा कि सरकारी संसाधनों का उपयोग करते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। हिमाचल भवन जैसे परिसर में प्रदेश के नागरिकों और अधिकारियों का आना-जाना लगा रहता है। इसलिए वहां प्रशासनिक व्यवस्था और आम लोगों की सुविधा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
भाजपा सांसद ने राज्य सरकार से जुड़े इस मुद्दे पर कांग्रेस नेतृत्व को घेरते हुए कहा कि राजनीतिक गतिविधियों और सरकारी कार्यों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना आवश्यक है। सरकारी परिसरों का उपयोग किसी राजनीतिक दल के कार्यक्रमों या गतिविधियों के केंद्र के रूप में नहीं होना चाहिए।
मुख्यमंत्री सुक्खू पर लगाए आरोप
अनुराग ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि एआई समिट के दौरान हुए प्रदर्शन के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिमाचल भवन और फिर हिमाचल प्रदेश में संरक्षण दिया गया था।
ठाकुर ने कहा कि मौजूदा घटनाक्रम के कारण सरकारी भवन के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी परिसरों का उपयोग राजनीतिक हितों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
उनके बयान का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि हिमाचल भवन प्रदेश की जनता की सुविधा के लिए है और वहां होने वाली गतिविधियों से आम लोगों के काम प्रभावित नहीं होने चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर जिम्मेदारी बरतने की अपील की।
सार्वजनिक परिसरों का इस्तेमाल जनहित में हो
भाजपा सांसद ने कहा कि हिमाचल भवन का उपयोग प्रदेश के लोगों और प्रशासनिक कार्यों के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि सरकारी भवनों का संचालन जनहित को ध्यान में रखकर होना चाहिए और वहां ऐसी गतिविधियां नहीं होनी चाहिए, जिनसे आम लोगों को असुविधा हो।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को अपनी गतिविधियों के लिए उचित स्थानों का इस्तेमाल करना चाहिए। सरकारी परिसरों में आम नागरिकों की आवाजाही और प्रशासनिक कार्यों को प्राथमिकता देना जरूरी है।
ठाकुर ने हिमाचल भवन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मौजूदगी को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकारी संपत्तियों का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप हो। उनके अनुसार, प्रदेश के नागरिकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और संसाधनों का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों के बजाय जनता के हित में किया जाना चाहिए।
इस मुद्दे पर भाजपा सांसद ने कांग्रेस सरकार को घेरते हुए सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल, राज्य की आर्थिक स्थिति और आम लोगों की सुविधा को प्रमुखता से उठाया। फिलहाल, इस मामले में कांग्रेस या हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से प्रतिक्रिया की जानकारी उपलब्ध नहीं है।




